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भगवान शिव बताते हैं गरीबी से मुक्ति के लिए 3 बातों को किसी को नहीं बतानी चाहिए | Mahadev Motivation

Bhakti With Ani

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[0:00]भगवान शिव कहते हैं गरीबी से मुक्ति के लिए इन तीन बातों को किसी से ना बताएं.. प्रिय भक्तगण, आज हम आपको एक कथा का श्रवण करा रहे हैं. जो सुनने मात्र से आपके जीवन में सुख संपत्ति और धन की वर्षा होगी. तो चलिए कथा को प्रारंभ करते हैं. भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं, यह तीन बातें मानव को कभी भी किसी को नहीं बताना चाहिए. जो मानव यह तीन बातें नहीं बताते हैं, वह इंसान कभी भी गरीब नहीं रहेगा. फिर माता पार्वती कहती है हे प्राणनाथ, वह कौन सी तीन बातें हैं जिसे जान लेने से इंसान को कभी भी दुखों का सामना नहीं करना पड़ेगा. फिर भगवान शिव कहते हैं हे देवी, आज मैं पृथ्वी लोक पर एक सन्यासी का रूप धारण करके यह तीन बातें बताने जा रहा हूं. कृपया आप इस कहानी को ध्यान से सुने, अगर आप यह कहानी सुन रहे हैं तो पूरा सुनिए. इस कथा को आधा अधूरा छोड़कर जाने की गलती मत करिएगा, क्योंकि इस पवित्र कथा को पूरा सुनने से मन चाहा फल की प्राप्ति होगी. इसलिए इस कथा को पूरा सुने, आप शिव भक्त हैं तो भोलेनाथ का अनादर ना करें. भगवान शिव पृथ्वी लोक पर एक सन्यासी के रूप में आते हैं. आज की इस प्यारी सी कहानी की शुरुआत करते हैं. प्राचीन समय की बात है एक नगर में एक धनवान सेठ रहता था. उसके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी, और उसका व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था. उसकी पत्नी भी बहुत खुश रहती थी. क्योंकि सेठ हर महीने उसके लिए नए-नए गहने खरीदता था और उसे बहुत प्रसन्न रखता था. प्रिय श्रद्धालुओं सेठ के घर के बगीचे में एक वटवृक्ष था. उस वटवृक्ष के नीचे सन्यासी अपना आसन बिछाकर ध्यान किया करते थे. सेठ और सेठानी दोनों सन्यासी की बहुत सेवा करते थे, और उसकी देखभाल करते थे, क्योंकि वह सन्यासी कई सालों से उस वटवृक्ष में रह रहे थे. सेठ हर रोज सन्यासी को घर का भोजन देते थे, और सन्यासी भी उनसे बहुत प्रेम करते थे. भगवान शिव जो सन्यासी थे वह बहुत खुश थे क्योंकि उन्हें किसी चीज के लिए कहीं और नहीं जाना पड़ता था. सेठ और सेठानी हर रोज उन्हें स्वादिष्ट भोजन खिलाते थे. प्रिय श्रद्धालुओं, सेठ की पत्नी बहुत ही सरल और भोली स्वभाव की थी. उसकी आदत थी कि वह घर की हर बात बाहर वालों को बता देती थी. एक दिन सेठ की पत्नी ने अपने पति से पूछा पिया जी, आपका व्यापार कैसा चल रहा है? आप कैसे इतना मुनाफा कमाते हो? श्रद्धालुओं अपनी पत्नी का ऐसा सवाल सुनकर सेठ ने सारी बात बता दी. सेठ ने कहा प्रिय मैं अनाज का धंधा करता हूं. मैं चंबल की घाटी से अनाज खरीदता हूं और उसे महंगे दामों में बेच देता हूं. प्रिय श्रद्धालुओं अपने पति की यह बात जानकर सेठानी बहुत प्रसन्न हुई उसने सोचा मेरे पति तो बहुत ही बुद्धिमान है. यह बात तो सारे नगर वालों को पता होनी चाहिए कि मेरे पति इतने बुद्धिमान हैं और इतना ज्यादा धन कमाते हैं. प्रिय श्रद्धालुओं अब सेठ की पत्नी ने पूरे नगर में यह बात फैला दी कि उनके पति इस तरीके से पैसा कमाते हैं. श्रद्धालुओं अब क्या था नगर के कुछ लोगों को जब यह पता चला कि सेठ किस प्रकार धन अर्जित करता है तो वे सभी भी अनाज का धंधा करने लगे. प्रिय श्रद्धालुओं अब नगर के बहुत से लोग अनाज का व्यापार करने लगे हैं. सेठ जो पहले कम दाम में अनाज खरीदता था अब वही अनाज महंगे दामों में बिकने लगा है. सेठ का धंधा थोड़ा कम चलने लगता है. उसे मुनाफा नहीं होता और धीरे-धीरे वह गरीब होता