[0:00]अब तो सभी को पता है कि एक हॉस्पिटल बिल आपको गरीब बहुत गरीब बनाने के लिए काफी है। बट फैक्ट यह है कि एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी भी आपको शायद गरीब बना सकती है, क्योंकि या तो प्रीमियम बहुत हाई होगा या फिर आपका क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा। प्रीमियम महंगे क्यों हैं? थैंक्स टू सरकार, 18 परसेंट जीएसटी, एंड थैंक्स टू कंपनीज क्योंकि वो अलग-अलग फीचर्स लाते रहते हैं। 1 करोड़ के प्लान्स, इनफाइनाइट सम अश्योर्ड, फैंसी राइडर्स, जो शायद आपको रिक्वायरमेंट भी नहीं है बट आप उसका प्रीमियम पे करते रहोगे और कभी वसूलोगे नहीं। My नेम इज मनी माइंडेड मनदीप, एंड दिस इज द अल्टीमेट गाइड टू बाइंग द बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी। और प्रीमियम ऐसा ना हो कि उससे हम आज ही गरीब बन जाए।
[0:46]अब इंडिया में करीब 30-35 हेल्थ इंश्योरेंस कंपनीज हैं। सारी की सारी अच्छी नहीं है बट अच्छी कौन सी है हमें यह ढूंढना आना चाहिए। उसके लिए हमें सबसे पहले चेक करना है इनकरड क्लेम्स रेशियो। इसका मतलब होता है अमाउंट ऑफ क्लेम्स पेड डिवाइडेड बाय टोटल अमाउंट ऑफ प्रीमियम्स अर्नड इन 1 ईयर। इंश्योरेंस बिज़नेस ऐसे ही तो काम करता है, हम बहुत सारे लोगों से, यानी कंपनी बहुत सारे लोगों से प्रीमियम्स इकट्ठा करती है और उम्मीद करती है कि यह सारे के सारे लोग एक ही साल में क्लेम मांगने ना आ जाए। तो कंपनी का इनकरड क्लेम्स रेशियो यही बताता है कि कंपनी ने कितना पैसा प्रीमियम में कमाया और उसका कितना परसेंटेज पैसा क्लेम्स में बांट दिया। अगर यह परसेंटेज बहुत कम है दैट मीन्स कंपनी लोगों का क्लेम आसानी से पास नहीं कर रही है और वह फर्दर उसके कंप्लेंटस डेटा में भी रिफ्लेक्ट होगा। और अगर यह परसेंटेज 100 परसेंट से भी ज्यादा है दैट मीन्स कंपनी जितना कमाती नहीं है उससे ज्यादा क्लेम्स में बांट रही है तो यह एक्स्ट्रा पैसा कहां से आ रहा है? एक लॉस मेकिंग कंपनी को आखिर कब तक और कौन फंड करेगा? इसलिए हेल्दी इनकरड क्लेम्स रेशियो होता है समवेयर अराउंड 80 या 85 परसेंट और ऐसी कई कंपनीज हैं जिनको मैंने ग्रीन में भी मार्क किया है। इनके पिछले 3 सालों के ICR भी लिखे हैं और 3 सालों का एवरेज भी लिखा है। और अगर आप ध्यान से देखोगे तो ऐसी कंपनीज जिनका हमेशा 100 परसेंट से ऊपर का इनकरड क्लेम्स रेशियो है, वो सारी की सारी पब्लिक इंश्योरेंस कंपनीज हैं। आपको ICR को फर्दर स्टडी करना है तो IRDAI की हैंडबुक में पिछले 10 सालों का डेटा है वो भी सेगमेंट वाइज। इतना नहीं करना पड़ता बट कुछ इंटरेस्टिंग चीजें आपको मिल सकती हैं। तो 2014 से लेकर 2024 तक का डेटा है मैंने लास्ट वाले डेटा को ही हाईलाइट करा है बाकी 9 साल का नहीं देखा है। इसमें चार सेगमेंट में ICR बता रखा है और फिर लास्ट में उन सबका टोटल भी बता रखा है। यह जो टोटल वाला इनकरड क्लेम्स रेशियो है, ये आपका IRDAI एनुअल रिपोर्ट से मैच नहीं करेगा। और वो इसलिए नहीं करेगा IRDAI की हैंडबुक वाला जो यह ग्रैनुलर डेटा है, इसमें आपको सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस डेटा मिल रहा है विदाउट पर्सनल एक्सीडेंट एंड ट्रैवल। हाउ डू वी मेक सेंस ऑफ दिस डेटा? सबसे पहले हम देखेंगे कि टोटल में 80 या 85 परसेंट के आसपास कौन सी कंपनीज हैं। फॉर एग्जांपल, चोला मंडलम इज एट 81 परसेंट इन टोटल। बट जैसे ही मैं इंडिविजुअल पॉलिसीज का नंबर चेक करूंगा तो यह है 360 परसेंट यानी यह जितना प्रीमियम कमा रहे हैं इंडिविजुअल पॉलिसीज से उसका 360 परसेंट क्लेम्स में दे रहे हैं। एंड दैट्स अ लॉस मेकिंग बिजनेस। इसी कंपनी का फैमिली फ्लोटर इनकरड क्लेम्स रेशियो देखोगे तो 14 परसेंट ही है मतलब यहां पर यह क्लेम ही पास नहीं कर रहे हैं तो कुछ अजीबोगरीब हालात चल रहे हैं। अब यहां पर थोड़ा खेलने के बाद हम चलेंगे कंप्लेंट्स डेटा पे। दिस इज द नंबर ऑफ कंप्लेंट्स पर 10000 क्लेम्स और