[0:00]अपनी पावर का यूज करके लोगों को कैसे भड़काया जाता है कोई हमारे बाबाओं से सीखे कायरो जग जाओ अब सब हिंदू अपने हाथ में हथियार उठा लो। अरे भाई इतना हिंदू मुस्लिम तो नेता लोग नहीं कर पा रहे हैं आप किसमें दंगे करवाना चाह रहे हो? वेदन है सब हिंदू एक हो जाओ और पत्थर मारने वालों के घर पर बुलडोजर चलवा बड़े बूढ़ों की कहावत है कि मुंह से कुछ भी बोलने से पहले दो-चार बार सोच लेना चाहिए लेकिन दो-चार बार तो छोड़ो यह बाबा सोच ही नहीं पा रहे हैं। रूम में भी जब आप लगा के दरवाजा नहाए तो भी निर्वस्त्र नहीं नहाना चाहिए क्योंकि भले हमें कोई ना देख रहा हो पर प्रकृति तो देख रही है। सत्य, अहिंसा, त्याग, समर्पण, अक्रोध, वैराग्य यह हमारे संतों के कुछ गुण बताए जाते हैं और यह गुण हमारे इन प्रिय संतों में कूट-कूट के भरे हैं। तभी तो यह एक-एक कथा के लिए लाखों की फीस चार्ज करते हैं। अगर आपको बागेश्वर बाबा की कथा करानी हो तो 50 लाख खर्च करने पड़ते हैं। दक्षिणा हम लेते हैं इसमें कोई संदेह नहीं। 2-2 लाख के पर्स और लेटेस्ट आईफोंस यूज करते हैं बड़ी लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं और तो और प्राइवेट जेट्स और बिजनेस क्लास में फ्लाई करते हैं।
[1:06]और हां क्रोध वह तो इन्हें बिल्कुल भी नहीं आता। बागेश्वर वाले हैं कच्ची गोली नहीं खेलते हैं। ना कटा मारे ठटली मार देवे। अब देखो मुझे इतनी प्रॉब्लम इन बाबाओं से नहीं है जितनी इन्हें भगवान मानने वाले लोगों से है। सबको पता है आसाराम बापू और राम रहीम पर रेप और मर्डर के चार्जेस हैं। फिर भी जैसे ही लोग बेल पर बाहर आते हैं लोग माला वाला लेकर बाहें फैलाकर स्वागत में लग जाते हैं। लोगों का ब्रेन वॉश तो इन्होंने इस कदर किया हुआ है कि इन बाबाओं के खिलाफ बोलने का मतलब है कि आप हिंदुत्व और सनातन के खिलाफ बोल रहे हो। लेकिन आज इस वीडियो को पूरा देखो और समझो कि हिंदुत्व और सनातन इन बाबाओं से नहीं है यह बाबा हिंदुत्व से है।
[1:53]गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागु पांव। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय। इसका मतलब है जब गुरु और भगवान दोनों सामने खड़े हों तो पहले गुरु के चरणों में प्रणाम करना चाहिए क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुंचाने का रास्ता होते हैं। लेकिन आज के ये मॉडर्न गुरु इनके लिए ये भगवान तक पहुंचने का रास्ता नहीं है खुद ही भगवान है। इनके खिलाफ बोलने वालों को अपने पैर छूने पर मजबूर करना। पैर दबाओ। पैर दबाओ पूर्ण धर के मूढ धर के पैर दबाओ। मुड धर के। पैर पैर ये तो है सारे। बेसलेस तर्क देना। मोर कभी भी शारीरिक संभोग नहीं करते। उन्हें संताने कैसे होती है मोर रोते हैं आंसू गिरते हैं मोरनी उस आंसू को पीती है और उससे उन्हें