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महाभैरव मंत्र।हर साधक को अवश्य करना चाहिए। #bhairav #kaalbhairav #कालभैरव

गृहस्थ तंत्र

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[0:00]जय मां विंद वासनी हर हर महादेव आप सभी का स्वागत है हमारे YouTube परिवार में। भरण पोषण करने के कारण ही भगवान का नाम भैरव पड़ा है। भगवान रुद्र के अवतार भैरव हर उस कार्य को करने में सक्षम हैं जो कि संसार की भलाई के लिए और एक गृहस्थ के भरण पोषण के लिए संभव होता है। स्वरूप अनेक हैं, भेद अनेक हैं। जिनकी चर्चा हम पहले के कई वीडियोस में कर चुके हैं। आज का विषय है कि हमारे प्रत्येक कार्य को सिद्ध करने में सक्षम कोई भैरव जी का ऐसा विधि विधान किया जाए जिससे कि हमारे प्रत्येक कार्य बने। विशेष करके भैरव जी का प्रयोग तंत्र के क्षेत्र में लोग करते हैं। इस विषय से अनजान हैं लोग कि घर में भी रक्षण हेतु भैरव जी की स्थापना की जाती है। पहले के वीडियोस में हम इस चीज को बता चुके हैं। यह प्रश्न था कि कोई एक ऐसा सात्विक और सरल साधना जो कि प्रत्येक गृहस्थ कर सकें। जिसका कोई तिरक प्रभाव ना हो, सौम्य हो, साथ ही वह हर कार्य को करने में सक्षम हो, भैरव जी के माध्यम से, भैरव के स्वरूप के माध्यम से। तो ऐसी ही एक आज उपासना साधना को आप सभी के समक्ष रख रहे हैं। इसको प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है। घर में जिस भी स्वरूप की स्थापना की गई हो, जिस भी स्वरूप की देवी हो, जिस भी स्वरूप की भैरव जी की उपासना करते हो आप, उनकी स्थापना की गई हो और उनकी आप साधना पूजन कर रहे हो या फिर केवल धूप दीप दिखा रहे हो। तो एक ऐसा विधि विधान आज आप सभी के समक्ष रख रहे हैं कि इस साधना को तो प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए। और कोई भी आप नया अनुष्ठान जब करने जाते हैं, उससे पहले रक्षा के लिए इस मंत्र का प्रयोग करना चाहिए। आप कहीं भी किसी भी कार्य के लिए जा रहे हो, नौकरी के लिए जा रहे हो, इंटरव्यू में सफलता अगर प्राप्त करने हो, उसके लिए जा रहे हो, आप इसका प्रयोग करें। बिजनेस करते हैं, वहां पर कुछ डील रिलेटेड काम करने के लिए जा रहे हैं, जहां किसी व्यक्ति के ऊपर प्रभाव पड़ना चाहिए सही तरीके से, तब आप इस साधना का प्रयोग कर सकते हैं। तो आज की जो है साधना है, यह हर व्यक्ति को सिद्ध करके रखना चाहिए। इसमें स्त्री पुरुष का कोई भेद नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति इसे कर सकते हैं और हर कार्य के लिए कर सकते हैं। कार्य का उल्लेख इस साधना को पूर्ण करने के बाद जब आप इसका प्रयोग करेंगे, तब संकल्प में करेंगे कि मैं इस कार्य के हेतु इस मंत्र का जप कर रहा हूं। ठीक है, पहली बात तो यह हो गई। दूसरी बात है कि जब कभी भी हम किसी भी शक्ति को जागृत करते हैं, किसी भी शक्ति का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम जो है उस स्वरूप के साथ-साथ में उनके जितने भी गण होते हैं, उनके भी पूजन