इंडस्ट्री एवरेज है 22। और आप देखोगे 22 के ऊपर कौन है तो यहां पर आपको केयर मिलेगा, मनीपाल सिग्ना, नीवा बूपा एंड स्टार हेल्थ। कई लोग स्टार हेल्थ के कंप्लेंट्स डेटा से सरप्राइज नहीं होंगे। लोएस्ट एंड सिंगल डिजिट कंप्लेंट्स सिर्फ तीन कंपनीज की हैं, बजाज आलियांज, ICICI लोंबार्ड एंड HDFC Argo। प्राइवेट इंश्योरेंस में। पब्लिक वाले में यूनाइटेड इंडिया की भी 8 कंप्लेंट्स हैं बट उनका ICR बहुत ज्यादा है तो वो वैसे ही रिजेक्ट हो गए। बजाज आलियांज का आपको टोटल इनकरड क्लेम्स रेशियो तो ठीक लगेगा 83 परसेंट पे बट हैंडबुक वाले डेटा में जहां पे सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस है वहां पर इनका टोटल ICR 89 परसेंट है व्हिच इज ऑन अ हायर साइड। इंडिविजुअल पॉलिसीज में इनका इनकरड क्लेम्स रेशियो 67 परसेंट है बट देन अगेन ये सिर्फ एक ही साल का डेटा है और अगले साल ये सारा का सारा डेटा फॉर ऑल कंपनीज चेंज भी हो सकता है तो आई वुडन्ट बी टू हार्श ऑन बजाज आलियांज। इस क्राइटेरिया के अकॉर्डिंग अच्छी कंपनीज ज्यादा है नहीं मार्केट में। HDFC और ICICI लोंबार्ड दो मिली हैं। अब इससे पहले कि आपको टेंशन हो जाए कि हमारे पास तो केयर या स्टार हेल्थ की पॉलिसी है आपको डरना नहीं है ऐसा नहीं है कि आपका अगला ही क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा। हो भी सकता है। ज्यादातर क्लेम्स लीगली रिजेक्ट होते हैं। आपको बाद में पता चलता है कि आपके साथ धोखा हुआ है पॉलिसी में वह फीचर्स हैं तो सही बट आप उसको क्लेम नहीं कर पा रहे हो। इसलिए आपको पता होना बहुत इंपोर्टेंट है कि आपकी पॉलिसी में क्या हिडन टर्म्स एंड कंडीशंस हैं और इस वीडियो में मैं आपको वही सिखाने वाला हूं। अच्छी पॉलिसीज की हिडन टर्म्स एंड कंडीशंस कैसी दिखती हैं, बुरी या स्लाइटली बुरी पॉलिसीज की हिडन टर्म्स एंड कंडीशंस कैसी दिखती हैं। वह समझने के बाद आप अपनी करंट पॉलिसी इवैल्यूएट करना अगर आपको लगता है यह बुरी पॉलिसी है तो आपको डेफिनेटली वो पॉलिसी को पोर्ट करवा लेना चाहिए एक अच्छी पॉलिसी में। पोर्ट करवाने का फायदा यह होगा कि जो वेटिंग पीरियड्स आपने ऑलरेडी निकाल लिए हैं वो आपको वापस नहीं निकालने पड़ेंगे। बट अगर आपने सम इंश्योर्ड बढ़वाया पोर्टिंग के टाइम पे तो एडिशनल सम इंश्योर्ड पे आपको एडिशनल वेटिंग पीरियड लगेगा। जो सम इंश्योर्ड आपका कंटिन्यू चल रहा था वो अनटच्ड रहेगा।
[4:52]कंपनी शॉर्टलिस्ट करने के बाद वी मस्ट ऑल्सो नो हाउ टू शॉर्टलिस्ट अ गुड प्लान। उसके लिए भी एक एलिमिनेशन टेक्निक है। यू हैव टू अवॉइड पॉलिसीज विद थ्री ईविल फीचर्स रूम रेंट का लिमिट, डिजीज वाइज सब लिमिट एंड को-पे। कई पॉलिसीज में या तो आपको रूम रेंट का लिमिट मिलेगा जैसे सम इंश्योर्ड का 1 परसेंट या फिर रूम का टाइप लिखा होगा जैसे सिंगल एसी प्राइवेट रूम। इसका मतलब आप उससे बड़े या महंगे रूम में जाकर अपना इलाज करवाते हो। फॉर एग्जांपल आपका बेस सम अश्योर्ड है 10 लाख और आपको सिंगल एसी प्राइवेट रूम ही अलाउड है जो कि हॉस्पिटल का सबसे सस्ता वाला रूम होता है उसका प्राइस है 3000 रुपए। बट आपने लिया 5000 पर नाइट वाला रूम और आप 5 दिन एडमिट थे तो आपको 25000 रुपए का रूम पड़ा। आपका जो टोटल एलिजिबल सर्जरी वाला खर्चा था वह 5 लाख रुपए था तो आपका टोटल बिल बना 525000 रुपए। अब आपको लगेगा कि 3000 की बजाय 5000 का रूम मैंने ले लिया यानी हर दिन 2000 रुपए का एडिशनल खर्चा कर दिया और 5 दिन के लिए एडमिट थे। मतलब 10000 रुपए आपको अपनी जेब से पे करने हैं और बाकी पूरा 515000 रुपए का खर्चा आपको क्लेम मिल जाएगा पॉलिसी से। तब आपको इंश्योरेंस कंपनी यह बताएगी आपका जो पॉलिसी में रूम रेंट लिमिट था वो आपके एक्चुअल रूम रेंट का 60 परसेंट ही है। तो अब आपको आपके 5 लाख के क्लेम का भी 60 परसेंट ही मिलेगा यानी 300000 रुपए। 