संतान होती है। या फिर लड़कियों पर अजीबोगरीब टिप्पणियां करना। अब लड़कियां लाते हैं 25 साल की। अब 25 साल की लड़की चार जगह वो मुंह मार चुकी होती है। यह तो इन लोगों के लिए नॉर्मल सी चीजें हैं। एक बार इस वीडियो को देखो। ये तेरी बहन बोल नहीं सकती थी? नहीं बोल सकती थी। अभी क्या हुआ, अभी क्या हुआ? बोलने लगी। मेरा केस सुन। अब इसे देखकर तो एक पढ़ा-लिखा डॉक्टर भी ट्रॉमा में आ जाएगा। क्योंकि अब तुम्हें मेहनत करके नीट का एग्जाम देने की कोई जरूरत नहीं है। तुम्हें सिर्फ एक आश्रम में अपनी जॉइनिंग फीस जमा करानी है और बाबा का सर्टिफिकेट लेना है और बस अपनी पोशाक बदलो और तुम तैयार। और हमारे बाबा तो खुलेआम कैंसर ट्यूमर जैसे भारी बीमारियों का इलाज भी आसानी से कर देते हैं। परेशानी गले में हल्की सी खुजली है बस छींक में आराम है। गले में खुजली है मुंह खोलो। लगाओ माइक पूछो कहां है खुजली खत्म हो माइक पर बोलो। नहीं है नहीं है। यह तो एक चीज है कि इनका धंधा सिर्फ बीमारी ठीक करने तक सीमित नहीं है। यह तो अध्यापक का काम भी बहुत ही बेहतरीन तरीके से करते हैं। 70 में क्या जोड़े कि 17 हो जाए फास्ट हिंदी से लिखो 70 और फिर हिंदी से लिखो 17 अ की मात्रा जोड़ दो हो जाएगा। लेकिन सबसे दुख की बात तो यह है कि आज इंडिया का लिटरेसी रेट लगभग 80% होने के बाद भी आधे से ज्यादा लोग इसी तरह के अंधविश्वास में कैसे फंस जाते हैं। और इस नए मॉडर्न जमाने के स्पिरिचुअल सिस्टम को बढ़ावा देते हैं और पूरी दुनिया को यह दिखा देते हैं कि जो दुनिया में कोई नहीं कर सकता वह हमारे देश के बाबा कर सकते हैं। 17 दिन की अखंड ज्योति जलाए 50 ग्राम देसी गाय के गोमूत्र में दो खड़ी हल्दी की गांठ पीस करके मिलाकर के रोगी को पिलाए लाभ 100% होगा आशीर्वाद। अगर हम किसी भी धर्म के शास्त्र देखें तो उसमें साधु बाबा और साधवी इन सभी को जीवन कैसे जीना होता है वह सब लिखा है। आज से कई साल पहले देवराहा बाबा नीम करोली बाबा शिर्डी वाले साईं बाबा जैसे महान साधु हमारे देश में हुआ करते थे। जिनका जीवन हमारे शास्त्रों में लिखे हुए जीवन के अनुसार बिल्कुल साधारण शांत और कष्टों से भरा हुआ होता था। जिन्हें ना कोई मोह था ना ही क्रोध आता था ना ही किसी से कंपटीशन का भाव था। लेकिन आज के जमाने के बाबाओं को देखोगे जैसे यह पूकी बाबा और बागेश्वर बाबा इनका तो एक अलग ही टेशन है। कथा करने के लिए प्राइवेट जेट से आ रहे हैं। कोई फॉर्चूनर में घूम रहा है। और जो यह बोलते हैं कि इंसान को सिंपल जीवन जीना चाहिए वह ही लेदर काट के बैग बनाने वाली कंपनीज का प्रमोशन कर रहे हैं। यह सब अपनी लग्जरी लाइफ जीने में और ढोंग करने में बिल्कुल माहिर है। पहले के काल में एक महान बाबा हुआ करते थे जैसे देवराहा बाबा। इनके बारे में कहा जाता है कि वह