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CBSE Topper Secrets Revealed: How Ishani scored 100% in Grade 12?

Schoolcast With Avyakt

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[0:00]Section 1

जिनके मार्क्स कम आते हैं वो मेहनत नहीं करते। लोग क्या करते हैं, वही ज्यादा एग्जॉस्टिंग होता है। पूरा आपको लगता है कि आपने मेहनत करी या फि...

[3:18]Section 2

बिल्कुल। क्योंकि हां खुद से ही एफर्ट होना चाहिए और हां दूसरों से भी मैं हेल्प लो जो भी सब कुछ आपको सब सब आप कर लो उसके बाद रिजल्ट जो है व...

[7:24]Section 3

हां क्योंकि मुझे याद है मेरे कुछ क्लासमेट्स वो लोग आते ही नहीं थे क्लास कभी आते कभी नहीं आते। या। इससे जगह मतलब इसकी जगह अगर वो वो लोग रो...

[16:56]Section 4

सेल्फ स्टडी से मेरा ज्यादा आई एम एबल टू अब्सॉर्ब नॉलेज कि मुझे ट्यूशन जाके दूसरों के साथ मिलकर एक बार होके फिर होता है। नो इट्स वैरी गुड...

[24:20]Section 5

इम्प्रूवमेंट एज इन लाइक दिस ऑल ऑफ दिस इज न्यू टू मी लाइक कम्युनिकेशन इंटरैक्टिंग विद पीपल। तो इसमें डेफिनेटली मुझे थोड़ा इम्प्रूवमेंट तो...

[27:37]Section 6

क्योंकि क्योंकि मुझे पता ही नहीं कि कैसे करना है तो आई थिंक माय टीचर्स गाइडेड मी ड्यूरिंग दैट टाइम। एब्सोल्युटली मतलब 11th में आके पता चल...

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[0:00]जिनके मार्क्स कम आते हैं वो मेहनत नहीं करते। लोग क्या करते हैं, वही ज्यादा एग्जॉस्टिंग होता है। पूरा आपको लगता है कि आपने मेहनत करी या फिर आपको लगता है लक बहुत बड़ा रोल प्ले करता है?
[0:59]नहीं मार्क्स कमाने की। ऐसा तो नहीं है। देखो मार्क्स के बारे में मैं नहीं ऐसे बोल सकती मैं लेकिन सबको मैं सबको मैं यही करना चाहूंगी कि मेहनत तो करना चाहिए फुल 100% देना चाहिए।
[2:29]उसके बाद जो भी हो वो है आपको खुद को सेटिस्फेक्शन होना चाहिए। फिर जो भी लोग बोले वो छोड़ देना चाहिए क्योंकि आपको पता है कि आपने 100% किया है।
[2:43]मतलब अपनी तरफ से पूरा काम करो और फिर भूल जाओ आपके 100 ऑन 100 आए या आपके 90 आए या आपके 70 आए।
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[0:00]जिनके मार्क्स कम आते हैं वो मेहनत नहीं करते। लोग क्या करते हैं, वही ज्यादा एग्जॉस्टिंग होता है। पूरा आपको लगता है कि आपने मेहनत करी या फिर आपको लगता है लक बहुत बड़ा रोल प्ले करता है? टॉपर सिर्फ पढ़ाई में तो नहीं होता। ऐसा नहीं है कि स्कूल से हम रियल लाइफ के लिए कुछ सीख नहीं रहे हैं। स्टूडेंट्स से ज्यादा टीचर्स का प्रेशर है कि, ये लोग कांड करते हैं। CBSE दो बोर्ड एग्जाम कराने वाला है। ऐसे इरिटेटिंग बच्चे भी होते हैं। आपको कभी आपके पेरेंट्स ने प्रेशर नहीं किया? सुनो सबकी करो खुद की। लोग आप पर हंसते हैं। आई एम वैरी नाइव अबाउट सोशल मीडिया रिलेटिव्स हैं, ये दिमाग बहुत खराब करते हैं। 12 घंटे पढ़ना है, मेरे नीचे कोई बेहोश हो गई थी। तो वो मेरे लिए थोड़ा सा एक झटका था। DPS को ना हर सिटी में एक बड़ा क्रेजी स्कूल समझा जाता है। ये लोग कांड करते हैं। बॉयफ्रेंड होना चाहिए। एक गर्लफ्रेंड होनी चाहिए। आप ऐसे लोगों से थोड़ा दूरी रहे। ह्यूमैनिटीज मतलब वीक साइंस मतलब स्ट्रांग। कॉलेजस की इम्पोर्टेंस जो है वो डे बाय डे इज रिड्यूसिंग। मोस्ट स्कूल्स आल्सो डोंट ऑफर ह्यूमनिटीज एट ऑल। ये तो आपको याद था। फेकड स्माइल। मार्क्स नहीं है सबसे ऊपर।

[0:59]मार्क्स आर नॉट द मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग इन दिस वर्ल्ड। आर लास्ट एपिसोड वेंट वायरल और हमने बहुत सारे कमेंट्स देखे रिकॉर्डिंग द 12th बोर्ड एग्जाम रिजल्ट्स। इसीलिए टू केटर टू योर ओपिनियन, टू आंसर योर क्वेश्चंस वी गॉट वन ऑफ द मोस्ट स्पेशल पीपल इन स्कूल एजुकेशन राइट नाउ। तो हम लाए हैं आज स्पेशली ईशानी देवनाथ को। वो क्लास 12th की स्टूडेंट है फ्रॉम डीपीएस भोपाल अहमदाबाद एंड शी स्कोर्ड अ 500 ऑन 500। शी सेड मार्क्स आर नॉट द मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग। टू नो मोर अबाउट हाउ टू प्रिपेयर फॉर बोर्ड एग्जाम्स एंड हाउ नॉट टू गिव इन टू आउटसाइड डिस्ट्रैक्शंस और प्रेशर्स, प्लीज ये एपिसोड देखिए और कमेंट करिए और हमें बताइए आपको कैसा लगा। आपको लगता है कि जैसे आपके 500 ऑन 500 आए तो क्या पूरा आपको लगता है कि आपने मेहनत करी या फिर आपको लगता है लक बहुत बड़ा रोल प्ले करता है? क्योंकि जब मैं 12th में था आई थिंक अबाउट 10 इयर्स बैक तो लोग कहते हैं आप इंग्लिश अच्छी लिखोगे तो आप कुछ भी लिखोगे तो आपको मार्क्स बहुत अच्छे मिलेंगे। या आप स्टेप्स ज्यादा लगाओगे तो स्टेप्स के ज्यादा मार्क्स मिलेंगे आप कुछ भी लिखो तो आपको इस बारे में क्या लगता है सिर्फ लक है या क्या? नहीं मार्क्स कमाने की। ऐसा तो नहीं है। देखो मार्क्स के बारे में मैं नहीं ऐसे बोल सकती मैं लेकिन सबको मैं सबको मैं यही करना चाहूंगी कि मेहनत तो करना चाहिए फुल 100% देना चाहिए।

