[0:00]हे दोस्तों राघव ओबोरॉय को पिछले तीन हफ्तों से बराबर नींद नहीं आ रही थी उसको एक सवाल खाए जा रहा था अपनी जिंदगी में उसने हजार डिसीजंस लिए थे लेकिन यह एक डिसीजन लेना उसके लिए बहुत भारी पड़ रहा था बात असल में यह थी कि राघव अराउंड 60 इयर्स का हो चुका था और एक मल्टीमिलियनेयर था एक मजदूर की तरह जिसने अपनी शुरुआत करी थी कंस्ट्रक्शन साइट्स पर वो काम करता था लेकिन धीरे-धीरे उसने सिस्टम को समझा और फिर वो कॉन्ट्रैक्टर बन गया कॉन्ट्रैक्टर बनने के बाद उसने रिस्क लिया और एक बिल्डर बना जिसके बाद उसने मल्टीपल कंस्ट्रक्शंस किए आज उसके 170 से ज्यादा टावर्स पूरे वर्ल्ड में फैले थे 10,000 से ज्यादा एंप्लॉईज उसके लिए काम करते थे और यह सब करने के लिए उसने बहुत बार बड़े-बड़े डिसीजंस लिए थे बट सबसे बड़ा डिसीजन अभी लेना बाकी था कि उसके बाद उसके तीनों बेटों में से कौन सा बेटा उसकी पोजीशन संभालेगा राघव अपने तीनों ही बेटों से बहुत प्यार करता था तीनों के अंदर ही खूबियां थी खामियां थी तीनों भाइयों में प्यार भी था पर झगड़ा भी होता था और कई बार वो सब एक दूसरे की बातें नहीं सुनते थे इसीलिए क्लेरिफाई करना जरूरी था कि उनमें से लीड कौन करेगा कंपनी को तीनों ही अपने आप को कैपेबल समझते थे राघव को पता था वह जिस भी एक को चुनेगा बाकी दो तो नाराज होंगे ही और इसीलिए ही उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें तभी एक दिन उसने अपने एक पुराने दोस्त को फोन किया जिसने कई बार लाइफ के ऊंच-नीच में राघव की मदद करी थी अच्छे सजेशंस और काइंड ऑफ मेंटरशिप देके उस रात जब राघव ने आधे घंटे अपने उस पुराने दोस्त से बात करी तो बातों-बातों में राघव ने सारी चीजें बता दी कि कैसे वह परेशान है और तब फोन से आवाज आई कम ज्यादा ज्यादा कम प्रिंसिपल याद है राघव ने बोला हां याद है उसने तो मुझे अपनी लाइफ में बहुत आगे बढ़ने दिया उस प्रिंसिपल पर तो मुझे ही किताब लिखनी चाहिए थी दोनों हंसे और तभी राघव के दिमाग में एक आईडिया आया उसने अपने दोस्त को शुक्रिया कहा और फोन रख दिया अगले दिन राघव ने अपने तीनों बेटों को बुलाया तीनों बेटों में से जो पहला बेटा था उसका नाम था अरुण सबसे एल्डेस्ट और लीडरशिप क्वालिटी रखने वाला था अरुण दिखने में हट्टा कट्टा था बड़ा था फिजिकली उसकी स्ट्रेंथ बहुत थी हमेशा जिम जाता था और ओवरऑल वह मेहनत करने वाला इंसान था मेहनत से जरा भी नहीं घबराता था इनफैक्ट वह इतनी मेहनत करता था जितना शायद ही और कोई करे कई बार वह जानबूझ के कंपनी में सबसे पहले आता और एंड तक रुकता अपनी मेहनत दिखाने के लिए वह अपनी मेहनत पे टू बी ऑनेस्ट बहुत ज्यादा प्राउड था और यही कहीं ना कहीं उसकी खामी भी थी कि वो हर चीज में ब्रूटल फोर्स मेहनत का रास्ता ही चुनता था दूसरा बेटा था विकास यह अरुण से एग्जैक्ट अपोजिट था इसे मेहनत करना बिल्कुल पसंद नहीं था यह हमेशा बोलता था कि जब ऊपर वाले ने हमें इतना स्मार्ट दिमाग दिया है तो मेहनत करने की जरूरत क्या है मेहनत तो गधा भी करता है ऐसे टाइप की उसके कुछ लाइंस होते थे