[0:00]शिकारियों ने उस किसान की एक नज़र, और उसे लेकर शेर सिंह के पिंजरे में बंद कर दिया.
[0:06]शेर सिंह को सच में भूख लगी थी. नहीं नहीं, मुझे मत खाओ, मुझे छोड़ दो. किसान ने जैसे ही अपना सर ऊपर किया, शेर सिंह ने उसका चेहरा देखा और उसे पहचान गया. उसी किसान ने उसकी जान बचाई थी. शेर सिंह उसके पास जाकर, उसके सर पर अपना पंजा फेरने लगा. शिकारी यह देख हैरान हो गए. यह शेर उस इंसान को खा क्यों नहीं रहा? इधर किसान को यह समझ में आ गया कि शिकारी ने शेर सिंह को बंदी बनाया है. उसने शेर सिंह को बचाने की सोची, और शेर सिंह के कान में अपनी योजना बताई. शेर सिंह किसान की बात समझ गया.