जानवरों से बात कर लेते थे पानी पर चल लेते थे। अब यह असली बात है या नहीं यह हम नहीं जानते लेकिन जब इंदिरा गांधी 1978 के इलेक्शंस में हार गई थी तब वह खुद उनके आश्रम में दर्शन करने के लिए गई थी। और कुछ लोगों का यह भी कहना है कि देवराहा बाबा ने ही उन्हें हाथ यानी पंजे का चुनाव चिन्ह बनाने के लिए भी बोला था। और उसी वजह से वह अगला इलेक्शन जीत गई थी। वेल अब मैं यह नहीं कह रही कि यह बातें सच है यहां पर पूरी तरह से झूठ है। लेकिन आज हमारे जमाने के बाबा तो एकदम बेहतरीन से बेहतरीन चमत्कार भी कर देते हैं। जैसे इस वीडियो में देखिए इसमें हमारे बागेश्वर बाबा एक लड़के को भीड़ से आगे बुलाते हैं और उससे पूरा ड्रामा करवाते हैं। और मारो इसे।
[5:50]और मारो इसे। लेकिन कुछ टाइम बाद शासी जी फिर से सेम आदमी को ही सेलेक्ट कर लेते हैं। और फिर से उसे भीड़ में से आगे बुला लेते हैं और फिर शुरू हो जाता है उनका ड्रामा। क्या इसमें शास्त्री जी ने इतना भी नहीं सोचा कि एक ही बंदे को एक ही एक्टर को दो बार कपड़े चेंज करके बुलाने से वह अलग नहीं हो जाता। और यह तो सिर्फ एक केस है ऐसे ही केस हमारे देश में कई सारे हैं। एक फैक्ट और जानकर आपको हैरानी होगी कि इनका काम सिर्फ लोगों को ठीक करना या चमत्कार दिखाना नहीं है। घर में लड़ाई हो रही हो या सास-बहू के झगड़े हो उन समस्याओं का भी बाबा ही हल कर देंगे। गुरु जी अगर बहू सास को मार दे तो क्या पाप लगता है। सास को मार दिया।
[6:31]नहीं जैसे दो-चार झपट मार दिया हो। साफ शब्दों में बोले तो हर समस्या का हल इज इक्वल्स टू बाबा। पहले के जमाने में बाबा या फिर संत बनने के लिए एक लंबी तपस्या हुआ करती थी। उसके लिए हिंदी स्क्रिप्चर्स फिलॉसफी भगवत गीता वेद उपनिषद इन सब की जानकारी चाहिए होती थी। लेकिन आज बाबा बनना है कोई बड़ी बात नहीं उसमें क्या अभी बन जाओ। इस बच्चे को देखिए यह है अभिनव अरोरा जी महाराज। जितनी इनकी उम्र है उतने साल तो पहले के साधु तपस्या कर लेते थे। अब आप खुद ही सोचिए इन बालकों ने कितनी सिद्धि प्राप्त कर ली होगी। अब मैं यह नहीं कह रही कि आज हमें स्पिरिचुअल लीडर्स की जरूरत नहीं है बिल्कुल है पर इन जैसों की तो बिल्कुल नहीं है। आज भी कुछ लोग हैं जो सच में बाबा कहलाने लायक है जिन्हें असली स्पिरिचुअल नॉलेज है। आज के इस भागदौड़ के जमाने में जहां सब मॉडर्न हो गए हैं वहां स्पिरिचुअलिटी और स्पिरिचुअल नॉलेज देने वालों की सच में बहुत जरूरत है। स्पिरिचुअल नॉलेज से आप किसी की भी मेंटालिटी चेंज कर सकते हो किसी को भी पॉजिटिव फील करा सकते हो और सबका मन जीत सकते हो। लेकिन कुछ लोग इसी चीज का गलत फायदा उठाते हैं। जो स्पिरिचुअल नॉलेज के नाम पर लोगों को कुछ भी बता देते हैं। हमारे डर्मेटोलॉजिस्ट बाबा निरुद्ध जी आचार्य जी महाराज