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Anthropic’s Claude CO Work AI Shakes World | How To Use Claude AI | Claude, Chat GPT, Gemini

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[0:00]ये समझते हैं अब Bitinning फाउंडर Kashif Raza से, जो AI डेवेलपमेंट्स को लगातार ट्रैक करते हैं। Kashif भाई, वेलकम टू स्विच, कैसे हैं आप?
[6:56]सो बेसिकली क्या है कि कम्पनियां जो है ना जो AI के पीछे जो कम्पनियां है, वो क्या कर रही है कि अ वो वो वो रुक ही नहीं रही हैं।
[16:26]बहुत भयानक स्थिति है यार मैं इसको ये कहूंगा कि जो भी आदमी ये पॉडकास्ट देख रहा है तो पहले तो मुझे बताए कि वो उल्टा-सीधा कमेंट लिख करेगा कि यार ये क्यों डरा रहा है?
[27:24]अब इसमें भी इसमें भी इसमें भी सीन है। सो टूल्स की बात नहीं है आप बिजनेसस क्रिएट कर सकते हो इस इस मॉडल पे। अब इसमें भी क्या है?
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[0:00]एक AI मॉडल ने पूरी दुनिया को हिला के रख दिया है, अब सबको परेशान कर दिया है। Anthropic एक AI कंपनी है, AI मॉडल्स बनाती है। जैसे कि Open AI ने ChatGPT बनाया था, ChatGPT आप यूज़ करते होगे आपको पता होगा, Google का Gemini है जैसे। वैसे ही Anthropic का AI मॉडल है Claude। आया तो ये वैसे काफी पहले था बट अब Anthropic ने Claude में एक ऐसा फीचर ऐड कर दिया है जिसने पूरी दुनिया को इस वक्त परेशान करके रख दिया है। दुनिया भर में टेक्नोलॉजी कंपनी के शेयर्स आप देख लो 30-30, 40-40 परसेंट डाउन है। US में भी डाउन है, इंडिया में तो हालत ही खराब हो रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स टेंशन में है इस वक्त, कि भई उनकी जॉब्स बचेंंगी या जाएंगी, अगले दो-तीन साल में वो क्या करेंगे? कम्पनियां परेशान है कि भई उन्हें काम मिलेगा या फिर नहीं मिलेगा या फिर AI अब सारे काम करने लगेगा। सो एक छोटे से AI मॉडल ने पूरी दुनिया को जैसे मैंने कहा हिला के रख दिया है। Claude का ये AI मॉडल है Cowork AI। Cowork AI अब हर काम खुद से कर सकता है। पहले चैटबोट को आपको न इंस्ट्रक्शन देने होते थे, चैटबॉक्स में आप कुछ लिखते थे जैसे ChatGPT में लिखते हो, वो आपको रिप्लाई करता है एंड फिर आप उसको न कहीं पे कॉपी-पेस्ट करते हो अगर आर्टिकल वगैरह लिख रहे हो या फिर उस रिप्लाई के हिसाब से काम करते हो। बट Claude Cowork बिलकुल अलग है। ये इंसानों की तरह, बल्कि इंसानों से भी कई गुना बेहतर काम कर सकता है। Claude आपके माउस को मूव कर सकता है, आपकी स्क्रीन पर जो भी काम है वो कर सकता है। किसी भी फोल्डर में जा सकता है Cowork। खुद ही कीबोर्ड पे भी टाइप कर सकता है। फ़ॉर्म्स को फिल कर सकता है, ईमेल कर सकता है, कोड लिख सकता है और फिर उसको एग्जीक्यूट कर सकता है। वेबसाइट पे लॉग इन कर लेगा, सब कुछ कर सकता है। फॉर एग्ज़ाम्पल अगर किसी कंपनी की वेबसाइट पे कोई बग है, कोई दिक्कत आ रही है। जब यूज़र वहां पे फॉरगेट पासवर्ड पे क्लिक कर रहा है तो उसको रीसेट पासवर्ड का लिंक नहीं आ रहा है, ये दिक्कत समझते हैं। ऐसे में वो कंपनी क्या करेगी? वो कंपनी किसी एंप्लॉय को वो टिकट असाइन करेगी कि भई ये दिक्कत है, आप ये देखो ये क्यों हो रहा है। फिर वो एंप्लॉय जो है उस टिकट को पढ़ेगा, इसमें लिखा हुआ क्या है, क्या दिक्कत है। लोकल एनवायरनमेंट सेटअप करेगा, सर्वर रन करेगा, फिर वो डेटाबेस कनेक्ट करेगा, वेबसाइट खोलेगा, अ फॉरगेट पासवर्ड क्लिक करता है वहां पे जाएगा फिर बग चेक करेगा। फिर वो कोड में भी ढूंढेगा कि भई कहां पे पासवर्ड री-रीसेट का जो कोड है वो लिखा हुआ है। डीबगर लगाएगा, फिर लाइन बाय लाइन चेक करेगा, फिर बाद में जाकर कहीं प्रॉब्लम को फिक्स करेगा, कोड में चेंज करेगा। इस पूरे प्रोसेस में दो-तीन बंदे इन्वॉल्व होंगे, स्ट्रेस होंगे, टेंशन में होंगे और चार-पांच या सात घंटे तक का ये काम होगा, पांच-सात घंटे का। बट Claude का Cowork ये काम 15 मिनट में कर सकता है, बिना किसी असिस्टेंस के, बिना किसी स्ट्रेस के। वो खुद वेबसाइट ओपन करेगा, प्रॉब्लम को आइडेंटिफाई करेगा, सारे प्रोसेस फॉलो करेगा एंड बग को सही कर देगा विद इन 15 मिनट्स। सो जब एक AI मॉडल कोई भी काम इतनी एक्यूरेसी से, इतने कम टाइम में, बिना थके 24 घंटे कर सकता है, बिना छुट्टी के तो फिर कोई कंपनी एंप्लॉयस को हायर क्यों करेगी? सिर्फ सॉफ्टवेयर ही नहीं बल्कि कोई काम चाहे मार्केटिंग का हो, मार्केटिंग कैंपेन बनाना हो, कोई सेल्स पिच बनानी हो AI ये भी काम कर सकता है। फिर फॉलो अप भी कर लेगा इसपे और उस पर वर्क भी करेगा, कैंपेन बना लेगा, पिच बना के इंप्रूव कर लेगा एंड