Thumbnail for Trump wants joint venture with Iran to collect Hormuz toll | Ankit Agrawal Study IQ by StudyIQ IAS

Trump wants joint venture with Iran to collect Hormuz toll | Ankit Agrawal Study IQ

StudyIQ IAS

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[0:00]नमस्कार दोस्तों, दोस्तों अब तो ऐसा लग रहा है कि दुनिया में कुछ भी हो रहा है। एक समय था जब अमेरिका जाना जाता था रूल बेस्ड ऑर्डर के लिए। मतलब दुनिया में रूल्स के हिसाब से चीजें होनी चाहिए।

[0:11]अब सोच के देखिए, ये जो ईरान वॉर है अभी खत्म हुआ नहीं है। स्टेट ऑफ होरमुस कभी खुल रहा है, कभी बंद हो रहा है।

[0:17]उसके बीच अब यहां पर यह खबर आ रही है कि ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के साथ एक जॉइंट वेंचर सेटअप किया जाए। ईरान के साथ। ताकि यहां पर जो जितने भी शिप्स पास होंगे स्टेट ऑफ होर्मुज से उनसे टोल कलेक्ट किया जा सके।

[0:30]ये आप देख सकते हो खबर। अ ब्यूटीफुल थिंग ट्रंप वांट्स होर्मुज टोलस एज अ जॉइंट वेंचर विद ईरान। इसको डिटेल से समझने की जरूरत है कि हो क्या रहा है यहां पर।

[0:40]ट्रंप क्या चाहते हैं, ईरान क्या कह रहा है और साथ ही साथ ओमान क्यों नो कह रहा है इसको लेकर, ओमान क्यों नहीं इसको एक्सेप्ट करने के लिए रेडी है। वो सब कुछ मैं बताऊंगा इंडिया के ऊपर क्या इंपैक्ट आएगा।

[0:51]चलिए शुरुआत करते हैं। देखिए सबसे पहले तो क्वेश्चन ये है कि ईरान ने क्या प्रपोज किया? देखो एक तो जो यूएस ईरान का सीज फायर हुआ है वो तो आप सब जानते ही होंगे। कल सुबह-सुबह खबर आ गई थी।

[1:00]लेकिन यहां पर ईरान ने एक टोल सिस्टम को प्रपोज किया है कि जो भी शिप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पास होगा, उनको कुछ चार्ज यहां पर देना पड़ेगा।

[1:09]और पॉसिबली दो तरह के चार्ज हो सकते हैं। एक तो ये है कि जितने भी शिप गुजरे, एक शिप के बेसिस पर चार्ज लगाया जाए। जैसे मान लो एक शिप गुजरेगा तो उसके ऊपर वन मिलियन डॉलर, टू मिलियन डॉलर।

[1:21]एक फिक्स चार्ज लगा दिया जाए। या फिर यहां पर ये भी है कि पर बैरल के हिसाब से। मतलब मान लो अगर अह 100 बैरल ऑइल पास हो रहा है।

[1:31]तो एक बैरल के ऊपर एक डॉलर चार्ज लगाया जाए। मतलब आप समझ रहे हो कि अगर मान लो क्रूड ऑइल 80 डॉलर पर बैरल का है तो ऑटोमैटिकली ये 81 डॉलर हो जाएगा क्योंकि एक डॉलर उनको यहां से पास होने के लिए देना पड़ेगा।

[1:40]ठीक है? तो इस तरह की चीजें हैं। इनफैक्ट यहां पर अल्टरनेटिव सिस्टम की भी बात कही जा रही है। या आप देख सकते हो क्रिप्टो टोल। ईरान सेट्स 1 डॉलर पर बैरल क्रिप्टो टोल ऑन टैंकर्स ट्रांजिटिंग वाया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।

[1:53]अब क्वेश्चन यह है कि इसके पीछे का इकोनॉमिक लॉजिक क्या है? मैं आपको बता दूं हर दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 17 से 20 मिलियन बैरल्स पर डे पास होते हैं।

[2:04]मैं अभी तो सिर्फ ऑइल की बात कर रहा हूं। और ये बेसिकली अगर आप देखोगे 1 डॉलर पर बैरल के हिसाब से। मतलब पोटेंशियल जो रेवेन्यू है वो होगा ईरान के लिए 17 से 20 मिलियन डॉलर पर डे के हिसाब।

[2:14]और एनुअली अगर आप इसको कन्वर्ट करोगे तो 6 से 7 बिलियन डॉलर के आसपास की कमाई होगी ईरान के लिए। अब क्वेश्चन ये है कि ईरान को इसकी जरूरत क्यों है?