200000 रुपए आपको अपनी जेब से देने पड़ेंगे। एंड ऐसी पॉलिसी का कोई फायदा नहीं होता। डिजीज वाइज सब लिमिट इज ऑल्सो अ वेरी बिग झोल। हो सकता है आपको कंपनी बोले 50 लाख का सम इंश्योर्ड है आपके पास। बट आप शायद ऐसा ट्रीटमेंट ही नहीं ढूंढ पाओगे जिसमें आपको 50 लाख रुपए का क्लेम मिल जाए क्योंकि हर टाइप का ट्रीटमेंट प्री-डिफाइंड है और उसपे कितना मैक्सिमम आप क्लेम कर सकते हो वो लिमिट लगा रखी है। एंड यह मुझे सबसे बेकार बात लगती है क्योंकि हो सकता है आज के जमाने में कई बीमारियों के कटिंग एज टेक्नोलॉजिकली एडवांस ट्रीटमेंट अवेलेबल हैं अच्छे हॉस्पिटल्स में। बट मैं वह करवा ही नहीं पाऊंगा। तो डिजीज वाइज सब लिमिट भी नहीं होना चाहिए। एंड थर्ड आता है को-पे। इसका मतलब यह होता है कि एडमिसेबल क्लेम अमाउंट यानी नॉट टोटल क्लेम कंपनी जो कंसीडर करती है वर्थ पेइंग उसका सर्टेन परसेंटेज जैसे 20 परसेंट या 30 परसेंट आप अपनी जेब से पे करो। एक रियल एग्जांपल बताता हूं अगर आपके पास यह तीनों फीचर्स हैं पॉलिसी में तो कैसे आपकी 15 लाख की पॉलिसी यूजलेस है। सम इंश्योर्ड है 15 लाख, आपने क्लेम किया 10 लाख रुपए का और सबसे पहले निकालेंगे एडमिसेबल क्लेम अमाउंट और वो आया 8 लाख रुपए का। ₹200000 रुपए कहां गए क्योंकि आपने महंगा रूम लिया था ₹200000 रुपए उसके काट लिए गए। 8 लाख रुपए का एडमिसेबल क्लेम अमाउंट है पर 20 परसेंट तो आपको देना है यानी 240000 रुपए आपको भरने पड़ेंगे यह तय हो गया है। बट उसके बाद क्या पता चलता है? डिजीज पर ₹500000 का सब लिमिट है। हो क्या रहा है एडमिसेबल क्लेम अमाउंट और सब लिमिट में व्हिच एवर इज लोअर देखा जा रहा है। कंपनी लोअर वाले अमाउंट को पकड़ रही है और कह रही है कि मैं तो बस इतना ही दूंगी। तो 10 लाख के क्लेम में से आधा कई बार आधे से ज्यादा आपको अपनी जेब से पे करना पड़ जाएगा अगर आपके पास रूम रेंट, डिजीज वाइज सब लिमिट एंड को-पे यह तीनों एक ही पॉलिसी में है तो।
[8:00]अब हम कंपेयर करेंगे HDFC Argo Optima Secure और ICICI लोम्बार्ड एलिवेट प्लान को। यह दो कंपनीज इसलिए क्योंकि इनका इनकरड क्लेम्स रेशियो और कंप्लेंट्स डेटा अच्छा है। और यह दो प्लान इसलिए क्योंकि यह दोनों इन कंपनीज के अच्छे या फ्लैगशिप प्लान्स हैं। पहले तो हम फीचर वाइज कंपैरिजन करेंगे उसके बाद मैं आपको फर्दर डीप में ले जाकर दोनों पॉलिसीज के पॉलिसी डॉक्यूमेंटस को साइड बाय साइड खोलकर उनकी हिडन टर्म्स एंड कंडीशंस ढूंढना सिखाऊंगा। यह एक्सरसाइज सीखकर आप अपनी एक्जिस्टिंग पॉलिसी को एनालाइज कर सकते हैं और यह पता लगा सकते हो कि आपकी पॉलिसी के जो फैंसी फीचर्स हैं क्या आप उनको क्लेम कर भी पाओगे या नहीं। तो मैं HDFC का Optima Secure प्लान एंड ICICI का Elevate कंपेयर कर लेता हूं। सबसे पहले आप नोटिस करोगे HDFC का प्रीमियम ज्यादा है ₹22308 रुपए। वेयर एज ICICI एलिवेट का प्रीमियम ₹14285 रुपए। यह प्रीमियम 30 साल के लड़के के लिए हैं जो फिट एंड फाइन है। वो इसलिए क्योंकि ICICI में आपको 50 लाख का बेस सम इंश्योर्ड मिलता है। वेयर एज HDFC में 50 लाख के बेस सम इंश्योर्ड के साथ-साथ 50 लाख एक्स्ट्रा फ्रॉम डे वन भी मिलता है। दिस इज कॉल्ड HDFC Argo का Secure बेनिफिट। उसके बाद आप नोटिस करोगे रूम रेंट लिमिट में HDFC में तो कोई लिमिट नहीं है बट ICICI में सिंगल प्राइवेट एसी रूम का लिमिट है। और पॉलिसी वर्डिंग्स को देखोगे तो उसमें यह भी लिखा होगा कि हॉस्पिटल का सबसे सस्ता वाला रूम अलाउड है। एक भी स्टेप ऊपर चले गए तो आपको प्रोपोर्शनेट डिडक्शन लग जाएगा। अब आप यह सोच रहे हो कि फ्लैगशिप प्लान में ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसा इसलिए क्योंकि एलिवेट प्लान बहुत सस्ता है और वह सस्ता इसीलिए है क्योंकि उसके इंपोर्टेंट फीचर्स को इसमें इंक्लूड ना करके एडिशनल राइडर्स में बेचा जाता है। तो यह भी देखने वाली बात होगी कि आप यूजफुल राइडर्स अगर इसमें ऐड करते हो इसको यूजेबल पॉलिसी बनाने के लिए तो क्या इसका प्रीमियम Optima Secure के आसपास आता है। इसके डिटेल्ड कंपैरिजन में आप रेस्ट ऑफ द फीचर्स भी इजीली कंपेयर कर सकते हो। यह आपको एक ओवरव्यू दे सकता है कि कौन सी पॉलिसीज में किस तरह के फीचर्स हैं बट वो फीचर्स कितने काम के हैं यह जानने के लिए अब अपन निकालते हैं दोनों पॉलिसी के पॉलिसी वर्डिंग्स। यह पॉलिसी वर्डिंग्स आपको पॉलिसी बाजार पर ही मिल जाएंगी जहां पर आप यह सारा प्रीमियम एंड राइडर्स का कैलकुलेशन देख रहे हो वहीं पर ऑल फीचर्स पे क्लिक करोगे और स्क्रॉल डाउन करोगे तो बॉटम में उस पॉलिसी का पॉलिसी वर्ड डॉक्यूमेंट डाउनलोड के लिए अवेलेबल है।