पाठ को करना चाहिए। अब भगवान भैरव के जो गण हैं, प्रत्यक्ष रूप से वो किसे माना गया है और उनके क्या सेवा करनी चाहिए। तो हम सभी जानते हैं कि स्वान को यानी कि कुत्ते को भैरव जी का वाहन माना जाता है। तो जो भी व्यक्ति जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या से ग्रसित है, चाहे अभ चार से ग्रसित हो, भूत प्रेत की बाधा हो, चाहे धन संबंधी समस्या हो, संतान संबंधी समस्या हो, भगवान भैरव गृहस्थ के हर एक कार्य को करने में सक्षम है, उसके कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो उनके लिए असक्षम हो भगवान भैरव। तो आपको सबसे पहले तो एक गांठ बांध लेना चाहिए। प्रत्येक दिन मीठा रोटी या नमकीन रोटी, या सादा रोटी, जो आपका सामर्थ्य हो, जो आप सकें, वह प्रत्येक दिन जब से आप भैरव साधना उठाएंगे, तब से लेकर के नियमित रूप से आप जो है, कुत्ते को खिलाएंगे। चाहे आप सुबह खिलाइए, रात खिलाइए, समय का कोई बंधन नहीं है। रोटी के स्वाद का कोई बंधन नहीं है कि हमको सादा रोटी ही खिलाना है, मीठा नहीं खिलाना है या नमकीन खिलाना है। आप कोई भी रोटी खिला सकते हैं, लेकिन अपने हाथ से जो है आप स्वान को भोजन सर्वप्रथम जो है प्रत्येक दिन आप कराएंगे। आप अपने पास रख लीजिए जहां कुत्ते मिले वहां खिला दीजिए। उनकी आत्मा तृप्त होगी जब आपको आशीर्वाद मिलेगा ना, तो वाहन से ही वह आने वाले हैं। वह प्रसन्न हो गए, हम कहा जाता है कि 12 साल तक भैरव की उपासना की जाती है। 12 साल तक वीरभद्र की उपासना की जाती है। 12 अलग मंदिरों में, 12 अलग क्षेत्रों में भगवान वीरभद्र की उपासना उसी प्रकार से भैरव की भी साधना प्रमुख रूप से होती है। गुरु परंपरा से सब चीजें प्राप्त होती है। YouTube Facebook से नहीं, महान विद्वानों से नहीं। तो इन सभी चीजों को हम उतने लंबे समय तक तो अब घर गृहस्ती छोड़ के कोई कर नहीं सकता है। तो गृहस्थ आश्रम में रहते हुए कैसे करना है। तो जब भी आप भैरव जी की उपासना करते हैं, ना तो कुत्तों की सेवा तो मतलब निश्चिंत रूप से आप बिल्कुल करना ही करना है। उनको कभी कष्ट नहीं देना है। ऐसा ना हो, पत्थर नहीं मारना है। घर पर अगर दरवाजे पे आकर के भैरव जी का वाहन कुत्ता चाहे वो किसी भी रंग का रंग का कोई मतलब नहीं कि काला कुत्ता हो, सफेद कुत्ता हो, चितकबरा कुत्ता हो, कोई भी कुत्ता आकर के अगर वाहन के रूप में उनका जो स्वरूप है वो आकर के आपके घर पर अगर बैठे रहता है ना, यकीन मानो कि भैरव जी की कृपा है तो ही वो बैठ रहा है। नहीं तो यहां पे लोग उतार उतार के कुत्ते को खिलाने के लिए परेशान रहते हैं, कुत्ता सूंघ के छोड़ देता है, खाता नहीं है, याद रखना। अगर रुष्ट हो ना, अगर उनका यह भैरव का स्वरूप रुष्ट हो, तो अनेकों बार यह चीज होता है। अगर उतारा तो विशेष करके, अगर किसी का उतारा दिया जा रहा है ना, कुत्ता सूंघ के छोड़ देगा, खाएगा नहीं। अगर वह प्रसन्न हो, उनकी कृपा ऐसे व्यक्ति के माध्यम से प्राप्त हो रही हो, तो ही वह खाएगा। और अगर खा लिया तो समझ लो