[0:00]साल 1999 की शुरुआत में Apollo Tyres Group के चेयरमैन और उनके सीनियर अफसरों को दुबई से कॉल पर कई बार एक्सटॉर्शन की धमकियां आ चुकी थीं। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह को काम दिया कि वो इन कॉल्स को ट्रेस करें और पता लगाएं कि आखिर एक्सटॉर्शन की इन धमकियों के पीछे कौन लोग काम कर रहे हैं। इस काम के लिए ईश्वर सिंह ने बड़ा एक्सटॉर्शन करने वाले करीब 150 सरगनाओं की एक लिस्ट तैयार की। ऐसे ही एक्सटॉर्शन की मांग करने वाले नंबरों में से रिलेटेड एक नंबर पर ईश्वर सिंह की नज़र पड़ती है और ये नंबर था कृष्ण कुमार का, यानि T-Series के मालिक गुलशन कुमार के छोटे भाई कृष्ण कुमार का नंबर। डेली बेसिस पे दिल्ली पुलिस के दो कांस्टेबल की ड्यूटी थी कि वो रोटेशनल शिफ्ट लगाएंगे और 24 घंटे दिन-रात कृष्ण कुमार का फ़ोन सुनेंगे। गुलशन कुमार की कुछ साल पहले ही अंडरवर्ल्ड ने दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। Gulshan Kumar who was gunned down in broad daylight while coming out of a temple in Mumbai was initially thought to be killed by extortionists of the Dubai based mafia. इसलिए दिल्ली क्राइम ब्रांच कृष्ण कुमार के नंबर पर आने-जाने वाले कॉल्स का रिकॉर्ड रख रही थी। सर अस्सलाम वालेकुम, सर वह लंदन वाला दोस्त खतरे में आ गया है, इधर प्रिपरेशन दे दी है, दो दिन में उठाएंगे उसको। फ़रवरी 2000 के आखिरी दिनों तक ईश्वर सिंह दो ऐसे नंबर शॉर्टलिस्ट कर लेते हैं जो कृष्ण कुमार से लगातार बात कर रहे थे और इनमें पहला नंबर था 9811 वाला नंबर जो कि संजीव चावला का था। खबर सीधे आपको दिखा रहे हैं संजीव चावला जिसको प्रत्यर्पित करके लंदन से भारत लाया गया है। 19 साल बाद अब कई राज खुलेंगे। भारत-अफ्रीका मैच फिक्सिंग का मुख्य किरदार संजीव चावला। संजीव चावला लंदन के ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर 'Toro' नाम की एक दुकान चलाते थे जहां कपड़े और सस्ते फैशन के सामान मिला करते थे। संजीव चावला 1990 की शुरुआती सालों में ही ब्रिटेन चले गए थे और उस समय वो अपने मम्मी-पापा से मिलने के लिए दिल्ली में आए हुए थे। कृष्ण कुमार से रिलेटेड एक दूसरा नंबर था राजेश कालरा का, जो लिप स्कैन प्रिंटिंग प्रेस के मालिक थे और साथ में सट्टेबाजी भी किया करते थे। राजेश कालरा दिल्ली के ग्रेटर कैलाश कॉलोनी में रहा करते थे और कृष्ण कुमार के पड़ोसी थे। इन दो नंबर में इंटरेस्टिंग बात ये निकली कि राजेश कालरा और संजीव चावला आपस में इन दोनों नंबर को एक्सचेंज करके इस्तेमाल किया करते थे। इसलिए कुछ बड़ा कांड होने के शक में ईश्वर सिंह इन दोनों नंबर्स को टैप करने की परमिशन अपने सीनियर अथॉरिटी से मांगते हैं। मार्च 2000 की शुरुआत में ईश्वर सिंह को राजेश कालरा और संजीव चावला का नंबर टैप करने की परमिशन मिल जाती है। जब टैपिंग शुरू हुई तब संजीव चावला का कृष्ण कुमार को पहला कॉल आता है। लेकिन इंटरेस्टिंगली ये कॉल किसी एक्सटॉर्शन के लिए नहीं थी, बल्कि ये दोनों कुछ और बात कर रहे थे। इस कॉल में चावला कहते हैं कि हैंसी क्रोनिए के साथ सब सेट हो गया है, बहुत बड़ा पैसा बनने वाला है। हैंसी क्रोनिए यानि साउथ अफ्रीकन क्रिकेट टीम के कप्तान हैंसी क्रोनिए। I've heard a rumor from India that Hansie Cronje has been suspected of match fixing and it was that momentary pause before he answered. इस वक्त साउथ अफ्रीकन क्रिकेट टीम इंडिया में दो टेस्ट और पांच वनडे मैच खेलने के लिए आई हुई थी। जिसका इंडिया के साथ पहला टेस्ट मैच 19 फरवरी 2000 को था और आखिरी वनडे मैच 19 मार्च 2000 को खेला जाना था। क्रिकेट लवर इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह के लिए हैंसी क्रोनिए का नाम सुनना कोई बड़ी चौंकाने वाली बात नहीं थी। इस कॉल टैपिंग के दौरान ही 14 मार्च को संजीव चावला दिल्ली के ताज पैलेस होटल में ठहरे हुए एक गेस्ट को कॉल करते हैं। इस कॉल पर संजीव चावला बोलते हैं, 'हाय हैंसी!' इस कॉल में हैंसी क्रोनिए और संजीव चावला की बातें ऐसे हो रही थीं जैसे दोनों एक-दूसरे को सालों से जानते हो। ईश्वर सिंह को भी मालूम नहीं था कि अगले कुछ दिनों में देश में क्या होने वाला है। कैसे उनकी एक्सीडेंटल इन्वेस्टिगेशन कई देशों में बवाल मचाने वाली है और इसमें ऐसे-ऐसे क्रिकेटर्स के नाम आने वाले थे जिन्हें लोग भगवान मानते थे। While monitoring those telephones we overheard a conversation pertaining to cricket. एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार में छपी रिपोर्ट के अकॉर्डिंग, क्रोनिए को संजीव चावला की तरफ से एक रोमिंग फ्री फ़ोन नंबर भी मिला था। जिसे क्रोनिए इंडिया में रहकर कहीं से भी संजीव चावला से बात कर सकता था। संजीव चावला और क्रोनिए के बीच मोस्टली दो-तीन चीजों पर ही बात होती थी, जैसे गेम प्लानिंग क्या होगी और प्लेयर्स तक पैसा कैसे पहुंचाया जाएगा। In one of the monitorings of the cell phones we found that it was Hansie Cronje's voice. 