[0:00]एक समय की बात है एक जतनपुर नाम के गांव में बागेश्वर नाम का गरीब किसान रहता था. उनके घर में उनकी पत्नी कोमल और उनके 16 साल का लड़का एक साथ रहते थे. बागेश्वर को सिर्फ खेती करने आती थी उसके अलावा उसने कोई और काम नहीं सिखा था. सही समय पर बारिश ना होने की वजह से उसके खेत में फसल ही नहीं होते थे. जिसके कारण परिवार चलाना बहुत कठिन हो रहा था. एक दिन सुनिए जी आज तो घर में बिल्कुल भी कुछ राशन नहीं है. मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं. अरे कोमल तुम चिंता मत करो मैं कुछ करता हूं. बस इतना कह के बागेश्वर घर से चला जाता है. रास्ते में हे राम यह कैसा समय आ गया है प्रभु मेरे घर में राशन का एक दाना तक नहीं है. चलो मैं और मेरी कोमल तो भूखे पेट रह लेंगे लेकिन मेरे बेटे का क्या. मैंने तो केवल खेत में मेहनत करना सिखा है लेकिन उसमें भी बारिश सही समय पर ना होने की वजह से खेत में फसल नहीं हुई. अब मेरे पास जमींदार से उधारी पैसे लेने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. बागेश्वर अपने गांव के जमींदार के पास जाता है जमींदार हीरालाल बहुत शातिर और चालाक किस्म का इंसान है जो हमेशा हर किसी को बेईमानी से लूटने के बारे में सोचता रहता है. अरे आवा आवा बागेश्वर भैया और बताओ कैसे आना हुआ है. क्या बताऊं जमींदार जी बहुत खराब समय से गुजर रहा हूं देखिए ना. अब बारिश समय से ना होने पर खेत की सारी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं. घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है इसलिए आपसे कुछ पैसे उधार लेने आया हूं. अरे हां हां भैया बोलो कितने रुपए चाहिए आपको. ऐसे समय में हम नहीं मदद करेंगे तो और कौन करेगा बोलो बोलो कितने दे दूं. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जमींदार जी लेकिन मैं ज्यादा पैसा उधार नहीं लेना चाहता इसलिए आप ऐसा करें कि ₹1500 दे दीजिए. अरे भैया ई कैसन बात कर रहे हो भला 10 से ₹12000 तो लो क्या पता आगे चलके कब बरसात होगी और कब समय बदले. जमींदार मन में सोचने लगता है. अरे ससुरा तुम लोग इतना कम कम पैसा लोगे तो मैं कैसे कमाऊंगा ज्यादा ज्यादा लोगे तभी है ना. हमें ज्यादा ब्याज मिलेगा. यहां बागेश्वर भी सोचने लगा. आखिर अब मैं क्या करूं वैसे यह कह तो ठीक ही रहे हैं. पता नहीं कब भगवान की हम जैसों पर दया होगी. एक काम करता हूं ₹10000 ले लेता हूं. अच्छा ठीक है तो जमींदार भाई ₹10000 पर कितना तक ब्याज लेंगे आप. देखो बागेश्वर भैया ₹10000 के 10 टक्का प्रति महीना. लेकिन आप तो अपने ही आदमी हैं आपस में क्या धंधा करें चलो आप 8% दे देना. हे भगवान 8% प्रति महीना तो हमारे लिए बहुत ही ज्यादा ब्याज है. ले तो लेंगे लेकिन चुकाएंगे कैसे. अगर नहीं लूंगा तो मेरा बेटा नकुल भूखा ही रहेगा. चलो ले ही लेता हूं अगर भगवान की यही मर्जी है तो यही सही. अरे बागेश्वर भैया कहा हुआ क्या सोच रहे हैं ब्याज के बारे में तो नहीं सोच रहे हैं. हां जमींदार भाई इतना ब्याज कैसे. अरे कोनो चिंता की बात नहीं है देखिए आप तो अपने हैं आराम से चुकाएगा कहिए क्या कहते हैं. अच्छा ठीक है दे दीजिए. बागेश्वर उस जमींदार से ₹10000 उधार लेकर चला जाता है.