कि आपकी समस्या का निवारण शुरू हो चुका है वहां से। यह जादू नहीं है कि भैया आज की एक दिन में ठीक हो जाए, लेकिन अगर करोगे ना तो रिजल्ट आपको मिलेगा प्रॉफिट। आपको जरूर प्राप्त होगा, लाभ जरूर प्राप्त होगा। तो इसलिए सबसे पहला कार्य तो यह है कि आपको प्रतिदिन करना है। खिलाना जरूर है। दूसरा चीज है कि इसमें आपको माला जो है या तो स्फटिक का रहेगा। देख लेना भाई ज्योतिष के अनुसार से अपने लग्न कुंडली के अनुसार से शुक्र महाग्रह की क्या स्थिति है। अगर शुक्र महाग्रह आपके लिए लाभ है, लाभ देने वाले हैं, किसी भी घर में स्थित होकर के अगर आपके लिए सही है, 6 8 12 में तो किसी कंडीशन में ना हो। बाकी फिर भी अच्छे से देख करके कि अगर वह लाभ देने वाले हो तो फिर स्फटिक की माला ना ही नहीं, तो फिर आपको रुद्राक्ष की माला, रुद्राक्ष की कोई भी माला चलेगी। विशेष करके पंचमुखी रुद्राक्ष हो, तो भी चलेगा। या फिर अष्टमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष, इसकी माला। ये तीन रुद्राक्ष की माला आपके पास में कोई भी अगर होगी तो चलेगी। रुद्राक्ष की माला नहीं होनी चाहिए। और यह माला जो है, आपको धारण भी करना है। अगर आप स्फटिक नहीं धारण कर सकते, रुद्राक्ष नहीं धारण कर सकते, किसी भी कारण से हो सकता है कि आपको स्किन एलर्जी हो। आप रुद्राक्ष धारण करें, उसके कांटों से स्किन में प्रॉब्लम हो जाए। तो ऐसे कंडीशन में आपको यह देख लेना चाहिए कि हमको कौन सा रंग सूट करता है। ज्योतिष जी के अनुसार ग्रह अपने लगने लग्न कुंडली के अनुसार हमको कौन सा रंग सूट करता है और उसी रंग का हकीक माला ले लीजिए। किसी को काला हकीक यानी कि शनि महाग्रह अगर अच्छे हैं सही हैं तो काला हकीक ले लीजिए, नीला हकीक ले लीजिए, पीला ले लीजिए, लाल ले लीजिए आप किसी भी रंग के हकीक माला को ले लीजिए। और उसे जो है अभी भैरव अष्टमी किसी भी महीने में आप सुन रहे हो या भैरव अष्टमी से या चीज आरंभ करनी है। हर महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी को भैरव अष्टमी होती है, आप मुख्य जो काल भैरव अष्टमी है, मार्गस महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी को, वह 2021 में 27 दिसंबर को पड़ रही है। अन्य किसी भी साल आप इस वीडियो को सुन रहे हो तो उस तिथि को देख लीजिए कि मार्गस महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी कब है, भैरव अष्टमी या फिर आप अन्य महीने में सुन रहे हैं तो उस महीने की भैरव अष्टमी जब भी पड़ेगी, कृष्ण पक्ष की अष्टमी उस दिन से इसको आरंभ करें। दिन का कोई महत्व नहीं है कि सभी रविवार हो मंगलवार हो तो ही होगा। तिथि पड़नी चाहिए अष्टमी तिथि। ठीक है। और माला लाने के पश्चात रुद्राक्ष की माला अगर हो तो केवल गाय कच्चे दूध से धो के गंगाजल से धो के आप सामान्य जो है उसमें एक माला शिवजी के मंत्र का बिना पंचाक्षर मंत्र बिना ओम लगाए आप जप कर लें। और उसके पश्चात जो है उस पर भैरव जी का जो मंत्र आपके स्क्रीन पर दिखाया जाएगा, प्रमुख जो