जाता है. सेठ का पूरा धंधा बैठ जाता है. यह देखकर वह बहुत चिंतित और दुखी हो जाता है. प्रिय श्रद्धालुओं एक दिन की बात है, सेठ अपने व्यापार की परेशानी से तंग आकर बगीचे में बैठा था. तभी भगवान शिव जो सन्यासी थे वह वहां आते हैं और कहते हैं सेठ जी, क्या बात है आज आप कुछ परेशान लग रहे हैं? तब सेठ बताता है हे संत महात्मा मेरा व्यापार बहुत मंदा चल रहा है. मुनाफा बहुत कम हो गया है. नगर के बहुत से लोगों ने अनाज का धंधा शुरू कर दिया है. जिससे मेरा धंधा बैठता जा रहा है. भगवान शिव जो सन्यासी थे, सेठ की बातें सुनकर कहते हैं, सेठ जी क्या आपने किसी को बताया था कि आप किस प्रकार अपना धन अर्जित करते हैं? किस प्रकार आप अपनी जीविका चलाते हैं? तब सेठ कहता है हां संत महात्मा मैंने अपनी पत्नी को सारी बात बताई थी. वह मुझसे पूछ रही थी कि आप इतना धन कैसे कमाते हैं? तब मैंने उसे बताया था कि मैं अनाज का व्यापार करके धन अर्जित करता हूं. प्रिय श्रद्धालुओं अब सन्यासी को सारी बात समझ में आ जाती है. सन्यासी कहते हैं सेठ जी आपने बहुत बड़ी गलती कर दी है. आपको सेठानी जी से यह बातें नहीं करनी चाहिए थी. आज मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं और इस कहानी के माध्यम से बताऊंगा कि चाहे कितने भी करीबी इंसान हो, यह तीन बातें कभी किसी को नहीं बतानी चाहिए. इससे गरीबी आपके आसपास भी नहीं भटकेगी. प्रिय श्रद्धालुओं अब सन्यासी जो भगवान शिव थे वह अपनी कहानी प्रारंभ करते हैं. सन्यासी कहते हैं सेठ जी, एक समय की बात है. एक नगर में एक गरीब आदमी रहता था. वह इतना गरीब था कि अपने परिवार के लिए ठीक से भोजन भी नहीं जुटा पाता था. फिर सन्यासी कहते हैं सेठ जी गरीबी मनुष्य के लिए एक अपमानकारी दुख था. बिना धन के गृहस्थी और घर चलाना बहुत मुश्किल था. फिर सन्यासी आगे कहते हैं सेठ जी वह गरीब आदमी जैसे तैसे अपने घर वालों का पेट पाल रहा था. कभी उनको भोजन मिल जाता था, तो कभी भूखे पेट ही सोना पड़ता था. एक दिन उस गरीब आदमी की पत्नी ने कहा, हमारे पास तो धन ही नहीं है. सुबह को खा ले तो शाम की उम्मीद नहीं है, शाम को खा ले तो सुबह की उम्मीद नहीं है. आखिर ऐसे कब तक चलेगा? मैं जैसे तैसे करके घर चला लूंगी, लेकिन आप धन कमाने के लिए परदेश चले जाइए. इस प्रकार से हमारे परिवार का गुजारा नहीं चलेगा. मनुष्य के पास चाहे कितना ही धन हो लेकिन अगर उसके पास कोई काम नहीं है तो वह धन भी बेकार होता है. अगर हम कुछ नहीं करेंगे तो अपने बच्चों को कैसे पालेंगे? भूखे मरने से अच्छा है कि किसी की छोटी मोटी मजदूरी ही कर ले. अब पत्नी के बार-बार कहने पर वह गरीब आदमी धन कमाने की आस लेकर घर से निकल पड़ा. वह जंगलों के रास्ते से प्रदेश के लिए रवाना हुआ. चलते-चलते वह एक जंगल में पहुंच गया. दूर की यात्रा तय करके जा रहा था. बेचारा थक चुका था तो उसने देखा कि आगे एक छायादार बरगद का पेड़ है. उस पेड़ की लंबी-लंबी शाखाएं थी. उसकी जड़ें जमीन को छू रही थी. शीतल छाया देखकर वह बेचारा गरीब आदमी उस पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा. प्रिय श्रद्धालुओं सन्यासी आगे कहते हैं, वह गरीब आदमी वह बरगद के नीचे आराम से लेटा हुआ था. तभी उसने देखा कि कहीं से एक सांप आया और वह सांप उसी पेड़ पर चढ़ गया. गरीब आदमी उस सांप को गौर से देख रहा था. वह सोचने लगा कि यह सांप इस बरगद पर क्यों चढ़ रहा है? और अब क्या करेगा? तभी उसने देखा कि उस पेड़ की डाल पर तोता और मैना का घोंसला था. घोंसले में तोता और मैना के बच्चे रखे हुए थे. सांप को देखकर तोता और मैना के बच्चे डर के मारे चिल्लाने लगे. वह गरीब आदमी देखते ही समझ गया कि यह दुष्ट सांप इन बच्चों को खाने आया है. सोचने लगा कि मैंने