14 मार्च 2000 को फरीदाबाद में होने वाले वनडे मैच में हैंसी क्रोनिए ने चावला को बताया कि हर्शल गिब्स 20 से कम रन बनाएगा। अगली सुबह जब मैच शुरू हुआ तब ठीक वैसा ही हुआ जैसा क्रोनिए ने बताया था। हर्शल गिब्स 29 बॉल खेलकर सिर्फ 19 रन पर ही आउट हो जाते हैं और वो भी तब जब उनके दो कैच छूटे थे। Gibbs, Gibbs, the man they're going for the drive. And have a look at that, straight down Tendulkar's throat. इसके अगले ही दिन यानि 15 मार्च 2000 को चावला एरोफ्लोट की फ्लाइट SU-550 से मॉस्को होता हुआ लंदन चला जाता है। लंदन जाकर संजीव चावला 16 मार्च को हैंसी क्रोनिए को फिर से फोन करता है तब क्रोनिए गुस्से में आकर बोलता है कि अभी तक उसको मिलने वाला पूरा पेमेंट क्लियर नहीं हुआ है जिससे उसकी टीम के खिलाड़ी काफी ज्यादा गुस्सा हैं। तब चावला हैंसी क्रोनिए को प्रॉमिस करता है कि वो जल्दी ही बकाया पेमेंट टाइम से पूरा करा देगा। इसके बाद 18 मार्च को नागपुर मैच से एक दिन पहले हैंसी क्रोनिए चावला को फ़ोन करके बताता है कि वो मैच की शुरुआत ऑफ स्पिनर डेरेक क्रुक्स को नई गेंद देकर करेगा। अगले दिन जब मैच शुरू हुआ तब डेरेक क्रुक्स हाथ में नई गेंद लेकर मैदान पर खड़ा होता है। Cronje was heard to say that he'd spoken to three South African cricketers and had a plan for fixing the game. कुल-मिलाकर दिल्ली पुलिस के पास हैंसी क्रोनिए, संजीव चावला, कृष्ण कुमार, राजीव कालरा और बाकी लोगों की 14, 16 और 18 मार्च की कुल आठ टेप्स इकट्ठा हो चुकी थीं। इसके अलावा पुलिस ने ये भी नोटिस किया कि जहां-जहां क्रिकेट टीमें ट्रैवल करती थीं संजीव चावला भी वहां-वहां ट्रैवल करता था। इन सब इंसिडेंट और एविडेंस को देखते हुए साउथ अफ्रीका और इंडिया सीरीज के बीच में ही दिल्ली पुलिस इस कंक्लूजन पर पहुंच चुकी थी कि इंडिया साउथ अफ्रीका के मैचों को फिक्स किया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी दिल्ली पुलिस इन क्रिकेट प्लेयर्स और फिक्सर्स पर कोई मामला दर्ज नहीं करती। वो इसलिए क्योंकि अगर दिल्ली पुलिस ऐसा करती तो 19 मार्च 2000 को सीरीज खत्म होने से पहले ही ये मामला दोनों देशों के बीच बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी क्रिएट कर देता। ऊपर से अगर दिल्ली पुलिस ने उसी समय मामला दर्ज कर लिया होता तो दक्षिण अफ्रीकी टीम को भी पूछताछ के लिए गिरफ्तार करना पड़ता, जिसे दोनों देशों की रेपुटेशन खराब होती इसलिए दिल्ली पुलिस ने सीरीज खत्म होने का वेट किया। हालांकि इससे नुकसान ये हुआ कि संजीव चावला 15 मार्च को ही इंडिया छोड़कर लंदन जा चुका था। 19 मार्च को सीरीज खत्म होने के बाद फाइनली 7 अप्रैल 2000 के दिन दिल्ली पुलिस सामने आकर साउथ अफ्रीका के कैप्टन हैंसी क्रोनिए पर आरोप लगाती है कि क्रोनिए ने इंडिया के खिलाफ खेले गए गेम में मैच फिक्सिंग की है। इन एलिगेशंस को बैक करने के लिए दिल्ली पुलिस हैंसी क्रोनिए और संजीव चावला की ऑडियो टेप्स को भी जारी करती है। इन टेप्स में संजीव चावला और हैंसी क्रोनिए की कन्वर्जेशन्स के साथ हर्शल गिब्स, पीटर स्ट्राइडम और निक्की बोए जैसे प्लेयर्स के भी नाम थे। हालांकि दिल्ली पुलिस के इन एलिगेशंस पर साउथ अफ्रीकन क्रिकेट बोर्ड ने अलग ही रिएक्ट किया। We are saying that our players are innocent until proven guilty. 8 अप्रैल 2000 को साउथ अफ्रीका के यूनाइटेड क्रिकेट बोर्ड एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी करके हैंसी क्रोनिए का पक्ष लेती है। South African cricket board (UCBSA) ने कहा कि उन्हें क्रोनिए की ईमानदारी पर 1% का भी शक नहीं है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इंडिया इस केस से जुड़ी हुई जो भी रिपोर्ट आगे पेश करेगा उसमें रत्ती भर भी दम नहीं होगा। 