[0:00]क्या आपने कभी सोचा कि ये लोग कछुए के बच्चों को उठाकर खुद पानी तक क्यों नहीं छोड़ देते? जबकि इस दौरान शिकारी परिंदे इन बच्चों को खा भी जाते हैं। फिर भी तरस नहीं आता इन दरिंदे लोगों को, नहीं बल्कि समझदार लोगों को। क्योंकि इन कछुओं की मदद करना एक्चुअल में इनकी मौत का लॉन्ग कट होता है। और कई देशों में इन्हें उठाकर पानी में छोड़ना जुर्म है। दरअसल इन समुद्री कछुओं के अंडों को सही ऑक्सीजन एंड टेंपरेचर रेत में मिलता है। इसीलिए मां रेत में अंडे दबाकर चली जाती है। फिर बच्चे निकलकर घंटों तक समुद्र की तरफ भागते हैं और ज्यादातर मारे जाते हैं। लेकिन इस दौरान उनके दिमाग में इंफॉर्मेशन छप रही होती है अर्थ के मैग्नेटिक फील्ड की और नेचुरल लाइट की। पूरी याददाश्त तैयार होती है, फिर यही इनका नेचुरल जीपीएस बनता है। सालों बाद जब इन्हें अंडे देने होते हैं तो यह इसी याददाश्त के जरिए हजारों किलोमीटर दूर से लौटकर उसी इलाके में आते हैं जहां पैदा हुए थे। लेकिन अगर आप उन्हें बचपन में उठाकर सीधा पानी में छोड़ देते तो यह याददाश्त नहीं बनती। गड़बड़ हो जाती, जिससे या तो वह गलत जगह अंडे देते या अंडे बाजी हो ही नहीं पाती, नस्ल बर्बाद। इसीलिए नेचर में कभी उंगली नहीं करनी चाहिए, नीचे करो जितनी करनी है।

Don’t Interfere With Nature 🐢 | Turtle Survival Journey | #turtle #animals #wildlife #sea #shorts
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