तो इन बच्चों को देख लिया है, अगर अब मैं इन्हें नहीं बचाता हूं तो मुझे बहुत पाप लगेगा. बच्चे तो बच्चे ही होते हैं, चाहे वे इंसान के हो या किसी पक्षी के. बच्चों की हमेशा रक्षा करनी चाहिए. उधर एक सर्प उन बच्चों के पास पहुंच जाता है, तभी वह गरीब आदमी उठता है और फटाफट बरगद के पेड़ पर चढ़ जाता है. उसने उस सर्प को मार गिराया और नीचे फेंक दिया. फिर उसी बरगद के नीचे आकर लेट गया. तोता और मैना के बच्चे अपनी रक्षा करने वाले उस गरीब आदमी को मन ही मन बहुत दुआएं देने लगे. श्रद्धालुओं उसी समय तोता और मैना अपने बच्चों के पास आते हैं. अपने माता-पिता को पास आया देख तोता और मैना के बच्चे बहुत खुश होते हैं, और उन्हें पूरी घटना बताते हैं कि आज इस वृक्ष के नीचे जो इंसान लेटा है, वह हमारे लिए देवदूत बनकर आया है. हमें खाने के लिए एक भयंकर सर्प आया था. इसी इंसान ने उस भयानक सर्प को मारकर हमारे प्राण बचाए हैं. हम इसके ऋणी हो गए हैं. अगर यह इंसान उस सर्प को नहीं मारता, तो आज हम घोंसले में जीवित नहीं होते. इसका हम पर बड़ा एहसान हो गया है. अपने बच्चों के मुख से उस मुसाफिर की प्रशंसा सुनकर तोता और मैना बहुत खुश होते हैं. तोता और मैना उस गरीब आदमी के पास पहुंच जाता है और कहता है हे मनुष्य तुमने आज हमारे बच्चों की जान बचाकर हमें अपना ऋणी बना लिया है. आप कौन हो और कहां जा रहे हो? तोता और मैना के पूछने पर वह गरीब आदमी कहता है हे पक्षियों मैं एक गरीब आदमी हूं और धन कमाने के लिए परदेश जा रहा था. सफर का थका हारा था तो इस बरगद की छाया में बैठकर आराम करने लगा. तब मैंने देखा कि एक दुष्ट सर्प तुम्हारे बच्चों को खाने के लिए तुम्हारे घोंसले के पास जा रहा था. मैंने उसे मार डाला. फिर तोता और मैना बोले, भाई तुमने हम पर बहुत बड़ा उपकार किया है. संसार में सबसे बड़ी खुशी बच्चों से होती है बच्चों से अधिक प्रिय तो किसी को कोई नहीं होता. आप भी तो धन कमाने अपने बच्चों के लिए ही जा रहे हैं. अब आपने हमारे बच्चों की जान बचाई है तो हम आपके बच्चों की भूख मिटाना चाहते हैं. तब उन्होंने बताया हम दोनों तोता और मैना नाम के पक्षी हैं. हम हमेशा कीमती मोती खाते हैं और हमने सुना है कि यह मोती मनुष्यों के लिए बहुत मूल्यवान होते हैं. हम तुम्हें कुछ मोती देते हैं, तुम उन्हें बेचकर बाजार से कुछ खाने पीने का सामान ले आओ, और आज से तुम यही रहकर हमारे बच्चों की देखभाल करते रहना. हम तुम्हें इसी तरह से रोज यह कीमती मोती लाकर देते रहेंगे. तोता और मैना की बात सुनकर वह गरीब आदमी खुश हो गया. सोचता है कि अगर हमें यही धन मिलेगा, तो हम बाहर क्यों जाएंगे? प्रिय श्रद्धालुओं वह आगे कहता है कि सेठ जी वह गरीब आदमी तोता से कुछ मोती लेकर बाजार गया और अपने खाने पीने का सामान खरीद लाया. उस वृक्ष के नीचे उसने एक झोपड़ी बना ली और वही रहने लगा. और तोता मैना के बच्चों की देखभाल करने लगा. अब तो तोता और मैना निश्चित हो गए. उन्हें उनके बच्चों की रक्षा करने वाला मिल गया था. अब वे निश्चित होकर भोजन के लिए सुबह अपने घोंसले से उड़ जाते थे और शाम को लौट कर आते थे. अपने बच्चों को घोंसले में सुरक्षित देखकर वे बहुत खुश होते थे और उस गरीब आदमी का धन्यवाद करते थे और उसे कुछ मोती लाकर देते थे. इस तरह से धीरे-धीरे तोता और मैना की नौकरी करते हुए उस गरीब व्यक्ति को दो महीने बीत गए थे. इधर तोता और मैना के बच्चे भी बड़े हो गए. अब उस गरीब आदमी को अपनी पत्नी और बच्चों की याद आने लगी. एक दिन उसने तोता और मैना से कहा कि हम अपने घर जाना चाहते हैं. पता नहीं हमारी पत्नी और बच्चे कैसे हैं? तब तोता और मैना बोले हे भाई अब तुम निश्चित होकर अपने घर जाओ. और अपने बच्चों के साथ रहो. हमारे बच्चे