9 अप्रैल को क्रोनिए खुद भी आकर एक स्टेटमेंट जारी करते हैं जिसमें क्रोनिए कहते हैं कि उन पर लगाए सभी एलिगेशंस बेसलेस हैं। वह 100% क्लियर कर देना चाहते हैं कि उन्होंने इंडिया में खेले गए किसी भी मैच में कोई पैसा नहीं लिया है। साथ ही उन्होंने अपनी टीम के किसी भी मेंबर से मैच हराने की बात भी नहीं की है। If you check my bank account, that I think is the only thing that's going to clear me, because as I've said, you know, I have not received any money. क्रोनिए जब ये स्टेटमेंट दे रहे थे तब उनके साथ हर्शल गिब्स और निक्की बोए भी मौजूद थे जिनका नाम भी इन ऑडियो टेप्स में आया था। ये दोनों भी क्रोनिए के दिए स्टेटमेंट को सही बताकर मैच फिक्सिंग में किसी भी तरह से शामिल होने से साफ इनकार कर देते हैं। साउथ अफ्रीका की तरफ से आए इतने एक्सट्रीम रिस्पॉन्स को देखकर इंडियन गवर्नमेंट अपनी ही जांच एजेंसीज पर भरोसा करने के बजाए उल्टा साउथ अफ्रीकन क्रिकेट बोर्ड को ही पुचकारने में लग जाती है। डिप्टी मिनिस्टर ऑफ फॉरेन अफेयर्स अजीज पहाड़ साउथ अफ्रीका के क्रिकेट बोर्ड UCBSA के चीफ अली बकर को भरोसा दिलाते हैं कि इंडियन गवर्नमेंट साउथ अफ्रीकी प्लेयर्स के फोन टैप वाले मामले में आई रिपोर्ट्स पर दिल्ली क्राइम ब्रांच से सफाई मांगेगी और पूछेगी कि आखिर किस बेसिस पर दिल्ली पुलिस ने क्रिकेटर्स पर लगाए एलिगेशंस को पब्लिक किया। The allegations are outrageous. Hansie Cronje is a man of unquestionable honesty and integrity. दरअसल साउथ अफ्रीका में पूरी क्रिकेट फ्रेटरनिटी क्रोनिए के सपोर्ट में खड़ी हो जाती है। साउथ अफ्रीकन क्रिकेट अथॉरिटीज ने क्लेम किया कि दिल्ली पुलिस ने उनके क्रिकेटर्स पर आरोप लगाते हुए जो ऑडियो टेप्स प्रोवाइड कराई हैं उसमें जो आवाज है वो क्रोनिए की है ही नहीं। इधर CBI ने दिल्ली पुलिस की हेल्प करते हुए कहा कि जल्द ही वो इंटरपोल से क्रोनिए और संजीव चावला के वॉइस सैंपल को टेस्ट करवाएंगे ताकि उन ऑडियो टैप्स की ऑथेंटिसिटी मालूम हो सके। इधर जब दिल्ली पुलिस अपना केस दमदार बनाने में लगी हुई थी तभी साउथ अफ्रीका में एक इंटरेस्टिंग मोड़ आता है। 11 अप्रैल को साउथ अफ्रीकन क्रिकेट बोर्ड UCBSA डिक्लेयर करती है कि क्रोनिए को साउथ अफ्रीका में ऑस्ट्रेलिया के साथ शुरू होने वाली तीन वनडे मैच की सीरीज से बाहर कर दिया गया है। UCBSA ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि क्रोनिए UCBSA हेड अली बकर के सामने कन्फेंस कर लेते हैं कि उन्होंने एक लंदन बेस्ड बुकी से 10,000 से 15,000 डॉलर लिए थे। लेकिन ये पैसे सिर्फ मैच फोरकास्टिंग बताने के लिए किए थे, यानि पिच कैसी होगी, पहले फील्डिंग करेंगे या बैटिंग करेंगे, यानि यहां क्रोनिए ने एक्सेप्ट नहीं किया कि उन्होंने इंडिया के साथ मैच फिक्सिंग की है। अंत में UCBSA ने क्रोनिए के बारे में ये स्टेटमेंट जारी कर दिया और इसके कुछ घंटे बाद ही क्रोनिए केप टाउन में अपना एक अलग स्टेटमेंट जारी कराने के लिए आते हैं और बोलते हैं कि उन्होंने भारत में कभी कोई फाइनेंशियल रिवॉर्ड किसी भी तरह का और किसी से भी नहीं लिया है। All I will say is that I was not involved in fixing or manipulating the results of cricket matches. I always played to win. लेकिन क्रोनिए का ये स्टेटमेंट किसी भी काम नहीं आता। UCBSA क्रोनिए की अप्रैल की सैलरी को रोक देती है और जज एडविन किंग की अध्यक्षता में एक नया कमीशन भी बनवाती है जो साउथ अफ्रीकी क्रिकेट में मैच फिक्सिंग और इससे जुड़े मामलों की जांच करता है। ये जांच एक महीने से ज्यादा तक चलती है। फाइनली जून 2000 में क्रोनिए एडविन किंग कमीशन के सामने गवाही देते हुए ये बात मान लेते हैं कि उन्होंने इंडिया से खेले गए मैचों में पैसे लेकर मैच फिक्स किया था। साथ ही वो शर्मिंदा हैं कि ड्यूरिंग दी इन्वेस्टिगेशन उन्होंने कमीशन के ऑफिसर से बार-बार झूठ बोला, उन्हें गुमराह किया, जिसके लिए क्रोनिए बिना किसी शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं। I do like money. I'm not trying to get away from that. लेकिन अपने इस कन्फेशन में क्रोनिए ऐसी बातें बताते हैं जो इंडियन क्रिकेट की जड़ों को हिलाकर रख देता है। क्रोनिए बताते हैं कि 1996 में कानपुर की तीसरी टेस्ट के दौरान उनके पास मोहम्मद अजहरूद्दीन का फ़ोन आया था। अजहरूद्दीन मुझे एक होटल में बुलाते हैं और वहां पर मुकेश गुप्ता उर्फ एमके नाम के बुकी से मिलवाकर खुद रूम से बाहर चले जाते हैं। क्रोनिए आगे कहते हैं कि अजहरूद्दीन के बाहर जाते ही बुकी एमके मुझसे ये पूछते हैं कि क्या क्रोनिए टेस्ट मैच के आखिरी दिन अपना विकेट गिफ्ट करके साउथ अफ्रीका को ये मैच हरवा सकते हैं। ये बात एमके मुझे 30,000 डॉलर्स देते हुए कहते हैं। साथ ही कहते हैं कि मुझे अपने इस प्लान में शामिल करने के लिए उसको टीम के बाकी प्लेयर्स से भी बात करनी पड़ेगी। क्रोनिए के स्टेटमेंट के अनुसार एमके का ये ऑफर उन्हें पसंद आता है। क्रोनिए आगे अपने कन्फेशन में बताते हैं कि मुझे ये पैसा कमाने का सबसे आसान तरीका लगा। लेकिन तब मेरा मैच फिक्सिंग करने का कोई इरादा नहीं था। इवन मैंने किसी और प्लेयर से इस बारे में बात भी नहीं की और ना ही खुद से