[0:00]जय माता दी हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को बहुत ही पावन पर्व माना जाता है और इसी दिन से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत भी होती है। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है।
[0:15]और नवमी तिथि को समाप्त होती है इन नौ दिनों में भक्त मा दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं और अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार अष्टमी या फिर नवमी तिथि को कन्या पूजन करके व्रत का पारणा करते हैं।
[0:30]इन नौ दिनों में सच्चे मन से की गई पूजा को माता रानी स्वीकार करती हैं और अपने भक्तों के घर में सुख समृद्धि का आशीर्वाद बरसाती हैं उनके जीवन की सारी परेशानियां दूर करती हैं हिंदू पंचांग के अनुसार
[0:43]साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च दिन गुरुवार से होगा और समापन होगा 27 मार्च को इस दिन शुक्रवार पड़ रहा है।
[0:55]इस बार तिथियों के संयोग के कारण नवरात्रि आठ दिनों की भी मानी जा रही है क्योंकि कुछ लोग अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन मनाने की बात कर रहे हैं तो आज की इस वीडियो में आप जानने वाले हैं चैत्र नवरात्रि की सभी तिथियों के बारे में
[1:09]कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त के बारे में अष्टमी और नवमी तिथि कब से शुरू और कब समाप्त होंगी और किस दिन आप व्रत का पारणा कर सकते हैं जानकारी पसंद आए तो वीडियो को लाइक करना मत भूलिएगा।
[1:19]इस बार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:54 से शुरू होगी इससे पहले तक अमावस्या तिथि रहेगी तो अमावस्या का आप स्नान सुबह कर सकते हैं और जब प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाए उस समय से ही आपको कलश स्थापना या फिर जो भी पूजा आदि है नवरात्रि की वह प्रारंभ करनी चाहिए।
[1:40]प्रतिपदा तिथि 20 मार्च दिन शुक्रवार को सुबह 4:52 पर शुरू होगी इसलिए नवरात्रि का पहला दिन 19 मार्च गुरुवार को ही रहेगा इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:54 से 7:43 तक रहेगा अगर आप इस समय में कलश की स्थापना नहीं कर पाते हैं तो फिर अभिजीत मुहूर्त में भी कलश की स्थापना की जा सकती है जो कि दोपहर 12:10 से 12:58 तक रहेगा।
[2:08]अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी 25 मार्च दिन बुधवार को दोपहर 1:51 से और अष्टमी तिथि का समापन होगा 26 मार्च दिन गुरुवार को सुबह 11:49 तक इसके बाद में नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
[2:22]ऐसे में जो लोग अष्टमी और नवमी एक ही दिन मनाने की बात कर रहे हैं वे 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी और नवमी की पूजा करके कन्या पूजन कर सकते हैं अगर आपके यहां पर अष्टमी के दिन कन्या पूजन होता है तो सप्तमी तिथि को व्रत रखकर अष्टमी तिथि गुरुवार को सुबह 11:49 तक आप कन्या पूजन कर सकते हैं अष्टमी तिथि के अंदर-अंदर कन्या पूजन कर लेना चाहिए।
[2:46]और नवमी तिथि 26 मार्च गुरुवार को सुबह 11:50 से शुरू हो रही है और 27 मार्च शुक्रवार को सुबह 10:07 तक नवमी तिथि रहेगी इसके बाद में दशमी तिथि लग जाएगी।
[2:58]ऐसे में जो लोग एक ही दिन यानी 26 मार्च गुरुवार को ही अष्टमी और नवमी मनाने की बात कर रहे हैं वे 26 मार्च गुरुवार को सुबह 11:50 से लेकर 12:30 बजे तक दोपहर में कन्या पूजन कर सकते हैं यानी नवमी का कन्या पूजन कर सकते हैं इसके अलावा गुरुवार को शाम के समय भी सूर्यास्त से पहले-पहले आप कन्या पूजन कर सकते हैं और जो लोग 27 मार्च को ही नवमी मनाना चाहते हैं हिंदू पंचांग के अनुसार वैष्णव नवमी 27 मार्च दिन शुक्रवार की ही रहेगी अगर आप इस दिन नवमी मनाना चाहते हैं तो नवमी तिथि समाप्त होने से पहले पहले आप कन्या पूजन कर सकते हैं।
[3:35]यानी कि 27 मार्च शुक्रवार को सुबह 10:07 तक ही कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा इसके बाद में दशमी तिथि लग जाएगी।
[3:44]अब कुछ श्रद्धालु ऐसे भी होते हैं जो नवरात्रि के नियमों का बहुत कठोरता से पालन करते हैं जिसमें पूरे नौ दिन और नौ रातों की पूजा करके दशमी तिथि के दिन वे कन्या पूजन करते हैं और तभी प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारणा करते हैं तो यह आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है क्योंकि कुछ लोग अष्टमी को कन्या पूजन करके तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करके प्रसाद ग्रहण करके शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का पारणा कर लेते हैं।
[4:10]सभी बातें ठीक है क्योंकि सब लोग अपनी-अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार या समय के अनुसार ही व्रत का पालन करते हैं जो लोग पूरे नौ दिन की पूजा करने में समर्थ ना हो तो वे लोग इस बार 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी और नवमी एक ही दिन मना सकते हैं आप किस दिन अष्टमी और नवमी मनाएंगे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा।
[4:26]कलश विसर्जन हमेशा कन्या पूजन करने के बाद ही किया जाता है और कन्या पूजन करने से पहले आप हवन आदि जो भी करना चाहते हो वह कर ले उसके बाद ही कन्या पूजन करें आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस बार 26 मार्च गुरुवार को अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों का संयोग पड़ रहा है।
[4:44]ऐसे में आप यदि अष्टमी नवमी एक ही दिन नहीं मनाना चाहते हैं तो 26 मार्च को अष्टमी की पूजा कर ले और नवमी तिथि का पालन आपको 27 मार्च शुक्रवार को करना चाहिए हम 27 मार्च शुक्रवार को ही नवमी की पूजा करेंगे कन्या पूजन भी उसी दिन करेंगे और हम भी प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारणा कन्या पूजन करने के बाद ही कर लेते हैं आप व्रत का पारणा कब करते हैं कमेंट बॉक्स में बताना मत भूलिएगा।