[20:04]सबसे पहले सम इंश्योर्ड। जैसा मैंने आपको बताया HDFC में बेस सम इंश्योर्ड के साथ-साथ उतना ही अमाउंट आपको सिक्योर बेनिफिट में भी मिलता है जो कि डे वन से एप्लीकेबल है और फर्स्ट हॉस्पिटलाइजेशन में भी आप उसको क्लेम कर सकते हो। क्या उसमें कोई हिडन कंडीशन है? लेट्स फाइंड आउट। दिस इज द सिक्योर बेनिफिट। तो इसमें लिखा है एडिशनल अमाउंट एज स्पेसिफाइड इन द पॉलिसी शेड्यूल विल बी अवेलेबल टू द इंश्योर्ड पर्सन एज सम इंश्योर्ड फॉर ऑल क्लेम्स एडमिसेबल अंडर सेक्शन B एंड सेक्शन B 2.3 व्हिच इज कॉल्ड प्रोटेक्ट बेनिफिट। सेक्शन B आपके सारे जो जितना भी कवरेज होता है वो सेक्शन B में लिखा है और जो सेक्शन B 2.3 प्रोटेक्ट बेनिफिट है यह कंज्यूमेबल्स का कवर है। जी हां, आपको Optima Secure में कंज्यूमेबल्स का कवर भी मिलता है और यह अच्छी बात है कि सिक्योर बेनिफिट में लिखा है कि दोनों टाइप के कवर में आप सिक्योर बेनिफिट अवेल कर सकते हो। एनी अनयूटिलाइज्ड अमाउंट इन होल और इन पार्ट विल नॉट बी कैरिड फॉरवर्ड टू द सब्सीक्वेंट पॉलिसी ईयर। ये कह रहा है कि हर साल आपको बेस सम इंश्योर्ड का एडिशनल उतना ही अमाउंट मिलता रहेगा बट वो जोड़ नहीं सकते आप हर साल। अगले पॉइंट में यह भी लिखा है कि आप सिक्योर बेनिफिट को एक क्लेम या फिर मल्टीपल क्लेम्स में यूज कर सकते हो एक ही साल में। तो मतलब अगर 50 लाख की पॉलिसी है तो वो टेक्निकली बन गई 1 करोड़ की पॉलिसी मैं उसको कैसे भी यूज कर सकता हूं। ICICI एलिवेट में ऐसा कोई सिक्योर बेनिफिट नहीं है। अब हम कंपेयर करते हैं नो क्लेम बोनस जिसका नाम HDFC में है प्लस बेनिफिट। पॉइंट A में लिखा है कि आप इसे 100 परसेंट ऑफ बेस सम इंश्योर्ड के बराबर एक्युमुलेट कर सकते हो। पॉइंट B में लिखा है कि पॉलिसी ईयर कंप्लीट करने पर आपको यह दिया जाएगा। आप इसको कैरी फॉरवर्ड कर सकते हो जो कि मैंने आपको बताया बस आपकी पॉलिसी में कोई ब्रेक नहीं होना चाहिए। पॉइंट C में लिखा है कि आप क्लेम करो या ना करो आपको यह प्लस बेनिफिट मिलेगा बहुत अच्छी बात है। मतलब कि Optima Secure इज सच पॉलिसी जिसका कवर डे वन से तो डबल हो रहा है यानी आपको सिक्योर बेनिफिट भी मिल रहा है। सेकंड ईयर की शुरुआत में आपका कवर 2.5X हो रहा है आपको 50 परसेंट का प्लस बेनिफिट मिल चुका होगा और थर्ड ईयर की शुरुआत में आपका टोटल कवर अब 3X हो चुका है यानी आपका कवर 1.5 करोड़ हो जाएगा अगर आपने 50 लाख की पॉलिसी ली तो। उसके बाद नोट्स में कुछ सिनेरियोस को फर्दर एक्सप्लेन किया गया है। फॉर एग्जांपल पॉइंट 5 और 6 को पढ़ो। फाइव में लिखा है कि अगर आपने अगले साल पॉलिसी रिन्यूअल के टाइम पर कवर को घटा दिया 50 लाख से मे बी 25 लाख कर दिया। तब आपको यह प्लस बेनिफिट 25 लाख पे मिलेगा बट पॉइंट 6 में लिखा है कि अगर आपने अगले साल रिन्यूअल के टाइम पे कवर बढ़ा लिया 50 लाख से 1 करोड़ कर दिया। तो आपको प्लस बेनिफिट 1 करोड़ पे नहीं 50 लाख पे मिलेगा। और लास्ट पॉइंट भी आपके लिए इंपोर्टेंट है न्यू इंश्योर्ड पर्सन एडेड टू द पॉलिसी ड्यूरिंग सब्सीक्वेंट रिन्यूअल्स विल बी एलिजिबल फॉर द प्लस बेनिफिट एज पर देयर रिन्यूअल टर्म्स। अब यहां पर लिखा है एज पर देयर रिन्यूअल टर्म्स। अगर न्यू पर्सन के रिन्यूअल टर्म्स अलग हैं मतलब कि उनको बेस सम इंश्योर्ड मिलेगा सिक्योर बेनिफिट भी मिलेगा बट प्लस बेनिफिट डे वन से नहीं मिलेगा। उनको