मैंने मैच पर कोई नेगेटिव असर डाला। इसके बाद भी बिना किसी एक्सटर्नल इंटरवेंशन के हम ये मैच हार जाते हैं और मैंने बिना कुछ किए ही अच्छे पैसे कमा लिए। There might be trouble here. Hansie Cronje is run out by a mile. क्रोनिए ने कहा कि इसी दौरे के दौरान एमके ने मुझे इंडिया के साथ खेले जाने वाले आखिरी वनडे मैच को हारने का भी ऑफर दिया। जिसके बदले मुझे और मेरी टीम को 2 लाख डॉलर्स मिलने थे। लेकिन जब मैंने ये ऑफर अपनी टीम के मेंबर्स को बताया तब मोस्टली टीम मेंबर्स इस ऑफर को एक्सेप्ट करने से इनकार कर देते हैं। उसके बाद टीम के कुछ मेंबर्स बाद में आकर मुझसे बात करते हैं और बोलते हैं कि अगर पैसा थोड़ा बढ़ाया जाए तो वो इसके बारे में सोच सकते हैं। क्रोनिए कहते हैं कि अब मैं एमके को फ़ोन लगाकर पैसे बढ़ाकर 2 लाख डॉलर से 3 लाख डॉलर्स करने की डिमांड करता हूं। लेकिन एमके नहीं मानता और अपना आखिरी प्राइस 2.5 लाख डॉलर्स पर फिक्स कर देता है। अगली सुबह जब मैं टीम को जाकर नया ऑफर बताता हूं तब पूरी टीम ऐसा करने से मना कर देती है। I picked up the telephone and told him that the players had rejected the offer. क्रोनिए एक्सेप्ट कर लेते हैं कि हां 1996 से उन्होंने सटोरियों से करीब 1 लाख डॉलर की रिश्वत ली थी लेकिन उन्होंने कभी जान-बूझकर कोई मैच नहीं हारा। Yes, I accepted money from bookmakers. Yes, I was trying to feed them information. Yes, I spoke to the players before the match in 1996. क्रोनिए के इस बयान में इंडिया के कैप्टन मोहम्मद अजहरूद्दीन का नाम आने से इंडियन क्रिकेट में बवाल मच जाता है। Like today, Azharuddin was accused of match fixing in the report released by the Indian and South Africa. इस पर मोहम्मद अजहरूद्दीन कहते हैं कि वे बिल्कुल बेकसूर हैं और उनका नाम साउथ अफ्रीकन अथॉरिटीज ने इसलिए बुलवाया है ताकि वो दिल्ली पुलिस द्वारा उनके कैप्टन क्रोनिए पर चलाई जा रहे केस का बदला ले सकें। Azhar had vehemently denied all charges and had taken the legal route to clear his name and honor. क्रोनिए के कन्फेशन के बाद बुकी मुकेश गुप्ता उर्फ एमके इंडियन अथॉरिटीज के निशाने पर आ जाता है। वो समझ जाता है कि अगर वो इंडिया से नहीं भागा तो CBI उसको कच्चा चबा जाएगी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने मिड-जून 2000 में ही मुकेश गुप्ता यानि एमके की गिरफ्तारी के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया कि कहीं वो देश छोड़कर भाग ना जाए। जब काफी दिन तक पुलिस को एमके नहीं मिला तब CBI एक चाल चलती है। वो एमके को धमकी देती है कि अगर उसने सरेंडर नहीं किया तब CBI उसके 70 साल के बूढ़े पिता को हिरासत में ले लेगी। CBI की ये धमकी काम कर जाती है और मुकेश गुप्ता खुद CBI के ऑफिस आकर सरेंडर कर देता है। अब बुकी मुकेश गुप्ता ने CBI के सामने जो नाम लिए उससे इंडियन टीम की तरफ से की जाने वाली मैच फिक्सिंग की नई फाइल खुल जाती है। काका जिंदाबाद, काका जिंदाबाद, काका जिंदाबाद। मुकेश गुप्ता ने किस-किस का नाम लिया और क्या-क्या आरोप लगाए उससे पहले मुकेश कुमार गुप्ता के बैकग्राउंड को जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि 90s में होने वाली मोस्टली फिक्सिंग के पीछे इस एक अकेले बंदे का हाथ जरूर होता था। मुकेश गुप्ता उर्फ एमके दिल्ली के सबसे बड़े सट्टेबाजों में से एक था जिसने 1983 के वर्ल्ड कप में इंडियन टीम के जीतने के बाद सट्टा खेलना शुरू किया था। धीरे-धीरे एमके के पास सट्टा खेलने वालों की भीड़ लगने लग जाती है। इसके पीछे एक रीजन ये भी था कि एमके सभी को टाइम पर पैसे दिया करता था और किसी भी तरीके की घपलेबाजी नहीं करता था।
[14:54]मई 1986 में एमके मुंबई आ जाता है और सटोरिए मामा और कामाटे के यहां अपना खाता खोल लेता है। इसी दौरान एमके को मामा और कामाटे ने एक सलाह दी कि तू अभी दिल्ली के लोकल क्रिकेट क्लब में जा और वहां देख कि कौन सा प्लेयर तुम्हें सबसे टैलेंटेड लग रहा है। और ऐसे प्लेयर को चूज कर और उसे फाइनेंशियली ऐड प्रोवाइड करा। ये सब तुझे इसलिए करना है क्योंकि कल की डेट में अगर वो इंडियन टीम में सेलेक्ट होता है तो मैच को फिक्स करने और इंडियन क्रिकेट टीम के इंटरनल सर्कल में पहुंचने में वो तेरे काम आएगा। इसी सलाह को मानते हुए एमके 1988 में दिल्ली के क्लब्स में चल रहे राम चरण अग्रवाल टूर्नामेंट को देखने के लिए चला जाता है। यहां एमके की नजर अजय शर्मा नाम के एक शानदार बल्लेबाज पर पड़ती है। उस मैच के बाद एमके अजय शर्मा के पास जाता है और उसकी तारीफ करते हुए उसको ₹2000 दे देता है। साथ ही कहता है कि अगर फ्यूचर में कोई प्रॉब्लम