[0:00]बात है 1576 की। मेवाड़ के हल्दीघाटी में चल रहा था एक ऐसा युद्ध जो भारतीय इतिहास में सबसे घमासान युद्ध के नाम से जाने जाने वाला था। इसमें शामिल थे इंडिया के दो सबसे जाबांज योद्धा जलालुद्दीन अकबर और मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा प्रताप सिंह। इस युद्ध को घमासान इसीलिए माना जाता है क्योंकि इसमें दोनों भी पक्ष की सेना में जमीन आसमान का फर्क था। जहाँ एक तरफ महाराणा प्रताप की 20000 की सेना तलवार और भालों से लड़ रही थी, वहाँ अकबर के 80000 आदमी बड़ी-बड़ी बंदूकों से महाराणा की सेना को मार गिरा रहे थे। साथ ही अकबर के पास महाराणा प्रताप की सेना से तीन गुना ज्यादा हाथी थे और उनके पास सिर्फ हल्दीघाटी के युद्ध में इतने घोड़े थे जितने महाराणा प्रताप की पूरी सेना के पास कभी नहीं थे। और अकबर का सबसे बड़ा हथियार था महाराणा प्रताप का भाई जिन्होंने युद्ध के वक्त अकबर से हाथ मिला लिया था। अब ये सब सुनकर तो जाहिर है कि ये जंग अकबर ही जीतेगा। लेकिन आपको ये जान के हैरानी होगी कि इतना सब होने के बावजूद ये जंग के विजेता महाराणा प्रताप थे। जिससे अब ये सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि आखिर वो कैसे कर पाए? वेल हेलो फ्रेंड्स मैं हूं गौरव और आज जो कहानी मैं आपको सुनाने वाला हूं वो सच होने के बावजूद हिस्ट्री टेक्स्ट बुक्स के हिसाब से झूठ है। क्योंकि उनका कहना है कि महाराणा रणभूमि छोड़कर भाग गए थे और युद्ध में जीता अकबर। लेकिन ये नैरेटिव आखिर कहां से आया और क्यों ये इतना प्रोपोगेट किया गया? चलिए सुलझाते हैं इस गुत्थी को इन अ टुडेस वीडियो टाइटल्ड महाराणा प्रताप्स स्टोरी दैट इज इरेस्ड फ्रॉम हिस्ट्री। हल्दीघाटी की कहानी के तह तक पहुंचने से पहले हमें समझना होगा कि उस समय यानी कि 16वीं सदी में भारत की स्थिति कैसी थी। 16वीं सदी में अकबर ने भारत के अच्छे खासे हिस्सों पर अपना कब्जा जमा कर उस पर मुगलों का हरा झंडा लहरा दिया था। लेकिन इस पूरे हरे यानी मुगलों के शासन के बीच एक छोटे से हिस्से पर केसरी झंडा फड़क रहा था जो था राजस्थान के छोटे से राज्य मेवाड़ का। वहां राज चल रहा था राजपूत राजा उदय सिंह द सेकंड का। ये छोटा सा राज्य अकबर के लिए बेहद ही जरूरी था क्योंकि मेवाड़ गुजरात और दिल्ली के ट्रेड रूट के बराबर बीचोंबीच में पड़ता था। और उस समय मुगलों का ज्यादातर ट्रेड गुजरात के पोर्ट के जरिए होता था। इसीलिए गुजरात के पोर्ट पर जाने के लिए मेवाड़ से होकर जाना पड़ता था और मेवाड़ उन पर भारी मात्रा में टैक्स लगाया करता था। अब अकबर को मेवाड़ हासिल तो करना ही था, लेकिन दूसरे राजाओं की तरह अकबर सीधे जंग पर नहीं निकल जाया करते थे। क्योंकि उन्हें पता था कि भले बातचीत करने पर उनका थोड़ा सा नुकसान हो लेकिन तो भी वो नुकसान जंग में हुए नुकसान के मुकाबले बहुत ही कम होगा। और आप इतिहास के पन्नों को पलट कर देख सकते हो जब भी कोई जंग हुई है किसी का भला नहीं हुआ है और फिर चाहे वह हमारे ग्रंथों में दर्ज महाभारत की युद्ध हो या आजादी के बाद हुई इंडिया पाकिस्तान वॉर। बट इट इज राइटली सेड की हिस्ट्री से हमें सीख लेना चाहिए वरना हिस्ट्री अपने आप को वापस से रिपीट कर दिया है। और आज के बिजी लाइफ में करंट अफेयर्स और हिस्ट्री के लिए हमारे पास टाइम कहां है? 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[7:51]इन्हीं तोपों के कारण मुगल सेना चित्तौड़ की दीवारों को तोड़कर अंदर घुसे थे पर ये तोपें बहुत ही बड़े हुआ करते थे। और हल्दीघाटी की गली इतनी छोटी थी कि मुगल अपने तोप लेकर गुजर ही नहीं पाते। यानी उन्हें इस जंग में अपने एक्स फैक्टर के बिना ही लड़ना पड़ता। अब तीसरी चीज जो उन्होंने की वो थी हल्दीघाटी के भील काबिले के लोगों को अपनी सेना में शामिल कर देना। क्योंकि महाराणा को ये पता था कि किसी भी जंग में जीतने के लिए बड़ी सेना या ज्यादा हथियारों की नहीं बल्कि जहाँ लड़ रहे हैं उस जमीन की ज्यादा जानकारी होनी चाहिए। इसीलिए