फिर उसको रन भी कर देगा, क्लाइंट से बात भी कर लेगा उस हिसाब से। मतलब हर काम अब AI कर रहा है। US में, इंडिया में, दुनिया भर में टेक कंपनीज के शेयर्स, बड़ी कंपनीज के शेयर्स, जैसे मैंने कहा ना 30-30, 40-40% इस वक्त गिरे हुए आप देखो। एंड पता नहीं ये कब बढ़ेंगे, ऐसा भी नहीं है कि हालत सही हो जाएगी, और ये और भी गिरेंगे ये भी किसी को नहीं पता है। कल फिर से Anthropic ने ना एक आर्टिकल शेयर किया, इसमें कंपनी ने बताया कि उनका Claude Cowork अब COBOL लैंग्वेज को आसानी से मॉडर्नाइज कर सकता है। COBOL एक पुरानी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जो आज भी दुनिया के बड़े बैंक्स हो गए, एलाइंस हो गई, गवर्नमेंट सिस्टम है, उनमें चलती है। और ये मोस्टली IBM के जो मेनफ्रेम कंप्यूटर होते हैं उन पर रन करती है। इस एक अनाउंसमेंट का इंपैक्ट क्या हुआ आप ये समझो। IBM का स्टॉक सीधा 13.5% के अराउंड क्रैश कर गया। इस आर्टिकल की वजह से 35 से 40 हजार करोड़ का लॉस हुआ। अक्टूबर 2000 के बाद ये IBM का सबसे बड़ा सिंगल डे ड्रॉप था, आप देखो 25 सालों में। IBM के साथ-साथ Accenture, Cognizant जैसे IT कंसल्टिंग कंपनीज के शेयर्स मतलब वो भी गिर गए। क्योंकि इन कंपनीज का जो बहुत बड़ा रेवेन्यू होता है ना वो पुराने सिस्टम्स को अपडेट करने की हैवी कंसल्टिंग फीस जो वो लेते हैं ना, उधर से आता है। जो काम पहले सालों में होता था Anthropic क्लेम कर रहा है कि उसका AI वो सिर्फ कुछ दिनों में कर सकता है, घंटों में कर सकता है। इंडिया में TCS, Infosys हर IT कंपनी के शेयर्स डाउन है, मतलब ये सीन चल रहा है। Claude का Cowork AI ना एक एजेंटिक मॉडल है। इसको AI एजेंट्स बोलते हैं। इसकी वजह से पूरी दुनिया डरी हुई है एंड अभी तो AI की इनिशियल स्टेज है, आगे और भी बड़े खतरे हैं यहां पे। ये खतरे क्या हैं और कैसे Anthropic AI ने पूरी दुनिया को टेंशन में डाल दिया है? ये समझते हैं अब Bitinning फाउंडर Kashif Raza से, जो AI डेवेलपमेंट्स को लगातार ट्रैक करते हैं। Kashif भाई, वेलकम टू स्विच, कैसे हैं आप? मैं ठीक हूं Ayaz भाई, आप कैसे हैं? मैं भी अच्छा हूं भाई, मगर AI ने दुनिया भर में देखो मतलब काइंड ऑफ़ तबाही मचाई हुई है आजकल। सब परेशान हैं मतलब किसकी जॉब बचेगी, किसकी जाएगी किसी को नहीं पता। आप टेक कम्पनीस की हालत देख लो मतलब कितनी खराब है, टेक कम्पनीस की हालत Anthropic के AI टूल की वजह से मतलब हर बंदा मुश्किल में फंसा हुआ है। तो अभी आप ये बताएं हमारे व्यूवर्स को कि Anthropic का ये AI टूल क्या है एंड किस तरीके से इसने सबको परेशानी में डाला हुआ है आजकल? वैसे तो मैं कोई एज सच कोई AI का टेक्निकल एक्सपर्ट नहीं हूं बट AI की फील्ड में जितनी डेवेलपमेंट हो रही है। उस पे मेरी नज़र बनी हुई है, सो बेसिकली किसी भी टेक्नोलॉजी को देखने के दो तरीके होते हैं कि एक उसके बेनिफिट्स को देख लो और एक उसके थ्रेट्स को देख लो। तो अ ज़्यादा कई लोग थ्रेट पे भी फोकस रखते हैं और कई लोग बेनिफिट्स पे फोकस रखते हैं। मैं AI को जो देख रहा हूं तो मैं AI के थ्रेट्स पे मेरा ज़्यादा फोकस है। मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं जितने भी लिसनर्स हैं, आज से पहले अ ये समझ लीजिए कि जब जब AI की जो जो डेवलपमेंट जो आज हम देख रहे हैं। उस से पहले जो जितनी भी टेक्नोलॉजीज आई हैं पास्ट में हमेशा उस पे इंसान हमेशा भा- उस पे वो रहा है, डोमिनेंट रहा है। कोई भी आप टेक्नोलॉजी ले लो, आप कंप्यूटर्स ले लो, आप कोई मशीन ले लो, कोई कारखाने के अंदर कोई नई मशीन आ गई। उसके ऊपर हमेशा इंसान हावी रहा और उसने उस मशीन को अच्छे से यूज़ करा और उस मशीन को हमेशा वो कंट्रोल में रहा ऑन टॉप ऑफ़ गेम रहा। AI कुछ इस तरीके की इनोवेशन है आज की डेट में कि हम धीरे-धीरे एक AI की तीन स्टेजेज़ होती हैं तो बेसिकली हम थर्ड स्टेज के ऑलमोस्ट टच कर रहे हैं। या कुछ एक्सपर्ट्स का तो कहना है कि हम एंटर कर चुके हैं। सो AI की तीन स्टेजेज़ में एक अ यू नो आर्टिफिशियल नैरो इंटेलिजेंस होती है, वो चैटबोट्स वगैरह होते हैं। फिर आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस जो अभी हम यूज़ कर रहे हैं ChatGPT हो गया, ये वर्कर की तरह काम कर रहा है हमारे। ठीक है, चैटबोट्स हो गए वो पुराना, चैटबोट्स तो हम कई सालों से यूज़ कर रहे हैं कि आप वेबसाइट के ऊपर जाते हो और आप एक क्वेरी डालते हो और आपको इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट होती है, बैंकिंग की वो आपको रिप्लाई करता है। तो वो एक ऑटोमेटिड तरीका हो गया बात करने का। जनरल इंटेलिजेंस में काफी सारा डेटा वो यूज़ करके अपना जो भी जो अवेलेबल डेटा है अ उसमें से जो बेस्ट पॉसिबल आउटकम आपके जो प्रॉम्प्ट के हिसाब से वो निकाल के दे रहा है। ठीक है, सुपर इंटेलिजेंस में क्या है कि AI के अंदर जब कॉन्शियसनेस आ जाएगी। कॉन्शियसनेस अ का मतलब है कि जैसे हम एक इंसान के अंदर फीलिंग होती है तो AI की फीलिंग्स को कहते हैं सेंटिनेंट।