हो तो वो उसे बेझिझक कभी भी कॉल कर सकता है। लगभग 15 दिन बाद एमके फिर अजय शर्मा से मिलता है और फिर कुछ पैसे दे देता है। ऐसा करके 2 साल के अंदर अजय शर्मा और एमके दोनों अच्छे दोस्त बन जाते हैं। फिर आता है 1990 का वो साल। जब अजय शर्मा को न्यूजीलैंड के दौरे के लिए इंडियन टीम में सेलेक्ट कर लिया जाता है। और फिर अजय शर्मा ने कहा कि आपको उस मैच में 100% नहीं खेला। उन्होंने CBI को बताया और उन्होंने कहा कि उनको यह भी लगता था कि शायद आपके रिश्ते हैं बुकी से आपको हैरानी हुई सचिन ने इस तरह की बातें की। इस सीरीज में एमके अजय शर्मा से वेदर, पिच कंडीशन और टीम फॉरमेशन की जानकारी लेता है और अच्छा मोटा पैसा कमा लेता है। लेकिन न्यूजीलैंड टूर के बाद जब इंग्लैंड टूर आया तब अजय शर्मा को इंडियन टीम में जगह ही नहीं मिली। इसलिए अब अजय शर्मा एमके के किसी काम का नहीं था। इसलिए बुकी एमके अजय शर्मा से रिक्वेस्ट करता है कि वो इंडियन टीम के फास्ट बॉलर मनोज प्रभाकर से उसकी पर्सनल मीटिंग करवा दे। एमके के कहने पर अजय मनोज प्रभाकर से बात कर लेता है और एक मीटिंग फिक्स करा लेता है। जब एमके मनोज प्रभाकर से मिला तब वो टीम की इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन को पास कराने के बदले मनोज प्रभाकर को पैसे देने की बात करता है। साथ ही प्रॉमिस करता है कि अगर इंग्लैंड टूर पर मनोज प्रभाकर द्वारा बताई गई इंफॉर्मेशन से एमके को फायदा होता है तब एमके मनोज को एक चौड़े टायर वाली मारुति जिप्सी दिलवाएगा और हुआ भी ऐसा ही। इंग्लैंड टूर पर मनोज प्रभाकर ने एमके को इंडियन टीम से जुड़ी सभी सीक्रेट इंफॉर्मेशन पहले ही बता दी जिससे एमके को ठीक-ठाक फायदा होता है। जब इंडियन टीम घर वापस लौटी तब अपने वादे के मुताबिक एमके ने मनोज प्रभाकर को चौड़े टायरों वाली मारुति जिप्सी खरीदने के लिए पैसे दिए। इसके अलावा एमके मनोज प्रभाकर से एक डील करता है कि मनोज प्रभाकर उसे जितने भी इंटरनेशनल क्रिकेटर से मिलवाएंगे उन हर प्लेयर पर वो उसको ₹50,000 देंगे। इसी डील के चलते मनोज प्रभाकर ने एमके को श्रीलंकन टीम के प्लेयर अरविंदा डि सिल्वा से मिलवाया। Over 9000 runs at this level. There it is. एमके अरविंदा डि सिल्वा के जरिए न्यूजीलैंड टीम के कैप्टन मार्टिन क्रो से मिलता है। इसके अलावा साल 1991 में एमके दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला में होने वाले भारत-पाकिस्तान विल्स कप के लिए पाकिस्तानी प्लेयर सलीम मलिक से मिलता है। ये एमके की मीटिंग भी मनोज प्रभाकर ने ही करवाई थी। Salim Malik explains that you only need five or six players to be in on the scam. Will six players agree to such a scam? They'll agree. They all played with me and we've sat together and done it before. इस मीटिंग में बुकी एमके ₹8 लाख देकर सलीम मलिक से मैच हारने की बात करता है और सलीम मलिक ये बात मान भी जाते हैं।
[18:18]ये मैच पाकिस्तान करीबी मुकाबले में हार जाता है। आने वाले कुछ सालों में एमके ऐसे ही मनोज प्रभाकर की मदद से कई और इंटरनेशनल क्रिकेटर से मिलता है, पैसे देता है और मैच फिक्स करवा लेता है। ये सिलसिला आगे भी चलता रहता है। I didn't say anything. They still filmed. Is it you on the film? No. It's not you. They made that film. But it's what an actor? Not you or I don't know who's there. कुछ टाइम बाद एमके और मनोज प्रभाकर में अनबन होनी शुरू हो जाती है। एमके के मुताबिक मनोज प्रभाकर अब उसकी बजाए दिल्ली और मुंबई के बाकी सटोरियों के साथ काम करने लगे थे। इसके अलावा जो इंफॉर्मेशन मनोज प्रभाकर प्रोवाइड करवा रहे थे उसमें मोस्टली इंफॉर्मेशन गलत साबित होती थी जिससे एमके को खूब लॉस झेलना पड़ता था। दूसरा गलत इंफॉर्मेशन के बाद भी मनोज प्रभाकर बहुत ज्यादा पैसों की डिमांड करते थे। इसलिए एमके को अब मनोज के रिप्लेसमेंट की तलाश थी और एमके को वो रिप्लेसमेंट भी मिल जाता है।
[19:18]हुआ ये कि अजय शर्मा वही अजय शर्मा जिसकी बदौलत एमके इंडियन क्रिकेट टीम को अंदर से भेज सका था वो एमके से कुछ पैसे की हेल्प मांगता है। इन पैसों के बदले अजय एमके को प्रॉमिस करता है कि वो उसकी मुलाकात मोहम्मद अजहरूद्दीन यानि इंडियन कैप्टन मोहम्मद अजहरूद्दीन से करवाएगा जो दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इस डील के तहत अजय शर्मा 1995 में दिल्ली के ताज पैलेस में बुकी एमके की इंडियन कैप्टन अजहरूद्दीन के साथ एक मीटिंग फिक्स करवा देता है। इस मीटिंग के लिए अजय शर्मा को ₹5 लाख मिलते हैं। इस मीटिंग में बुकी एमके मोहम्मद अजहरूद्दीन को ₹50 लाख एडवांस पेमेंट के तौर पर भी देता है। ये पैसे अजहरूद्दीन को इस