भी अब उड़ने के काबिल हो गए हैं. अब कोई भय नहीं है. तुम अपनी पत्नी और बच्चों को देखो. कभी तुम्हें हमसे मिलने का मन हो, तो इसी स्थान पर आ जाना. श्रद्धालुओं इतना कहकर तोता और मैना उस गरीब आदमी को ढेर सारे मोती दे देते हैं. अब वह गरीब व्यक्ति उन मोतियों को अपने साथ लेकर अपने घर पहुंच जाता है. उसने वह मोती अपनी पत्नी को दिखाए तो उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुई. उसने पूछा पतिदेव तुम यह कीमती मोती कहां से लेकर आए हो? तब उस आदमी ने बताया हे प्यारी, मैं बीते दो महीने से एक तोता और मैना की नौकरी कर रहा था. उन्हीं ने मुझे यह कीमती मोती दिए हैं. यह मोती बहुत कीमती और अनमोल है. इन्हें बेचकर हम अपना घर और बड़ा बनवाएंगे. अपने बच्चों को अच्छे वस्त्र लाकर देंगे और तुम्हारे लिए भी नए-नए गहने बनवाएंगे. प्रिय श्रद्धालुओं भगवान शिव सन्यासी रूप में कहते हैं, सेठ जी अब वह आदमी उन मोतियों को बेचकर बाजार से अपने घर का सारा जरूरी सामान ले आया और अपना नया घर बनवाने लगा. और वह आराम की जिंदगी जीने लगा. प्रिय श्रद्धालुओं उस नगर के राजा प्रताप सिंह एक अजीब रोग से ग्रसित हो गया. नगर में दूर-दूर से बड़े-बड़े वैद्य राजा को देखने आए. और अपने-अपने तरीके से इलाज शुरू कर दिया. लेकिन राजा के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ. जब किसी के इलाज से राजा ठीक नहीं हुए तो एक वैद्य ने राजा से कहा, महाराज आपकी जिंदगी बच सकती है, अगर आपको तोते के बच्चे का मांस मिल जाए, तो आप हमेशा के लिए ठीक हो जाएंगे. इस प्रकार वैद्य की बात सुनकर राजा प्रताप सिंह ने अपने राज्य में घोषणा करवा दी कि जो कोई उसे तोता लाकर देगा, उसे सोने के सिक्के दिए जाएंगे. प्रिय श्रद्धालुओं धीरे-धीरे यह बात पूरे राज्य में फैल गई. सब लोग तोते की तलाश में इधर-उधर लग गए. पर किसी को भी तोता नहीं मिला. एक दिन गरीब आदमी की स्त्री अपने पड़ोस में कुछ स्त्रियों के साथ बैठकर बात कर रही थी. कुछ घर गृहस्थी की बातें हो रही थी. बातों ही बातों में तोते की चर्चा छिड़ गई. एक स्त्री बोली बहन क्या तुम्हें पता है कि राजा साहब ने तोते का बच्चा लाने का आदेश दिया है. तोता लाना कोई आसान काम नहीं है. जब गरीब आदमी की पत्नी ने सुना कि राजा साहब बीमार हैं और उन्होंने घोषणा की है कि जो कोई उन्हें तोता का बच्चा लाकर देगा, उसे सोने के सिक्कों से मालामाल कर देंगे. यह सुनकर उस गरीब आदमी की पत्नी ने कहा, अरे बहनों तोता लाना कौन सी बड़ी बात है. मेरे पति तो दो महीने तोता और मैना की नौकरी करके आए हैं. वह एक नहीं कई तोते ला सकते हैं. इतना कहने के बाद वह अपने घर चली गई. नगर की स्त्रियों ने उसकी बात सुनी और अपने पतियों से बताई. धीरे-धीरे यह बात पूरे नगर में फैल गई. राजा ने भी सुना कि उनके राज्य में एक व्यक्ति है जो तोता और मैना के पास नौकरी करके आया है. राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि उस आदमी को पकड़ कर लाएं और उससे कहे कि वह एक तोता का बच्चा लाकर दे. राजा ने कहा इसके बदले हम तुम्हें मुंह मांगा इनाम देंगे. यह सुनकर वह आदमी घबरा गया और बोला महाराज आप मेरे प्राण ले लो, पर मैं आपको तोता का बच्चा लाकर नहीं दे सकता. मैंने तो उनकी जान बचाई थी. एक रक्षक भक्षक कैसे बन सकता है? उसके इंकार करने पर राजा प्रताप सिंह बहुत नाराज हुए और बोले अगर तुमने हमारी बात नहीं मानी और तोता का बच्चा लाकर नहीं दिया तो हम तुम्हारी पत्नी और बच्चों को मरवा देंगे. प्रिय श्रद्धालुओं फिर भगवान शिव रूपी सन्यासी कहते हैं कि, मनुष्य सबसे ज्यादा कमजोर तब पड़ता है, जब उसके बच्चों की सुरक्षा की बात आती है. ऐसे में वह कुछ भी करने को मजबूर हो जाता है. राजा की