वह अपनी टीम मेंबर्स को भी हमेशा यही बोलता था कि भले से लेट आओ लेकिन काम जल्दी खत्म करके दो वो चीजों को ऑप्टिमाइज करने पे बहुत फोकस करता था इसीलिए ही कई लोग उसे ऑप्टिमाइजर भी बोलते थे और इसी में कहीं ना कहीं उसकी खामियाब भी थी कि कई बार वो ऐसी चीजों को ऑप्टिमाइज करने लग जाता था जैसे ऑप्टिमाइज करने की जरूरत ही नहीं थी वह हार्ड वर्क को कई बार टालता था काम करने को वह कई बार टालता रहता था इजी वे आउट फाइंड आउट करने के लिए आखिरी बेटा था रोहन यह सबसे यंगेस्ट था तीनों में एज का डिफरेंस ज्यादा नहीं था लेकिन यह तीनों से ज्यादा सॉफ्ट था सोचता ज्यादा था किताबें ज्यादा पढ़ता था और बहुत ज्यादा बातें नहीं करता था रोहन को अपने दोनों भाई पसंद थे वो दोनों से ही सीखता था उसकी ऑब्जर्वेशन स्किल्स बहुत अच्छी थी कई बार उसके दोनों बड़े भाई उसे बोलते भी थे कि इतना किताब पढ़ना बंद कर रियल दुनिया में ज्यादा टाइम स्पेंड किया कर जो कई बार वह करता भी था और उसकी खामी कई बार लोगों को यही लगती थी कि वह शायद लेजी है या इतना काम नहीं करता तो अगली सुबह जब तीनों भाई राघव के सामने खड़े हुए तो हर कोई क्यूरियस था कि डैड ने सडनली हमें ऐसा क्यों बुला लिया तब राघव ने उन्हें बताया कि देखो मैं चाहता हूं अभी यह डिसाइड हो जाए कि मेरे बाद ओबोरॉय कंस्ट्रक्शन ग्रुप्स का चेयरमैन कौन बनेगा कौन लीड करेगा इसके लिए मैं चाहता हूं कि जो सबसे कैपेबल होगा वही जीतेगा और उसी को चेयरमैनशिप की पोजीशन मिलेगी
[3:48]ना तीनों ही भाई इस चीज पे थोड़ा बात करने के बाद एग्री करते हैं कि यह सही है इसीलिए कुछ दिन बाद वह तीनों भाइयों को उस रेस के लिए उस कंपटीशन के लिए एक ओल्ड कंस्ट्रक्शन यार्ड में बुलाया जाता है एक बड़ी सी खुली जगह जहां कंस्ट्रक्शन होने वाला होता है और वहां पर रखे होते हैं तीन बड़े से स्क्वायर शेप के स्टोन्स यह स्टोन सोप स्टोन्स होते हैं काफी हैवी होते हैं वहां पर राघव उन्हें बताता है कि कैसे चैलेंज यह है कि तुम लोगों को अपने हाथों का यूज करके इस स्टोन को इस पोजीशन से 800 से 100 मीटर दूर वह जो वाइट लाइन दिख रही है उसके पार इस पत्थर को पहुंचाना है और जो भी इस पत्थर को पहले उस लाइन के पार पहुंचाएगा वो जीत जाएगा रूल्स बड़े ही सिंपल थे आप छोटे-मोटे टूल्स का यूज कर सकते हो लेकिन फॉकलिफ्ट या बड़े टूल्स का यूज नहीं करना है और कंडीशन यह है कि आपको अपने हाथों का यूज करना ही पड़ेगा इस पत्थर को यहां से वहां पहुंचाने के लिए छोटी-मोटी चीजों के लिए आप दूसरों की मदद ले सकते हो जैसे टूल्स मंगवाने के लिए या ऐसी कुछ चीजें वरना मैक्सिमम काम आपको ही करना पड़ेगा जब तीनों ही भाई रूल्स समझ गए तो रेस शुरू हुई और जैसा कि एक्सपेक्टेड था वैसा ही होना स्टार्ट हुआ अरुण जो पहला भाई था उसने उस 400-500 किलो के पत्थर को अपनी ब्रूटल स्ट्रेंथ से मेहनत से पुश करना स्टार्ट किया और पत्थर क्योंकि बहुत हैवी था और जमीन भी जो थी वह थोड़ी मिट्टीदार थी इसीलिए जितना उसने सोचा था उतनी आसानी से वह पत्थर मूव नहीं हो रहा था बट