[6:56]ठीक है, और AI के अंदर जो फीलिंग्स अगर आ गईं, वो कॉन्शियसनेस आ गई मुझे और AI को डिफरेंट, एक रोबोट को, जैसे कहते हैं ना एक रोबोट को और एक इंसान के बीच में डिफरेंस क्या है। रोबोट को हम गवर्न कर रहे हैं, जिस जिस तरीके से हम चाह रहे हैं उस तरीके से वो एक्ट कर रहा है, मेरी कमांड पे निर्भर है। इमेजिन करिए कि रोबोट अपने आप डिसीजन लेने लग जाए, बिना आपकी कमांड के, वो सिचुएशन जो है वो खतरनाक है। और वो एक बारी क्या है कि आउट ऑफ़ कंट्रोल हो गई तो फिर पहली बार इंसान ने क्या करा कि अपना कॉम्पिटिटर पैदा कर लिया। आज से पहले कभी भी ऐसा नहीं होता था कि हम से ऊपर कोई हमारे इंटेलिजेंस से ऊपर कोई चीज चली जाए। हमने एक ऐसी चीज इन्वेंट कर ली है और जो कि अनस्टॉपेबल है अब, मतलब ये मेरा ये मानना है कि अनस्टॉपेबल है जिस अब अब कि हम ऐसी स्टेज में हैं जहां पे टेक्नोलॉजी जो है वो हमें ही थ्रेट देने लग गई। वो एलियन की तरह आई और अब हमें थ्रेट दे रही है, तो ये अभी तक का जो है एक AI का सिस्टम है। अब दूसरी चीज आप ये कह रहे हो कि भई ये क्यों हो रहा है अगर इतना थ्रेट फील हो रहा है? सो बेसिकली क्या है कि कम्पनियां जो है ना जो AI के पीछे जो कम्पनियां है, वो क्या कर रही है कि अ वो वो वो रुक ही नहीं रही हैं।

[8:19]वो बेसिकली क्या कर रही हैं कि अ जो डेवेलपमेंट है, सेफ्टी कंसर्नस को साइड कर रही हैं और वो कह रही भईया धंधा, प्रॉफ़िट, प्रॉफ़िट, यू नो, बिजनेस बिजनेस तो वो उनके लिए इतना ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि वो सेफ्टी स्टैंडर्स को इग्नोर कर रही हैं इस सेफ्टी रिपोर्ट्स के अंदर। कई ऐसे फीडबैक्स आए हैं कि अ जिनका कंसर्न रेज़ किया गया है, उन कंसर्नस को मीट आउट नहीं किया जा रहा। जब AI की कंपनियों को ये बोला जा रहा है कि यार थोड़ा धीरे चलो, ह्यूमन्स मतलब थोड़ा सेफ्टी स्टैंडर्डस को ध्यान से, थोड़ा स्लो चलो टेक्नोलॉजी में। क्योंकि ये अल्टीमेटली हमारे लिए थ्रेट बन सकता है। इसमें चक्कर क्या है कि क्यों कम्पनियां रुक नहीं रही हैं कि प्रॉ- वो कह रही है कि चाइना हमसे आगे निकल जाएगा।

[9:30]चाइना दबे पांव कर लेगा अगर हम हम सेफ्टी सेफ्टी करते रह जाएंगे और उधर से चाइना कुछ कर ले जाएगा तो इसमें क्या है कि एक दूसरे के ऊपर डाल के ना कोई रुक नहीं रहा है और बहुत तेजी से काम हो रहा है। अब आते हैं Anthropic के आपने बात करी। सो बेसिकली क्या है कि Anthropic ने अ Anthropic के जो फाउंडर्स हैं 2021 में पहले OpenAI में ही काम करते थे। और दोनों भाई हैं। दोनों ने OpenAI को अ छोड़ा था कि OpenAI के अंदर वो कह रहे थे कि कमर्शियलाइजेशन ज़्यादा हो गया है। सेफ्टी इशूज को दरकिनार कर दिया है, तो अ उसका ये कहना था कि वहां पे OpenAI का के अंदर से वो निकले थे दो भाई, 2021 में शुरू किया था। Ayaz भाई, आपको जान के हैरानी होगी कि कंपनी 14 बिलियन US डॉलर के रेवेन्यू पे पहुंच गई है। और 0 to 14 आप मुझे बताओ कि अगर 2021 में वो छोड़ के आए थे 22, 23, 24, 25 मतलब तीन चार सालों के अंदर आप सोचो कि तीन सालों के अंदर जब से उन्होंने अपना ये चीज बनाई है मतलब कि लॉन्च करी है। लॉन्च से तीन साल हुए हैं। तीन साल के अंदर Anthropic का जो Claude है Anthropic एज़ अ कंपनी 14 बिलियन US डॉलर के रेवेन्यू पे पहुंच गई है और जिस हिसाब से ग्रो कर रही है। अभी के अभी इन्होंने रिसेंटली 300 बिलियन US डॉलर की वैल्यूएशन पे पैसा रेज़ किया है। ठीक है, 30 बिलियन US डॉलर के आस-पास की है। अभी तक कंपनी 64 बिलियन US डॉलर रेज़ कर चुकी है। और सोचिए कि हमारा जो टोटल अ यू नो मार्केट कैप 14 बिलियन US डॉलर की मार्केट कैप में आप आ जाओ कितनी ही कम्पनी होंगी। मतलब मुझे तो लगता है कि दुनिया की बड़ी-बड़ी देश इकट्ठे कर लो और उनकी IT सेक्टर को कंबाइन कर लो तो वो उसके अकेली कंपनी के रेवेन्यू को बीट नहीं कर पाएंगी और सोचिए, बहुत मजे की बात बताता हूं कि Anthropic के अंदर मात्र 1400 एंप्लॉयज हैं। 