बात सुनकर वह गरीब आदमी बहुत घबरा गया. उसने सोचा कि अब मुझे किसी भी तरह तोते का बच्चा ला कर राजा को देना ही होगा. वह घर आया और अपनी पत्नी को डांटने लगा, तुमने यह क्या कर दिया? तुम्हें बिल्कुल भी समझ नहीं है? हम क्या करते हैं और कहां जाते हैं तुमने यह बातें नगर की स्त्रियों से क्यों कही? धीरे-धीरे यह बात राजा प्रताप सिंह तक पहुंच गई. अब बताओ मैं क्या करूं? जिन तोता और मैना ने हमें खाने को भोजन, रहने को नया घर और पहनने को अच्छे वस्त्र दिए, मैं उनके साथ गद्दारी कैसे कर सकता हूं? तुमने यह बात उन महिलाओं को बताकर बहुत बड़ी भूल की है. वह व्यक्ति कहता है कि प्रिय अपने घर की कुछ बातें दूसरों से कभी नहीं कहनी चाहिए. पहली बातें आपके घर में कितना धन है और आपकी कमाई का स्रोत क्या है, यह बातें दूसरों से कभी नहीं बतानी चाहिए. दूसरी बातें घर में आपसी प्रेम की बातें पति-पत्नी के प्रेम की बातें बाहर वालों के सामने नहीं करनी चाहिए. तीसरी बातें आपसी लड़ाई-झगड़े मतभेद मान अपमान की बातें कभी दूसरों के सामने नहीं करनी चाहिए, वरना लोग हमारी गुप्त बातें जानकर, हमारी कमजोरी को समझकर हमारा फायदा उठाते हैं. चौथी बातें अपनी कमजोरी दूसरों के सामने ना बताएं और अपनी उन्नति का राज किसी को ना बताएं. जिन बातों को कहने से आपके परिवार पर दुख आ सकता है, वे बातें कभी बाहर नहीं करनी चाहिए. खासकर उन बातों को अपनी स्त्री से ना कहे, जिन बातों से घर की मान प्रतिष्ठा नष्ट होती हो, परिवार पर संकट आता हो, किसी की जान जाती हो, परिवार में फूट पड़ती हो या आपके रिश्ते खराब होते हो. क्योंकि कहते हैं कि स्त्रियों के पेट में इस तरह की बातें पचती नहीं हैं. अब वह गरीब आदमी बोला, प्रिय तुम्हारी यह गलती आज हमारे परिवार को मौत के मुंह में डाल रही है. यदि तुमने इस बात को छुपा लिया होता तो आज हम निर्भय होकर अपने घर में आनंद की जिंदगी जी रहे होते. अब राजा की आज्ञा है तो तोता का बच्चा लाकर राजा को देना ही पड़ेगा. लेकिन ऐसा करने से मैं पापी कहलाऊंगा. जिन बच्चों की मैंने इतने दिन देखभाल करी, जिन्हें मैंने मरने से बचाया, अब मैं उन्हें किस प्रकार मौत के मुंह में डाल सकता हूं. पत्नी कहने लगी पति देव अब जो भी हो लेकिन हमें अपनी और बच्चों की जिंदगी बचानी है तो आपको यह पाप करना ही पड़ेगा. प्रिय श्रद्धालुओं अब तो बड़ा लाचार होता हुआ वह गरीब आदमी जंगल की ओर चल पड़ा था. जहां वह तोता के बच्चों की देखभाल करता था. उधर जब तोता और मैना और उनके बच्चों ने उस गरीब आदमी को अपने पास आता हुआ देखा, तो वे बड़े खुश होने लगे. अपने बच्चों को अत्यंत खुश देखकर तोता और मैना कहने लगे, अरे बच्चों तुम इतने खुश क्यों हो रहे हो? वह तो तुम में से किसी एक को लेने आ रहा है. तुम में से कौन है जो आज उसके साथ जाकर उसकी और उसके बच्चों की जान बचाएगा? फिर तोता कहता है कि बच्चों, लेकिन एक बात याद रखना, तुम में से जो भी उसके साथ जाएगा, वह कभी लौट कर नहीं आएगा. वह नगर के राजा का भोजन बन जाएगा. प्रिय श्रद्धालुओं तब तोता के बच्चों ने पूछा कि आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? तोता बताता है कि बच्चों यहां का राजा बीमार पड़ गया है और वैद्य ने उसे तोता के बच्चे का मांस खाने को कहा है. इसलिए तुम में से किसी एक को वह लेने के लिए आया है. यदि तुम में से कोई उसके साथ जाने को तैयार है, तो वह जा सकता है. तभी उनमें से एक बच्चा कहने लगा हे माता-पिता उस आदमी ने ही हम सबकी जिंदगी बचाई है. और आज वह आदमी बहुत बड़ी मुसीबत में है. ऐसे में हमें भी उसकी मदद करनी चाहिए. चाहे हमारी जान ही क्यों ना चली जाए, लेकिन हम उसके साथ जरूर जाएंगे. उधर वह आदमी उस बरगद के वृक्ष के नीचे आता