[4:02]चलो अब जल्दी-जल्दी बाजार से राशन और नकुल के लिए कुछ खाने को ले लेता हूं. आज मेरा बेटा तो खुश हो जाएगा. बागेश्वर जल्दी-जल्दी बाजार से सामान लेकर घर के लिए वापस हो जाता है.
[4:18]घर पहुंचते ही कोमल बागेश्वर के हाथ में सामान देखकर खुश हो जाती है और कहती है. अजी यह सामान पैसे कहां से मिले जी. देखो कोमल मुझे पता है तुम मुझ पर गुस्सा करोगी लेकिन मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था. मैं समझ गई जी आपने किसी से उधारी पैसे लिए होंगे. पर कोई बात नहीं मैं भी वहीं सोच रही थी. लेकिन ऐसे समय में गांव में किसी के पास देने के लिए पैसे नहीं है.
[5:15]तो क्या आप जमींदार से उधारी पैसे लेकर आए हो.
[5:22]मैंने तो एक डेढ़ हजारी मांगे थे पर उसने कम से कम 10000 या उससे ऊपर लेने बोला. इसलिए मैंने ₹10000 ले लिए सुनो ना कोमल अब मेरे बेटे के आने का टाइम हो गया है. मैंने यह कुछ सामान लाया है जाओ सबके लिए कुछ अच्छा सा बना दो. जी आज तो मेरा बेटा खुश हो जाएगा. इतना कह के कोमल रसोई में चली जाती है. कोमल ने बहुत ही स्वादिष्ट खाना बनाई. खाने की खुशबू पूरे घर में महक रही थी. वाह कोमल तो अपने बेटे की मनपसंद खीर बना रही हो. दोपहर में नकुल घर आ जाता है अपना पसंदीदा खाना देखकर वह बहुत खुश हो जाता है. बड़े दिनों बाद बागेश्वर के परिवार में आज सभी के चेहरे पर खुशी थी. मां खाना तो बहुत-बहुत ज्यादा स्वादिष्ट था. आज तो सच में मां मजा आ गया. अच्छा पापा मेरे दोस्त सोमनाथ ने आज मुझे बुलाया है. कह रहा था कि आज वह मुझे अपने पापा से मिलवाने वाला है. इसलिए मैं वहां जा रहा हूं. एक दो घंटे में वापस आ जाऊंगा. ठीक है बेटा जाओ लेकिन संभल के जाना और संभल के आना ठीक है. हां पापा आप फिक्र मत करो मैं अच्छे से जाऊंगा और अच्छे से आऊंगा. इतना कह के नकुल घर से निकल जाता है.
[6:54]भगवान मैं जानता हूं कि हमारे खेत में थोड़ा भी फसल नहीं हुआ है. और मेरे पिताजी सिर्फ मेरे लिए पैसों का इंतजाम किए हैं. भगवान जी कृपया कुछ ऐसा कीजिए कि मैं अपने माता-पिता की चिंता दूर कर सकूं. नकुल भगवान से प्रार्थना करते हुए अपने दोस्त सोमनाथ के घर पहुंचा. दरवाजे पर उसका दोस्त उसका इंतजार कर रहा था. अरे नकुल तू आ गया आजा अंदर आजा चल मेरे पिताजी तुझसे मिलने के लिए कब से इंतजार कर रहे हैं. सोमनाथ पर तेरे पिताजी मुझसे क्यों मिलना चाहते हैं. वह तो पिताजी से ही पूछ लेना.
