[0:00]बाबा कभी-कभी एक भाव आता है कि ब्रज में जन्म दिया है। ब्रज में जन्म लेने के बाद भी ऐसी सेवा दी है कि ब्रजवास नहीं होता। हां, अगर हम ब्रजेंद्र नंदन के आश्रित हैं और ब्रज किशोरी के चरणों का चिंतन करते हैं और हमें यह सेवा मिले कि हम जा जा करके समाज के सोए हुए लोगों को जगाकर नाम रूप लीला धाम में लगाए तो हमें इस बात का पश्चाताप नहीं होना चाहिए कि हमें धाम वास नहीं मिल रहा हम उनको हम उनकी सेवा में ही तत्पर बहुत से सोए हुए लोग हैं जिनको घसीट कर भागवत आचार्य वृंदावन लाए जिनको घसीट कर रास आचार्य वृंदावन लाए हम जो आए हैं ना तो रास के द्वारा ही तो आए तो हम भगवान का जस गा रहे हैं और भगवान के पार्षद हैं हमारा चाहे जहां शरीर छूटे हम धाम में ही जाएंगे।

देवी चित्रलेखा जी ने किया वृन्दावन वास को लेकर प्रश्न! | Premanand Ji Maharaj | #shorts
SHREE RADHA VALLABH SHREE HARIVANSH
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