है और तोता मैना से अपना दुख बताता है. तब तोता मैना कहते हैं हे भाई, तुम चिंता ना करो हमारे बच्चे तुम्हारे साथ जाने के लिए तैयार हैं. तुम इनमें से किसी एक को ले जाओ. श्रद्धालुओं अब वह गरीब आदमी उनमें से एक तोता के बच्चे को लेकर लौट जाता है और राजा को ले जाकर दे देता है. राजा उस तोते के बच्चे को एक पिंजरे में बंद करता है और अपने नौकर को रखने के लिए कहता है. राजा कहता है कि हम इसे सुबह निकालेंगे और फिर इसके मांस को खा जाएंगे. प्रिय श्रद्धालुओं अब क्या होता है कि राजा प्रताप सिंह का एक बेटा था जो पशु पक्षियों से बहुत प्रेम करता था. उसे यह नहीं पता था कि यह तोता उसके पिता के खाने के लिए लाया गया है. वह अपने मित्रों के साथ उसी जगह पर खेल रहा था, जहां तोते का बच्चा पिंजरे में कैद था. राजकुमार ने जब एक सुंदर तोते को पिंजरे में बंद देखा तो वह उसके साथ खेलने लगा. तभी राजकुमार का एक मित्र कहता है मित्र तुम इस पक्षी को बाहर निकालो यह कितना सुंदर तोता है पिंजरे में इसका रहना बिल्कुल सही नहीं है. हम इसे आजाद कर देते हैं. अपने मित्र की बातें सुनने के बाद राजकुमार ने उस तोते के बच्चे को पिंजरे से बाहर निकाल देता है. जैसे ही वह पिंजरा खोलता है, तोता का बच्चा आकाश में उड़ जाता है. धीरे-धीरे यह बात राजा तक पहुंची कि आपके राजकुमार ने उस तोते को छोड़ दिया है. अब आपके प्राण बचाना बड़ा ही मुश्किल है. यह सुनकर राजा को बहुत गुस्सा आया. उन्होंने तुरंत राजकुमार को बुलाया और गुस्से में कहा अरे नादान पुत्र, तूने उस तोते के बच्चे को क्यों छोड़ दिया? राजकुमार बहुत घबरा गया और बोला पिताजी मुझे क्या पता था कि वह उड़ जाएगा. मैं तो उसके साथ खेलना चाहता था. अपने पुत्र की बात सुनकर राजा को और भी गुस्सा आया उन्होंने उसे नगर से निकालने का आदेश दे दिया. प्रिय श्रद्धालुओं अब राजा के सैनिक राजकुमार को नगर की सीमा से बाहर छोड़ देते हैं. उधर वह तोते का बच्चा उड़कर अपने माता-पिता के पास पहुंचता है और उन्हें सारी बात बताता है, कि राजा के बेटे ने उसे आजाद कर दिया है. तोता और मैना ने जब अपने बच्चे को देखा तो कहा पुत्र राजा के बेटे ने तुम्हें तो आजाद कर दिया, लेकिन वह खुद संकट में फंस गया है. उसके दुष्ट पिता ने उसे नगर से बाहर निकाल दिया है. अब उसकी जिंदगी की जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर है. तुम जाओ और उसकी मदद करो. प्रिय श्रद्धालुओं तोता राजकुमार की मदद करने के लिए उसके पास पहुंच जाता है. राजकुमार उसे देखते ही पहचान लेता है. यह तो वही पक्षी है जिसे मैंने पिंजरे से आजाद किया था. राजकुमार कहता है तुम्हारी वजह से मुझे मेरे पिता ने नगर से निकाल दिया है. अब तुम ही बताओ मैं क्या करूं कहां जाऊं? तोता कहता है मित्र तुम चिंता मत करो, तुमने मेरी जान बचाई थी इसलिए मैं तुम्हारी मदद करने आया हूं. दुख सुख में अब मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगा. श्रद्धालुओं अब राजकुमार खुश हो जाता है. क्योंकि उसे कम से कम एक साथी तो मिल ही गया था. अब तोता और राजकुमार दोनों एक दूसरे नगर में घूमने लगते हैं. चलते-चलते वे दोनों एक सुंदर बगीचे में पहुंच जाते हैं. उसी बगीचे में वहां के राजा की पुत्री भी अपनी सहेलियों के साथ घूमने आया करती थी. उस राज्य के राजा की कन्या का नाम रूपमती था. राजकुमारी रूपमती बहुत ही सुंदर थी और उसकी खूबसूरती की चर्चा पूरे नगर में होती थी. राजकुमार और तोता उस बगीचे में बैठे हुए थे तभी वहां राजा की कन्या रूपमती अपनी सहेलियों के साथ बगीचे में घूमने आती है. राजकुमारी को देखकर राजकुमार वृक्ष के पीछे छुप जाता है और तोता राजकुमारी के सामने पहुंच जाता है. राजकुमारी उस सुंदर तोता