[0:00]क्या आपने कभी सोचा है कि क्या हो अगर भगवान शिव और श्री राम की सेना युद्ध के मैदान में आमने-सामने आ जाएं? हम सब जानते हैं कि श्री राम महादेव के परम भक्त हैं और महादेव श्री राम के लेकिन शास्त्रों के अनुसार एक बार इन दोनों के बीच एक बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ था। आखिर ऐसा क्यों हुआ कि दो परम आराध्य एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए? यह अद्भुत कथा पद्म पुराण पाताल खंड में वर्णित है। रावण वध के बाद जब भगवान श्री राम ने अयोध्या में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया तो उन्होंने अपना विजय अश्व यानी घोड़ा छोड़ा। उस घोड़े की रक्षा का जिम्मा श्री राम के छोटे भाई शत्रुघ्न और महाबली हनुमान जी के पास था। घूमते-घूमते वह घोड़ा देवपुर नाम के एक राज्य में जा पहुंचा। देवपुर के राजा वीरमणि भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें वरदान दिया था कि जब भी तुम पर कोई प्राणघातक संकट आएगा और तुम मुझे पुकारोगे तो मैं स्वयं तुम्हारी रक्षा करने आऊंगा। जब श्री राम का घोड़ा देवपुर पहुंचा तो राजा वीरमणि के पुत्र ने उस घोड़े को पकड़ लिया। नियम के अनुसार घोड़ा पकड़ने का मतलब था युद्ध की चुनौती। नतीजा यह हुआ कि श्री राम की सेना और राजा वीरमणि के बीच एक भयंकर युद्ध छिड़ गया। युद्ध में शत्रुघ्न ने राजा वीरमणि की पूरी सेना को नष्ट कर दिया और राजा को बुरी तरह घायल कर दिया। जब राजा वीरमणि ने देखा कि अब मृत्यु निश्चित है तो उन्होंने अपने वरदान के अनुसार महादेव को पुकारा। अपने भक्त की करुण पुकार सुनते ही साक्षात महाकाल यानी भगवान शिव वीरभद्र और नंदी के साथ रणभूरी में प्रकट हो गए। महादेव ने त्रिशूल उठाया और श्री राम की सेना पर प्रहार किया। शत्रुघ्न मूर्छित हो गए और महाबली हनुमान जी भगवान शिव से भिड़ गए। यह युद्ध इतना भयंकर था कि पूरी धरती कांपने लगी। जब महादेव को शांत करना असंभव हो गया तब महाबली हनुमान ने श्री राम का स्मरण किया। अगले ही पल श्री राम स्वयं युद्ध भूमि में प्रकट हुए। लेकिन श्री राम ने महादेव पर कोई शस्त्र नहीं उठाया। उन्होंने अपना धनुष नीचे रख दिया और हाथ जोड़कर महादेव को प्रणाम किया। श्री राम ने कहा हे प्रभु जो आपका भक्त है वह मेरा भी भक्त है। आपने अपने भक्त की रक्षा का वचन निभाया। अपने आराध्य श्री राम की यह विनम्रता देखकर महादेव भी मुस्कुराए और उनका क्रोध शांत हो गया। उन्होंने भी श्री राम को प्रणाम किया। इस तरह बिना किसी हार जीत के यह महायुद्ध शांत हुआ। श्री राम ने अपने स्पर्श से सभी मूर्छित योद्धाओं को जीवित कर दिया और राजा वीरमणि ने खुशी-खुशी घोड़ा लौटा दिया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। अश्वमेध यज्ञ का वह घोड़ा आगे बढ़ा एक ऐसी जगह जहां अयोध्या की इस पूरी सेना को धूल चटाने के लिए दो छोटे-छोटे बालक इंतजार कर रहे थे। आखिर कौन थे वह दो अनजान बालक जिन्होंने महाबली हनुमान और श्री राम की सेना को बंदी बना लिया। जानने के लिए पार्ट टू का इंतजार करें। श्री राम और महादेव की इस अद्भुत लीला के लिए कमेंट में नमः जरूर लिखें जहां न से नारायण और म से महादेव हैं।

महादेव vs श्री राम: ब्रह्मांड कांप उठा!#Mahadev #sriram #hanuman #hindugranth #facts #hinduhistory
Khushi Mythology
3m 0s536 words~3 min read
YouTube auto captions
Transcript source
YouTube auto captions
This transcript was extracted from YouTube's auto-generated caption track. The transcript below is server-rendered so it can be read, searched, cited, and shared without opening the original YouTube player.
Pull quotes
[0:00]क्या आपने कभी सोचा है कि क्या हो अगर भगवान शिव और श्री राम की सेना युद्ध के मैदान में आमने-सामने आ जाएं?
[0:00]हम सब जानते हैं कि श्री राम महादेव के परम भक्त हैं और महादेव श्री राम के लेकिन शास्त्रों के अनुसार एक बार इन दोनों के बीच एक बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ था। आखिर ऐसा क्यों हुआ कि दो परम आराध्य एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए?
Use this transcript
Related transcript hubs
Watch on YouTube
Share
MORE TRANSCRIPTS