भी एक साल निकालना पड़ेगा अगले रिन्यूअल पे उनको 50 परसेंट प्लस बेनिफिट मिलेगा और उसके अगले रिन्यूअल पे उनको अगला 50 परसेंट का प्लस बेनिफिट मिलेगा। अब यही प्लस बेनिफिट यानी नो क्लेम बोनस का जो नया नाम है वो अपन ICICI एलिवेट में ढूंढते हैं। इन्होंने अपने एनुअल रिन्यूअल बोनस को बोला है लॉयल्टी बोनस। यहां पर लिखा है यह 20 परसेंट का लॉयल्टी बोनस देंगे हर साल। इर्रेस्पेक्टिव ऑफ अ क्लेम मतलब क्लेम नहीं करोगे या करोगे तो भी मिलेगा। प्रोवाइडेड दैट द पॉलिसी हैज़ बीन कंटीन्यूअसली रिन्यूड विद द कंपनी मतलब इसमें भी आपकी पॉलिसी के बीच में कभी ब्रेक नहीं आना चाहिए। लॉयल्टी बोनस आप 100 परसेंट ऑफ एनुअल सम इंश्योर्ड तक जोड़ सकते हो यानी आपके बेस सम इंश्योर्ड तक आप जोड़ सकते हो उसके ऊपर नहीं जा सकता और आप आगे आने वाले सालों में उसको कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हो। अगला फीचर है रेस्टोरेशन व्हिच इज द मोस्ट इंटरेस्टिंग इन माय ओपिनियन क्योंकि इसी की कंडीशंस में झोल मिलेंगे। दोनों जगह खोल लेते हैं। HDFC बोलता है ऑटोमेटिक रिस्टोर बेनिफिट और ICICI बोलता है रीसेट बेनिफिट। तो पहले अपन ICICI एलिवेट के रीसेट बेनिफिट को देखते हैं। इसमें लिखा है वी विल रीसेट अप टू 100 परसेंट ऑफ दी एनुअल सम इंश्योर्ड। एनुअल सम इंश्योर्ड जहां-जहां भी इस पॉलिसी डॉक्यूमेंट में दिखे समझ लेना कि बेस सम इंश्योर्ड की बात हो रही है क्योंकि जहां-जहां पे भी बेस लिखना था वहां पे इन्होंने एनुअल लिखा हुआ है। उसके बाद यह भी लिखा है फॉर एनी इलनेस डिजीज और इंजरी मतलब कि रिलेटेड और अनरिलेटेड सारी टाइप के ट्रीटमेंट्स के लिए आपको यह रेस्टोरेशन बेनिफिट मिलेगा। पहले इन्होंने एक और कंडीशन लिखी हुई थी जो कि अब यह हटा चुके हैं जो कि अच्छी बात है। वह कंडीशन यह थी कि अगर आपकी रिलेटेड इलनेस है और उसके लिए आप सेकंड टाइम हॉस्पिटलाइज होते हो तो वह हॉस्पिटलाइजेशन मिनिमम 45 डेज बाद होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो आपको रेस्टोरेशन नहीं मिलेगा बट ऐसी कंडीशन अब नहीं है। अब हमें इन पॉइंट्स को ढंग से समझना है सारी कहानी इधर ही है। सबसे पहले लिखा है द बेनिफिट विल बी ट्रिगर्ड अनलिमिटेड टाइम्स इतनी जल्दी खुश नहीं होना है। आगे पढ़ो। थर्ड पॉइंट में लिखा है द एनुअल सम इंश्योर्ड इंक्लूडिंग लॉयल्टी बोनस, इंफ्लेशन प्रोटेक्टर, पावर बूस्टर शुड बी इनसफिशिएंट एज अ रिजल्ट ऑफ प्रीवियस क्लेम्स पेड इन दैट पॉलिसी ईयर। इसमें दो बातें बताई गई हैं एक तो क्लेम यूटिलाइजेशन सीक्वेंस बता दिया आपको और दूसरा आपको यह भी बता दिया कि अगर आपको रेस्टोरेशन का बेनिफिट क्लेम करना है तो यह सारे टाइप के कवर का इनसफिशिएंट होना जरूरी है क्लेम पे करने के लिए तभी आपको मिलेगा। अब इसको एग्जांपल से समझते हैं मान लो आपके पास ₹50 लाख का बेस सम इंश्योर्ड है इनके लैंग्वेज में एनुअल सम इंश्योर्ड है और आपके पास ₹10 लाख का लॉयल्टी बोनस भी है क्योंकि आपकी पॉलिसी को 1 साल कंप्लीट हो गया था 20 परसेंट आपको लॉयल्टी बोनस मिल गया। और अभी के लिए मान लो आपके पास इन्फ्लेशन वाला राइडर और पावर बूस्टर वाला राइडर नहीं है और आपके पास साथ में ₹50 लाख तक का रेस्टोरेशन का बेनिफिट है जो अभी एक्टिवेटेड नहीं है वह साइड में पड़ा है। अब आपका फर्स्ट क्लेम आता है ₹25 लाख का तो बड़ी इजीली बेस सम इंश्योर्ड में से उसको क्लेम कर लिया जाएगा। अगले क्लेम के लिए उसी साल आपके पास अब बेस सम इंश्योर्ड में ₹25 लाख पड़े हैं, ₹10 लाख लॉयल्टी बोनस में पड़े हैं और रेस्टोरेशन भी अभी पड़ा है बट वह एक्टिवेटेड नहीं है। अब अगर आप इसी साल सेकंड टाइम हॉस्पिटलाइज होते हो और आपका बिल अगर ₹35 लाख से नीचे बनता है तो बड़े आराम से बेस सम इंश्योर्ड और लॉयल्टी बोनस में से उसको पे किया जाएगा। बट लेट्स से आपका क्लेम बनता है ₹45 लाख रुपए तो ₹25 लाख रुपए बेस सम इंश्योर्ड में से निकाले जाएंगे। ₹10 लाख