[2:29]उसके बाद जो भी हो वो है आपको खुद को सेटिस्फेक्शन होना चाहिए। फिर जो भी लोग बोले वो छोड़ देना चाहिए क्योंकि आपको पता है कि आपने 100% किया है।

[2:43]मतलब अपनी तरफ से पूरा काम करो और फिर भूल जाओ आपके 100 ऑन 100 आए या आपके 90 आए या आपके 70 आए।

[3:18]बिल्कुल। क्योंकि हां खुद से ही एफर्ट होना चाहिए और हां दूसरों से भी मैं हेल्प लो जो भी सब कुछ आपको सब सब आप कर लो उसके बाद रिजल्ट जो है वो तो होगा ही। बट ठीक है ये आपका आंसर बहुत अच्छा है बट आपको क्या लगता है कि आप पूरे 12th में एक साल हम होते हैं। तो आपको सिलेबस बहुत हैवी होता है या फिर जो सोसाइटी की ऑब्सेशन है कि परसेंटेज 90, 95, 100 वो ज्यादा एग्जॉस्टिंग है या क्या है इन दोनों में से।

[4:06]लोग क्या करके वही ज्यादा एग्जॉस्टिंग होता है। वो ज्यादा एग्जॉस्टिंग होता है। ज्यादातर लोगों के लिए। क्योंकि सिलेबस तो देखो मेरे एक्सपीरियंस से अह सिलेबस कम ही होते जा रहा है ईयर बाय ईयर। पहले तो बहुत होता था अभी मतलब लोगों का कंप्लेन तो रहता ही है जितना भी कम कर लो सिलेबस। लेकिन हां मतलब मेरे ख्याल से सिलेबस तो हो ही जाता है। लोगों का प्रेशर थोड़ा होता है तो लगता है कि अच्छा ये कर रही हूं वो काफी है या ये भी है भी। तो वो भी है। लेकिन मैंने जैसे मेरा सीबीएसई बोर्ड है तो मैंने तो एनसीआरटी से ही पढ़ा है। कंटेंट मैंने एनसीईआरटी से ही पढ़ा है खुद के नोट्स बनाए हैं। ओके। और जो क्वेश्चंस हैं वो मैंने प्रैक्टिस किए हैं। तो मैंने ये सब किया है और मुझे काफी लगा। इसलिए मैं ट्यूशंस भी नहीं गई। ओके। तो आपको खुद को ऐसे होना चाहिए कि हां आप दूसरों से भी रिव्यू लो कि मैंने मैंने टीचर्स को भेजती थी आंसर कि इन इवन जो भी टेस्ट होते थे स्कूल में तो मैं पूछती थी कि ये ये इनफ है ये काफी है इससे ज्यादा बेटर कितना हो सकता है।

[5:03]तो वो सब भी है। लेकिन हां बस। बट ट्यूशन ना जाना भी मेरे को लगता है कि आज के टाइम में एक बहुत बड़ी अचीवमेंट है क्योंकि आपके अराउंड इतनी नॉइज है अगर आपके 10 फ्रेंड्स होंगे तो नौ के नौ ट्यूशन सेंटर जाते होंगे। तो कैसे आपने ट्यूशन नहीं गए आपने ये कैसे सोचा या आपके पेरेंट्स ने बोला या आपने कैसे करा ऐसा? मैं बचपन से ही कभी ट्यूशन नहीं गई। कभी भी नहीं करी आपने। नहीं तो एक तो ये था कि मैं कभी गई नहीं हूं अभी शुरू करूंगी तो थोड़ा अजीब हो जाएगा। और मुझे लगता है कि जो भी मेरे टीचर्स पढ़ाते हैं स्कूल में वो बहुत अच्छी तरीके से पढ़ाते हैं। वो इनफ है। तो मैं घर जाके अगर थोड़ा सेल्फ स्टडी करूं तो वो वो ज्यादा बेहतर होगा।

[5:43]इंस्टेड ऑफ स्पेंडिंग टाइम एट ट्यूशन क्योंकि वहां पर जाने आने का टाइम वेस्ट मेरे मेरे लिए वो टाइम वेस्ट होता था क्योंकि मैं घर जाके पहले सो गई आराम से। बिल्कुल सही बात है। फिर मैं सेल्फ स्टडी करूंगी तो मेरा वो वाला रूटीन थोड़ा ऊपर नीचे हो जाता मेरे ख्याल से तो इसलिए मैं नहीं गई ट्यूशन बाकी मेरे अह हां मतलब स्कूल के पढ़ाई से ही हो जा रहा था मेरा तो। क्योंकि मैं मैं ऑस्ट्रेलिया से ग्रेजुएशन करी है तो मैं ऑस्ट्रेलिया में था तो मैं वहां हम कहीं काम करते थे मैंने संयम सर से भी ये बात करी थी। तो वहां क्या होता है कि जब आप लोगों को बताते हो ना कि हम पहले स्कूल में पढ़ते हैं फिर हम वही पढ़ने के लिए ट्यूशन जाते हैं तो लोग आपके ऊपर हंसते हैं। लोग कहते हैं कि ये लॉजिक के उनको बड़ा ये अजीब लगता है कि ये कैसी अजीब ये पागलों वाली बातें कर रहे हैं।