शर्त पर दिए जाते हैं कि वो आने वाली सीरीज में एमके को मैच के बारे में सही इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करवाएंगे। हालांकि शुरुआती इंफॉर्मेशन जो अजहरूद्दीन ने साल 1996 में हुए टाइटन कप की दी थी वो गलत साबित होती है। Shop on Boya and he packs it on to him. You know why he's hit that. सौदे के मुताबिक अजहरूद्दीन को टाइटन कप का फाइनल साउथ अफ्रीका से हारना था। लेकिन ये मैच टीम इंडिया जीत जाती है और एमके को भारी घाटा उठाना पड़ता है। ये घाटा इतना ज्यादा था कि एमके ऑलमोस्ट दिवालिया हो गया। इसके बाद बुकी एमके खुद मोहम्मद अजहरूद्दीन के हैदराबाद वाले घर जाता है और उनसे रिक्वेस्ट करता है कि वो आने वाले टेस्ट मैचेस जो इंडिया में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले जाने वाले हैं उनकी सही इंफॉर्मेशन प्रोवाइड कराएं ताकि एमके के नुकसान की भरपाई हो सके। इस बार अजहरूद्दीन एमके की बात मान जाते हैं। इसके बाद अहमदाबाद में इंडिया साउथ अफ्रीका में खेला गया पहला टेस्ट मैच जिसमें मोहम्मद अजहरूद्दीन ने एमके को बोला कि ये मैच ड्रॉ होगा। हालांकि ये मैच इंडिया जीत जाती है जिससे एमके के नुकसान की 30% भरपाई हो जाती है। इसके बाद कोलकाता में हुए दूसरे टेस्ट के बारे में अजहरूद्दीन ने बताया कि ये मैच टीम इंडिया हार जाएगी। इस मैच में टीम इंडिया हार जाती है। इस मैच से एमके के नुकसान की 60% भरपाई हो जाती है। इसके बाद जब तीसरे टेस्ट मैच की बात आती है तब मोहम्मद अजहरूद्दीन एमके की सिफारिश पर उसको ऐसे प्लेयर से मिलवाते हैं जिससे ये सब पचड़ा शुरू हुआ था और ये खिलाड़ी थे साउथ अफ्रीकन टीम के कैप्टन हैंसी क्रोनिए। इस मीटिंग में जब एमके ने क्रोनिए से पूछा कि तीसरे टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीकन टीम का क्या होने वाला है तब क्रोनिए कहते हैं कि उनकी टीम ये टेस्ट मैच हार जाएगी। एमके क्रोनिए की इस जानकारी के लिए उसको 40,000 डॉलर्स देते हैं। ये वही मीटिंग है जो क्रोनिए ने अपने कन्फेशन के दौरान एक्सेप्ट की थी। I gave him a more or less figure and it turned out that South Africa beat Zimbabwe out more or less around that figure and he gave me a sum of 3000 rand for that. जब ये मीटिंग चल रही थी इसी दौरान अजय शर्मा ने अजय जडेजा को भी एमके से मिलवाया और अजय जडेजा एमके के सामने प्रपोजल रखते हैं कि वो उनके लिए कुछ मैचेस खेल सकते हैं। जब एमके अजय जडेजा से पूछते हैं कि टीम में उनके साथ और कौन सा प्लेयर है जो इस काम में जडेजा के साथ काम आ जाएगा तब जडेजा नयन मोंगिया का नाम लेते हैं। हालांकि एमके को अजय जडेजा का ये प्रपोजल ज्यादा पसंद नहीं आता इसलिए वो मना कर देता है। इस मीटिंग में एमके अजय जडेजा को एक फ्यूचर इन्वेस्टमेंट के तौर पर ₹50,000 देता है। साल 1997 में भी एमके और अजहरूद्दीन साथ में काम करते हैं लेकिन अजहरूद्दीन की बताई मोस्टली इंफॉर्मेशन से एमके को खास फायदा नहीं हुआ। 1997 में हुए सहारा कप में एमके को अजहरूद्दीन की वाइफ संगीता बिजलानी के जरिए कई इंपोर्टेंट टिप्स मिलती हैं लेकिन उससे एमके को कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। अब एमके को लगने लगा कि अजहरूद्दीन उसको गुमराह कर रहे हैं और वो जरूर दूसरे सटोरियों के साथ काम कर रहे हैं या फिर अजहरूद्दीन के पास मैच को फिक्स कराने के लिए पर्याप्त खिलाड़ी नहीं हैं। अजहरूद्दीन की बताई टिप्स से बार-बार नुकसान होने के बाद एमके अजहरूद्दीन पर पैसे वापस लौटाने का प्रेशर डालता है और अजहरूद्दीन ये बात मान भी जाते हैं। एमके CBI को बताता है कि उसने अजहरूद्दीन से लगभग ₹30 लाख कई किश्तों में वसूल लिए। किश्त वसूल करने के बाद एमके ने मई 1998 में सट्टेबाजी और इससे जुड़े सभी काम छोड़ दिए। एमके के मुताबिक उसने अजहरूद्दीन को टोटल ₹90 लाख दिए थे। He said that Because 20, 25 lakhs per player. That's around $90000 a player. और राकेश मारिया एक्सप्लेन दैट द प्लेयर्स देन यूज द मनी दैट दे पेड टू लूज टू बेट ऑन द अदर टीम टू विन। अभी तक मैंने आपको जितनी भी इंफॉर्मेशन दी है वो सभी बातें एमके का CBI को दिया स्टेटमेंट था जो उसने अपने सरेंडर के समय CBI को दिया था। इसके बाद CBI इस केस से जुड़े बाकी प्लेयर्स और सटोरियों को भी पकड़कर उनके बयान लेती है। जैसे मुंबई का सट्टेबाज अनिल नागाड़ा उर्फ अनिल स्टील ये बात कंफर्म करता है कि हां एमके मनोज प्रभाकर और अजहरूद्दीन के साथ मिलकर मैचेज को फिक्स करवाया करता था। Sports Minister SS Dhindsa asserted that the search operations might not provide the vital clue and only a Cronje-like deposition may prove