रुपए लॉयल्टी बोनस से निकाल लिए जाएंगे और फिर भी जो ₹10 लाख रुपए बच रहे हैं उसको निकाला जाएगा रेस्टोरेशन बेनिफिट से। तो रेस्टोरेशन बेनिफिट जो ₹50 लाख का आपके पास अवेलेबल है उसमें से ₹10 लाख रुपए आपके बेस सम इंश्योर्ड में डाल के उसको रीस्टोर किया जाएगा और फिर वहां से क्लेम निकाला जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि थर्ड पॉइंट में लिखा है कि आपके एक्जिस्टिंग कवरेज यानी बेस सम इंश्योर्ड और लॉयल्टी बोनस और कोई राइडर भी ले रखा है वह सब आपका इनसफिशिएंट पड़ गया था यह ₹45 लाख का बिल पे करने के लिए इसलिए रेस्टोरेशन अप्लाई हुआ। कई पॉलिसी में इनसफिशिएंट वर्ड की बजाय यह लिखा होता है कि आपके सारे टाइप के कवर जीरो होने बहुत जरूरी है वैसा वाला रेस्टोरेशन मैंने आपको थोड़ी देर पहले ही बताया था वो और ज्यादा यूजलेस होता है। यह एटलीस्ट यूजेबल है। फोर्थ पॉइंट में लिखा है कि आपको फर्स्ट क्लेम में रेस्टोरेशन का बेनिफिट नहीं मिलेगा। हर साल के पहले क्लेम में आपको नहीं मिलेगा। फिफ्थ पॉइंट में लिखा है द टोटल अमाउंट ऑफ रीसेट विल नॉट एक्सीड द एनुअल सम इंश्योर्ड फॉर दैट पॉलिसी ईयर। अब अगर ऐसा है कि टोटल मेरा रीसेट एनुअल सम इंश्योर्ड से ज्यादा नहीं हो सकता तो उस चीज को मैं अनलिमिटेड टाइम्स कैसे क्लेम कर सकता हूं क्योंकि फर्स्ट पॉइंट में लिखा है इट विल बी ट्रिगर्ड अनलिमिटेड टाइम्स। टर्न्स आउट अनलिमिटेड टाइम्स का मतलब अनलिमिटेड रेस्टोरेशन नहीं है। इसी एग्जांपल को कंटिन्यू करते हैं आपका सेकंड क्लेम भी आराम से हो गया। थर्ड क्लेम के लिए आपके पास जीरो बेस सम इंश्योर्ड पड़ा है जीरो लॉयल्टी बोनस पड़ा है और ₹40 लाख का रेस्टोरेशन पड़ा है। अब आपका थर्ड क्लेम ₹40 लाख के नीचे-नीचे आता है तो ये ₹40 लाख तक का अमाउंट रीस्टोर कर दिया जाएगा बेस सम इंश्योर्ड में और उसको पे कर दिया जाएगा। और सिमिलरली इसी साल के लिए थर्ड क्लेम ऑनवर्ड्स आपका टोटल कवर ₹40 लाख ही है। आप एक क्लेम में यूज करो चाहे मल्टीपल क्लेम में यूज करो चाहे अनलिमिटेड क्लेम में यूज करो आप यह ₹40 लाख को कैसे भी यूज कर सकते हो। तो अनलिमिटेड का मतलब यह है कि आपका जो लिमिटेड रेस्टोरेशन है व्हिच इज 100 परसेंट ऑफ योर एनुअल सम इंश्योर्ड इस केस में ₹50 लाख का उसको आप फर्स्ट क्लेम को छोड़कर आने वाले सारे इनफाइनाइट अनलिमिटेड क्लेम्स में यूज कर सकते हो। व्हिच बिकम्स लाइक अ मार्केटिंग गिमिक क्योंकि आप एक साल में कितनी बार हॉस्पिटलाइज होते हो। अब मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इनका रीसेट बेनिफिट यूजेबल नहीं है यूजेबल तो है बट यह वर्ड अनलिमिटेड थोड़ा सा मिसलीडिंग तो बिल्कुल है। तो मैंने दोनों प्लान्स को साइड बाय साइड खोल लिया। HDFC में बेस कवर रखा है ₹25 लाख का और ICICI में बेस कवर रखा है ₹50 लाख का ऐसा इसलिए क्योंकि HDFC में ₹25 लाख के बेस कवर के साथ ₹25 लाख एक्स्ट्रा मिलते हैं फ्रॉम डे वन इन फॉर्म ऑफ सिक्योर बेनिफिट जिसकी कोई खास हिडन कंडीशंस है नहीं। दिस इज नॉट अ फेयर कंपैरिजन बाय द वे HDFC के बेस सम इंश्योर्ड को अगर ₹25 लाख रखेंगे तो उसका कवर ट्रिपल हो जाएगा यानी ₹75 लाख थर्ड ईयर में वेयर एज ICICI का ₹50 लाख का बेस सम इंश्योर्ड डबल होता है पांचवे साल में यानी 1 करोड़ का। जस्ट समथिंग टू कीप इन माइंड फिर भी HDFC काफी महंगा है। अभी प्रीमियम आ रहा है ₹19300 और ₹12882। HDFC में मैंने एक राइडर ऐड किया है अनलिमिटेड रीस्टोर के नाम से क्योंकि इनकी पॉलिसी में साल में एक ही बार रेस्टोरेशन मिलता है। बट अगर आप चाहते हो कि आपको रेस्टोरेशन भी अनलिमिटेड मिले तो आप यह बहुत ही सस्ता सा प्रीमियम ऐड कर सकते हो। इसके अलावा मैंने HDFC में कोई और राइडर ऐड नहीं किया है बट ICICI में खूब सारे राइडर्स हैं सबसे पहले आता है इनफाइनाइट केयर। इसका मतलब किसी एक सिंगल क्लेम में आप इनफाइनाइट अमाउंट का क्लेम कर सकते हो आपकी पूरी एक लाइफटाइम में ऐसा