[0:00]जगन्नाथ मंदिर के ऊपर कोई पक्षी क्यों नहीं उड़ता? क्या यह प्रभु का चमत्कार है या हमारे पूर्वजों की टेक्नोलॉजी? इस मंदिर को 12वीं सदी में राजा अनंतवर्मन ने बनवाया था। मंदिर का शिखर लगभग 214 फीट ऊंचा है। और ऊपर लगा हुआ है 2200 किलो का नीलचक्र। इसमें किसी सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि पूरा मंदिर इंटरलॉकिंग टेक्नीक से निर्मित है। यानी पत्थर ऐसे काटे गए कि वे आपस में फंसकर खुद ही भार संभाल लें। मंदिर की रचना में बेहद उन्नत लोड डिस्ट्रीब्यूशन का उपयोग हुआ है। मंदिर नीचे से चौड़ा है, लेकिन जैसे-जैसे ऊपर जाते हैं संरचना हल्की और पतली होती जाती है और इसी कारण यह कई सदियों से खड़ा हुआ है। शिखर घुमावदार और पतला है जो हवा को मोड़ देता है, इसीलिए यहां ध्वजा नीचे की हवा से उल्टी लहराती है। मंदिर का नीचे का स्ट्रक्चर इतना मजबूत है कि यह भूकंप में भी मंदिर को संभाल लेता है। अब इस मंदिर के ऊपर से पक्षी क्यों नहीं उड़ते? सीधा कारण है कि इसका शिखर ऊपर की ओर पतला, घुमावदार और तीखे कोनों वाला बनाया गया है। जब समुद्र की ओर से आने वाली तेज हवाएं इस शिखर से टकराती हैं तो वे सीधी ना जाकर ऊपर उठ जाती हैं। और किनारों से घूमते हुए शिखर के ऊपर एक टर्बुलेंट जोन बना देती हैं। इस क्षेत्र में हवा हर पल दिशा बदलती है। पक्षियों को उड़ने के लिए स्थिर और समान एयर प्रेशर की आवश्यकता होती है, लेकिन मंदिर के शिखर के ऊपर बनने वाली यह घूमती और टकराती हवा उनके लिए बेहद असुरक्षित हो जाती है।

जगन्नाथ मंदिर पे पक्षी क्यू नही उड़ते #ai #3d #jagannath
Jitendra Joshi
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