something. अनिल स्टील 1996 में एमके और अजहरूद्दीन द्वारा किए गए मैच फिक्स को भी कंफर्म करता है। जब CBI मोहम्मद अजहरूद्दीन का स्टेटमेंट लेती है तब वे बताते हैं कि हां उनके और अजय शर्मा के साथ अच्छे रिलेशन थे जिसकी वजह से अजहरूद्दीन 1995 में पहली बार एमके से मिले थे। अजहरूद्दीन बताते हैं कि अजय शर्मा और एमके ने खराब मैच खेलने के लिए उन्हें ₹1.25 करोड़ देने की बात कही थी लेकिन ये सौदा पूरा नहीं हो सका था। इसके अलावा अजहरूद्दीन ये एक्सेप्ट भी करते हैं कि हां उन्होंने कुछ मैचेज के लिए एमके से पैसे लिए थे। लेकिन जिन मैचेज के लिए ये पैसे लिए थे उनमें उनका परफॉर्मेंस अच्छा ही रहा था। Down the track comes Azharuddin and he's hit that all the way for a six. Yeah! अजहरूद्दीन ने कहा कि 1996 में राजकोट में इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच हुआ टाइटन कप मैच एमके के कहने पर फिक्स किया गया था जिसमें उनका साथ अजय जडेजा और नयन मोंगिया ने दिया था। Cause of rebuilding of the Indian innings, this. Oh, it's a six! What a strike! इसके अलावा 1997 में श्रीलंका में हुए Pepsi Asia Cup का एक मैच भी एमके के जरिए फिक्स किया गया था। अजहरूद्दीन ने एक्सेप्ट किया कि उन्होंने 1996 में कानपुर में मुकेश कुमार गुप्ता उर्फ एमके को हैंसी क्रोनिए से मिलवाया था। इसके साथ ही अजहरूद्दीन अजय गुप्ता और अमीश गुप्ता जो दूसरे सटोरी थे उनके बारे में बताते हैं और कहते हैं कि उन्होंने अजय जडेजा और नयन मोंगिया के साथ मिलकर 1999 में जयपुर में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए Pepsi Cup के एक मैच को भी फिक्स किया था।
[25:35]इस मैच के लिए अजहरूद्दीन को अजय गुप्ता की तरफ से ₹10 लाख मिले थे। Azharuddin making sure that he finds the gap this time on the off side, on the up. And nicely balanced. अजहरूद्दीन के बाद CBI बाकी इंडियन प्लेयर्स का भी बयान लेती है जिसमें सचिन तेंदुलकर के बयान सबसे ज्यादा पॉपुलर होता है। जब सचिन से पूछा गया कि क्या उन्हें किसी इंडियन प्लेयर के मैच फिक्सिंग में शामिल होने का शक है तब सचिन ने कहा कि कैप्टन के रूप में अजहरूद्दीन ने जितने भी मैच खेले हैं उन्हें लगता था कि अजहरूद्दीन अपना 100% नहीं दे रहे हैं। 1994 का कानपुर में वेस्टइंडीज के साथ मैच था और सचिन तेंदुलकर ने कहा कि आपने उसमें 100% नहीं खेला। उन्होंने CBI को बताया और उन्होंने कहा कि उनको ये भी लगता था कि शायद आपके रिश्ते हैं बुकी से आपको हैरानी हुई सचिन ने इस तरह की बातें की। Finally अक्टूबर 2000 में CBI ने अपनी 75 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की और उस समय के स्पोर्ट्स मिनिस्टर सुखदेव सिंह ढिंढसा को सौंपी। CBI इस कंक्लूजन पर पहुंचती है कि इंडियन क्रिकेट में बड़े लेवल की मैच फिक्सिंग हो रही है जिसमें CBI पांच इंडियन प्लेयर और नौ इंटरनेशनल प्लेयर्स का नाम लेती है। इन नामों में इंडिया के मोहम्मद अजहरूद्दीन, अजय जडेजा, मनोज प्रभाकर, नयन मोंगिया और अजय शर्मा शामिल थे और नौ फॉरेन प्लेयर्स में इंग्लैंड के एलेक स्टीवर्ट, वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा, साउथ अफ्रीका के हैंसी क्रोनिए, श्रीलंका के अर्जुन रणतुंगा और अरविंदा डि सिल्वा, न्यूजीलैंड के मार्टिन क्रो, पाकिस्तान के आसिफ इकबाल और सलीम मलिक और ऑस्ट्रेलिया के मार्क वॉक शामिल थे। Governments's decision to introduce a set of conduct for players seems one measure to avoid further scams related to the game. हालांकि CBI द्वारा प्रोवाइड कराए गए एविडेंसेस के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के जज मनोज कुमार मुखर्जी और फिर सोलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया हरीश साल्वे CBI को कहते हैं कि उन्होंने मैच फिक्सिंग का जो केस बनाया है वो कोर्ट में टिक नहीं पाएगा। क्योंकि तब भारत में मैच फिक्सिंग से जुड़े प्रॉपर नियम-कानून नहीं थे। We have got evidence of unexplained expenditure, unexplained investment, undisclosed assets, the assets which have been valued low. We have evidence of large scale gifts. CBI ने अपनी रिपोर्ट में जो भी बताया उसमें इंडियन लॉ के अकॉर्डिंग सिर्फ चार केसेस बन सकते थे। CBI ने जिन एक्टिविटीज को अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया था कि अजहरूद्दीन यहां ठीक से नहीं खेले, वहां अपना विकेट आसानी से दे दिया। ये ना तो धोखाधड़ी में आता था और ना ही किसी क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी में। कोर्ट बाहर से देखकर ये नहीं बता सकता था कि सामने वाले ने अपना