नहीं है साल में एक बार। पूरे जीवनकाल में एक बार। मतलब मोस्ट गंभीर बीमारियों के लिए यह यूजबल है। यह राइडर इस बात को ध्यान में रख के बनाया गया है कि बहुत कम लोग इसे क्लेम करेंगे। तो हो सकता है आप लाइफटाइम ₹189 और इसके ऊपर लोडिंग पे करते रहोगे हर साल जब प्रीमियम बढ़ेगा बट आप यह बेनिफिट शायद कभी क्लेम ना कर पाओ। और अगर आप हाईली पैरानॉइड भी हो मेरी तरह तो भी यह लेने से पहले इसके टर्म्स एंड कंडीशंस पढ़ लेना। इसमें टोटल नाइन टर्म्स एंड कंडीशंस हैं। बहुत बढ़िया लिखा है कि आपको विदाउट एनी लिमिटस ऑन एनुअल सम इंश्योर्ड आपको लाइफटाइम में एक क्लेम करने दे दिया जाएगा आपको आयुष डेकेयर ट्रीटमेंट्स के अलावा बाकी सारे टाइप के ट्रीटमेंट्स में कवर मिल जाएगा।
[30:03]आप अगर पॉलिसी खरीदते समय ये राइडर नहीं लेते हो तो उसके अगले दो साल में भी ले सकते हो। उसके बाद नहीं मिलेगा। एक बार आपने ले लिया तो अब इसको ऑप्ट आउट नहीं कर सकते जब तक आप इसे क्लेम नहीं कर लेते अपने पूरे पॉलिसी के लाइफटाइम में। पॉइंट फाइव में लिखा है टोटल सम इंश्योर्ड यानी एनुअल सम इंश्योर्ड, लॉयल्टी बोनस इफ अकूरुड, पावर बूस्टर इफ ऑप्टेड एंड अकूरुड, इन्फ्लेशन प्रोटेक्टर शैल बी यूटिलाइज्ड एज पर फॉलोइंग सीक्वेंस इन इवेंट ऑफ अ क्लेम अंडर दिस ऑप्शनल कवर। मतलब पहले एनुअल सम इंश्योर्ड जाएगा, लॉयल्टी बोनस जाएगा उसके बाद उसके बाद पावर बूस्टर उसके बाद इन्फ्लेशन प्रोटेक्टर उसके बाद आपका ये इनफाइनाइट वाला क्लेम एप्लीकेबल होगा। अब अगले पॉइंट में लिखा है आफ्टर यूटिलाइजेशन ऑफ ऑल द अबोव मेंशनड सम इंश्योर्ड द टोटल सम इंश्योर्ड शैल बी रिड्यूस्ड टू जीरो। इसका मतलब अगर आपका लास्ट वाला कवरेज जो इन्फ्लेशन प्रोटेक्टर है उसमें अगर 12 लाख रुपए बच जाते हैं और अब आप हॉस्पिटल में एडमिट होते हो और आपका यह इनफाइनाइट वाले क्लेम का टाइम आ जाता है क्योंकि बहुत बड़ा मेडिकल बिल बन चुका है। तो आप नहीं कर पाओगे क्लेम क्योंकि इन्फ्लेशन प्रोटेक्टर में थोड़े से पैसे बच रहे हैं पहले उसको यूज करो उसको जीरो करो और अगले क्लेम में जाओगे तब इनफाइनाइट मिलेगा।
[31:25]अगला पॉइंट अगर आप वॉलंटरी को-पेमेंट ले लेते हो तो आपका इस इनफाइनाइट वाले कवर पर भी को-पेमेंट लग जाएगा तो ऐसा मत करना कि को-पेमेंट भी ले रखा है और आपने इनफाइनाइट वाला राइडर भी ले रखा है। उसके बाद कुछ और केसेस हैं जिसमें आप यह क्लेम नहीं ले सकते हो। और लास्ट में यह लिखा है कि आपका रूम कैटेगरी भी अप्लाई हो जाएगा। तो अगर आप यह राइडर ले रहे हो तो को-पे नहीं लेना है और रूम रेंट को मॉडिफाई करने का राइडर लेना है ताकि आपकी रूम रेंट की लिमिट हट जाए। वरना यह इनफाइनाइट लंबे क्लेम का एक इनफाइनाइट परसेंटेज ऑफ बिल आप ही को पे करना पड़ेगा।
[32:04]और पॉइंट नंबर सिक्स मुझे यह कहता है कि अगर मुझे ये चारों टाइप के कवर को जीरो करना जरूरी है तो मतलब एक पर्टिकुलर केस में मुझे यह इनफाइनाइट कवर डिनाई हो जाएगा।
[32:20]तो मेरे ओपिनियन में यह राइडर स्किप करके आपको ज्यादा यह सोचना चाहिए कि हम कैसे अपना बेस सम इंश्योर्ड बढ़ाएं। एडिक्वेट बेस कवर ले रहे हो तो आप सॉर्टेड हो क्योंकि उसके साथ-साथ आपको रिन्यूअल बोनस भी मिल रहा है दोनों पॉलिसीज में तो आपका कुछ सालों बाद कवर वैसे भी डबल हो जाएगा। HDFC वाला ले रहे हो तो आपका कवर वैसे भी थर्ड ईयर में ट्रिपल हो जाएगा। ICICI में नेक्स्ट राइडर है पावर बूस्टर। पावर बूस्टर का मतलब आपको 100 परसेंट सम इंश्योर्ड एवरी ईयर मिल जाएगा रिगार्डलेस ऑफ क्लेम्स। ये तो बहुत ही अमेजिंग है यानी 50 लाख की पॉलिसी है अगले साल 1 करोड़ की हो जाएगी उसके अगले साल 1.5 करोड़ की हो जाएगी ऐसे 10 सालों बाद 5 करोड़ 50 लाख की हो जाएगी कोई अपर लिमिट नहीं है आप इसको अनलिमिटेड जोड़ सकते हो तो टेक्निकली यू आर बाइंग एन इनफाइनाइट कवर वाली पॉलिसी।