[7:24]हां क्योंकि मुझे याद है मेरे कुछ क्लासमेट्स वो लोग आते ही नहीं थे क्लास कभी आते कभी नहीं आते। या। इससे जगह मतलब इसकी जगह अगर वो वो लोग रोज स्कूल आते हैं और पूरा मतलब कंसंट्रेशन फुल कंसंट्रेशन से अगर पढ़ते तो शायद ट्यूशन की जरूरत नहीं पड़ती। तो मतलब 100 ऑन 100 के लिए आपको बड़े ट्यूशन सेंटर की जरूरत नहीं है सेल्फ बिलीव और स्कूल में ध्यान देने से भी आप 100 ऑन 100 ला सकते हो। रेगुलर होना चाहिए। बिल्कुल। बहुत वेरी वैलिड पॉइंट आजकल लोग ये पॉइंट नहीं समझते हैं। गुड वन आपको लगता है कि जैसे आप स्कूल में पढ़ रहे हो कुछ और आप लाइफ में घर जाते हो। स्कूल को छोड़ के भी हमारी एक बड़ी लाइफ होती है फैमिली होती है फ्रेंड्स होते हैं तो क्या आप स्कूल में ऐसा कुछ सीख रहे हो जो आपको लाइफ में भी हेल्प कर रहा है या सिर्फ हम सब जो स्कूल जा रहे हैं वो सिर्फ ग्रेड्स कलेक्ट करने में पोकेमोन कार्ड्स की तरह बस लगे हुए हैं एक ग्रेड दूसरा ग्रेड ऐसा क्या लगता है आपको? नहीं ऐसे स्कूल में से भी मैंने बहुत कुछ सीखा है। देखो एक तो टेक्स्ट बुक इंफॉर्मेशन है वो तो है ही। उसके अलावा मेरे स्कूल में प्रोजेक्ट्स भी होते थे। तो हमारे हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस के ग्रुप प्रोजेक्ट्स होते थे। तो उसमें मैं दोनों में लीडर थी मैं। ओके। और सो मुझे बहुत पता चला अबाउट यू नो पीपल। अलग-अलग लोग कैसे काम करते हैं, हाउ दे व्यू ए सिनेरियो कैसे वो लोग अप्रोच करते हैं? क्योंकि मैं आई एम वैरी डिसिप्लिंड मुझे ये ये चाहिए ऑन टाइम। कुछ लोग नहीं करते हैं, वो लोग के अपने व्यूज हैं।

[9:34]तो ये एक था कि अलग-अलग स्किल्स के हिसाब से लोगों को कैसे काम करवाना है क्योंकि मैं सबको ये कुछ पढ़ाई का दोगे तो वो लोग भी बोर हो जाएंगे फिर वो लोग करेंगे भी नहीं टाइम पे भी खत्म नहीं होगा। तो वो मैंने मैनेज किया। फिर कैसे मतलब हां मुझे थोड़ा उनको भी थोड़ा टाइम मैनेजमेंट सिखाना पड़ा लेकिन ओवरऑल हो गया प्रोजेक्ट एंड दे वर आल्सो थैंकफुल टू मी कि वो लोग भी आए कि चलो ठीक है हो गया लाइक यू रियली गुड लीडर मुझे भी लगा चलो हां आई हैव आल्सो डन समथिंग वेल।