उन्होंने भील काबिले के लोगों को इस युद्ध में शामिल किया जो तीर चलाने में जाबांज थे। वो पहाड़ के ऊपर चढ़कर मुगल सेना के सैनिकों को अपने तीरों से खत्म कर रहे थे और साथ ही जंग की हर खबर वो ऊपर से देखकर महाराणा प्रताप को दे रहे थे। इन्हीं सारी रणनीतियों पर भरोसा कर महाराणा प्रताप 18th जून 1576 की तपती धूप में हल्दीघाटी पर मुगलों से लड़ने पहुंच चुके थे। यह युद्ध काफी समय तक चला जिसमें फिर महाराणा प्रताप का आमना-सामना हुआ मुगलों के सेनापति मानसिंह से जो अपने युद्ध हाथी पर सवार थे। और यहीं पर कहानी आती है उनके लोकप्रिय घोड़े चेतक की जिसमें उसने अपने पैरों से उस युद्ध हाथी पर इस आक्रोश से वार किया कि वो हाथी पूरी तरह हिल गया और मानसिंह जमीन पर गिर गए। लेकिन उस समय हाथी की सूंड पर तलवारें बांधी जाती थी जिसके कारण चेतक का एक पैर पूरी तरह कट गया था। अब जो कि चेतक चल नहीं पा रहा था तो इस मौके का फायदा उठाते हुए फिर कुछ मुगल सैनिक महाराणा प्रताप की ओर तेजी से बढ़ने लगे। पर उसके बाद जो हुआ उसे आज तक पूरी दुनिया नहीं भुला पाई है। नदी की तरह खून बहने के बावजूद चेतक वहां से तेजी से दौड़ पड़ा और वो भी बिना रुके पूरे 5 किलोमीटर तक। उसने खाई के ऊपर से लगभग 27 मीटर्स तक की छलांग मारी और दूसरी तरफ पहुंचते ही उसने महाराणा प्रताप को उतार कर अपना दम तोड़ दिया। मुगल सैनिकों के घोड़े इतनी दूर तक कूद नहीं पाए और महाराणा प्रताप वहां से सही सलामत निकल गए। अब ये कहानी सुनकर ऐसा लगना स्वाभाविक है कि महाराणा प्रताप असल में रण छोड़कर भाग चुके थे। लेकिन किसी भी जंग में जीत तब तक नहीं होती जब तक तुम सामने वाले राजा को मार ना दो या उसके राज्य पर कब्जा ना कर लो। महाराणा प्रताप उस दौरान तो वहां से निकल गए थे लेकिन वह काफी समय तक वहीं के जंगलों में अपने सैनिकों के साथ रुके थे और मुगलों को वहां से मेवाड़ तक कभी आगे बढ़ने ही नहीं दिया। जिसके बाद अकबर ने गिव अप कर दिया और अगले 20 सालों तक मेवाड़ पर महाराणा प्रताप का ही झंडा फड़कता रहा। लेकिन हमारी स्कूल की किताबों में यह लिखा गया है कि महाराणा प्रताप जंग छोड़कर भाग चुके थे। मेवाड़ पे अकबर ने कब्जा कर लिया था। अब ऐसा आखिर क्यों लिखा है? और इतनी बारीकी से पूरे युद्ध को प्लान करने के बावजूद क्यों टेक्स्ट बुक्स महाराणा प्रताप के बारे में कहते हैं कि ही लैक पेशेंस, कंट्रोल एंड मिलिट्री प्लानिंग? दरअसल हमारे देश में इतिहास इतिहासकार नहीं बल्कि सरकार और पॉलिटिशियंस लिखते हैं। अब राजस्थान की ही बात ले लो राजस्थान में जैसे-जैसे सरकार बदली वैसे-वैसे महाराणा प्रताप का इतिहास की किताबों में रोल बदला। किसी सरकार के हिसाब से वो महान थे और किसी सरकार के हिसाब से वो मुगलों से डरकर भाग गए थे। लेकिन आज हमने देखा कि हल्दीघाटी के युद्ध का सच क्या था। और ये सच आज भी मेवाड़ में रहने वाले लोकल लोगों की जुबान पे है। और ऐसा सिर्फ महाराणा प्रताप के साथ ही नहीं हुआ बल्कि ऐसा कई सारे राजा महाराजाओं के साथ हुआ कि हमारी इतिहास की किताबें हमें उनके बारे में झूठ सिखाती है और कई महान राजाओं का तो इन किताबों में जिक्र तक नहीं है। क्या ऐसे कोई राजा की कहानी आपको पता है मुझे नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताना और साथ ही अगर इस वीडियो से कुछ भी नया सीखने मिला या जानने मिला तो एक लाइक जरूर ठोकना। गेटसफ्लायफैक्ट चैनल को अभी सब्सक्राइब कर लो क्योंकि ऐसे ही नॉलेजेबल इंटरेस्टिंग और यूनिक वीडियोस आपको यहां पे रोजाना देखने को मिलेगा जो आपका नॉलेज हरदम बढ़ाते रहेगा। और हां फ्रेंड्स जाने से पहले नया साल नया बदलाव कुकू एफएम ऐप को डाउनलोड करना मत भूलना। एक अच्छी हैबिट आपकी लाइफ बदल सकती है सो क्लिक फास्ट। अभी एक्शन लो और डाउनलोड करो कुकू एफएम ऐप। सिर्फ ₹199 पर ईयर में आपको हजार से भी ज्यादा ऑडियो बुक्स मिलेंगे हिंदी लैंग्वेज में। विथ दैट सेड फ्रेंड्स ऐज ऑलवेज स्टे क्यूरियस, कीप लर्निंग एंड कीप ग्रोइंग। जय हिंद।