धीरे-धीरे ही सही इंच बाय इंच वो पत्थर आगे बढ़ रहा था यह देख के उसके चेहरे पर स्माइल आई और उसे लगा कि यह रेस तो वह आराम से जीत ही जाएगा दूसरे भाई ने जब अरुण को मूव होते हुए देख लिया तो उसके दिमाग में एक चीज आई कि वह अरुण जितना ताकतवर तो नहीं है ना ही उसको यह लगा कि इतनी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है बेटर रास्ता जरूर होगा और तभी उसको आईडिया आया उसने एक हैमर चीजल और कुछ छोटे-मोटे टूल्स मंगाए जिसकी हेल्प से उसने उस पत्थर के जो कोने के हिस्से होते हैं उसको एक-एक करके तोड़ना स्टार्ट किया अरुण यह देख के समझ गया था कि वह कोई ट्रिक स्मार्ट वर्क करने की कोशिश कर रहा है बट उसने उसके ऊपर ध्यान देने से इंकार कर दिया उसके दिमाग में सिर्फ इतना था कि अगर मैं हार्ड वर्क करता रहूंगा पुश करता रहूंगा तो मैं जल्दी पत्थर पहुंचा ही दूंगा वहीं दूसरी तरफ विकास धीरे-धीरे उस पत्थर को राउंड शेप का बनाने लग गया गोल आकार का स्टार्टिंग के 30 मिनट जहां यह दोनों ही बहुत मेहनत कर रहे थे रोहन इन दोनों को ही ऑब्जर्व करके रास्ते को ऑब्जर्व कर रहा था और कुछ सोच रहा था और ऐसी 15-20 मिनट सोचने के बाद पूरे रास्ते को चलकर ऑब्जर्व करने के बाद रोहन ने डिसाइड किया कि वह भी अपने दूसरे भाई की तरह चीजल और हैमर से उस पत्थर को राउंड बनाएगा उसने वही चीज करना स्टार्ट करी बाकी सब देख के यही सोच रहे थे कि रोहन अपने दूसरे भाई की स्ट्रेटेजी हमेशा की तरह कॉपी कर रहा है और कुछ ओरिजिनल आईडिया नहीं है और इस चीज में भी उसने लेट कर दी क्योंकि रोहन ने ऑलरेडी कई सारे कॉर्नर्स को अच्छे से राउंड बना दिया था ना अरुण अपनी ताकत की मदद से उसने 30-40 मीटर पार भी कर लिए थे लेकिन अब उसकी हालत खराब होना स्टार्ट हो गई थी उसके हाथ लिटरली जवाब देना स्टार्ट कर रहे थे पत्थर के आगे जो मिट्टी जमा हो रही थी वह उसके चैलेंज को और बढ़ा दे रही थी अरुण क्या कर रहा था कि बार-बार जा के आगे जो मिट्टी जमा हो रही है पत्थर की वजह से वह उसको साफ कर रहा था फिर धक्का दे रहा था फिर मिट्टी साफ कर रहा था और यह मेहनत देख के सभी बहुत इंप्रेस्ड थे कि कितना मेहनती लड़का है यह राघव भी इस चीज को नोटिस कर रहा था बट इंटरेस्टिंग चीज तब चालू हुई जब विकास ने उस पत्थर को ऑलमोस्ट गोल जैसा बना दिया और धक्का देना स्टार्ट किया जैसे ही उसने धक्का देना स्टार्ट किया उसे भी ताकत लगानी पड़ी बट कंपेरटिवली वो काफी इजी तरीके से आगे वो पत्थर रोल होना स्टार्ट हो गया यह चीज देख के सभी सरप्राइज थे जबकि रही बात रोहन की उसने भी पत्थर को गोल तो कर दिया था बट सिलेंडर शेप में किया था उसने पूरा स्फेरिकल नहीं और इसके बाद जहां विकास पत्थर को पुश कर कर के आगे बढ़ा रहा था वही रोहन वो जो रास्ता था वह पता नहीं उसपे कुछ तो कर रहा था बार-बार वहां जा के फावड़े से शवेल से कुछ टूल्स का यूज करके उस रास्ते को प्लेन बनाने की कोशिश कर रहा था सभी लोग को देख के लग रहा था कि रोहन क्या ही कर रहा है ऐसे तो वो पक्का हार ही जाएगा और शायद ऐसा ही होने वाला