[10:01]मतलब आपने पीपल स्किल्स सीखे। तो मतलब ऐसा नहीं है कि स्कूल से हम रियल लाइफ के लिए कुछ सीख नहीं रहे हैं बहुत कुछ सीख रहे हैं बट ये अगेन आपके माइंड सेट के ऊपर है। यू हैव टू बी ओपन। क्योंकि अगर आप अच्छा ये तो कुछ बकवास ही है टेक्स्ट बुक नॉलेज इज नॉट एवरीथिंग और आप सो गए। वो भी अच्छा नहीं है। बिल्कुल सही बात है। बिल्कुल। आई थिंक स्कूल फाउंडेशन ऑफ लर्निंग तो है ही लेकिन लोग शायद उसकी वैल्यू को नहीं पहचान पा रहे हैं ज्यादा तो लोग नहीं देखते हैं। आपको क्या लगता है टॉपर्स कल्चर के बारे में? क्योंकि जो टॉपर जैसे आप हैं। अब आपके 100 ऑन 100 आए नाउ मीडिया इज आफ्टर यू लोग आपसे बात करना ही चाहते हैं लोग जो और जिसके मैं एक स्टूडेंट हूं मेरे 40 आए और मेरे को कुछ इंपोर्टेंस नहीं मिलती है। तो क्या आपको लगता है ये सही है क्या अगर मेरे 40 आए और मैं 99 वाले 100 वाले को देख रहा हूं मैं ऐसा फील कर रहा हूं कि मैं तो लूजर हूं क्या ये सही है क्या होना चाहिए? नहीं बिल्कुल स्टूडेंट्स को ऐसे लूजर तो फील नहीं होना चाहिए। मोस्टली लोग देखते हैं ऐसे टॉपर्स को क्योंकि दे वांट टू फील फील इंस्पायर्ड कि हां हम भी अगर ऐसे मतलब वो लोग जानना चाहते हैं कि टॉपर्स क्या करते हैं जो हम भी करें। तो अगर वैसे सिनेरियो से देखें तो अच्छी बात ही है और मैं ये बोलना चाहूंगी कि टॉपर्स भी आखिर इंसान ही है मतलब नॉर्मल पीपल बिल्कुल। एंड लाइक नथिंग इज आउट ऑफ रीच। तो बस ये कि उनको पेडेस्टल पे उठा दिया फिर ये बाप रे महान ऐसा भी नहीं होना चाहिए बट देन यू शुड आल्सो एप्रिशिएट कि हां इन्होंने मेहनत की है क्या-क्या किया है। बट क्या आपको लगता है कि सोसाइटी में एक ही पैरामीटर होना चाहिए कि आपके 100 ऑन 100 आए। यू आर वेरी गुड एट एकेडमिक्स। बट यू माइट हैव अ फ्रेंड जो कि एक्टिंग में बहुत अच्छी है लेकिन उनके 45 आए हैं लेकिन उसको कोई रिकॉग्नाइज नहीं कर रहा है। उसको दुनिया बोल रही है कि ये तो बिल्कुल नालायक है ये पढ़ा पढ़ती नहीं है ये सिर्फ ड्रामा करती रहती है। नहीं ये तो गलत है। और डेफिनेटली एक मिनिमम अमाउंट तो पढ़ना ही चाहिए। लाइक एजुकेशन इज रियली इंपोर्टेंट इन ऑल ओवरऑल पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए। लेकिन अगर वो एक्टिंग में अच्छी है तो दैट शुड आल्सो गेट रिकॉग्निशन डेफिनेटली। एब्सोल्युटली। आई थिंक हमारे पैरामीटर्स और होने चाहिए कि आप टॉपर हो तो वो एक्टिंग में टॉपर है या कोई स्पोर्ट्स में टॉपर है। हां डेफिनेटली। टॉपर सिर्फ पढ़ाई में तो नहीं होता। बिल्कुल। आपको लगता है कि अब जैसे आपके 100 ऑन 100 आए हैं तो ये मैटर करेगा फ्यूचर में या लोग ये भूल जाएंगे आप कैसे व्यू करते हो इस चीज को कि आपकी लाइफ में जो भी आप बनोगे क्या उसमें ये मैटर करेगा कुछ भी? देखो अभी तो मैटर करता है क्योंकि अभी मेरा एकेडमिक जर्नी अभी भी लाइक ऑन गोइंग है। बट देन इफ यू लुक एट द वर्ल्ड एट लार्ज वो लोग तो डेफिनेटली भूल जाएंगे। वो तो मतलब एक और टॉपर हो सकता है। ऑब्वियसली नोबडी कैन क्रॉस दिस। लेकिन हां ऐसे इक्विवेलेंट ऐसे आ सकते हैं वो भी अच्छी बात है। लेकिन मेरे लिए मेरे जो इनर सर्कल है जो लोग हैं वो लोग याद रखेंगे एंड दे विल दे विल ऑलवेज वैल्यू मी। तो वो अच्छा है। एंड जो जो लोग एजुकेशन को वैल्यू करते हैं वो लोग याद रखेंगे। तो दे विल आल्सो वो लोग याद रखेंगे एंड दे विल आल्सो एप्रिशिएट तो हां मतलब कई कभी मतलब आप एक जगह में जाओगे पीपल विल प्रेज यू और एक जगह जाओगे इरिटेट हो गए कि ये क्या टॉपर हां नहीं मतलब छोड़ो ये सब तो। बिल्कुल सही बात है। एब्सोल्युटली दिस इज रियल और रियल बातें ही करने के लिए हम यहां पर हैं। अब आपका कोई आप कोई भी एक ऐसा इंसिडेंट शेयर कर सकते हैं जैसे आपने बोर्ड एग्जाम्स दिए जब मैंने भी दिए थे आप रोज सुबह उठते हो सेंटर जाते हो। तो उसमें सेंटर जाके आप बैठते हो दिमाग में टेंशन चल रही होती है एग्जाम से पहले फिर हम बैठते हैं कुछ ऐसा इंसिडेंट फनी इंसिडेंट या कुछ भी आपको ऐसा याद हो जो आपने एक्सपीरियंस किया हो। मैं सेंटर में एकदम लास्ट मतलब मैं पहले पहुंच जाती थी सेंटर में और फिर मैं गाड़ी में ही बैठी रहती थी मेरे पापा होते थे। ओके। और एकदम जब लास्ट मूवमेंट मैं जाती थी क्योंकि मुझे कोई भी क्योंकि लोग जाते हैं तो इट्स वैरी हैबिचुअल कि लोग बात करके अच्छा ये भी क्वेश्चन वो भी। तो मुझे वो सब नॉइस नहीं चाहिए था तो मैं एकदम लास्ट में जाती थी। ये भी फनी इंसिडेंट है आई थिंक कि आपने नॉइस कट कर दी। हां नॉइस कट कर दी लेकिन हां मेरे एक फ्रेंड्स ग्रुप है वो लोग मतलब मैं क्लास में बैठ जाती थी मेरी सीट में। तो वो लोग भी नहीं नहीं चलो एक बार तो वॉशरूम जा के ही आएंगे। मैंने बोला हां चलो ये भी कुछ चीजें मना नहीं करनी चाहिए। बिकॉज वो लोग भी मेरा सपोर्ट सिस्टम है तो हां मतलब मैं थोड़ी देर जाती थी पर देन अदरवाइज मैं एकदम काम फोकस रहती थी क्योंकि वो एक इंपोर्टेंट चीज है आई थिंक कि अभी आपने पढ़ लिया अभी कुछ नहीं अभी बस शांति से ओन्ली दोस थ्री आर्स मैटर नाउ। एब्सोल्युटली आई थिंक जो आपने फॉलो किया दैट वैरी फ्यू पीपल डू क्योंकि जब मैं एग्जाम में था तो मैं तो जल्दी जाता था कि मुझे टाइम स्पेंड करने के लिए मिलेगा कि हम इतने दिन से पढ़ रहे हैं। हां हां डिस्कस करेंगे और बोलेंगे। कुछ फन करेंगे कुछ मस्ती करेंगे। अच्छा है सबका अपना-अपना पर्सपेक्टिव है बट वैरी नाइस टू नो। अब मुझे नहीं पता आपको पता है कि नहीं कि 2026 बोर्ड एग्जाम से सीबीएसई दो बोर्ड एग्जाम कराने वाले हैं। आर यू अवेयर? ऐसे रूमर्स चल रहे थे बट आई एम नॉट वैरी श्योर कि ये सच है कि नहीं क्योंकि मेरा मेरा फोकस मेरे बोर्ड्स पे था। बिल्कुल। तो उन्होंने पॉलिसी निकाली है कि आप दो बोर्ड्स दे सकते हैं आपके पास ऑप्शन है एक बोर्ड पहले होंगे अब एग्जैक्ट मंथ मुझे नहीं पता और एक बाद में होंगे। या आप पहले वाला दे सकते हो या बाद वाला या आप दोनों दे सकते हो। जिसमें आप कुछ भी मार्क्स जो बेटर होंगे चूज कर सकते हो। तो क्या आपके टाइम में ऐसा होता तो आप दो बार ये एक्सपीरियंस करना चाहते कि सेंटर तक जाके गाड़ी में बैठना और फिर जाना या आप एक ही बार करते। स्ट्रेसफुल होता है एक्चुअली लाइक दैट्स अ डिलेमा कि जाना चाहिए कि नहीं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता एक्चुअली। आई थिंक स्टूडेंट्स से ज्यादा टीचर्स का प्रेशर है कि कैसे सिलेबस खत्म कराए गए कैसे होगा एंड देन आल्सो लाइक इफ यू लुक एट द बोर्ड कैलेंडर कि एक एग्जाम होता है फिर तीन-चार दिन छुट्टी ऐसे ऐसे तो फिर स्कूल कब जाएंगे ऐसे तो फिर एग्जाम ही देते रहेंगे पूरे साल। सो दैट्स अ बिट ट्रिकी। स्टूडेंट स्टूडेंट के हिसाब से तो स्टूडेंट पढ़ के जो भी जैसे भी करके चला जाएगा बट आई डोंट थिंक दे शुड पुट दिस क्योंकि बहुत ज्यादा प्रेशर हो जाएगा फिर। लाइक पहले इतने जल्दी एक बोर्ड करना एंड देन अनदर वन।