[2:23]एक तो ईरान के ऊपर हेवी सैंक्शन्स लगा हुआ है। यहां पर ग्लोबल बैंकिंग जो सिस्टम है स्विफ्ट सिस्टम जिसको कहते हैं उससे दूर रखा गया है। डॉलर बेस्ड ट्रेड ट्रेड से दूर रखा गया है।

[2:34]और इसीलिए वो यहां पर क्रिप्टो टोल की बात कर रहा है ताकि आसानी से उसके पास पैसे मिल जाए और उसको कहीं भी इस्तेमाल कर सके। एंड दिस टोल बिकम्स अ न्यू रेवेन्यू स्ट्रीम।

[2:45]यहां पर सैंक्शंस के बाहर से ईरान कहीं ना कहीं टोल लेने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हां ये सिर्फ रेवेन्यू के लिए नहीं है, ध्यान से समझिएगा। इसका एक हिडन ऑब्जेक्टिव है।

[2:54]मतलब इस पूरे वॉर में ईरान को एक बात समझ में आ गई है कि उसके पास एक बहुत बड़ा लिवरेज हो गया है। अब अब दुनिया जो है ईरान के ऊपर अटैक करने से पहले 10 बार सोचेगी।

[3:04]क्योंकि ईरान को ये पता चल गया ना अभी तक आज तक तो हुआ नहीं था सिर्फ बातें कही जाती थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर देंगे। लेकिन इस वॉर में एक्चुअल में ईरान ने ये करके दिखा दिया।

[3:11]सो दैट इज व्हाई ये एक बहुत बड़ा स्ट्रेटेजिक लिवरेज की तरह काम करेगा। एंड सबसे इंपॉर्टेंट एक और यहां पर बात है वो है इकोनॉमिक कंपनसेशन फॉर सैंक्शन्स।

[3:22]मतलब जिस तरह से ईरान में तबाही हुई है इस पूरे वॉर के अंदर और इसको बिल्ड करने के लिए बहुत सारा डॉलर्स पता नहीं कितने बिलियंस ऑफ डॉलर्स लगेंगे उसको वापस से बिल्ड करने के लिए।

[3:32]तो ईरान कहीं ना कहीं ये कह सकता है, प्रपोजल रख सकता है अभी इस्लामाबाद में टॉक होनी है, तो उसमें प्रपोजल रखेगा कि भाई देखो हम ये टोल इसलिए लाना चाहते हैं ताकि हमें कुछ कंपनसेशन मिल सके।

[3:41]एंड यू नेवर नो ट्रंप। ट्रंप के बारे में तो आप कुछ कह ही नहीं सकते। ट्रंप तो कह देंगे हां ठीक है उनका बहुत नुकसान हुआ है। चलो इनको अलाउ कर देते हैं टोल देना।

[3:50]साथ ही साथ कंट्रोल ओवर ग्लोबल एनर्जी फ्लोस। ये हिडन ऑब्जेक्टिव आप कह सकते हो ईरान का। सिंपल टर्म्स में ईरान वांट्स टू कन्वर्ट ज्योग्राफी इनटू पावर।

[3:58]अब क्वेश्चन ये आता है कि यहां पर ट्रंप का बयान कहां से आ गया? क्या है ना कि यहां पर एक जर्नलिस्ट है अमेरिकन जर्नलिस्ट एबीसी न्यूज़ में जोनाथन कार्ल।

[4:07]उन्होंने इसके बारे में जिक्र किया। उन्होंने कहा दिस मॉर्निंग, आई आस्क्ड प्रेसिडेंट ट्रंप इफ ही इज ओके विद द ईरानियंस चार्जिंग अ टोल फॉर ऑल शिप्स दैट गो थ्रू द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।

[4:20]ही टोल्ड मी देयर मे बी अ जॉइंट यूएस ईरान वेंचर टू चार्ज टोल्स। मतलब सोच सोच के देखिए कहां बुद्धि चली गई है हो क्या गया है दुनिया को।