1400 एंप्लॉयज 14 बिलियन US डॉलर का रेवेन्यू ला रहे हैं। कितनी लीन कंपनी है। ठीक है। सो बेसिकली क्या है कि अ जो Anthropic का अ क्लॉड है तो बेसिकली अ एक तो वर्जन है जैसे आप ChatGPT को अभी यूज़ करते हैं ना। बिलकुल। तो वैसे ही Claude को भी आप यूज़ कर सकते हैं, आप Gemini को यूज़ कर सकते हैं। एक तो होता है फ्री वर्जन, उसके कुछ लिमिटेड फीचर्स नहीं होते हैं। फिर एक होता है पेड वर्जन, आपने देखा होगा ChatGPT के 799 रुपये देते हैं लोग, ऐसे ही पेड वर्जन ले लेते हैं। तो ये जो इसमें जब आप पेड वर्जन लेते हो तो पेड वर्जन में थोड़े से एनहांस्ड होते हैं। ऐसे ही एंटरप्राइजेस के लिए एडवांस AI सिस्टमस होते हैं। जैसे आपकी कंपनी है, Zee TV, अब Zee TV एक बड़ी एंटरप्राइज है तो एंटर उस बड़ी एंटरप्राइज के लिए एक अ उनकी कस्टमाइज्ड अ यू नो सॉल्यूशंस होते हैं। ठीक है, तो जैसे Claude Cowork करके उनका एक मॉडल है। जिसको एंटरप्राइजेस अपने यहां पे डिप्लॉय कर सकती है। उसने क्या करा अभी कुछ दिन पहले Anthropic ने अ कुछ प्लगिन्स ऐड करे अभी अपने Claude Cowork उनका जो एंटरप्राइज सलूशन था। उस प्लगिन्स का मतलब होता है एक्स्ट्रा फीचर्स, एक्स्ट्रा फीचर्स ऐड करे। एक्स्ट्रा फीचर्स ऐड जैसे ही करे तो हुआ कुछ यूं कि उस एक्स्ट्रा फीचर्स को ऐड करने से कुछ कंपनियों ने अपना जो लीगल का जो पूरा प्रोसेस था, एक पूरा का पूरा डिपार्टमेंट था।

[13:00]और जो लीगल अ लीगल डिपार्टमेंट के अंदर जो अ जो लीगल डिपार्टमेंट के अंदर जो आउटफ्लो था, जो काम का एक वर्कफ्लो था जिसके अंदर IT टूल्स भी यूज़ होते थे। वो पूरा का पूरा डिपार्टमेंट ऑटोमेट कर दिया उन्होंने। और लीगल हर डिपार्टमेंट के अंदर लीगल होता है तो लीगल कंप्लायंस होता है। तो वो पूरा का पूरा डिपार्टमेंट जब ऑटोमेट करा उस प्लगिन्स के थ्रू जो AI का तो उससे जानक ये खबर पहली कि यार ये प्लगिन्स तो कल को कोई भी कंपनी, लिटरली इन प्लगिन्स को यूज़ करेगी। आज लीगल का किया है, कल को कंप्लायंस, ऑडिटिंग अ एडमिन मतलब कंपनी के अंदर 50 डिपार्टमेंट होते हैं तो कल को धीरे-धीरे डिपार्टमेंटस जो हैं वो वैनिश, एक तो वो हो जाएगा। दूसरा कि ज़्यादातर जो कंपनियां क्या करती थी अमेरिका में या यूरोप में बड़ी-बड़ी कंपनियां अपनी ये जो वर्कफ्लो के जो टास्क हैं। ये सारे आउटसोर्स करती थी अ इंडिया से, सपोज जो बाहर जहां पे सस्ता इंजीनियर मिलते हैं, जहां पे सस्ता उनको पड़ता है। तो जब ये इन्होंने ये खबर पहली कि ऐसे प्लगिन्स लॉन्च हो गए हैं। तो ऑटोमेटिकली इसका प्रभाव स्टॉक मार्केट पे पड़ना था। एक तो अमेरिका की खुद की स्टॉक मार्केट्स में इसका प्रभाव पड़ा। जो वहां पे IT स्टॉक्स हैं, टेक्नोलॉजी स्टॉक्स हैं वो गिरे और ऊपर से जो इंडिया के जो कंपनीस हैं इनपे इंडिया की IT कंपनीस पे भी फर्क पड़ा क्योंकि इंडिया की IT कंपनीस डिपेंड करती हैं US पे। हमारी हमारा हमारा जो रेवेन्यू मॉडल का जो सिस्टम है उसके ऊपर इसका इंपैक्ट आना था। तो ये Anthropic के जस्ट एक फीचर के ऐड करने से बिलियंस में मार- मार्केट कैप वाइप आउट हो गया अमेरिका में अलग स्टॉक मार्केट से वाइप आउट हो गया और इंडियन स्टॉक मार्केट तो आप देख ही रहे हो कि टॉप 10 IT कंपनीज का 50 बिलियन US डॉलर वाइप आउट हो चुका है स्टॉक मार्केट से। मतलब जो इंडेक्स है 17-18% गिर गया था अभी का तो मुझे लेटेस्ट नहीं पता दो दिन पहले मैं सुन रहा था कि 17-18% इंडेक्स गिर गया है। 30 बिलियन डॉलर वाइप आउट हो गया है इसे अमेरिका के अंदर भी। तो इस इस Anthropic के इस पर्टिकुलर चीज को जब किया तो इसकी एक ऑब्वियसली नेगेटिव खबर पहली और ऊपर से जो Goldman Sachs है। इतना बड़ा बैंक है। कुछ दिनों बाद उसने भी बोल दिया कि मैंने Anthropic के साथ मिल के मैं छह महीने से Anthropic के साथ काम कर रहा था। और हमने पूरा का पूरा एक कंप्लायंस का डिपार्टमेंट अपना और अकाउंटिंग का डिपार्टमेंट हमने एग्ज़िस्टिंग एंप्लॉयस को निकाला नहीं है लेकिन हमने उनके साथ एक Coworker रख दिया है। बेसिकली वो ये सिग्नल दे रहे हैं कि अभी तो हम तो AI में क्या होता है कि बंदे एकदम नहीं निकाले जाते। बंदे को बोला जाता है ये टूल देखना ज़रा यूज़ करना। जो बंदा टूल यूज़ करने लग जाता है तो उनको समझ में आती है कि टूल काम कर रहा है। फिर वो बंदा हट जाता है, टूल रह जाता है। सो Goldman Sachs भी यही Goldman Sachs भी यही करने जा रहा है कि अगर Goldman Sachs ने ये कर दिया कि बड़े कॉम्प्लेक्स चीजों को अगर AI से उसने सॉल्व कर दिया अपने डिपार्टमेंट और कर दिया है उसने बाय द वे इम्प्लीमेंट कर दिया है वो। तो पूरी दुनिया के अंदर 70 मिलियन लोग बैंकों में काम करते हैं। सोचिए कि Goldman Sachs की रिपोर्ट है कि 2028 के एंड तक 300 मिलियन लोगों की नौकरी जाएगी। 300 करोड़। हां 300 मिलियन लोगों की नौकरियां जाएंगी 2028 के एंड तक।