[16:00]या मेक्स सेंस अब जैसे आपने पहले बताया कि आपने ट्यूशन कभी नहीं पढ़ी। तो क्या आपको कभी आपके पेरेंट्स ने प्रेशर नहीं किया ट्यूशन के लिए या आपके किसी फ्रेंड ने नहीं बोला कि तू ट्यूशन नहीं पढ़ती है तो तू पीछे रह जाएगी। या कभी किसी रिलेटिव ने नहीं बोला कि ये तो ट्यूशन भी नहीं जाती है कभी ऐसा कुछ भी हुआ? नहीं ऐसे कोई प्रेशर नहीं था। एंड अह हां मतलब ऐसे मुझे मेरे फ्रेंड्स पूछते थे कि तू ट्यूशन जाती है तो मैंने बोला नहीं जाती मैं। तो वो लोग सरप्राइज होते थे लेकिन ऐसे कोई पीयर प्रेशर नहीं था कि अच्छा तो जॉइन कर ले क्योंकि मेरे अच्छे मार्क्स पहले से ही आते थे। ओके। तो हो सकता है कि किसी के अच्छे मार्क्स नहीं आते हो एंड दे वांट टू उनको प्रेशर हो कि अच्छा मेरे ट्यूशन में तो ये नोट्स है ऐसे मुझे पेपर मिलते हैं तो ऐसे बच्चे को शायद प्रेशर हो सकता है। लेकिन आपको खुद की आप आपको खुद का ही एक ओपिनियन रखना चाहिए इसमें कि आप सुनो सबकी करो खुद की आप सबसे देख लो। लेकिन अल्टीमेटली आपको खुद को ही डिसीजन लेना पड़ेगा कि किसमें सबसे ज्यादा फायदा है।

[16:56]सेल्फ स्टडी से मेरा ज्यादा आई एम एबल टू अब्सॉर्ब नॉलेज कि मुझे ट्यूशन जाके दूसरों के साथ मिलकर एक बार होके फिर होता है। नो इट्स वैरी गुड टू हियर दिस क्योंकि आई विश कि मेरे पास ऐसी विजडम होती जब मैं आपके जितना था 17 या 18 बिकॉज़ आई वाज वैरी वैरी स्टूपिड तो बड़ा अच्छा लगता है देख के कि पता नहीं वैरी नाइस टू नो कि आपने वो फोमो को रिजेक्ट किया। क्योंकि आजकल पूरी दुनिया फोमो पे ही चलती है व्हाटएवर यू डू इज बिकॉज ऑफ फोमो। आप बाहर जाते हो क्योंकि किसी ने Instagram पे स्टोरी डाली है। इसीलिए आप बाहर गए। आप ट्यूशन जाते हो एक जाते हो आप दूसरे बड़े सेंटर में जाते हो क्योंकि ये छोटा सेंटर है यहां फीस कम है तो वो तो बेटर होगा क्योंकि वहां फैंसी है। वैरी गुड टू नो इट इज कमेंडेबल। आपने ये जो नॉइस आपने रोकी तो आप सोशल मीडिया पर कैसे रोक पाए या सोशल मीडिया पर बहुत नॉइस होती है 12th में होते हैं हम देखते हैं बहुत लोग बाहर घूम रहे हैं वो पढ़ नहीं रहे हैं। बहुत लोग चिल कर रहे हैं लेकिन वो पढ़ रहे हैं वो दिखा रहे हैं कि हम घूम रहे हैं बहुत अलग-अलग तरीके का होता है और आजकल सोशल मीडिया इज एट इट्स पीक। एवरीवन इज ऑन सोशल मीडिया स्पेशली ग्रेड 10, 11, 12th। तो आपने ये नॉइस को कैसे कट किया सोशल मीडिया वाली? देखो अगर ऐसे बोले आई एम वैरी नाइव अबाउट सोशल मीडिया इतना सब कुछ चल कपट होता है आई आई डोंट नो। मेरे पास पहले से ही सोशल मीडिया नहीं था। और 11th 12th में भी मुझे ऐसे कुछ खास वर्जन ही लगी कि मुझे ज्वाइन करनी चाहिए। सो यू आर ऑन नो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म। एज ऑफ येट मैं नहीं हूं बट लेटर आई मे बी लाइक आई मे हैव टू ओपन वन क्योंकि यूजुअली क्या होता है ऐसे नए लोग मिलते हैं देन दे आस्क यू फॉर द आईडी इंस्टेड ऑफ मोबाइल नंबर फिर लगता है कि अरे मेरे पास तो है ही नहीं तो मे बी फॉर दैट आई विल हैव टू ओपन वन लेकिन हां ऐसे कोई नहीं है कि पोस्ट करना है मुझे लाइक्स मिलेंगे ऐसे कोई था ही नहीं ऐसे मतलब ऐसे मेरी कोई इच्छा थी ही नहीं। मैं भी ऐसे लोगों से भी मैं सुनती थी मेरे फ्रेंड से अच्छा मेरे ये ये फॉलोवर है लेकिन यू डोंट इवन नो हू दैट पर्सन इज। तो मेरा ऐसे कुछ था ही नहीं कि अच्छा मुझे कोई अनजान नंबर मेरे लिए कोई अगर कोई अनजान कोई फॉलो करे मुझे लगा कि ये कौन है ये इसका क्या है मैं क्यों एक्सेप्ट करूं बिना तो ऐसा मेरा माइंडसेट है। तो हां लोगों का अलग-अलग है लेकिन मुझे लाइक पर्सनली ऐसे कोई प्रेशर नहीं लगा कि हां मुझे भी ज्वाइन करना चाहिए। बट आपके फ्रेंड्स ने कभी आपको बोला नहीं कि सोशल मीडिया पर नहीं है क्या कर रही है। हां बोला है ऐसे मैंने बोला कि इवेंचुअली मैं बाद में बोलूंगी बाद बाद में मैं ज्वाइन करूंगी ऐसे कर कर के मैंने डिले कर दिया है। हां लेकिन ऐसे कोई प्रेशर नहीं है दे आर कनेक्टेड दे कनेक्ट विद मी ऑन WhatsApp। बट आपको कभी फील नहीं होता कि वो आके बताते हैं आज तो इसने ये फोटो डाली थी ये तो यहां समर वेकेशन में गई थी। तो मेरे को पता होना चाहिए। नहीं ये सब गॉसिप वो लोग मुझे भेज देते हैं। भेज देते हैं। हां लेकिन क्या है कि मेरे हाथ में मोबाइल होगा तो पूरे दिन ये सब गॉसिप चलता रहेगा। व्हेन आई मीट विथ माय फ्रेंड्स वो पांच मिनट होगा एंड देन इट्स ओवर। तो आपको क्या लगता है आपके फ्रेंड्स क्यों यूज करते हैं सोशल मीडिया या वो एडिक्टेड क्यों है इतने ज्यादा आजकल? ऐसे मतलब ओवरऑल बच्चों की बात करूं तो इट्स अ बिट डिफिकल्ट फॉर मी टू अंडरस्टैंड देयर माइंड सेट क्योंकि ऐसे मोस्टली टू कनेक्ट विद पीपल आई थिंक एक पॉजिटिव साइड भी है लाइक इफ यू आर इंटरेस्टेड इन मूवीज और इफ इफ इफ और यू आर इंटरेस्टेड इन सम नीश काइंड ऑफ अ सब्जेक्ट तो यू कैन कनेक्ट विथ पीपल हु हैव दैट सेम काइंड ऑफ इंटरेस्ट। हां। तो ये एक अच्छी बात है यू नो अक्रॉस बॉर्डर्स यू कैन कनेक्ट लेकिन एक ये भी है कि मुझे मैंने पोस्ट किया इसने लाइक किया अच्छा इसने क्यों लाइक नहीं किया वो एक अलग है।