मुख्य मंत्र रहेगा, उसका जप करना है। अगर अन्य माला लेते हैं स्फटिक की लेते हैं या किसी भी अन्य रंग के हकीक माला को लेते हैं, सार्वजनिक रूप से अगर आप कोई भी रंग के माला को ले रहे हैं तो उसे अच्छे तरीके से प्राण प्रतिष्ठा कर लें। प्राण प्रतिष्ठा करने की जो विधि है इसी चैनल पर शुरुआत के वीडियोस में बता दिए गए हैं। पूरी विधि बता दी गई है, आपको किसी से करवाने की जरूरत नहीं है, आप देख के स्वयं कर सकते हैं। तो भैरव अष्टमी से पहले प्राण प्रतिष्ठा आपको माला का कर लेना है। ठीक है। रुद्राक्ष की माला हो तो उसमें आवश्यक नहीं है, अगर करना चाहे तो आप उसमें भी बिल्कुल कर सकते हैं। गोमुखी की आवश्यकता इसमें अनिवार्य रूप से बिल्कुल नहीं है, आप बिना गोमुखी के भी एक लाल कपड़े से या फिर लाल जो गमछा होता है या रामनामी जो चादर होती है उनसे ढक के आप कर सकते हैं। क्योंकि यह माला आपको बाद में धारण करना है। आसन इसमें पीला लीजिए, लाल लीजिए कोई दिक्कत नहीं है। गुसासन भी ले सकते हैं, कंबलासन भी ले सकते हैं। दिशा दक्षिण को छोड़ कर के कोई भी दिशा हो सकती है। समय सुबह का समय भी हो सकता है, शाम का समय भी हो सकता है, रात का समय भी हो सकता है जब भी आप बैठ के कर सकें। इसमें दो मुख्य जो चीजों की आवश्यकता पड़ेगी वो होगा कि भैरव जी का आपके पास एक तस्वीर होना चाहिए या फिर एक त्रिशूल होना चाहिए। भैरव जी की तस्वीर रखें, उनके श्री विग्रह को रखें या फिर उनके फोटो को रखें या फिर अगर कुछ भी ना हो तो एक चावल की ढेरी पर सुपारी रख कर के भैरव जी को मानसिक रूप से मान लीजिए और उन्हीं के समक्ष जो है चौमुख दिया जो है जलाना है आपको। चौमुख दिया में चमेली का तेल डाल के जलाया जाता है, लेकिन चमेली का तेल का दिया जो होता है बहुत जल्दी जल के खत्म हो जाता है। तो आप वहां पर सरसों तेल का दीपक जला सकते हैं और एक दूसरा दिया जो है चमेली तेल का जलाएं, यानी दो दिया आपको जलाना है, एक चमेली तेल का चौमुख दिया और एक सरसों तेल का चौमुख दिया। दिया कम से कम दो से ढाई घंटे तक जले इतना आपको ध्यान रखना है। यह आपको कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर के अमावस्या तिथि तक करनी है, जाप आपको। प्रतिदिन आपको पांच माला से लेकर के 21 माला तक जप आप कर सकते हैं। कम से कम पांच माला, अधिक से अधिक 21 माला आपके पास जितना समय हो। एक माला जप करने में आपको कितना लगता है, देख लीजिए। नए साधक है तो थोड़ा समय लगेगा। तो आप चाहे पांच करिए, सात करिए, नौ कीजिए, 11 कीजिए, 21 कीजिए, जितना आपका सामर्थ्य हो। इतना आप 21 माला मैक्सिमम आप कर सकते हैं। सिर्फ इतना ही दिन आपको साधना करना है। संकल्प यह लेना है कि मैं भैरव मंडल की कृपा प्राप्ति हेतु अपना नाम गोत्र उच्चारण करेंगे, हाथ में जल लेकर फूल अक्षत इत्यादि लेकर के आरंभिक विधियों को करने के पश्चात, आरंभिक विधि करने के बाद भैरव जी का पूजन किया जाता है। भैरव जी का पंचोपचार पूजन, यानी धूप दीप, गंध भोग इत्यादि के द्वारा पूजन। एक