[4:30]ट्रंप अमेरिका का राष्ट्रपति जो फ्री वॉटर होना चाहिए वहां पर ईरान को सपोर्ट कर रहा है कि चलो साथ में मिलकर एक जॉइंट वेंचर कंपनी खोल लेते हैं और दुनिया को टोल चार्ज करते हैं।

[4:42]वी आर थिंकिंग ऑफ डूइंग इट एज अ जॉइंट वेंचर। इट्स अ वे ऑफ सिक्योरिंग इट ऑल्सो सिक्योरिंग इट फ्रॉम लॉट्स ऑफ अदर पीपल। इट्स अ ब्यूटीफुल थिंग। ये ट्रंप का यहां पर कहना है।

[4:52]तो ट्रंप का ये जॉइंट वेंचर मॉडल है ना, ये भी कहीं ना कहीं ये सोच के आधार पर होगा कि अगर यूएस इसके अंदर शामिल नहीं होगा तो हो सकता है ईरान इसका सारा बेनिफिट उठा ले।

[5:01]तो ट्रंप यहां पर मे बी ये प्रपोज कर रहे होंगे चाहे वो कंट्रोल है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का या फिर रेवेन्यू हो गया। यहां पर क्यों ना बांट लिया जाए। एंड पॉसिबल स्ट्रक्चर क्या हो सकता है?

[5:10]एक जॉइंट अथॉरिटी बनाई जाएगी, एक शेयर्ड सिक्योरिटी ऑपरेशंस होगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में, रेवेन्यू शेयरिंग एग्रीमेंट हो सकता है। कुछ इस तरह की बातें यहां पर कही जा रही हैं। लेकिन मैं आपको बता दूं इसमें एक और बड़ा प्लेयर है वो है ओमान।

[5:24]क्योंकि ध्यान रखिएगा ये जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है एग्जैक्टली ये जो चोक पॉइंट है, ऊपर की तरफ तो ईरान है ही है। लेकिन नीचे की तरफ ये वाला जो हिस्सा है ये ओमान के पास है।

[5:32]एंड दैट इज व्हाई यहां पर ओमान के सहमति के बिना ये शायद पॉसिबल नहीं होगा क्योंकि सदन साइड में होर्मुज को ओमान कंट्रोल करता है एंड विदाउट ओमानस कोऑपरेशन ईरान कैन नॉट फुली एनफोर्स टोल।

[5:45]अब क्वेश्चन ये आता है कि ओमान इसको रिजेक्ट क्यों कर रहा है? सबसे पहला ओमान का कहना है इट्स अ वायलेशन ऑफ इंटरनेशनल लॉ।

[5:51]आप सब जानते होंगे यूएन क्लॉस के बारे में, यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ लॉ ऑफ द सी। हो सकता है कि ट्रंप को एक लेसन सीखना पड़े यूएन क्लॉस के बारे में।

[6:01]होता क्या है? तो यहां पर क्या है ना यूएन क्लॉस में साफ-साफ कहा गया है कि आपकी जो टेरिटरी है, ये जो लैंड है वहां से 12 नॉटिकल माइल्स तक ही आपकी वो टेरिटोरियल वॉटर होगी।

[6:11]बाकी का जो हिस्सा है आप सब जानते हो 200 नॉटिकल माइल्स तक उसको एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन कहते हैं। लेकिन अगर कोई इंटरनेशनल शिप वहां से गुजरना चाहता है आप उसको रोक नहीं सकते हो।

[6:23]ठीक है? ये इंपॉर्टेंट है। तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बीच से अगर कोई शिप गुजरता है तो किसी भी टेरिटोरियल वॉटर में नहीं आता है।

[6:29]अकॉर्डिंग टू द लॉ यहां पर उसको आसानी से पास होना चाहिए। ट्रांजिट पैसेज मिला हुआ है। एंड इट अप्लाइज टू ऑल वेसल चाहे वो सिविलियन हो, मिलिट्री हो।

[6:38]देयरफोर नो कंट्री कैन चार्ज टोल फॉर मीयर पैसेज। हां आपके देश के पोर्ट पर कोई आएगा अगर शिप आता है तब आप उससे चार्ज करो ना।

[6:46]मान लो अगर अ मुंबई के पास से कोई शिप गुजर रहा है अमेरिकन शिप गुजर रहा है और वो आपका 150 नॉटिकल माइल दूर है। ठीक है?