था कंपटीशन जो टक्कर चल रही थी वह अरुण और विकास के बीच में चल रही थी जिसमें ऐसा लग रहा था कि विकास जीत जाएगा बट फिर चैलेंज आना स्टार्ट हुआ विकास ने नोटिस किया कि एक टाइम तक तो पत्थर बराबर गोल-गोल घूम रहा था बट फिर 60-70 मीटर पर वह पत्थर गोल होने के बाद भी अच्छे से मूव नहीं कर पा रहा था उसको बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी फिर भी पत्थर नहीं घूम रहा था अरुण विकास को देख के हंसने लगा और फिर से उसने पत्थर को धक्का देना चालू किया और 60-70 मीटर तक पहुंच गया देखते ही देखते जहां विकास 80-90 मीटर पर पहुंच गया था सिर्फ 10-20 मीटर बचे थे उस आखिरी 10 मीटर में ही रोहन का पत्थर ऐसे गोल-गोल घुमा मानो जादू की तरह वह घूमते-घूमते उसने फिनिश लाइन तीनों से पहले पार कर ली सबसे एंड में मेहनत करने के बाद
[8:42]यह देख के सभी लोग बहुत ज्यादा शौक थे कि आखिर हुआ कैसे और राघव टू बी ऑनेस्ट काफी इंप्रेस्ड था यह पूरी चीजें होने के बाद राघव ने तीनों बेटों को ऑफिस में बुलाया और रोहन से उसने पूछना स्टार्ट किया कि तुमने क्या किया कि जहां अरुण हार्ड वर्क यूज कर रहा था विकास स्मार्ट वर्क कर रहा था तुमने क्या ऐसी चीज यूज करी जिसकी वजह से तुम दोनों को हरा दिया तब रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा दोनों का मिक्सचर और लेवरेज अब देखो दोस्तों स्टोरी में आगे जाने से पहले मैं बताना चाहूंगा यह वीडियो स्पॉन्सर्ड है समरी बोर्ड से समरी बोर्ड एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आपको ऐसी पावरफुल किताबों को वीडियो फॉर्मेट में एनिमेशन फॉर्मेट में कन्वर्ट करके दिखाता है जिससे आप वीडियो फॉर्मेट में आराम से एंजॉय करते हुए किताबों की बातों को चैप्टर वाइज सीख सकते हो और उनकी बातों को अपनी लाइफ में अप्लाई कर सकते हो जैसे रोहन ने हार्ड वर्क स्मार्ट वर्क का कॉमिनेशन यूज किया वैसे ही समरी बोर्ड भी स्मार्ट वर्क और हार्ड वर्क का कॉमिनेशन से बनाई गई है जहां पर हार्ड वर्क करके इस किताब को ऐसा एक फॉर्मेट दिया गया है जिससे आप स्मार्टली कंज्यूम करके 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कि इसे भी कार्व करना पड़ेगा मतलब शेप इसका चेंज करना पड़ेगा बट दूसरी इंटरेस्टिंग चीज उसने यह ऑब्जर्व करी कि जो रास्ता था जो मिट्टीदार रास्ता था वह पूरी तरीके से फ्लैट नहीं था वह एक तरीके से इंक्लाइंड पोजीशन पे था मतलब पत्थर को शेप देने के बाद भी भले से पत्थर पूरा गोली क्यों ना हो एक टाइम गोल चीजें भी पहाड़ नहीं चढ़ पाती है इंक्लाइन होने की वजह से उसने नोटिस करा कि वह इंक्लिनेशन वहां पर है इसीलिए उसे अरुण की स्ट्रेटेजी और विकास के स्ट्रेटेजी दोनों ही परफेक्ट नहीं लगी इसलिए उसने क्या किया रोहन ने सिर्फ दो या तीन डिग्री का स्लोप क्रिएट किया जो इनफ था ग्रेविटी को बीट करने के लिए या फिर ग्रेविटी को दोस्त बनाने के लिए जिसके वजह से गोल घूमता घूमता वह पत्थर ऑटोमेटिकली फिनिश लाइन तक पहुंच गया बिना ज्यादा मेहनत करे नाउ यह आंसर सुन के राघव बहुत ही