फूल भैरव जी के समक्ष रख के उसी के ऊपर में जल से उनको स्नान कराना या मानसिक रूप से उनको धूप दीप दिखाना, उनको भोग लगाना। भोग में आप यहां पर दही बड़ा जरूर भोग में लगाएं और मीठी में लड्डू बूंदी वाले लड्डू जो होते हैं, वो भोग में लगाएं। घर में यह साधना आप बिल्कुल निश्चिंत होकर कर सकते हैं। स्वरूप कौन सा इसमें हम मानेंगे भैरव जी का, आप बटुक भैरव का स्वरूप यहां पर मानेंगे। ठीक है। और आप स्थापना भी अगर घर में करते हैं तो बटुक भैरव की ही प्रतिमा हो या बटुक भैरव का ही तस्वीर हो, यही फोटो लगाएं और किसी स्वरूप की फोटो ना लगाएं। क्योंकि सार्वजनिक रूप से YouTube पर मैं बता रहा हूं तो मुझे नहीं पता है कि कौन सा भैरव आपके लिए कौन सा उनका स्वरूप जो है आपके लिए सही होगा। बटुक भैरव सर्वमान्य है, हर घर में पूजित हो सकते हैं, इसलिए उनकी ही स्वरूप की मैं आपको बता रहा हूं। पहले से अगर पूजित हैं कोई भी स्वरूप तो आप उनके सामने यह कर सकते हैं। ठीक है, बिल्कुल नया स्वरूप रखने की आवश्यकता नहीं है, आप उनके समक्ष ही कर सकते हैं। चार मुखी दिया बस जलाना है आपको। दीपक के बीच में एक सुपारी, एक तांबा का सिक्का, दो इलायची और दो लौंग यह जरूर डालना है। इस चीज का ध्यान रहे और थोड़ा सा कपूर डाल देना है। यह सिर्फ और सिर्फ सरसों तेल वाले में डालना है। चमेली तेल वाला दीपक जो रहेगा वो केवल बाती उसमें चार बाती रहेगी। और उसके पश्चात आरंभिक आप गुरु गणपति पूजन इत्यादि करें फिर जो माला आपने प्राण प्रतिष्ठित चैतन्य की है, उससे जो अभी स्क्रीन पे आपको मंत्र दिखाया जा रहा है, इस मंत्र का आप जप आरंभ करेंगे। जप कैसे करना है, बता ही चुके हैं। कितना माला करना है यह भी बता चुके हैं कि पांच माला मिनिमम, कम से कम पांच माला, मैक्सिमम 21 माला तक आप जप अपने सामर्थ्य अनुसार करें। कोशिश करें कि पहला दिन जितना माला जपो हर दिन उतना ही करें। पहला दिन अगर पांच माला किए हैं तो अगले दिन भी पांच माला अमावस्या तक हर दिन पांच-पांच माला करना है। 11 माला कर रहे हैं तो अमावस्या तक 11 माला, समय आप अपने कार्य के अनुसार आगे पीछे कर सकते हैं। अगर यह आपके साथ है समस्या कि भैया हमको ड्यूटी करना है, ऑफिस जाना है, बिजनेस में कुछ ऐसा दिक्कत है। बिजनेस अगर करते हैं तो उसमें समय आगे पीछे अगर हो जाता है तो ऐसा अगर है कि भैरव अष्टमी के दिन आप सुबह किए अगले दिन आपके पास समय नहीं रहा तो आप रात को भी कर सकते हैं, समय का बंधन नहीं है, बस हो जाना चाहिए। इस बात का आपको ध्यान रखना है। लेकिन प्रयास करें कि एक ही समय पर प्रतिदिन हो तो बहुत अच्छा रहेगा। ठीक है। तो यह काम आप अमावस्या के दिन तक करेंगे। अमावस्या के दिन जो है जितना माला आप जप हर दिन करते हैं, अमावस्या को भी उतना माला जप करेंगे और उसके बाद उतना ही माला हवन करेंगे। यानी अगर पांच माला आप जप करते थे प्रतिदिन तो पांच माला आहुति आप उस दिन देंगे। मैं पुनः बोल रहा हूं कि भैरव जी के किसी भी स्वरूप की आप उपासना करते हो, कोई