[7:40]सोमनाथ का घर काफी बड़ा और सुंदर था. उसके घर में उसके माता और पिताजी रहते थे. सोमनाथ अपने पिताजी से अपने दोस्त नकुल के बारे में बताया था कि उसके पिताजी बहुत कड़ी मेहनत करते हैं. खेत में घंटों काम करते हैं लेकिन पैसे की वजह से परिवार में बहुत टेंशन है. आओ बेटे नकुल कैसे हो. नमस्ते अंकल जी नमस्ते आंटी जी मैं ठीक हूं आप सभी कैसे हैं. खुश रहो बेटा हम सब भी बहुत अच्छे हैं. जगदीश नकुल नौ-10 मिनट ऐसे ही उसके और उसके माता-पिता जी के बारे में बातें करते हैं और फिर बेटा नकुल तुम तो बहुत स्मार्ट लड़के निकले बेटा कल से तुम दोपहर में स्कूल से आकर खाना खा के यहां चले आना. जी अंकल मैं आ तो जाऊं लेकिन घर पर भी थोड़े बहुत काम होते हैं. देखो बेटे नकुल पहले तो तुम यह टेंशन वेंशन छोड़ो हां एक काम करना. नहीं रहने दो कल मैं खुद ही तुम्हारे घर आऊंगा तुम्हारे घर तुम्हारे पिताजी से भी मिल लूंगा और तुमसे भी. ठीक है. जी अंकल ठीक है अच्छा तो मैं अब चलता हूं. ठीक है बेटा ध्यान से संभल के जाना. जी अंकल मैं एकदम संभल के जाऊंगा. उतने में सोमनाथ की मम्मी बोली. बेटा नकुल यह लेते जाओ घर पर खा लेना. नहीं आंटी इसे मैं नहीं ले सकता. अरे बेटा ले लो देखो तुम्हारी ममता आंटी ने कितने प्यार से दिया है. नकुल वह थैली ले लेता है पर उसे समझ नहीं आता कि सोमनाथ के पिताजी उसके पिताजी से क्यों मिलना चाहते हैं. जगदीश अंकल तो बहुत अच्छे हैं उन्होंने मुझसे कितने प्यार से बात किए और आंटी भी बहुत अच्छी हैं उन्होंने मेरा कितना ख्याल रखा. पर वह मेरे पिताजी से क्यों मिलना चाहते हैं. यही सब सोचते हुए नकुल घर पहुंचा और उसने सोमनाथ के माता और पिताजी के बारे में बताया. देखो कोमल हमारे नकुल को कितना अच्छा दोस्त मिला है. चलो बेटा ठीक है तो कल आएंगे सोमनाथ के पिताजी. हां पिताजी.
[10:16]अगले दिन दोपहर में सोमनाथ अपने पापा को नकुल के घर ले आया. अरे बेटा नकुल घर में नहीं बुलाओगे. अरे सर आइए आइए अरे कोमल देखो. हमारे नकुल के दोस्त और उनके पापा आए हैं. कोमल फट से सोमनाथ के पापा के लिए दूध वाली चाय बनाकर ले आती है. चाय पीने के बाद जगदीश जी बागेश्वर जी से कहते हैं. सुनिए बागेश्वर जी मैं आपसे थोड़ी बात करना चाहता हूं. जी सर कहिए क्या कहना चाहते हैं. जी आप मुझे सर मत कहिए मैं भी आपका दोस्त जैसा हूं इसलिए मुझे जगदीश कह के बुलाइए. अरे अच्छा ठीक है जगदीश जी बोलिए आप क्या कहना चाहते हैं. जगदीश बागेश्वर को घर से थोड़ा बाहर ले जाकर कहते हैं. बागेश्वर जी मेरा बेटा नकुल को अपना बहुत अच्छा दोस्त मानता है उसने मुझे बताया कि नकुल बहुत समझदार और अच्छा लड़का है पर
[11:22]गरीबी के कारण से वह पढ़ाई छोड़ने की बातें कर रहा है. भगवान की दया से अब जाके हमारा सोमनाथ खुश रहने लगा है. नहीं तो पहले वह सिर्फ अकेला ही रहता था क्योंकि उससे कोई दोस्ती ही नहीं करता था. अब क्योंकि आपके नकुल के कारण से मेरा बेटा खुश है इसीलिए मैं उसकी पढ़ाई की फीस भरना चाहता हूं आप अब टेंशन भूल जाइए समझे. बागेश्वर की आंखों में आंसू आ जाते हैं. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जगदीश जी आपने मेरी चिंता दूर कर दी. बस उस दिन से नकुल की पढ़ाई की चिंता दूर हुई. अब नकुल सोमनाथ के घर खेलने जाने लगा था ऐसे ही एक दिन सोमनाथ के पापा कहते हैं. नकुल सोमनाथ बेटा यहां आओ. वह दोनों जगदीश के पास जाते हैं.