को देखकर मोहित हो जाती है. वह उसे पकड़ना चाहती है लेकिन तोता उसकी पकड़ में नहीं आता. यहां राजकुमार राजकुमारी रूपमती की सुंदरता पर मोहित हो जाता है. प्रिय श्रद्धालुओं कुछ समय बगीचे में टहलने के बाद राजकुमारी अपने महल में लौट जाती है. राजकुमार पूरी तरह से राजकुमारी पर मोहित हो गया था. अब तो उसे एक पल भी अच्छा नहीं लग रहा था. तब तोता ने कहा मित्र तुम चिंता मत करो, तुम जिसे चाहने लगे हो मैं तुम्हें उससे मिलवा दूंगा. राजकुमार बोला मित्र तुम मुझे किसी भी तरह उस राजकुमारी से मिला दो. मैं उसके बिना अब रह नहीं पाऊंगा. तोता बोला मित्र तुम मुझ पर भरोसा रखो मैं. पता लगाकर आता हूं कि राजकुमारी कहां रहती है और तुम उससे कैसे मिल सकते हो. प्रिय श्रद्धालुओं अब तोता राजकुमारी रूपमती के पास जाता है. राजकुमार के महल में चारों तरफ सैनिक तैनात थे लेकिन तोता उड़ता हुआ ऊपर से जाता है और जाकर राजकुमारी के कक्ष के बाहर बैठ जाता है. तोता वहां से सब नजारा देखता है और सारी बात आकर राजकुमार को बताता है, कि महल में जाकर राजकुमारी से मिलना बहुत मुश्किल है. तोता कहता है तुम एक काम करो अपना रुमाल मुझे दे दो. मैं तुम्हारा रुमाल आज राजकुमारी के पास पहुंचा दूंगा और उसकी चुनरी ले आऊंगा. प्रिय श्रद्धालुओं अब रात में तोता राजकुमार का रुमाल लेकर राजकुमारी के पास रख आता है और राजकुमारी की चुनरी साथ ले जाता है. सुबह जब राजकुमारी रूपमती जागती है तो देखती है कि उसकी चुनरी गायब है और उसके पास एक रुमाल रखा हुआ है. राजकुमारी तुरंत समझ जाती है कि रात में कोई पुरुष उसके कक्ष में आया था. उसने देखा कि उसकी चुनरी गायब है और उसकी जगह किसी पुरुष का रुमाल रखा हुआ है. राजकुमारी बहुत व्याकुल हो जाती है और अपने सभी सिपाहियों को सावधान कर देती है. वह सिपाहियों से पूछती है कि रात में उसके पास कौन आया था? लेकिन किसी के पास कोई जवाब नहीं होता. अब राजकुमारी के कक्ष की सुरक्षा और बढ़ा दी जाती है. प्रिय श्रद्धालुओं अगली रात फिर से तोता राजकुमारी के कक्ष में जाता है और अपने मित्र द्वारा लिखी हुई चिट्ठी को राजकुमारी के पास रख आता है. अगले दिन जब राजकुमारी जागती है और चिट्ठी पढ़ती है तो उसमें लिखा होता है कि राजकुमारी मैंने जब से तुम्हें देखा है तब से मैं तुम्हारा हो गया हूं. मैं तुमसे विवाह करना चाहता हूं. अगर तुम्हें मुझसे मिलना है, तो तुम अपने बगीचे में आ जाना. मैं तुम्हें वहां मिल जाऊंगा. अब राजकुमारी अपनी सहेलियों को लेकर बगीचे में जाती है लेकिन वहां उसे कोई पुरुष नजर नहीं आता. वहां तो सिर्फ वही तोता घूम रहा होता है. जिसे उसने उस दिन देखा था. तोता राजकुमारी से कहता है राजकुमारी तुम जिसे देख रही हो, मैं तुम्हें उससे मिला सकता हूं. लेकिन पहले तुम मुझे वचन दो कि तुम यह बात अपने पिता से नहीं कहोगी और मेरे मित्र को बंदी नहीं बनाओगी. राजकुमारी ने वचन दिया कि वह उसे बंदी नहीं बनाएगी मुझे उससे मिलाओ मैं भी देखना चाहती हूं कि वह कौन है. जो इतने सख्त पहरे के बावजूद भी मेरे कक्ष में पहुंच गया. तब तोता ने अपने मित्र राजकुमार को बुलाया. श्रद्धालुओं राजकुमार भी देखने में बहुत सुंदर था. उसकी सूरत देखकर राजकुमारी भी उस पर मोहित हो गई. तब राजकुमार आता है और राजकुमारी के पास बैठकर बड़े ध्यान से उसके सुंदर चेहरे को निहारने लगता है. राजकुमारी ने पूछा तुम कौन हो? और इतने कड़े पहरे के बाद भी तुम मेरे कक्ष तक कैसे पहुंच गए. राजकुमार बोला प्रिय जब दिल में प्रेम होता है तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता. जब से मैंने तुम्हें देखा है, तब से मैं तुम्हें प्रेम करने लगा हूं और तुमसे विवाह करने की इच्छा रखता हूं. श्रद्धालुओं जब राजकुमारी