भी स्वरूप स्थापित हो, तो यह मंत्र हर स्वरूप के लिए है। इस बात का ध्यान रखें। ठीक है, यह मंत्र जो है हर स्वरूप को जागृत करेगा, इससे भैरव तत्व जागृत होगा और आप इसका बहुत सारे प्रयोग हैं, मैं उन प्रयोगों को भी आगे बताऊंगा। लेकिन पहले आप इस मंत्र को भैरव तत्व को स्वयं के लिए जागृत करें और स्वयं के लिए रक्षात्मक बनाएं। हवन कैसे करना है, हवन भैरव जी का कभी भी जब किया जाता है। देखिए दो तरीके से हवन होता है, सामान्य रूप से गृहस्थ में। एक तो हम लोग कुंड लेते हैं। दूसरा जो होता है विधि बनाते हैं बालू रख करके। तो जो संभव हो अगर आपके पास कुंड हो तो आप कुंड में हवन कर सकते हैं। नहीं तो पहले नीचे में बालू रख के या ईटा रख के उसके ऊपर बालू से पूरा चौकोर मंडल बना लीजिए और उसके ऊपर कभी भी जब भैरव जी का हम हवन करते हैं तो उल्टा त्रिकोण जो लकड़ी सजाएंगे वह उल्टा त्रिभुज रहेगा। और जब भगवती का करते हैं तो सीधा त्रिभुज, यानी कि जो ट्रायंगल बनेगा, उसमें जो बेस होता है, जो आधार होता है भगवती का जब हम मंडल बनाते हैं, जब उनका हवन करते हैं, तो वह आधार हमारी तरफ रहेगा। और जब भैरव जी के किसी भी स्वरूप का हवन विशेष करके तंत्रात्मक अनुष्ठान कुछ करते हैं, तो उल्टा त्रिकोण बनेगा। तो त्रिकोण में जो आधार रहेगा, जो बेस होता है, वह ऊपर की ओर है, आप जिधर बैठे हो आपसे उल्टा हो, तो इस तरीके से तीन लकड़ी को सजाएंगे और फिर उसके ऊपर और दो तीन लकड़ी रख के और जैसे अग्न स्थापन का विधि इत्यादि चैनल पे उपलब्ध है। आप लोग देख रहे हैं कैसे अग्नि का स्थापन किया जाता है और क्या-क्या किया जाता है, कौन से आरंभिक मंत्र इत्यादि हैं, आपको इसी चैनल पर मिल जाएगा। मैं इस वीडियो में भी जिन-जिन जीरो का मैं वर्णन कर रहा हूं, लिंक भी दे दूंगा। इसका भी लिंक दे दूंगा और माला प्रतिष्ठा का भी जो है वह भी लिंक दे दूंगा। इसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन में आप देख लीजिएगा, आपको मिल जाएगा। आप वहां से देख के सभी चीजों को कर सकते हैं। तो आरंभिक कृति करने के बाद आहूतियां जो आरंभ के दिन है सभी देंगे। मुख्य आहुति जो देनी है किन-किन चीजों से देनी है। मुख्य आहुति मैं लिख भी दूंगा डिस्क्रिप्शन में अगर आपको दिक्कत हो तो आप वहां से स्क्रीनशॉट लेके उन सभी चीजों को ला लें। इसमें सबसे प्रमुख क्योंकि यहां पे हम यहां पे पहले पुष्टिकार हवन अभी कर रहे हैं। तो यहां पे पंचमेवा जरूर होना चाहिए। ठीक है, जो सामान्य आहूतियां बनती हैं, सामान्य हम लोग किसका बनाते हैं? तिल, जौ, चावल ये प्रमुख है। तो यहां पे भी ऐसे ही लेना है। एक अगर अपने सामान्य आहुति के अनुसार मान लीजिए कि अगर एक किलो तिल ले रहे हैं तो आधा किलो जौ, 250 ग्राम चावल लेंगे, उसमें 100 ग्राम मधु मिलाएंगे। कम से 100 ग्राम नहीं 125 ग्राम कम से कम मधु उसमें होना चाहिए और उतना ही कम से कम 250 ग्राम तक उसमें पंचमेवा, दोगुना पंचमेवा जो होगा काजू किशमिश, ये सारे चीज को जो कटिंग मिलता है सबको