ज्यादा इंप्रेस्ड था और टू बी ऑनेस्ट अरुण और विकास ये दोनों भी काफी इंप्रेस हो गए इसके बाद तीनों भाई अपने फादर राघव के साथ बैठे जहां अरुण के हाथ में बैंडेजेस लगे हुए थे विकास पूरी तरीके से थक चुका था और रोहन बहुत एक्साइटेड था राघव ने तीनों से बात करना स्टार्ट करी और तीनों को कांग्रेचुलेशन किया कि उन तीनों ने ही इस इतने बड़े पत्थर को इतनी दूर तक पहुंचाया एक ने मेहनत की मदद से एक ने स्मार्ट वर्क की वजह से लेकिन एक ने कुछ ऐसा किया जो दोनों से ही अलग था लेकिन दोनों का मिक्सचर ही कहीं ना कहीं था पहले राघव ने एक फोन मिलाया और अपने फोन को लाउड स्पीकर पर रख दिया और बताया यह पूरी रेस का आईडिया मेरा ही था लेकिन यह आईडिया मुझे तब आया जब मैंने अपने खास दोस्त की मदद ली और यह दोस्त और कोई नहीं थे वो थे डॉक्टर बुक जिनको उन्होंने लाउड स्पीकर पे रख के बात करना स्टार्ट करी पहले बात करें अरुण से अरुण को उन्होंने कांग्रेचुलेशन किया कि वो 70 मीटर तक प्योर ताकत की मदद से उसने उस पत्थर को यहां से वहां ले के आया जो कि अपने आप में बहुत बड़ी चीज है अरुण ने बोला कि हां बट फिर भी मैं हार गया तब राघव ने कहा हां तुम हारे इसलिए नहीं क्योंकि तुमने मेहनत कम करी बट कि इसलिए क्योंकि तुम इफेक्टिव नहीं थे तुम्हें लगा पेन जितना होगा उतना मैं प्रोग्रेस करूंगा लेकिन यह बेस्ट तरीका नहीं है उसके बाद राघव ने विकास को देखा विकास तुम बहुत स्मार्ट हो तुमने बहुत अच्छे से स्टोन को ऑप्टिमाइज किया उसे गोल बना दिया जिससे तुम्हें आधी से भी कम मेहनत करनी पड़ी उस पत्थर को स्टार्टिंग में घुमाने के लिए लेकिन फिर एक टाइम बाद यह भी चीज इनफ नहीं हुई विकास ने बोला हां दिमाग लगाने के बाद भी मेहनत तो मुझे एंड में करनी ही पड़ी बहुत ज्यादा जो मुझसे नहीं हो पाई तब राघव ने कहा हां हां क्योंकि तुमने गलत चीजों को ऑप्टिमाइज कर दिया तुमने एक अच्छी सही चीज को किया बट दूसरी चीज ऑप्टिमाइज करना तुम भूल गए वो था रास्ता इसके बाद राघव ने रोहन को देखा रोहन स्टार्टिंग में ऐसा लग रहा था कि शायद तुम बुरी तरीके से हार जाओगे मुझे खुद को नहीं लगा था कि तुम इतने स्मार्टली चीजों को ऑप्टिमाइज करोगे तुमने स्मार्ट वर्क भी किया तुमने मेहनत भी किया और जहां पर जो चीज की जरूरत थी तुमने वो दोनों चीज यूज करी तभी फोन से आवाज आई बिल्कुल वैसे ही राघव जैसा तुमने अपने इनिशियल डेज में सक्सेस के लिए किया था यह आवाज किसकी थी वेल यह आवाज थी डॉक्टर बुक की राघव ने स्माइल करते हुए कहा यस माय डियर फ्रेंड फोन से वापस आवाज आई डॉक्टर बुक ने कहा कि देखो राघव पहले से ही एक बहुत ही हार्ड वर्किंग इंसान थे स्मार्ट वर्क भी उन्होंने बहुत किया लेकिन जिस चीज ने उनको आगे ले के गया वह सिर्फ हार्ड वर्क या स्मार्ट वर्क नहीं था वो था कम ज्यादा ज्यादा कम प्रिंसिपल नाउ यह सुन के सभी बच्चे कंफ्यूज थे वेल बुक की लैंग्वेज में बोला जाए तो इसे बोलते हैं 8020 प्रिंसिपल या फिर परि प्रिंसिपल यह सुनते ही रोहन के कान खड़े हो गए क्योंकि उसे पता था यह वो प्रिंसिपल