विकेट जान-बूझकर दिया है या वो सच में थका हुआ था। प्लेयर किस इंटेंशन से खेल रहा है इसको प्रूव करना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है। कोर्ट ने कहा कि इन प्लेयर्स पर भ्रष्टाचार अधिनियम भी लागू नहीं कर सकते क्योंकि ये प्लेयर्स कोई गवर्नमेंट सर्वेंट नहीं है। कोर्ट ने कप्तान अजहरूद्दीन और अजय शर्मा को सजा दिलाने की कोशिश की क्योंकि अजहरूद्दीन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में और अजय शर्मा सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन में काम करते थे। लेकिन कुछ टाइम के बाद उन्हें भी बरी कर दिया जाता है। हालांकि ये क्रिकेटर्स कोर्ट से बच जाते हैं लेकिन BCCI इन प्लेयर्स पर एक्शन ले लेती है। BCCI की डिसिप्लिनरी कमिटी दिसंबर 2000 में मोहम्मद अजहरूद्दीन और अजय शर्मा पर लाइफ टाइम क्रिकेटिंग बैन लगा देती है जबकि अजय जडेजा और मनोज प्रभाकर पर 5 साल का सस्पेंशन लगाती है। In the case of Azharuddin, there is not only a nexus, but there is also sufficient evidence to establish in an inquiry of this type that there was match fixing. That is the distinction between him and the other players. हालांकि इस पूरे स्कैंडल में नयन मोंगिया बच जाते हैं। BCCI शुरुआती जांच में तो नयन मोंगिया को सस्पेंड कर देती है लेकिन जब उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिलते तब उन्हें पूरे तरीके से बरी कर दिया जाता है। He had no time in my career. Have I been involved in match fixing as defined in the CBI report? दूसरी तरफ बाकी क्रिकेटिंग नेशन भी फिक्सिंग स्कैंडल में शामिल अपने क्रिकेटर्स के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना शुरू कर देते हैं। जैसे अक्टूबर 2000 में साउथ अफ्रीकन बोर्ड UCBSA ने हैंसी क्रोनिए पर लाइफ टाइम बैन लगा दिया। I remember saying to Hansie have you taken money from bookmakers? He said yes. And I think that was the end of the conversation.
[29:36]इसी तरह नवंबर 2000 में श्रीलंकन बोर्ड एक कमीशन बनाती है ताकि एमके द्वारा अर्जुन रणतुंगा और अरविंदा डि सिल्वा पर लगाए एलिगेशंस की जांच हो सके। श्रीलंकाई बोर्ड डि सिल्वा को साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले जाने वाले मैच में ड्रॉप कर देती है। लेकिन जुलाई 2001 में दोनों प्लेयर्स के खिलाफ प्रॉपर एविडेंसेस ना मिलने की वजह से फिक्सिंग के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया जाता है। If there was such an allegation it is his duty to not speak to me in such a manner. I am not a yes man and Arjuna is well aware of this. After I go past the boundary line in the ground I am one who gives my 100% for the game. इसी तरह नवंबर 2000 में न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड भी एमके के मार्टिन क्रो पर लगाए एलिगेशंस की जांच शुरू कर देती है लेकिन अगेन प्रॉपर एविडेंसेस ना मिलने की वजह से मार्टिन क्रो को भी जुलाई 2001 में इन एलिगेशंस से क्लियर कर दिया जाता है। वहीं इंग्लैंड के विकेटकीपर एलेक स्टीवर्ट जिनका नाम भी एमके ने लिया था उन्हें भी जुलाई 2001 में मैच फिक्सिंग के सभी आरोपों से क्लियर कर दिया जाता है। I was totally shocked when Star Sports made the phone call to me. And to be honest I've been really in a state of shock ever since. इधर जो सस्पेंशन इंडियन क्रिकेटर्स पर लगा था उसका ज्यादा असर इन क्रिकेटर्स पर पड़ता नहीं क्योंकि 2003 में दिल्ली हाई कोर्ट अजय जडेजा पर लगे 5 साल के सस्पेंशन को हटा लेती है। ऐसे ही 2012 में आंध्र प्रदेश की कोर्ट भी अजहरूद्दीन पर लगा लाइफ टाइम बैन हटा लेती है। कह रही, किसी के साथ मैं कोई लीगल एक्शन नहीं लूंगा। मैं बहुत खुश हूं कि आज जो कोर्ट के फैसले से। साल 2014 में दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के बाद BCCI ने अजय शर्मा पर लगाया हुआ लाइफ टाइम बैन भी हटा लिया। मनोज प्रभाकर पर लगा 5 साल का सस्पेंशन 2006 में पूरा होकर खत्म हो जाता है। नयन मोंगिया को 2000 में ही क्लीन चिट मिल चुकी थी। इस तरह आज की डेट में ये सारे प्लेयर्स जिनका नाम कभी मैच फिक्सिंग में आया था वो वेल सेटल्ड हैं। क्रिकेट फिक्सिंग के और भी कई केसेस हैं जिन्हें हम आगे की वीडियोस में डिस्कस करेंगे। अगर आपको हमारी मेहनत अच्छी लगी तो कृपया इस वीडियो को लाइक करते हुए चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें। आपके एक-एक कमेंट से हमारी वीडियो को बूस्ट मिलता है। इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।