[20:24]सेगमेंट तो आई थिंक मेजॉरिटी वही है। मेजोरिटी मुझे नहीं मुझे नहीं पता एक्चुअली। नहीं बट आपको सबसे ज्यादा पता होगा ना क्योंकि आप स्कूल जाते हो आप लोगों से बात करते हो लोग आपको बताते होंगे आज Instagram पर ये चल रहा है हमारे स्कूल का एक पेज बना उसमें लोगों ने ये बात करी। हां स्कूल का पेज वो लोग बनाते हैं। आवर स्कूल इज एक्टिवली ट्राइंग टू लाइक पुट पुट डाउन मतलब लाइक पुल डाउन ऑल दोज जो भी। हां लेकिन मुझे ये सब में इन्वॉल्व भी नहीं होना है अच्छा।

[20:47]और आप मीम्स भी नहीं जान पाते हो। आपके फ्रेंड्स। मीम्स नहीं जान पाती अच्छा है क्योंकि मैं उन लोगों को ही नहीं जानती जिनके ऊपर मीम्स बनाते हैं वो लोग। लाइक फ्रेंकली आई एम नॉट वैरी पॉपुलर एट स्कूल मतलब ऐसे क्लास में लोग मुझे पहचानते हैं एंड अगर कोई इवेंट में मैं कुछ मैनेज करूं या जो भी तो वो लोग मुझे पहचानते हैं बाकी ऐसे दे डोंट नो मी बाय द माय नेम। तो आप बहुत क्लियर हो कि मेरा फोकस यही है और मुझे यहीं चलना है। हां दैट्स ओके टीचर्स मुझे जानते हैं जो मेरे काम के हैं वो लोग जानते हैं बाकी ऐसे यू नो लाइक ऐसे ही रिडंडेंट गॉसिप ऐसे कोई लाइक आई पर्सनली डोंट लाइक। नो इफ आई गो बैक 10-15 इयर्स और मोर देन दैट 20-25 इयर्स ना ये करना इजियर था बिकॉज सोशल मीडिया था ही नहीं। तब लेकिन अब ये करना डिफिकल्ट होता जा रहा है बाय द डे। और आपने ही इस टाइम पर कर रहे हो आप तो दैट इज अ ह्यूज अचीवमेंट क्योंकि अगर फ्रेंड्स नहीं है तो हमारे कजंस होते हैं। वो हमें बोलते हैं वो हम जहां रहते हैं आप अहमदाबाद में रहते हो वो कहीं और रहते हैं वो कहते हैं तो सोशल मीडिया पर नहीं है तो कहीं ना कहीं हर कोई टेम्पट होकर गिव इन कर देता है। लेकिन इट इज कमेंडेबल कि आपने बिल्कुल भी गिव इन नहीं किया। नहीं किया मैंने। ग्रेट ग्रेट ग्रेट। अब जैसे जब मैं भी 2015 में मैंने मेरा रिजल्ट आया था 12th के बोर्ड्स का अब जो टॉपर मेरे भी फ्रेंड्स थे उनके 96, 97% आए तो दिमाग में क्या इमेज होती है कि ये तो पूरा टाइम पढ़ाई कर रहा होगा या इसने ये कर रही होगी पूरा सुबह से रात तक पढ़ाई इन्होंने सोना छोड़ दिया होगा ये तो बाहर नहीं जाते हैं ये खाना नहीं खाते हैं सिर्फ पढ़ाई करते हैं। तो आपका रूटीन कैसा था जब ये लास्ट वन ईयर में? ऐसे नॉर्मल ऐसे प्री बोर्ड के पहले यू नो जब ऐसे ही हम लोग नॉर्मल स्कूल चल रहा होता है तो स्कूल जाते हैं। कम कम बैक होम बाय 12:30। उसके बाद मैं आई हैव लंच विथ माय मदर हम लोग कुछ मूवी या टीवी सीरियल जो भी है वो देखते हैं फॉर वन आवर देन आई टेक अ रेस्ट। उसके बाद स्कूल का जो काम है वो मैं करती हूं। लाइक आई डोंट हैव एनी सेट नंबर ऑफ आर्स कि 12 घंटे पढ़ना है। इवन इन द लास्ट स्ट्रेच बिफोर द बोर्ड्स ऐसे नहीं है कि चलो 12 घंटे एट अ स्ट्रेच सोना बंद खाना बंद। बिल्कुल नहीं लाइक विदाउट स्लीप लाइक मिनिमम फाइव टू सिक्स आर्स स्लीप आई कैन नॉट फंक्शन। मतलब मैं सच में मैं एग्जाम मेरे एग्जाम जब भी चल रहे थे मैं 10:00 बजे तो सो ही जाती थी। एंड आई प्रेफर स्टडींग इन द अर्ली आर्स लाइक आफ्टर मैं वैसे 5:00 बजे उठ जाती थी मैं लाइक बोर्ड के पहले यू आर एट होम तब की मैं मैं बात कर रही हूं तो 5:00 बजे मैं उठ जाती थी एंड देन आई यूज टू स्टडी और सो जाती थी मैं 10:00 बजे तक। तो मतलब ये नैरेटिव के 12 घंटे पढ़ना ये सब एक पार्ट है। हर किसी के लिए अलग चीज वर्क करती है आई थिंक। अलग चीज वर्क करती है आई एम सेइंग दैट इट्स नॉट नेसेसरी कि इफ अ टॉपर इज सेइंग आई स्टडीड फॉर 12 आवर्स देन यू इट्स नॉट नेसेसरी दैट यू आल्सो स्टडी फॉर 12 आवर्स कॉम्प्रोमाइजिंग ऑन योर स्लीप, हेल्थ एक्सएटेरा।