[6:55]तो फिर आप ये थोड़ी कह देगा भारत कि भाई हमें चार्ज दो। अगर वो शिप मुंबई के तट पर आएगा तब हम यहां पर उससे बात करेंगे।

[7:02]तो ये इंपॉर्टेंट हो जाता है। अच्छा फियर ऑफ ग्लोबल प्रेसिडेंट। मतलब अगर ईरान इसमें सक्सीड हो गया तो अब तो बाकी के भी जो चोक पॉइंट है वहां पर भी तो खतरा होगा ना।

[7:12]कल के डेट में भारत भी फिर स्ट्रेट ऑफ मुलाक्का की बात कर सकता है। स्वेज कैनाल में तो ऑलरेडी कुछ चार्जेस हैं लेकिन वो थोड़ा सा डिफरेंट एंगल है, उसका हिस्टोरिकल परस्पेक्टिव है वो बहुत ही छोटा सा है पतला सा है उसको मेंटेन किया जाता है।

[7:23]वो एक अलग ही मामला आ जाता है। कहने का मतलब यहां है कि जो प्रिंसिपल ऑफ ग्लोबल कॉमन्स है वो पूरी तरह से ब्रेक हो जाएगा। यहां पर फ्रैगमेंटेड मैरीटाइम कंट्रोल दुनिया भर में आपको देखने को मिल सकता है।

[7:31]साथ ही साथ ओमान की न्यूट्रैलिटी। ध्यान रखिएगा ओमान हिस्टोरिकली जो है वो न्यूट्रल कंट्री रहा है। वो हमेशा मीडिएशन की तरफ रहता है।

[7:42]अगर ओमान यहां पर ईरान को सपोर्ट कर दे या फिर सिर्फ यूएस को सपोर्ट कर दे तो न्यूट्रल क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी। एंड इसीलिए आप देखोगे इस पूरे वॉर के अंदर ईरान ने जगह-जगह बॉम्बिंग की गल्फ कंट्रीज के अलग-अलग देशों में।

[7:51]उसमें उसने ओमान के ऊपर अटैक नहीं किया था अगर आपने ध्यान से देखा होगा। क्योंकि ओमान एक न्यूट्रल के तौर पर रहता है। जैसे यूरोप के अंदर स्विट्ज़रलैंड है कुछ उसी प्रकार से।

[8:01]फिर इसके अलावा ओमान इसको इसलिए रिजेक्ट कर रहा है बिकॉज़ ऑफ इकोनॉमिक स्टेबिलिटी कंसर्न। ओमान को ये बात पता है उसके पास ट्रंप की बुद्धि नहीं है।

[8:08]ओमान को ये बात पता है कि होर्मुज डिसरप्शन इज इक्वल्स टू ग्लोबल शॉक। इसकी वजह से ग्लोबल प्राइस स्पाइक होगा, इंस्योरेंस कॉस्ट बढ़ जाएगा, ट्रेड स्लो हो जाएगा।

[8:18]एंड ओमान भी तो स्टेबल शिपिंग पर डिपेंड करता है। तो वो इसको कहीं ना कहीं हटाना चाहता है कि इस तरह की चीजें ना हो। अच्छा इसका ओवरऑल जियोपॉलिटिकल मीनिंग समझने की कोशिश करिए।

[8:29]ये जियोपॉलिटिकल पर्सपेक्टिव से एक बहुत बड़ा डेवलपमेंट है। कहीं ना कहीं ये दिखा रहा है रूल बेस्ड ऑर्डर से हम पावर बेस्ड ऑर्डर की तरफ जा रहे हैं।

[8:38]पहले दुनिया भर में इंटरनेशनल लॉ डोमिनेट करता था। अब ये तो ट्रंप जैसा राष्ट्रपति आ गया है वो यहां पर ज्योग्राफी, मिलिट्री कंट्रोल, पावर इन सबकी बातें कर रहा है।

[8:48]तो एक बड़ा शिफ्ट यहां पर देखने को मिल रहा है। फिर इसके अलावा चोक पॉइंट का वेपनाइजेशन। कल के डेट में रशिया से लेकर चाइना हर कोई यहां पर अपना एक चोक पॉइंट देखेगा कि कहां पर उसको फायदा हो सकता है।