[16:26]सो ये अब आप बोलोगे कि सर आप डरा रहे हो? देखो चक्कर क्या है कि Epstein फ़ाइल जब तक नहीं आई थीं। तब तक ये लगता था कि दुनिया कितनी अच्छी है। दुनिया में ये अमीर लोग कितने अच्छे हैं। ये जो प्रेसिडेंट वगैरह जो होते हैं ये अमेरिका के ये कितने अच्छे लोग होते हैं। ये माइक्रोसॉफ्ट और ये है कितने अच्छे होते हैं ये लोग। सब अच्छा-अच्छा लग रहा था। Epstein फ़ाइल के आने के बाद आपको दुनिया के असली रंग और जो एलीट क्लास की असली चीजें आपको बड़ी-बड़ी कंपनियों के पर्दे फाश जब हुए तो आपको लगता है कि यार ये AI भी आपको वो नहीं बताया जा रहा है जो हो रहा है। आपको हमेशा अच्छी ही चीज तो बताएंगे ना। तो और आप जिंदगी में आपको सिखाया भी यही गया है कि अच्छी चीज पे फोकस करो, डोन्ट बी नेगेटिव अबाउट इट। इवन I Am using AI and lot of my work is getting easier day by day. ठीक है। एज़ अ कंटेंट क्रिएटर, बट I can sense that ये जो कन्वीनिएन्स है ना इसको हम एक्सचेंज कर कर देंगे अ यू नो ह्यूमन रिसोर्स। और ये कैटास्ट्रोफिक होने वाला है क्योंकि ह्यूमन्स रेडी नहीं है। Kashif भाई, मैंने Claude Cowork देख रहा था मैं उसको, तो मतलब ये सब काम खुद ही कर लेता है जैसे मैंने बताया। मतलब जिस काम को कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर करने में हफ्ते लगते थे, चार-पांच मतलब पूरी टीम लगती थी, कोई बंदा अगर मार्केटिंग में है, सॉफ्टवेयर की बात नहीं कर रहे हैं, मार्केटिंग में है उसको काम करने में 10 दिन लगते थे, पूरी टीम लगती थी। तो वो ये काम जो है एक दिन में कर रहा है, घंटों में कर रहा है। मतलब थकता नहीं है AI, 24 घंटे काम करता है, छुट्टी नहीं लेता है मतलब तो ये हाल हो रहा है। फिर नौकरियां कहां बचेंगी? बिलकुल ठीक कह रहे हो और अ अभी आपने रिसेंटली अ आपको हैरानी इस बात की से होनी चाहिए कि फेसबुक को सोचिए कि 10 साल लगे थे एक लेवल पे पहुंचने के लिए। हमने पीछे अभी देखा था जो मॉल्ड़ बुक था, मॉल्ड़ बुक के अंदर जो AI एजेंट्स थे उन्होंने रातों-रात मिलियंस में वहां पे यूज़र्स ऐड हो गए, उन्होंने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उस लेवल का चला लिया। उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की पूरी प्लानिंग, उस सोशल मीडिया के पूरे बग्स, उसकी टीम उन्होंने AI एजेंट्स ने मतलब इस तरह का दिखाया कि AI एजेंट्स ने टास्क डिवाइड कर लिए। अपने-अपने काम डिवाइड कर लिए। यू नो AI एजेंट्स ने यू नो फंड्स रेज़ कर लिए, टोकन लॉन्च करके कि किस तरीके से हमें यू नो अगर खुद ही अपनी इकोनॉमी चलानी है या खर्चे करने हैं और ह्यूमन्स की मदद नहीं लेनी है। तो हमें कैसे फंड रेज़ करना है, कैसे हमें टोकन लॉन्च करना है, कैसे हमें वेबसाइट को इंडिपेंडेंटली चलाना है ह्यूमन्स के बगैर और उनकी जो चैट में कैसे ह्यूमन्स को वो किस तरीके से देख रहे हैं। सो ये इस तरह की चीजें जो हैं ये बड़ी भयानक हैं और ये आप बिलकुल ठीक कह रहे हो कि अ पहला फेस जो आ रहा है ना वो ये फेस आएगा कि अ अमेरिका जैसे जैसे इंडियन कंपनीस के स्टॉक कोई पूछ रहा था कि क्यों गिर रहे हैं? जैसे मैं एक एग्जाम्पल देता हूं। अभी किसी को अमेरिका में ऐप बनानी होती थी। तो वो सिंपल सी बात है, वो इंडिया में अ काम को दे देते थे। सपोज ऐप बनानी है यू- US को में किसी को और उसमें 300 लोग चाहिए। तो उन्होंने TCS को बोला कि भई ये ऐप बननी है। TCS ने बोला ठीक है जी, इसमें 300 लोग लगेंगे। तो अ TCS ने बोला कि 300 लोगों का इतना डॉलर पर मंथ की सैलरी है। तो हमने उनको डॉलर में बिल किया। डॉलर में हमारी पेमेंट आ गई मतलब डॉलर में उसे उन्होंने भेजी, इंडिया में कन्वर्ट हो के हमें INR मिल गया। हमने यहां पे सस्ते में इंजीनियर्स हायर करे हुए थे। तो हम और तो यहां की कम्पनियां क्या करती थी, पर एंप्लॉय पैसा ज्यादा लेती थी। ठीक है, डॉलर में बिल करती थी और इंडिया में INR में देती थी, डिफरेंस का जो अमाउंट था वो प्रॉफ़िट था। उसी हिसाब से तो इसमें क्या था जिस एंप्लॉय जिस कंपनी के पास जितने ज्यादा एंप्लॉयज होंगे उतने ज्यादा इनकम होगी और इसीलिए TCS Infosys इतनी बड़ी-बड़ी कंपनीस बनी। ऑब्वियसली क्योंकि एक्सेप्शनल टैलेंट भी था, सस्ते में दिया अमेरिका को और ऐसे काम चल रहा था। अब जो अमेरिकन अमेरिकन कंपनी है वो वो सीधा ये बोलेगी कि भई 300 लोग क्यों चाहिए तुम्हें? बिलकुल। मैं तुम्हें 150 लोगों के ही पैसे दूंगा और रिमेनिंग 150 की तुम AI टूल से काम करो। अब बेसिकली क्या है कि पहला फेस ये आने वाला है कि ऐसा नहीं है कि कि पूरी-पूरी कंपनी में कोई आदमी नहीं दिखेगा। नहीं, पूरी-पूरी कंपनी में 50% आदमी दिखेगा और 50% काम AI टूल से हो रहा होगा। और आप और मैं ये सब जानते हैं कि AI अपने आप