जिन्हें लोग पूकी बाबा भी कहते हैं उनका कहना है कि सुंदर बनना है तो गोबर रगड़ लीजिए। गोबर यदि उसको रगड़ते हैं चेहरे पर और उससे स्नान करते हैं तो त्वचा संबंधी जितने रोग हैं वह समाप्त हो जाते हैं। हां हम मानते हैं कि हमारे पुराणों में गाय और गोमूत्र को पवित्र माना गया है। लेकिन बिना किसी टेस्ट के किसी के भी चेहरे पर गोबर रगड़वा देना और ब्यूटी की एडवाइस देना यह तो जायज नहीं है ना। और पता है असली दिक्कत लोगों को यह पता ही नहीं है कि कथावाचक साधु सन्यासी पुजारी ऋषि इनमें अंतर क्या होता है। कोई भी आया दो मीठी-मीठी बातें की बीच में भगवान का नाम ले लिया और बस हम उन्हीं को गुरु मान लेते हैं। और दिक्कत फिर वहीं आके खड़ी हो जाती है कि आज हम सब मिलकर इन बाबाओं को एक्सपोज तो कर देंगे लेकिन इनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। क्यों क्योंकि इन्होंने भगवा वस्त्र जो पहने हुए हैं। इनके पास पैसा पावर और अंधभक्त इतने हैं कि एक-दो दिन के लिए यदि ये अंदर चले भी गए तो भी इन्हें वहां अंदर फाइव स्टार जैसी फैसिलिटीज मिलेंगी। और उसके बाद भी ये एक-दो हफ्ते बाद बाहर आ जाएंगे और इनके भक्त बाहे फैलाकर माला लेकर इनका स्वागत कर रहे होंगे। इनके भक्त इतने अंधे होते हैं कि वह तो इन ढोंगी बाबाओं के लिए जान तक देने के लिए तैयार हो जाते हैं। अगर मैं मर जाती तो बॉडी भी मेरी लातों से कुचल जाती मैं बहुत भाग्यशाली समझती अपने आप। तो अब सोचिए यदि किसी ने इनके खिलाफ आवाज उठाई तो उसका क्या होगा। राम रहीम एक समय पे इनका नाम हर जगह न्यूज़ हेडलाइंस पर था। यह मल्टी टैलेंटेड बाबा है सिंगर भी है एक्टर भी है और कम पड़े थे और मर्डर भी है। यह अपने फॉलोवर्स को लव चार्जर कह के बुलाते हैं। यू आर द लव चार्जर यू आर द लव चार्जर इसके बाद इन्हें एक और जर्नलिस्ट के मर्डर के केस में जेल जाना पड़ा था। पर अभी 1 महीने पहले तो इन्हें बेल भी मिल गई है और बाहर आते ही इनके अंधभक्तो ने माला पहनाकर इनकी रैली निकालकर इनका स्वागत किया है। आप लोग सोचते होंगे इतने सीरियस एलिगेशन के बाद ये लोग बाहर आ कैसे जाते हैं तो इसका जवाब बहुत सिंपल है। इनके लाखों फॉलोवर्स है जो इनके लिए एक वोट बैंक की तरह है। और इन्हीं अंधभक्तों की वजह से इनके पास पैसे और पावर की कोई कमी नहीं है। इन ढोंगी बाबाओं का कोई भी इंटरव्यू देख लो यह किसी भी बात का सीधे-सीधे जवाब ही नहीं देते। टीवी की बीमारियां हो यहां तक कि कैंसर का कोई इलाज है थेरेपी दे दे के मार डालते हैं लोगों को जो मात्रा है नियुक्त शास्त्र में इतना दूध इतना घी इतना दही और इतना गोमूत्र और इतना पिलाई है। गोमूत्र और हल्दी ये अच्छा ये बताइए गोमूत्र में दम ना होती तो बड़े-बड़े मेडिकल स्टोरो में गोमूत्र। एक सिंपल सी बात को उल्टा घुमा फिरा