[8:58]एंड इट इज द राइज ऑफ जिओ इकोनॉमिक वॉरफेयर। जो कंट्रीज हैं वो ट्रेड रूट्स का इस्तेमाल करेंगे, इकोनॉमिक वेपंस की तरह इस्तेमाल करेंगे। अच्छा इसका इंपैक्ट भारत जैसे देशों के ऊपर काफी आएगा।

[9:07]क्योंकि अगेन हम काफी हेवीली डिपेंडेंट हैं क्रूड ऑइल के ऊपर एनर्जी के ऊपर। काफी सारा आता है स्टेट ऑफ होर्मुज से तो इसका इंपैक्ट यही होगा कि भारत में अगेन फ्यूल प्राइसेज बढ़ेंगे, इन्फ्लेशन इनक्रीस होगा, करंट अकाउंट डेफिसिट खराब हो जाएगा।

[9:18]रुपी तो डेप्रिशिएट हो ही रहा है और कितना डेप्रिशिएट होगा? ये सारे प्रॉब्लम्स हैं। लेकिन दोस्तों एक चीज समझने की जरूरत है कि बातें तो कही जा रही हैं कि यूएस और ईरान मिलकर एक जॉइंट वेंचर खोल लिया जाए।

[9:30]लेकिन ग्राउंड रियलिटी ये है कि इतने आसानी से काम करेगा नहीं। बहुत सारे प्रॉब्लम्स हैं। सबसे पहला लीगल तो मैंने आपको बता ही दिया कि मैरीटाइम जो नॉर्म्स हैं उसको ये वायलेट करता है।

[9:40]दूसरा पॉलिटिकल, क्या यूएस के जो एलाइज हैं, वैसे तो नेटो और जितने यूएस के एलाइज हैं उनमें ही आपस में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। तो यूएस के एलाइज भी इसको एक्सेप्ट नहीं करेंगे।

[9:50]यूरोप इसको पूरी तरह से रिजेक्ट कर देगा कि ये क्या बात हुई। फिर इसके अलावा स्ट्रेटेजिक, ट्रस्ट डेफिसिट यूएस और ईरान में काफी ज्यादा है। मतलब कल तक ये वॉर लड़ रहे थे।

[10:00]अब ट्रंप ये सजेस्ट कर रहे हैं कि हम ईरान के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर खोल लें। मतलब क्या ही चल रहा है। इसके अलावा ऑपरेशनल, मतलब इसको एनफोर्स करना अगेन बहुत डिफिकल्ट होगा।

[10:09]इसकी वजह अब जो शिप्स हैं वो रिफ्यूज कर सकते हैं पे करने से एंड इट कुड लीड टू नेवल कंफर्टेशन। बहुत कुछ हो सकता है।

[10:14]लेट्स सी आगे होगा क्या इसको लेकर बट एक जो बड़ी खबर आई थी इसके बारे में आई होप आपको समझ में आई होगी और जाने से पहले एक बहुत ही इंटरेस्टिंग क्वेश्चन।

[10:21]क्या आप बता सकते हो स्ट्रेट ऑफ डोवर ये कौन से दो वॉटर बॉडीज़ को कनेक्ट करता है इन चार ऑप्शन में से और इसका राइट आंसर आप सब जानते हैं मेरे इंस्टाग्राम पर तो मिलेगा ही।

[10:29]वहां पर अगर आप नहीं हो कोई बात नहीं टेलीग्राम से ले सकते हैं इसका सही उत्तर। और दोस्तों जैसा मैंने आपको बताया अगर आप यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं अचीवर्स कार्निवल सेल चल रहा है।

[10:37]जिसके तहत कोई भी यूपीएससी कोर्स आप लेते हो एक्स्ट्रा डिस्काउंट। इसके अंदर प्रीलिम्स से लेकर इंटरव्यू तक की पूरी पढ़ाई में सब कुछ आपको कराया जाता है। बस आपको यूज़ करना है ये कोड अंकित लाइव।

[10:47]एंड ये फोन नंबर दिया है। कोई भी अगर आपको डाउट है, प्रॉब्लम है, बैच से रिलेटेड इस पे कॉल कर लीजिए। मेरी टीम आपको अच्छे से गाइड कर देगी।

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