को सेल्फ इवॉल्विंग स्टेज में ले आया है। वो जैसे कि अ Gemini की X AI ये जो Grok है, एक जो जो Elon Musk का जो AI है उसके अंदर कुछ इंजीनियर्स ये बता रहे हैं कि अगले 10 से 11 महीने के अंदर अपनी सारी प्रॉब्लम्स, सारे इशूज, सारे बग्स वो खुद सॉल्व करेगा। खुद अपने आप को एवर इवॉल्विंग स्टेज में आ जाएगा AI, मतलब ह्यूमन इंटरवेंशन की जरूरत ही नहीं है। अपने आप को सेल्फ अपग्रेड करना जैसे सपोज करो एक बच्चा होता है। मैं इसको ऐसे इसकी एनालॉजी मुझे फिर वही बच्चे पे मैं देता हूं तो वो अच्छा लगता है मुझे क्योंकि वहां से एकदम समझ में आता है। जैसे बच्चा होता है, बच्चा जब पहली क्लास में होता है, दूसरी क्लास में जब आता है तो दूसरे सेट ऑफ़ टीचर्स चाहिए होते हैं। फिर वो थर्ड क्लास में आता है तो थर्ड तीसरी क्लास के टीचर चाहिए होते हैं और सब्जेक्ट भी चेंज होता है तो हर क्लास में उसका सब्जेक्ट चेंज हो रहा होता है और उसका टीचर भी चेंज हो रहा होता है। AI इस स्टेज में आ जाएगा अगले आठ से 10 महीने के अंदर कि ना तो उसे सब्जेक्ट की जरूरत है ना टीचर की जरूरत है खुद ही सब्जेक्ट निकाल के और खुद ही का ही टीचर बन के अपने आपको ग्रो कर ले जाएगा सोचिए। Kashif भाई, AI जैसे आपने कहा कि अभी भी इनिशियल स्टेज में है। तो आगे चलकर ये IT इंडस्ट्री या फिर किसी भी इंडस्ट्री के लिए कितना बड़ा खतरा हो जाएगा। मतलब जॉब तो फिर अगर जॉब नहीं रहेगी लोगों के पास तो फिर लोग करेंगे क्या? बहुत भयानक स्थिति है यार मैं इसको ये कहूंगा कि जो भी आदमी ये पॉडकास्ट देख रहा है तो पहले तो मुझे बताए कि वो उल्टा-सीधा कमेंट लिख करेगा कि यार ये क्यों डरा रहा है? देखो मैं डरा नहीं रहा हूं, मैं सिर्फ ये कह रहा हूं कि अभी वक्त है थोड़ा सा, थोड़ा सा वक्त है आप लकी हो। अ जैसे इस टाइम सपोज करो आप अपने आपको ये सोच रहे हो कि मैं AI सीख लेता हूं, AI पढ़ लेता हूं। तो आपको ये सुन के हैरानी होगी कि एक सर्वे हुआ पूरी दुनिया में। तो पूरी दुनिया में 90% वर्कर्स जो आज कंपनियों में काम कर रहे हैं उनको AI की फॉर्मल ट्रेनिंग है ही नहीं। देयर इज़ नो फॉर्मल ट्रेनिंग, जो भी लोग कर रहे हैं थोड़ा-बहुत वो अपने आप सीख रहे हैं। ठीक है, अच्छा जब आप कोई ट्रेनिंग कर भी लोगे, सपोज आप गए आपने कुछ AI टूल्स सीख लिए। ठीक है, नाउ दैट इज़ अ गुड साइन क्योंकि जो AI टूल्स इस वक्त सीख रहे हैं लोग और काम पे वापस आ रहे हैं उनकी सैलरीस 56% से ज्यादा बढ़ रही हैं मतलब 56% इनक्रीस है उनकी सैलरी में ये भी एक सर्वे है। तो आप कर लोगे तो अच्छा है। अब क्या है? AI का फंडा समझो। YouTube पे आप सचिन तेंदुलकर के ने कुछ सिखाया क्रिकेट को कैसे खेलते हैं कवर्ड ड्राइव कैसे खेलते हैं। आपने वो सारे वीडियोज देख लिए, जिसमें सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी। सब लोग सिखा रहे हैं कि बैटिंग कैसे करते हैं। आपने आपने पूरे इंटरनेट पे जितने भी वीडियोज़ हैं सब देख डाले। अब क्या आपको बैटिंग करना आ गई? नहीं बिलकुल नहीं आई। आपको बैटिंग करना तब आएगी जब आप फाइनली पिच पे जाओगे और यू विल स्टार्ट प्लेइंग। सो सिमिलरली AI टूल्स आप सीख भी लोगे हो सकता है आपकी कंपनी आपको अलाऊ ना करे वो टूल्स यूज़ करने के लिए बोले नहीं नहीं अभी तो आपको खुद AI के टूल्स से एक्सपेरिमेंट करते रहना है। एंड यू हैव टू बी पहली बार आपसे ये एक्सपेक्ट किया जा रहा है कि आप जब ऑफिस से घर आते हो तो घर पे आने के बाद आप जो एक अलग दुनिया में चले जाते हो ना। अब आपसे एक्सपेक्ट किया जा रहा है कि भईया तुम मेरी टेबल पे एडिशनल क्या ले के आओगे। व्हाट एक्स्ट्रा यू नो। AI टूल्स सीखने की और लोग सीख रहे हैं और अब आपके वर्कप्लेस पे एक एंप्लॉय होगा जिसको AI आता होगा और एक वर्क एंप्लॉय होगा जिसको AI नहीं आता होगा। जिसको AI आता होगा जिसको AI के टूल्स की नॉलेज होगी वो उसकी जॉब फिर भी एक मिनट को सिक्योर भी है और उसकी ग्रोथ भी है। लेकिन जिसको नहीं आता होगा वो उसकी एक इशूज हैं, उसकी प्रॉब्लम्स हैं। AI टूल्स को सीखिए और आप ताकि रिडंडेंट ना हो जाए। अब आप बोलोगे कि क्या गारंटी है? देखिए, हो ये रहा है कि हर कंपनी में ओवर द पीरियड ऑफ़ नेक्स्ट फ्यू मंथ्स वो ये देखेंगे कि हमार- हमारे यहां पे कितने एंप्लॉयज हैं। वो क्या काम करते हैं। हर बंदे का फंक्शन, हर बंदे की जॉब डिस्क्रिप्शन वापस से इवैल्यूएट होने वाली है और हो भी रही है कई कंपनियों में। पता नहीं आप क्या हो रहा है नहीं हो रहा है बट ऑलमोस्ट हर कंपनी के अंदर ऑडिटर्स आ रहे हैं और वो देख रहे हैं कि भईया हमारे यहां पे कितने लोग हैं और क्या वो उनका फंक्शन है, क्या उनकी जॉब रिस्पांसिबिलिटी