उसमें मिलाएंगे और उसमें घी मिला करके पूरी सामग्री तैयार कर लेंगे। क्योंकि यह पुष्टिकार हवन है अभी। और उसके पश्चात जो है प्रमुख आहुति हम इसी से देंगे। महिलाएं साधिकाएं जो हवन करने वाली हैं, वह सारी की सारी आहुति इसी सामग्री से देंगी। उनको कहीं भी घी से आहुति देने की आवश्यकता नहीं है। वह आरंभिक आहुति यानी गुरु गणपति का भी आहुति इसी से देंगे और पूरा भैरव जी का जो मंत्र आप जप किए हैं, जो स्क्रीन पे आपके दिखाई दिया है, इसके द्वारा जो हवन करना है, वह भी आप इन्हीं सामग्री से देंगे। तो जितना माला जप उतना माला हवन और उसके बाद पूर्णाहुति। तर्पण जो करना है, वह जरूर करना है, दशांश तर्पण करना है। ठीक है, दशांश तर्पण करेंगे, लेकिन अगर किसी भी स्थिति में तर्पण आप नहीं करते तर्पण करने की विधि भी चैनल पे दी हुई है। यहां पे आपको जब तर्पण करेंगे इस विधि से तो ये तांत्रिक मंत्र है, तो इसमें तर्पण करने के लिए हमको क्या एक पात्र में जल भरेंगे, जल में मधु जरूर डालेंगे यानी कि मीठा जल होना चाहिए और सुपारी पान पत्ता पर रख के तिल और सभी चीजों को जो-जो बताया गया है पंचमेवा इन सभी के द्वारा बना करके फिर तपियामी नमः इस पूरे मंत्र को बोल करके। अगर पांच माला किए हैं तो 50 बार तर्पण होगा और पांच बार मार्जन होगा। अगर 11 माला प्रतिदिन जप करते थे 11 माला का हवन किए हैं अगर आप तो एक माला का आप जो है या 110 मंत्र बोलिए या एक माला कम से कम जो है तर्पण होना चाहिए और उसका दशांश यानी कि 10 बार 11 बार आप जो है मार्जन अपने ऊपर करेंगे, 11 बार आप मार्जन करेंगे। यह काम आप करेंगे। इसके सिवाय अगर आप पूरे वीडियो को सुन रहे हैं तो प्रतिदिन जो जप करेंगे, जप के बाद जप के से पहले सबसे पहले तो जो भोग लगाएंगे उसमें लौंग, इलायची पान पत्ता जरूर हो प्रतिदिन। लौंग इलायची सुपारी पान पत्ता जो एक बीड़ा बनाया जाता है, सामान्य जो होता है, खोल के बीड़ा मतलब बीड़ा बना करके नहीं, ध्यान रहे बीड़ा नहीं चढ़ाना है। पान पत्ता के ऊपर भोग चढ़ाना है। दो जगह चढ़ाना है, एक भैरव जी के नाम से और आपके जो कुल के देवी देवता हैं उनका पूजन भी प्रतिदिन होना चाहिए। वह सामान्य आप उनके सामने धूप दीप भोग ही लगाएं, लेकिन उनका अपना जो है होते रहना चाहिए। प्रतिदिन का पूजन छोड़ के इसको नहीं करना है। प्रतिदिन का जप आप छोड़ सकते हैं जो पहले से करते हो वह सब ना करें। क्योंकि साधना आप कर रहे हैं, लेकिन जो भी देवी देवता है, उनके सामने जो है दीप दीपक जल जाना चाहिए, उनका भोग लगना चाहिए। उसके पश्चात जो है आप एक भोग यहां लगाएंगे, भैरव जी का। दूसरा चीज है जब जप पूर्ण हो जाए प्रतिदिन तो पांच कपूर के ऊपर दो-दो लौंग रखें, यानी जोड़ा लौंग, पांच कपूर, 10 लौंग प्रतिदिन जलाना है। आप चाहे तो किसी प्लेट में रख के जला सकते हैं या भूमि स्वच्छ है, साफ है तो आप वहां भी जला सकते हैं। यह आपको प्रतिदिन करना है। अंतिम दिन जब आप हवन करेंगे हवन पूर्णाहुति इत्यादि करने के पश्चात जो है उसी दिन कम से कम अपने वजन के 10वें भाग तक अगर संभव हो तो। अगर 70 किलो वजन है तो 7 किलो अनाज आप स्पर्श करके मानसिक रूप से संकल्प करके रख देंगे। हवन अगर आप रात में कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है, अगले दिन सुबह नहा धो कर के फिर आप इस चीज को करेंगे। 