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कभी-कभी सच में लगता है कि हम जिंदा तो है | innocentprincex Poetry | #poetry #shaayri

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[0:00]कभी-कभी सच में लगता है कि हम जिंदा तो है लेकिन जी नहीं रहे हैं ना कोई एक्साइटमेंट बची है ना खुशी का एहसास बस रोज का वही रूटीन
[0:15]और रास्ते में ऐसा कोई मोड़ भी नहीं मिलता जहां थोड़ी देर रुक कर खुद को महसूस कर सके
[0:21]सब कुछ बस चल रहा है बिना किसी मकसद के बिना किसी मतलब के और हम उस सफर में सिर्फ ऐसे किरदार बन कर रह गए हैं जो अपनी ही कहानी में खो गए हैं
[0:29]जिनका दिल तो बहुत कुछ महसूस करता है पर जिंदगी अब वैसी नहीं लगती जैसे कभी सपनों में सोचा था
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[0:00]कभी-कभी सच में लगता है कि हम जिंदा तो है लेकिन जी नहीं रहे हैं ना कोई एक्साइटमेंट बची है ना खुशी का एहसास बस रोज का वही रूटीन

[0:09]सुबह उठो काम करो थक जाओ और फिर वही कल का इंतजार मंजिल कहीं दिखाई नहीं देती

[0:15]और रास्ते में ऐसा कोई मोड़ भी नहीं मिलता जहां थोड़ी देर रुक कर खुद को महसूस कर सके

[0:21]सब कुछ बस चल रहा है बिना किसी मकसद के बिना किसी मतलब के और हम उस सफर में सिर्फ ऐसे किरदार बन कर रह गए हैं जो अपनी ही कहानी में खो गए हैं

[0:29]जिनका दिल तो बहुत कुछ महसूस करता है पर जिंदगी अब वैसी नहीं लगती जैसे कभी सपनों में सोचा था

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