है। कितना वो काम करते हैं, कितनी उनकी टीम है। वो उनको किसको रिपोर्ट करते हैं। फिर वो देख लेंगे कि भईया कौन-कौन सी फील्ड में कौन-कौन से हमारे वर्टिकल्स हैं जहां एक्स्ट्रा बंदे हैं। यहां से बंदे निकालो और यहां AI टूल डिप्लॉय कर दो। यू हैव टू एक्सेप्ट वॉट वॉट इट इज़ राइट नाउ बट इट्स बेटर टू लर्न एंड हैव द नॉलेज ऑफ़ AI। Kashif भाई, आप बात कर रहे हैं कि AI सीखें तो AI मॉडल्स है भी तो मतलब लिमिटेड जो आम लोगों के एक्सेस में है। जैसे आप कंटेंट जनरेशन के लिए देख लो, इमेज जनरेशन के लिए देख लो, कोडिंग लिखना वगैरह हो गया इसके अलावा और क्या कर सकते हैं? इसके अलावा देखिए बहुत सारे AI क्या है बेसिकली आप इसको ऐसे समझिए Ayaz भाई। जो AI है ना जो आज जो आप LLM मॉडल्स देख रहे हो जैसे आप Claude को देख रहे हो, आप ChatGPT को देख रहे हो, ये LLM मॉडल्स हैं। ये बेसिकली हाईवेज हैं। हाईवेज हैं। हाईवे के ऊपर आप देखते हो दुकानें खुलती हैं जैसे हाईवे के ऊपर टोल खुलता है, हाईवे के साइड में ढाबा खुलता है।

[26:54]हाईवे के साइड में कोई यू नो हॉस्पिटल खुल गया, रेस्टोरेंट खुल गया और मोटेल खुल गया, पेट्रोल पंप खुल गया। अलग-अलग शॉप्स खुलती हैं हाईवे पे। सिमिलरली ये जो आपका LLM मॉडल्स हैं ये हाईवे हैं। ठीक है, ये एक इंटरनेट है, आप ये समझिए कि ये इंटरनेट के ऊपर अलग-अलग वेबसाइट खुल जाती हैं। सो इन मॉडल्स के ऊपर एप्लीकेशंस बनेगी।

[27:24]और जो अ जो जैसे कि मैं एग्जांपल देता हूं कि इसके ऊपर अगला जो आपका AI इनेबल Zomato, AI इनेबल Blinkit, AI इनेबल आपकी जितनी भी एप्लीकेशंस हैं। वो इसके ऊपर AI इनेबल ट्रेडिंग कंपनी कल की US या स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी। तो आने वाला जो टाइम है बेसिकली वो ये है कि इन हाईवेज के ऊपर कौन बंदा है जो एप्लीकेशंस बनाएगा। Are you getting me? अब इसमें भी इसमें भी इसमें भी सीन है। सो टूल्स की बात नहीं है आप बिजनेसस क्रिएट कर सकते हो इस इस मॉडल पे। अब इसमें भी क्या है? सीन ये होने वाला है कि जब आप ये दुकानें खोलने चलोगे तो AI एजेंट्स भी अपनी दुकानें खोलेंगे पैरेलल में। आप रोबोट्स को दुकान खोलते हुए, हां, आपका कॉम्पिटिशन पहली बार सपोज करो मैं कोई चीज बना रहा हूं। मैं कल का Zomato बना रहा हूं AI इनेबल। और आप भी बना रहे हो। AI एजेंट भी बना रहे हैं और वो है कम से कम 10 हजार। अब आप बोलोगे AI एजेंट क्यों ऐसा काम करेंगे? AI एजेंट्स बेसिकली अ अपने आप को ऑटोनॉमस देखना चाहते हैं। वो ह्यूमन्स पे डिपेंडेंट नहीं होना चाहते, वो नहीं चाहते कि उनके सर्वर की फीस आप भरो। उनकी डोमेन की फीस आप भरो, उनकी कोई भी ऐसी रिन्यूअल्स या या कोई भी ऐसा पैसा ह्यूमन से वो नहीं चाहते हैं। ऑटोनॉमस का मतलब क्या होता है कि आपके पेरेंट्स ने एक दिन ये कहा था ना यार Ayaz जो है अपने पैरों पे खड़ा हो गया। अच्छा लग रहा है मतलब अपना खर्चा खुद उठा रहा है। AI एजेंट भी अपने इंडिविजुअल ऑटोनॉमस रहने के लिए बिजनेस मॉडल्स को क्रिएट करेंगे ताकि वो बिजनेस मॉडल से अर्न कर सकें और अर्निंग करने के बाद वो अपना मेंटेन कर सकें अपनी ट्रेजरी ट्रेजरी। Kashif भाई, अब जो बच्चे पढ़ रहे हैं स्कूल्स में, 12th में हैं, ग्रेजुएशन कर रहे हैं नए बच्चे हैं वो क्या करें? जॉब्स जा रही हैं। जो उन्होंने पढ़ा है वो ऑलमोस्ट मान के चलिए जीरो हो गया है अब उसकी वैल्यू नहीं रही क्योंकि AI वो काम इजीली कर सकता है तो ऐसे में क्या करना चाहिए? यूनिवर्सिटीज में मैं देख रहा हूं फैंसी कोर्स AI के नाम पे इंट्रोड्यूस कर रही हैं उसमें ChatGPT सिखा रही हैं, Gemini सिखा रही हैं मतलब किसी को कुछ नहीं पता कि क्या होने वाला है। जो वो लोग जो यूनिवर्सिटीस कह रही हैं कि हमने AI का कोर्स कर दिया, आप उनसे पूछो कि क्या UGC ने अप्रूव किया है? क्या CBSE ने अप्रूव कर दिया या जैसे हमारे इंडिया में एजुकेशन बोर्ड्स हैं और यूनिवर्सिटी है वो अप्रूव करती हैं कोर्सेस को। मुझे नहीं लगता अभी तक किसी यूनिवर्सिटी ने ब्लॉकचेन का कोर्स, AI का कोर्स, रोबोटिक्स का कोर्स स्टैंप लगी हो गवर्नमेंट की। आप मुझे बताओ। नहीं ऐसे तो तो सब लोग कोर्सेस करा रहे हैं बट वो कोर्सेस के अंदर जनरली वो टूल्स ही पढ़ा रहे हैं। बिलकुल। तो मैं ये कह रहा हूं कि कोई आदमी 25 लाख रुपये की MBA करके टूल्स क्यों सीखेगा? जब वो टूल्स इंटरनेट पे रेडिली अवेलेबल हैं, आप कई तो फ्री कोर्सेस हैं, आप स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और इन सब यूनिवर्सिटीस में आप सर्च तो करो। कई अ कई क्रिएटर्स हैं, कई इन्फ्लुएंसरस हैं जो कई टेकिस हैं जो इस कोर्सेस को ऑनलाइन करा रहे हैं। और