7 किलो यानी 70 किलो वजन है तो 7 किलो अगर आपका 80 किलो वजन है तो 8 किलो उतना अनाज कोई भी एक तरह का अनाज हो या पांच तरह का अनाज हो उसको आप स्पर्श करके संकल्प करके उसको रख दीजिए किसी भी योग्य ब्राह्मण को या गरीब को किसी को भी आप इसको दे सकते हैं कि भाई अपने यूज में वो ले ले। यह आपका साधना यहां पर पूर्ण होता है। ध्यान में पुण्य जितना आप करेंगे उतना अच्छा है। कुत्तों को रोज खिलाना है, इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें। प्रयोग करने की विधि कैसी होगी, वह हम इसके अलग-अलग वीडियोस दे देंगे। कम से कम पांच वीडियो उसके और अलग से आएंगे प्रयोग करने के लिए, लेकिन थोड़ा देर से आएगा वह सारा वीडियो। उसमें हम बताएंगे कि इस मंत्र के द्वारा कैसे-कैसे विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाते हैं। कम से कम पांच से छह वीडियोस उसके अलग से आएंगे जो सिद्ध साबरी विद्या चैनल पर रहेगा। इस चैनल पर तो हम सारा विधान बता दिए हैं क्योंकि वह इस इसमें काफी सारे प्रयोग साबर के रहेंगे तो उसी चैनल पर हम उसको डालेंगे। तो आप लोग उस चैनल को भी सब्सक्राइब कर लीजिए और इस विषय से संबंधित अन्य कोई भी प्रश्न हो तो अभी समय है अपने पास में अष्टमी के आने में चार-पांच दिन का समय है। आप प्रश्न भेजना शुरू कर दें। लाइव सेशंस अगर होते हैं तो लाइव में अपने प्रश्न को तैयार करके पूछ ले और टेलीग्राम ग्रुप में ज्वाइन करके वहां भी अपने शंका संशय को दूर करके सही तरीके से साधना को कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति जो भी साधना के क्षेत्र में आ रहा है, उसके लिए यह साधना अनिवार्य होगा, इसका कोई भी त्रक प्रभाव नहीं है। बिल्कुल निश्चिंत हो के इस साधना को करें। गण गुरु पूजन के बाद यानी गुरु साधना के बाद चाहे आप नौ नाथ की साधना करें, नौ नाथ चैतन्य मंत्र करें, गुरु गोरख साबरी करें, गुरु गायत्री करें। गोरख गायत्री करें, इन सभी के बाद जब गणपति साधना कर लेते हैं, चाहे आप साबर के क्षेत्र में हो चाहे समान तंत्रुक्त क्षेत्र में हो, दोनों में से किसी में तो दोनों ही क्षेत्र के लोग जो है, भैरव जी की इस साधना को कर सकते हैं। उसके बाद गुरु गणपति के बाद भैरव जी की ही साधना करनी है और यह साधना प्रत्येक व्यक्ति को करनी है इस बात का ध्यान रखें।

[20:19]तो आशा करते हैं कि आज के वीडियो से आपको लाभ प्राप्त होगा। कोई भी विषय छूट गया हो आपको लगे कि हां यहां यह प्रश्न होना चाहिए तो आप जरूर हमसे पूछे। मैं यथाशक्ति यथा समय आप सभी का जवाब दूंगा और हमारे साथ आप सभी बने रहे। जय मां विंध्यवासनी हर हर महादेव।

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