[33:42]पावर बूस्टर में कोई खास हिडन टर्म्स एंड कंडीशंस नहीं है व्हिच इज अ गुड थिंग बट पॉइंट नंबर थ्री माय लॉर्ड। इसमें लिखा है इन केस द इंश्योर्ड पर्सन ऑप्ट्स आउट ऑफ दिस कवर एट एनी टाइम ऑफ द रिन्यूअल ऑल द बोनस एक्युमुलेटेड अंडर पावर बूस्टर विल बी रिड्यूस्ड टू जीरो। अब आप बोलोगे मैं क्यों ऑप्ट आउट करूंगा इस अमेजिंग राइडर से मेरे तो 20 साल बाद 10 करोड़ की पॉलिसी हो जाएगी और 40 साल बाद 20 करोड़ की पॉलिसी हो जाएगी। आप ऑप्ट आउट इसलिए करोगे क्योंकि यह प्लान आज सस्ता है कल नहीं रहेगा। हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम एज के साथ बढ़ते हैं टर्म इंश्योरेंस की तरह फिक्स नहीं होते हैं तो फ्यूचर में आपका टोटल प्रीमियम इतना बढ़ सकता है कि आपको लगेगा कि यह राइडर मुझे हटा देना चाहिए। और अगर आप हटाते हो तो इसमें जुड़ा हुआ सम इंश्योर्ड चला जाएगा। और इसीलिए मुझे लगता है कि इसका प्रीमियम इतना अनअफोर्डेबल बन सकता है कि शायद मुझे छोड़ना पड़ेगा और यह गायब हो जाएगा तो मैं इसको आज ऐड नहीं कर रहा हूं। आई वांट टू कीप माय प्रीमियम स्लो। ऐसा करके ICICI में मेरा प्रीमियम आता है ₹14315 वेयर एज HDFC में आता है ₹19300। अब ICICI में प्रीमियम कम है बट कुछ की डिफरेंसेस हैं। HDFC में बेस सम इंश्योर्ड भी मिलता है उसके बराबर का सिक्योर बेनिफिट भी मिलता है और 50 परसेंट का प्लस बेनिफिट या फिर नो क्लेम बोनस जिसको बोलते हैं वो मिलता है इर्रेस्पेक्टिव ऑफ क्लेम्स। मतलब कि थर्ड ईयर में मेरा टोटल कवर ट्रिपल हो जाएगा। तो उस हिसाब से देखा जाए तो प्रीमियम जस्टिफाइड लगता है। वेयर एज ICICI में आपको कोई सिक्योर बेनिफिट नहीं मिल रहा यानी आपका जो बेस सम इंश्योर्ड है वही मिलेगा उसके साथ आपको नो क्लेम बोनस मिलेगा जो 50 परसेंट नहीं 20 परसेंट है यानी पांचवे साल में आपका कवर डबल होगा वेयर एज HDFC में तीसरे साल कवर ट्रिपल होता है। ICICI में आपको मेटरनिटी कवर भी मिलता है एंड आई थिंक HDFC में भी आ गया है बट दोनों के टर्म्स काफी बेकार से ही हैं मतलब आप एनुअली जितना प्रीमियम दोगे और जितना वेटिंग पीरियड है इट टर्न्स आउट आप अपना पूरा जो डिलीवरी का खर्चा है वो प्रीमियमस में ही दे दोगे और वही वापस लोगे तो एक बार वो मैथमेटिक्स कर लेना। ICICI में आपको बैरियाट्रिक सर्जरी का भी कवर मिल जाता है बट ये फैंसी नाम को समझ भी लेना एक बार बैरियाट्रिक सर्जरी हाईली ओबीस लोगों पे की जाती है उनके ऑर्गन्स को काट के उनका वेट लॉस सर्जरी किया जाता है ताकि वो जी पाएं आगे। तो अगर आप उस कैटेगरी में नहीं आते हो तो इसकी आपको कोई रिक्वायरमेंट नहीं है। कंक्लूजन यह है कि अगर आपको अब समझ आ गया है कि ICICI के प्लान में क्लेम कब मिलता है, कब नहीं मिलता है, क्या फीचर्स हैं जो आपके काम में आते हैं तो आप अपने लिए ये प्लान खुली आंखों के साथ ले सकते हो और प्रीमियम भी बचा सकते हो।
[36:27]तो अगर आपको कम प्रीमियम में ज्यादा कवर भी चाहिए जंप स्टार्ट राइडर भी चाहिए प्री-एक्जिस्टिंग डिजीजेस के लिए तो आप ICICI को कंसीडर कर सकते हो। बट अगर आपको एक नो कॉम्प्रोमाइज पॉलिसी चाहिए विद ट्रिपल कवरेज एंड सिंपल टू अंडरस्टैंड टर्म्स एंड कंडीशंस तो आप HDFC जा सकते हो विद हाई प्रीमियम। यह था 2025 का दी अल्टीमेट गाइड टू बाइंग द बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस फ्रॉम द बेस्ट कंपनी इन इंडिया अगर मुझसे कुछ छूट गया है तो प्लीज कमेंट में बताइए और अगर आपको लगता है कि हमारे वीडियो से आपको काफी वैल्यू मिली है जिसकी मैंने काफी ज्यादा कोशिश करी है तो प्लीज डिस्क्रिप्शन में दिए गए और टॉप कमेंट में दिए गए पॉलिसी बाजार के लिंक से जाकर अपनी पॉलिसी की रिसर्च भी करें वहां से पॉलिसी की वर्डिंग्स भी डाउनलोड करें और अगर मूड बन जाए तो पॉलिसी खरीद भी लें।
[39:46]मैं मिलता हूं आपसे एक और नए वीडियो में तब तक बाय-बाय।
[49:52]दिस इज द एडिटर।
[49:56]जो घर आके एडिट करता है मतलब ऐसी भी सर्विस है हमारे यहां पे। तो इसने पॉलिसी खरीदी अभी दो घंटे पहले।