ने पूछा कि तुम कौन हो और कहां से आए हो तब राजकुमार ने अपनी पूरी कहानी उसे सुनाई. राजकुमार की कहानी सुनने के बाद राजकुमारी के मन में उसके लिए सहानुभूति हो गई. अब तो रोजाना राजकुमारी रूपमती उस राजकुमार से मिलने उस बगीचे में आया करती थी. एक दिन राजकुमारी ने कहा राजकुमार मेरे पिता तुम्हारे साथ मेरा विवाह कभी नहीं करेंगे. इसलिए मैं तुम्हारे साथ भाग चलती हूं. और कहीं दूसरी जगह चलकर हम अपना विवाह कर लेंगे और आनंद पूर्वक रहेंगे. प्रिय श्रद्धालुओं अब वही होता है. राजकुमारी उस राजकुमार के साथ घोड़े पर सवार होकर भाग जाती है. और काफी दूर जाने के बाद वे एक झोपड़ी बनाते हैं और विवाह करके दोनों साथ रहने लगते हैं. दोनों को रहते रहते बहुत समय बीत जाता है और वह तोता भी उन्हीं के साथ रहता है. प्रिय श्रद्धालुओं भगवान शिव सन्यासी रूपी में कहते हैं सेठ जी उस राजकुमार की झोपड़ी में किसी तरह से आग लग जाती है और उसी आग को बुझाने के चक्कर में उस तोते का एक पंख जल जाता है. तब तोता ने कहा देखो मित्र अब आप अपने घर चले जाइए. अब आपके पिता का गुस्सा भी शांत हो चुका होगा. अब आपके पिता आपसे कुछ नहीं कहेंगे, जब वह आपको अपनी बहू के साथ देखेंगे तो वह आपको माफ कर देंगे. मेरा तो एक पंख जल गया है मैं अब उड़ नहीं सकता. इसलिए मैं कुछ दिन तक यही रहकर अपने पंख होने का इंतजार करता हूं. जब मेरा पंख दोबारा उग जाएगा तो मैं आपसे मिलने के लिए जरूर आऊंगा. प्रिय श्रद्धालुओं इस प्रकार से वह दोनों राजकुमार और उसकी पत्नी अपने नगर के लिए चल देते हैं. चलते-चलते रास्ते में एक नदी पड़ती है. उस नदी पर एक नाविक नाव चलाता था. राजकुमार अपनी पत्नी को लेकर नाव में बैठ जाता है. जैसे ही नाव नदी के बीच में पहुंचती है तो राजकुमार देखता है कि एक चूहा बार-बार नाव पर चढ़कर आता है लेकिन वह नाविक उसे हटाकर नदी में गिरा देता है. कई बार उस चूहे को नाविक ने हटा देता था. तब राजकुमार कहने लगा अरे यह बेचारा इस प्रकार से तो जल में डूबकर मर जाएगा. ये अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए इस नाव पर चढ़ रहा है. इसे चढ़ जाने दो. जब राजकुमार ने नाविक से कहा कि आप इस चूहे को चढ़ जाने दें. तो राजकुमार के कहने पर उस नाविक ने उस चूहे को अपनी नाव पर चढ़ जाने दिया. जैसे ही चूहा नाव के अंदर गया वह अंदर जाकर छुप गया. थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा कि नाव के अंदर धीरे-धीरे पानी आने लगा. प्रिय श्रद्धालुओं उसी चूहे ने नाव को काटकर उसमें छेद कर दिया था. जिससे नाव में पानी भरने लगा. जब नाव में पानी बढ़ने लगा, तो नाव पानी में डूबने लगी. धीरे-धीरे जब नाव पूरी तरह डूब गई, तो उसी समय राजकुमारी और राजकुमार पानी में बहने लगे. पानी के बहाव से राजकुमार बहुत दूर पहुंच गया और राजकुमारी रूपमती भी उसी पानी में बहती हुई राजा के बगीचे में जा पहुंची. बगीचे में रहने वाला माली जब राजकुमारी को बेहोश अवस्था में नदी के किनारे पड़ा देखता है तो वह जाकर राजा को यह खबर देता है. राजा जब सुंदर लड़की को देखता है तो वह उस पर मोहित हो जाता है. और सुंदर राजकुमारी को देखकर उसे अपने महल में ले आता है और राज्य वैद्य से उसका इलाज करवाता है. श्रद्धालुओं कुछ दिन बीतने के बाद जब राजकुमारी ठीक हो जाती है तो एक दिन वह देखती है कि राजा उसके करीब खड़ा है. राजा ने पहले ही राजकुमारी रूपमती के चेहरे को निहार रखा था. अब वह राजकुमारी से विवाह करना चाहता था. राजा कहने लगा हे राजकुमारी तुम्हारा भी इस दुनिया में कोई नहीं है. अब तुम हमारी पत्नी बन जाओ. तुम हमारी रानी बन जाओ और हमारे महलों में बड़े आराम के साथ रहो.

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