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Dive into Diversity | Exploring the Rich Cultures of Pakistan | Discover Pakistan

Discover Pakistan

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[0:31]پاکستان کے قومی منظرنامے پر کئی ثقافتوں کے دل فریب و حسین قوس و قضا کے رنگ نمودار ہیں۔

[0:41]پاکستان کی ثقافتی قوس و قضا پنجابی، سندھی، پختون، بلوچی اور بلتستانی رنگوں سے ترتیب پائی ہے۔

[1:03]یہ ہے پانچ دریاؤں کا حسین سنگم اور زرخیز دھرتی صوبہ پنجاب۔

[1:13]پنجابی اور سرائیکی زبان بولنے والے پنجابियों का कुर्ता, लुंगी, पटका, پگ، شلوار قمیض اور کھسا روایتی لباس ہیں، جبکہ خواتین میں مختلف طرز کے دیدہ زیب شلوار قمیض اور دوپٹے کا استعمال کیا جاتا ہے۔ فطرت خوشخورات پنجابیوں کے صحت مند دیہاتی کھانوں میں سرسوں کا ساگ، مکئی کی روٹی، لسی اور مکھن لاجواب ہیں۔ اور شہری کھابوں کو دنیا بھر میں شہرت حاصل ہے۔ جیدا پنجابیوں کے مقامی खेलों में कबड्डी, نیزہ بازی اور گھڑ سواری کو عالمی مقبولیت حاصل ہیں۔ خوشی کے موقعوں پر پنجاب के लोग झूंबर रक्स سے महज़ूज़ होते हैं। जज़्बात के इज़हार के लिए फोक गायकी बेमिसाल है। پنجاب کا ثقافتی رنگ قومی ثقافتی رنگوں میں بہت نمایاں ہے۔

[2:46]قدیم ثقافت کا شاہکار यह है सूबा सिंध।

[2:56]یہاں کی اکثریتی زبان سندھی ہے۔ सिंधी ख़वातीन के लिबास में रंगीन कढ़ाई और शीशा कढ़ाई से बना चोला और बड़ा दोपट्टा शामिल हैं। जबकि मर्दों में शलवार कमीज़ अजरक और शानदार सिंधी टोपी सिंध की सखाफत का लाज़मी हिस्सा है। खानों में सिंधी बिरयानी पल्ला माछी हर दिल अज़ीज़ हैं। फन्ने काशीगिरी, फन्ने मुसव्वरी और फन्ने जरूफ साज़ी सिंधी सखाफत का खाशा है।

[3:59]यह है बहादुर और जफाकश लोगों का खित्ता पाकिस्तान का सूबा ख़ैबर पख्तूनख्वा।

[4:14]यहां पश्तो और हिंको ज़बानें बोली जाती हैं। خیبر پختونخوا के लोग मौसिकी और रक्स में खास दिलचस्पी रखते हैं।

[4:30]आलात मौसिकी में रुबाब और हारमोनियम शामिल हैं।

[4:38]धागा कढ़ाई और शीशा टुकड़ों की ज़ेबाश से तैयार किए गए ख़वातीन के मलबुसात बहुत खूबसूरत नज़र आते हैं। یہاں کے مرد شلوار قمیض، واسکٹ اور پگڑی زیب تن کرتے ہیں۔ पठान क़दीमी रिवायत के मुताबिक अपने खानों में गोश्त का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं। बारबेक्यू के बगैर पखतूनों की कोई भी दावत मुकम्मल नहीं समझी जाती। यह है पेशावर का किस्सा खानी बाज़ार जहां पखतूनों के हर किस्म के खानों से लुत्फ उठाया जा सकता है।

[5:22]ख़ैबर पख्तूनख्वा का सफावती रंग बहुत शोख है।

[6:08]पुरकशिश सखाफत का हामिल यह है बलूचिस्तान।

[6:32]बलूची रिवायती खानों में सजी नमकीन रोश और खड्डी कबाब बलूची सखाफत की पहचान हैं।

[6:43]बलूच अपने त्यौहारों पर धरेस और हम्बो नामी इस्तमाई रक्स से महज़ूज़ होते हैं। बलूची ख़वातीन की पोशाक पर ऊन, रेशम और तिल्ला धागों से कशीदाकारी की जाती है। मर्दों में चौड़े घેર की शलवार और लंबी कमीज़ पर मखसूस पगड़ी खूबसूरत नज़र आती है। बलूची सखाफत अपना खास मकाम रखती है।

[7:41]कुदरत की खास अता और पाकिस्तान के दिल की धड़कन यह है गिलगित बल्तिस्तान।

[7:55]यहां के लोग अपनी मेहमान नवाज़ी में काबिले रशक हैं। यहां मुख़्तलिफ़ और दिलचस्प ज़बानें बोली जाती हैं। यहां के मर्दाना लिबास में ऊनी टोपी, ऊनी लिबास, चौघा, और शलवार कमीज़ शामिल हैं, जबकि ख़वातीन के दिलकश रेशमी, ऊनी और मखमली फ्रॉक आलमी सतह पर पसंद किया जाता है। रंगीन कढ़ाई से मुज़ैयन ज़ेवर के टुकड़ों से आरास्ता ख़वातीन की इराकी टोपी बहुत दिल फरेब नज़र आती है। बलतस्तानी अपने त्यौहार एहतमाम के साथ मनाते हैं। यहां के लोग खुशी की तकरीबात में मौसिकी और रक्स का खास एहतमाम करते हैं।

[8:49]बलतस्तानी खाने बहुत मुनफरिद हैं, जबकि मशरूबात में मेथी सूप और तुमोरो चाय पसंद की जाती है।

[9:03]बलतस्तानी इलाकाई खेल बसरा और पोलो को बैनुल अकवामी शोहरत हासिल है।

[9:40]اور یہ ہے جنت नज़ीर वादी कश्मीर। ख़वातीन की शाहतोश और पश्मीना ऊन की शालों पर तिल्ले की कशीदाकारी और अनगिनत बूटा डिज़ाइन बहुत खूबसूरत लगते हैं।

[10:01]पुरकशिश ज़ेवरात ख़वातीन के वकार में इजाफा करते हैं।

[10:10]कश्मीर के पुर लुत्फ खानों में कश्मीरी कबाब बेमिसाल हैं। मशरूबात में कश्मीरी चाय हर दिल अजीज़ हैं। जन्नत नज़ीर कश्मीर का सखाफती रंग बेनज़ीर है।

[10:38]अर्ज़े पाक पर अलग-अलग सूबों और ज़बानों के रंगों में हम आहांगी का ऐसा इम्तेजाज है के हर सूबाई रंग दूसरे सूबाई रंग को नुमाया करता नज़र आता है।

[10:53]यह रंग जुदा हो तो मुकम्मल इकाई की सूरत इख्तियार करते हैं और यगजा हो तो पाकिस्तानी तहज़ीब वो सखाफत का रंगमहल वजूद में आता है।

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