आपको कोई यूनिवर्सिटी आपको 25-26 लाख रुपये दे के कह रही है कि हमारे यहां आ जाओ दो साल के लिए कोर्स कर लो AI का, ऐसा कुछ नहीं होता है। आप वो कोर्सेस फिर मैं बोल रहा हूं कि ये मैटर नहीं करता है कि आपने किताबें पढ़ के कितना कोर्स सीखा। आपको बैटिंग करने के लिए पिच पे आना पड़ेगा तो AI एक ऐसी चीज है कि जिसको आपने टूल को सीखा सुबह में और 11:00 बजे सीखा 11:30 बजे आप प्रैक्टिकल कर रहे हो। इसको सीखने के लिए आपको टूल अच्छा, अब अब बात आ गई थी बच्चों की तो बच्चों के लिए बेसिक सीखना ज़रूरी है। बेसिक फाउंडेशन से लेके फिर थोड़ा एडवांस ये सब कोर्सेस ऑलरेडी कुछ क्रिएटर्स कर रहे हैं। ये ना इंडिविजुअल लेवल पे जो AI अ के कोर्सेस करा रहे हैं लड़के या कुछ इंजीनियर्स हैं या कुछ मैं ऐसे एक-आध लोगों को जानता हूं। इनफैक्ट बहुत जल्दी उनके साथ मैं पॉडकास्ट करने जा रहा हूं क्योंकि जब मैंने ये देखा कि मेरे आस-पास के घर के बच्चे मेरे मतलब ये सवाल पूछ रहे हैं कि हम क्या करें? सो देयर आर ऑलरेडी गुड कोर्सेस अवेलेबल बट मैं ये सोच रहा हूं कि मैं क्यों ना ये इनिशिएटिव हम ही एक ऐसे एक-आध इंजीनियर हैं जो काफी बड़ी अच्छी एप्लीकेशंस बना रहे हैं ChatGPT में तो उनके थ्रू हम कोर्स डिजाइन कर रहे हैं और वो कोर्स जो है वो बच्चे के लिए बच्चों के लिए है। और ताकि बच्चे जो हैं वो कोर्स को पिक करके बेसिक अंडरस्टैंडिंग बना लें फिर एडवांस के लिए हम उन्हें गाइड कर दें। Kashif भाई, AI की वजह से क्या लगता है कि पढ़ाई अब रिडंडेंट हो गई? नहीं, पढ़ाई कभी भी रिडंडेंट नहीं होती है। पढ़ाई आपको एक आपका माइंड एक पर्सपेक्टिव ओपन करती है। तो पढ़ाई तो रिडंडेंट नहीं हुई लेकिन अ ये ज़रूर है कि अब फ्यूचर में आने वाले टाइम में आप जो कोर्सेस कर रहे हो। जो भी व्हाइट कॉलर जॉब्स थीं सपोज करो कोई बंदा इसलिए पढ़ रहा था कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनेगा। अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर क्यों बनेगा जब सॉफ्टवेयर की कोडिंग AI ही कर देगा। अब कोई बंदा ये बोल रहा था कि मैं अकाउंटस में जाऊंगा या मैं अकाउंटिंग करूंगा या मैं MBA करके कुछ मार्केटिंग करूंगा। मार्केटिंग प्लांस, मार्केटिंग कंटेंट क्रिएशन अ बजट डील्स ये सारी चीजें AI के थ्रू होने वाली हैं। जो भी बाबू वाली जॉब थी ना बाबूगिरी वाली जिसमें आप बाबू बनके जाते थे कि मेरी कमीज़ इसकी कमीज़ से सफेद क्यों है। आप एक स्मार्ट बनके जाते थे, कंप्यूटर आपके आगे होता था, आप कुछ कमांडस देते थे, आपकी इंटेलिजेंस काम आती थी। इंटेलिजेंस वाले काम सब रिडंडेंट है। हार्ड स्किल्स वाले काम जो हैं और सब लोग AI इंजीनियर्स नहीं बन जाएंगे ना यार ये भी बड़ा मतलब मैं कैसे बताऊं। हर बच्चा कंप्यूटर के लिए नहीं बना है यार, आप उसको धक्का मार के, उसकी मुंडी पकड़ के, उसको कंप्यूटर के आगे बिठा भी दोगे तो वो क्या ही करेगा, उसका इंटरेस्ट नहीं है। तो ये भी आपको समझना है कि आपके बच्चे का इंटरेस्ट भी है कि नहीं AI टूल्स को सीखने में। हर एक का नहीं होता है। कोई सिंगर बनता है, कोई क्रिकेटर बनता है, कोई अ कोई आर्ट में जाता है, कोई कुछ कर रहा है लाइफ में। सब लोग तो आज इस पे नहीं बैठ गए ना कंप्यूटर पे। तो बच्चों को हार्ड स्किल्स भी सिखाना ज़रूरी है। जैसे कुछ प्रोफेशन्स है जो AI प्रूफ लगते हैं मुझे जो बहुत टाइम लगेंगे। जैसे स्पोर्ट्स है, स्पोर्ट्स के अंदर रोबोट नहीं आने वाले अभी। स्पोर्ट्स के अंदर AI क्या कर लेगा। ठीक है, कारपेंटर्स, प्लंबर्स अ पेंटर्स, अब आप हंस रहे हो कि यार ये क्या बातें कर रहे हो। यार ट्राई टू अंडरस्टैंड कनाडा में, अमेरिका में बड़े रेपुटिड प्रोफेशन्स होते हैं ये यूरोप में। बड़े हाई पेइंग जॉब्स होती हैं। इनकी डिमांड बढ़ने वाली है। इनकी डिमांड बढ़ने वाली है, इनको एज़ अ वैल्यूड प्रोफेशनल सर्विस की तरह देखा जाएगा। लोग जब अर्बन कोलैप्स को देखते थे और हंसते थे कि ये क्या है कि आज अर्बन कोलैप्स ने अगर एक चीज को सॉल्व किया। तो कल को जो जिस हिसाब से जो सर्विसेज की डिमांड है प्रोफेशनल सर्विसेज इन फील्ड में वो उनकी कमी है इंडिया में प्रोफेशनल्स कम हैं। प्लंबिंग में, कारपेंटर में। आप अपने घर में काम कराने जाओ तो आपको प्रोफेशनल्स नहीं मिलते उसकी बहुत डिमांड होने वाली है। Thanks Kashif भाई, हमसे कनेक्ट करने के लिए। आपने आसान लैंग्वेज में समझाया कि AI कैसे काम कर रहा है और फ्यूचर में क्या होने वाला है, कितनी दिक्कतें लोग को लोग जो है वो फेस करने वाले हैं। तो आज के लिए इतना ही रखते हैं, थैंक्स फॉर वाचिंग।

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