[0:01]प्रेम तो बहुतों ने किया पर शिव और सती का प्रेम, वह प्रेम नहीं था जिसे दुनिया समझती है. वह दो शरीरों का मिलन नहीं, दो आत्माओं का पूर्ण विलय था. और जब सती ने खुद को अग्नि में आहुत किया, तो यह सिर्फ एक बलिदान नहीं था. यह मैं का अंत था. शिव के प्रेम के अपमान का जवाब था. पूरी सृष्टि धरा उठी थी. और जिस शिव ने कभी मृत्यु को भी खेल समझा, उसने पहली बार विराह का दर्द जाना. जिसके लिए पूरा ब्रह्माड एक खिलौना था. उसने अपनी सती को उठाने के लिए पूरा जीवन दांव पर लगा दिया. यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी.

प्रेम बहुतों ने किया… लेकिन शिव–सती जैसा नहीं ❤️ | Shiv Sati Love | Bhakti Short
ॐ भक्ति भजन
1m 1s110 words~1 min read
Auto-Generated
Watch on YouTube
Share
MORE TRANSCRIPTS