[23:40]हां। तो वो नहीं होना चाहिए अगर आपको लग रहा है कि हां आई एम एबल टू डू इट देन डू इट बट देन खुद की भी लिमिट्स कैसे ऑब्वियसली लिमिट स्ट्रेच करनी चाहिए लेकिन इतना नहीं कि आप पढ़ रहे हो और फिर बोर्ड के एग्जाम के पहले आप फुस्स हो गए हो तो ये नहीं होना चाहिए। एब्सोल्युटली। आई टोटली अग्री आपको क्या लगता है कि आपकी स्ट्रेंथ्स क्या हैं जैसे मैंने नोटिस किया कि यू आर वेरी स्ट्रांग हेडेड कि अगर आपको जो करना है आप वही करोगे यू आर वेरी फोकस्ड तो आपको क्या लगता है व्हाट इज योर स्ट्रेंथ? मुझे भी लगता है यही स्ट्रेंथ है। आई एम ट्राइंग टू बिल्ड माय स्ट्रेंथ्स एक्चुअली क्योंकि अभी भी मैं देखती हूं मेरे में इम्प्रूवमेंट तो चाहिए। किस चीज में चाहिए इम्प्रूवमेंट?

[24:20]इम्प्रूवमेंट एज इन लाइक दिस ऑल ऑफ दिस इज न्यू टू मी लाइक कम्युनिकेशन इंटरैक्टिंग विद पीपल। तो इसमें डेफिनेटली मुझे थोड़ा इम्प्रूवमेंट तो करना पड़ेगा। दैट इज वन एरिया बट देन आल्सो आई कैन कंसंट्रेट फॉर आवर्स। लाइक आई एम नॉट डिस्ट्रैक्टेड ईजली। फॉर एग्जांपल ये एक फनी इंसिडेंट है 11th में। 11th में हम लोग का वीकली टेस्ट चल रहा है एंड इटस वैरी हॉट इन अहमदाबाद। एंड ऐसे लिख रहे हैं तो वी हैड लाइक ऐसे क्लास नहीं होता स्टेयर्स वाले क्लास। या या या। तो मेरे नीचे कोई बेहोश हो गई थी। ओके। एग्जाम लिखते। देन टीचर्स आर कमिंग ऐसे हवा दे रहे हैं ये सब हो रहा है वो सब हो रहा है। एग्जाम खत्म हो गया। मेरे फ्रेंड ने पूछा अरे तूने देखा वो क्या हुआ। इतना कुछ डिस्ट्रैक्शन हुआ था वो मैम आई उसको हवा दे रही थी कोई कॉल कर रही थी।

[25:15]मैं बोला अच्छा ये सब भी हो गया। तो मुझे दिखा ही नहीं ये सब हुआ। क्योंकि आई वाज आई वाज फुली फोकस्ड ऑन द टेस्ट कि बोलो ना अच्छा ये सब हो गया और अच्छा क्या है कैसी है वो लाइक आई हैव टू सी कि ठीक है कि नहीं। तो ये एक था तो आई फील आई कैन कंसंट्रेट रियली वेल। और ये बोर्ड एग्जाम में भी काफी इंपोर्टेंट है। व्हिच इज अ ह्यूज लाइफ स्किल आल्सो आई थिंक लाइफ में बहुत इंपोर्टेंट है। हां लाइफ में भी लाइक दिस इज लाइक इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ एग्जाम्स। या। बट हां ऐसे मतलब जो भी आप कर रहे हो फुल्ली फोकस ऐसे डिस्ट्रैक्शंस बेसिकली। नहीं अगर हम एग्जाम्स भी हटा दें हम रियल लाइफ में आजकल फोकस नहीं कर पाते हैं सिर्फ बच्चों की बात नहीं है 12th की बात नहीं है एनी एज ग्रुप हम देखते हैं हमारे पेरेंट्स भी कभी-कभी इतना सोशल मीडिया पे चले जाते हैं कि उनका ध्यान ही नहीं रहता है इधर-उधर बहुत बार ऐसा होता है मुझे नहीं पता आपने नोटिस किया है कि नहीं।

[26:06]बट इट इज अ ह्यूज लाइफ स्किल। बट एक तो आपने बोला कम्युनिकेशन और आपको क्या लगता है कि आपको किस चीज में वर्क करने की जरूरत है? अभी तो देखते हैं लाइक आई आई एक्चुअली आस्क फॉर रेकमेंडेशंस फ्रॉम माय टीचर्स एंड पेरेंट्स कि वो लोग ही ज्यादा बोल पाते हैं। बट या डेफिनेटली नाउ अभी कॉलेज में भी आई एम पुशिंग माइसेल्फ टू स्टडी आउटसाइड द सिटी।

[26:33]लाइक फार फ्रॉम माय पेरेंट्स टू यू नो टेस्ट माय लिमिट्स एंड यू नो स्ट्रेंथ्स कि कैसे मैं खुद मैनेज कर पाती हूं। सो आई थिंक दैट्स व्हाट आई एम प्लानिंग नाउ कि फिर पता चलता है कि आप कहां पे खड़े होते हो व्हेन आई एम व्हेन यू आर ऑन ओन। या तो क्या आप जैसे आप अपने आप को एनालाइज करते हो कभी आप बैठ के सोचते हो कि मेरे को क्या बेटर करना है या क्या नहीं है या कैसे आप कभी करते हो सेल्फ अवेयरनेस कैसे होती है आपकी आपको किसी से बात करते हो फ्रेंड से उससे पूछते हो कि आपको क्या लगता है कि मेरे बारे में क्या है या आपकी मॉम या डैड से आप बात करते हो या भाई से करते हो किसी से भी करते हो बात या खुद ही एनालाइज करते हो। ऐसे बहुत कुछ हुआ है लाइक ओवर द पास्ट टू इयर्स लाइक आफ्टर 11th अह जब मैंने ह्यूमनिटीज लिया क्योंकि इटस अ वैरी अह इट हैज अ वैरी डिफरेंट अप्रोच टू स्टडीिंग क्योंकि 10th में आई वुड से आई वास अ वैरी स्टूपिड स्टूडेंट। लेकिन 11th में आके मुझे मुझे पता चला कि देयर इज अ होल वर्ल्ड आउट देयर बियॉन्ड एकेडमिक्स। या। तो मेरे लिए थोड़ा सा ये झटका था।