[12:18]बेटा तुम दोनों बताओ तुम में से कौन शेयर मार्केट के बारे में जानता है नकुल बेटा पहले तुम बताओ. अंकल मैं इसके बारे में पहली बार सुन रहा हूं यह क्या होता है. और पापा मैं बस इतना जानता हूं कि शेयर मार्केट में शेयर खरीदा और बेचा जाता है. अच्छा सुनो अब कल से तुम दोनों मेरे साथ आधा घंटा बैठोगे. मैं तुम दोनों को अब कुछ सिखाना चाहता हूं. यह सब के बारे में नकुल को जरा भी समझ नहीं आता है लेकिन उसको जानने की बहुत इच्छा थी. तो उसने सोमनाथ के फोन पर गूगल सर्च किया तो जो उसने देखा वह देख के चौंक गया और फिर अगले दिन. अंकल मैंने गूगल पर सर्च किया था कि शेयर मार्केट क्या है क्या सच है अंकल. कि हम वहां से पैसे कमा सकते हैं. बेटा नकुल यह बिल्कुल सच है कि कोई भी शेयर बाजार से पैसा कमा सकता है. पैसा क्या बहुत-बहुत पैसा कमा सकता है. लेकिन बेटा चीजें देखने में जितनी आसान होती हैं असल में उससे कई ज्यादा मुश्किल होती है. अंकल मैं कुछ समझ नहीं पाया आप क्या कह रहे हैं. मैं ऊपर वाले कमरे में जा रहा हूं अपने दोस्त को लेकर वहीं आ जाओ मैं अब सब कुछ वहीं बताऊंगा. ठीक है अंकल. उसके बाद 5 मिनट में नकुल और सोमनाथ ऊपर वाले कमरे में जाते हैं. वहां वो लोग देखते हैं कि एक बहुत बड़ा कंप्यूटर है एक लैपटॉप है एक टैबलेट पर बहुत सारे अलग-अलग चार्ट खुले हैं मिनट-मिनट में लाल या हरी मोमबत्तियां बन रहे हैं उन्हें यह सब कुछ समझ नहीं आता लेकिन नकुल को इतना मालूम पड़ चुका था कि यह शेयर मार्केट कुछ तो है. वह दोनों जगदीश से पूछते हैं. पापा यह क्या है मैं आज तक नहीं जानता था कि आपके कार्यस्थल पर इतना बड़ा कंप्यूटर है. दरअसल आपका इतना बड़ा ट्रेडिंग सेटअप है. हां सोमनाथ यह मेरा ट्रेडिंग सेटअप है. मैं यहीं काम करता हूं लेकिन बेटा तुम्हें कभी यहां आने की जिज्ञासा ही नहीं थी. इसलिए हमने भी तुम्हें कभी इस बारे में नहीं बताया लेकिन अब तुम्हें देख के ऐसा लग रहा है कि तुम्हें यह सब बहुत पसंद आया है और शायद तुम इसके बारे में और जानना चाहते हो. हां अंकल सिर्फ सोमनाथ ही नहीं मैं भी बहुत उत्साहित हूं. शेयर बाजार के बारे में जानने के लिए. बिल्कुल बेटा नकुल क्यों नहीं. मैं यही तो तुम्हें और सोमनाथ को बताना चाहता था कि शेयर बाजार की दुनिया बहुत बड़ी है. इसमें अगर महानता हासिल कर ली जाए तो उसकी जेब में हजारों लाखों में हमेशा रहे. अच्छा तो तुम दोनों अब यहां से जाओ नीचे खेलो लेकिन हां कल से मैं तुम दोनों को थोड़ा-थोड़ा बाजार के बारे में बताना शुरू करूंगा. पापा मुझे पता है कि अब मेरा दोस्त इसे सीखने के लिए बहुत उत्साहित है. अब उसका खेलने में मन नहीं लगेगा उसका क्या मेरा भी नहीं लगेगा क्यों नकुल. हां अंकल प्लीज अभी से सिखाना शुरू कर दीजिए ना. वैसे भी अभी कोई जरूरी काम नहीं है तो हम फ्री ही हैं. बच्चों की अंदर की यह जिज्ञासा देखकर जगदीश मन ही मन खुश हो जाते हैं. लेकिन बेटा इसे सिखाने के लिए मुझे सोचना पड़ेगा कि शुरुआत कैसे और कहां से करूं. इसलिए शुरुआत तो कल से ही होगी. लेकिन अब तुम दोनों इतना कह रहे हो तो थोड़ी बुनियादी बातें बता ही देता हूं.