कर इमोशनल वे में बोलते हैं और आज की जेंज जी जनरेशन उसे पकड़ लेती है और मीम बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देती है। फिर हम उसे एक फनी कंटेंट की तरह देखते हैं लेकिन उन्हीं फनी बातों को कई सारे लोग रियलिटी में मान लेते हैं और फॉलो भी करते हैं। ये ढोंगी बाबा लोगों को मूर्ख तो बनाते ही है साथ में यह हिंदू धर्म का मजार भी बना रहे हैं। और इसी तरह इमोशनल बातें करके अपना सोशल मीडिया का धंधा आसानी से चला रहे हैं। और इनकी पीआर टीम का तो क्या ही कहना जो इनके बारे में अच्छा बोले उसको तो ऊपर चढ़ाओ लेकिन जो इनके बारे में सच बोले उनकी वीडियो को डाउन कर दो कई बार तो यह गुंडे सच बोलने वालों के घरों पे नजर रखते हैं उनके पीछे जासूसी करने लगते हैं। और तो और वीडियोस को डिलीट करने की धमकी तक देते हैं। पता है जैसे-जैसे यह सोशल मीडिया पर ग्रो कर रहे हैं ना सच बोलूं तो वो दिन अब दूर नहीं है जब यह लोग अपना खुद का एक कोर्स लॉन्च कर देंगे। बैचलर ऑफ बाबा मैनेजमेंट कोर्स।
[11:06]जया किशोरी जी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि सिंपल लाइफ जीनी चाहिए लेकिन वह खुद महंगे बैग्स लेकर घूमती है महंगी गाड़ियों में चलती है और तो और उसे जस्टिफाई भी करती है। इस बारे में दो-तीन चीजें मैं कहना चाहूंगी पहला तो जो बैग की बात है बैग इज अ कस्टमाइज्ड बैग। और जो सबसे पहली चीज लोग कह रहे हैं कि लेदर है उसमें कहीं भी लेदर नहीं है। पीके मूवी देखी है सुपर हिट थी बॉक्स ऑफिस पर लेकिन फिर भी इस मूवी को लेकर दंगे हुए थे। और वह दंगे करने वाले लोग यही रॉन्ग नंबर वाले बाबाओं के अंधभक्त थे। तो अब देखो इस वीडियो का मकसद किसी भी बाबा साधु या साध्वी को बदनाम करना नहीं था ना ही मैं स्पिरिचुअलिटी धर्म या भक्तों के खिलाफ हूं। अगर कोई बाबा सिर्फ स्पिरिचुअल ज्ञान दे और लोगों को अच्छा इंसान बनना सिखाए तो वह बिल्कुल ठीक है पर प्रॉब्लम तब होती है जब यह ढोंगी लोग अपने आपको बाबा से भगवान बनाने की कोशिश करने लगते हैं। अगर साफ शब्दों में देखा जाए तो स्पिरिचुअल नॉलेज का काम है आपको स्ट्रांग बनाना ना कि आपको किसी के भी ऊपर डिपेंडेंट बना देना। भगवान पर विश्वास रखिए लेकिन किसी भी इंसान को भगवान मत बनाइए। अगर आप सच में मन से भगवान को मानते हैं तो भगवान आपको हर जगह मिलेंगे। और सबसे जरूरी बात अगर कोई आपको यह बोलता है कि भाई बस मुझे फॉलो कर लो बाकी सब गलत है तो समझ लीजिए वह एक रॉन्ग नंबर है। वह आपको मन की शांति के पास नहीं अपने पास बुला रहा है वह भी अपनी जेबें भरने के लिए। सो व्यूअर्स आज की इस वीडियो में बस इतना ही एंड यदि यह वीडियो आपने यहां तक देखी है उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद प्लीज डू शेयर दिस वीडियो मोर एंड मोर।