[27:37]क्योंकि क्योंकि मुझे पता ही नहीं कि कैसे करना है तो आई थिंक माय टीचर्स गाइडेड मी ड्यूरिंग दैट टाइम। एब्सोल्युटली मतलब 11th में आके पता चला कि कम्युनिकेशन भी है स्पोर्ट्स में भी दुनिया है पहले लगता था कि सिर्फ पढ़ाई कर लिया तो टिक मार्क हो गया तो ये हो गया। करेक्ट आपके आजकल जब हम स्कूल के बच्चों की बात करते हैं तो मेंटल हेल्थ एक बहुत ही बड़ा इशू है। मतलब के किसी को जो एंजाइटी है या डिप्रेशन है या टेंशन है ऐसे वर्ड्स हर कोई यूज कर रहा है। आपने भी बहुत सुने होंगे। आई डोंट नो आपने सुना है कि नहीं। तो आपको क्या लगता है कि वो ऐसा क्यों फील कर रहे हैं और क्या आपने कभी ऐसा फील किया कि 12th के बोर्ड्स हैं पढ़ाई का स्ट्रेस है या कुछ भी आपने कभी ऐसा फील किया कि आपकी मेंटल हेल्थ में प्रॉब्लम हो रही है या किसी फ्रेंड ने कभी आपको बोला हो। मेंटल हेल्थ ऐसा तो अगर देखा जाए तो आई एम नॉट द करेक्ट पर्सन आई थिंक। क्योंकि मेरे मार्क्स अच्छे ही आते थे ऐसे कभी नहीं कि फेल हो गए।

[28:33]तो आई थिंक फ्रॉम देयर पर्सपेक्टिव ऐसे हो सकता है कि लाइक इटस अ टेंस अफेयर कि इतने कम आए हैं फिर पेरेंट्स का प्रेशर और वो सब। बट या डेफिनेटली अगर मेरे रूटीन की बात करें तो स्ट्रेस होता है। एंड देन देयर अ पॉइंट वेर यू फील लाइक कि बस हो गया अभी और नहीं करना है। देन आई टूक टाइम देन आई टूक टाइम ऑफ। तब मैं पूरा एक दिन पूरा आराम करती थी। मैं टीवी देखती थी नीचे फ्रेंड्स से मिलने जाती थी। और मेरी मम्मी मेरे लिए अच्छा-अच्छा खाना बनाती थी। दैट्स दैट्स अ कंफर्ट। दैट इज द मोस्ट इंपोर्टेंट। तो मैं ब्रेक ले लेती थी कि चलो एक दिन पूरा रेस्ट बट देन आई हैव टू बाउंस बैक। आई हैव टू कम फिर बाद में वापस रूटीन तो आई थिंक ब्रेक तो जरूरी होता ही है। दैट्स वन थिंग। हां लेकिन ऐसे अगर स्टूडेंट्स का ऐसे आई थिंक व्हाटस रियली इंपोर्टेंट इज यू नो अह खुद पे भरोसा होना चाहिए एंड आल्सो आई थिंक पेरेंट्स का भी यू नो पेरेंट्स शुड आल्सो सपोर्ट देयर चिल्ड्रन क्योंकि वो बहुत बड़ी बात है। एंड सम टाइम्स यू नो द चाइल्ड मे नॉट शो इट बट इट फील्स अह रियली गुड व्हेन अ पेरेंट एप्रिशिएट्स या फिर आपको सपोर्ट करते हैं नो मैटर व्हाट। या सो दैट्स वन थिंग फ्रॉम द बच्चे तो है ही छोटे हैं लेकिन आई थिंक पेरेंट्स शुड आल्सो यू नो बी वोकल अबाउट अह थिंग्स विथ देयर चिल्ड्रन एंड ट्राई टू बी क्लोज ट्राई टू कनेक्ट। एब्सोल्युटली क्या आप अपने पेरेंट्स से ओपनली सारी बातें शेयर करते हो? हां मैं तो बहुत क्लोज हूं मेरे पेरेंट्स से पहले से ही जो भी स्कूल में होता है मैं सब बताती हूं। एंड देन अह वी ईट टुगेदर एंड चैट। आपके जो रिलेटिव्स हैं क्या वो आपके अहमदाबाद में ही रहते हैं? नहीं दे लिव इन डिफरेंट प्लेसेस। डिफरेंट प्लेसेस तो वैसे एक बड़ा नैरेटिव होता है हर जगह कि रिलेटिव्स हैं ये दिमाग बहुत खराब करते हैं बोलेंगे मार्क्स कम आए या ये तो मेरा बच्चा ज्यादा अच्छा है जब वो शर्मा जी का बेटा आपने कहीं देखा होगा ऐसा होता है तो क्या आपके साथ ऐसा कभी आपने फेस किया या कभी कुछ हुआ? नो देयर आर टू कैटेगरी ऑफ पीपल चाहे वो रिलेटिव्स हो या जो भी। या। एक है कि आप आपको बहुत एप्रिशिएट करेंगे आप कुछ अच्छा करोगे तो आपको बोलेंगे। कि ये अच्छा है दे विल एप्रिशिएट कुछ बुरा करोगे तो वो भी बोलेंगे कि यू नो एंड दे आर द ट्रू पीपल और एक क्या आप कुछ भी कर लो। कुछ अच्छा ही दिखेगी नहीं कुछ होगा ही नहीं। एंड ज्यादा कौन से होते हैं? नहीं मैं तो ऐसे लोगों से मैं तो अवॉइड ही करती हूं। ज्यादा तो ऐसे ही होते हैं। कि कुछ होता ही नहीं है। अभी टॉप भी करा तो अच्छा अच्छा गुड और फिर खत्म।

[49:34]एब्सोल्युटली। हां मतलब मेंटल पीस तो सबसे ऊपर है एंड देन आल्सो लाइक इफ यू हैव योर मूमेंट वो भी अच्छा ही लगता है। नॉट एव्री डे बट देन एब्सोल्युटली समटाइम्स लास्ट टाइम यू फेक्ड अ स्माइल इन स्कूल। फेक्ड अ स्माइल। क्लास फोटो के वक्त।

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