क्या है अरुण को इसके बारे में इतना नहीं पता था विकास जानता था फिर भी डॉक्टर बुक ने थोड़ा सा एक्सप्लेन किया कि यह बुक कहीं ना कहीं बोलती है कि कई बार आप जो 80 पर रिजल्ट आपको मिलते हैं वह आपके 20 पर एफर्ट्स की वजह से मिलते हैं अरुण ने अपना 100% दिया लेकिन उसने उस 80% पर भी मेहनत कर दी जिससे सिर्फ 20% रिजल्ट मिलते हैं विकास ने ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान दिया बट वह क्रूश वल 20% उससे मिस हो गए जो 80% रिजल्ट देते हैं जबकि रोहन ने उस 20% पर बहुत ज्यादा फोकस किया हार्ड वर्क किया जिसकी वजह से 80% रिजल्ट मिलते हैं मतलब ग्रेविटी और टेरेन जिसे आप लेवरेज या फिर सिस्टम भी बोल सकते हो डॉक्टर बुक ने बोला कि देखो बच्चों आपके फादर ने यह एंपायर खड़ा किया सिर्फ इसलिए नहीं कि क्योंकि वह बहुत हार्ड वर्किंग थे या फिर इसलिए नहीं क्योंकि वह बहुत स्मार्ट या कनिंग थे ऐसे कई सारे कनिंग लोग आते हैं और जाते हैं आपके फादर ने एंपायर क्रिएट कर पाया क्योंकि जब जरूरत पड़ी तब उन्होंने हार्ड वर्क भी किया और जब जरूरत पड़ी तब उन्होंने स्मार्ट वर्क भी किया और कब क्या करना है वही सबसे इंपोर्टेंट है और यही बुक मैंने एक बार आपके डैड को रिकमेंड भी करी थी जो बुक को पढ़ने के बाद हमने इसे नाम दे दिया था कम ज्यादा ज्यादा कम प्रिंसिपल मतलब कम काम करके भी जो ज्यादा रिजल्ट्स क्रिएट करें और ज्यादा काम करके भी जो कम रिजल्ट्स क्रिएट करे ऐसी चीजों को समझो राघव ने इस बात से कंपलीटली एग्री किया और अपने बच्चों को पांच इंपोर्टेंट लेसन समझाए उसी किताब से लेसन नंबर वन ज्यादातर रिजल्ट्स कई बार ऐसी जगहों से आते हैं जहां पे आपको कम एफर्ट डालना पड़ता है जैसे रोहन का वह स्टार्टिंग का एक पुश और उसके बाद बस थोड़ा-थोड़ा पुश करते रहना जिसने अरुण के पांच घंटे के पुश से ज्यादा रिजल्ट्स क्रिएट किए लेसन टू हार्ड वर्क कई बार वेस्टेड एफर्ट की तरह होता है जस्ट बिकॉज आप ज्यादा सफर कर रहे हो इसका मतलब यह नहीं है कि आप जीतोगे सफरिंग पेन कोई स्ट्रेटेजी नहीं है लेसन थ्री एलिमिनेट बिफोर यू ऑप्टिमाइज विकास ने एक स्मार्टनेस यही करी कि उसने उस स्टोन को ऑप्टिमाइज किया उस पत्थर के उन पार्ट्स को जो जरूरत नहीं थी जिसकी उसको एलिमिनेट करना चालू किया और रोहन ने एक स्टेप आगे जाकर उस रास्ते में भी जो चीज की जरूरत नहीं थी मिट्टी उसको लेवल पर किया उसको हटाया निकाला जिससे रास्ता टप हिल के बजाय डाउन हिल बन गया लेसन फोर फोकस ऑन फ्यू एक्शन दैट मैटर्स रोहन ने स्टार्टिंग के कुछ घंटे पत्थर के शेप में दी और रास्ते को शेप देने में दी उसने सिर्फ उन एक्शंस पर मेहनत करी जिन एक्शंस पर मेहनत करना सबसे जरूरी था और लेसन फाइव लेवरेज मल्टीप्लाइज एफर्ट एक टाइम बाद वह पत्थर अपने आप घूम के उसने फिनिश लाइन क्रॉस इसलिए कर दिया क्योंकि लेवरेज पिक्चर में आ चुका था अमीर लोग अमीर इसलिए बनते हैं क्योंकि वह लोग लेवरेज का यूज करते हैं वो लोग दूसरे लोगों का यूज करते हैं और ऐसे सिस्टम बनाते हैं जिससे बड़े से बड़ा काम भी आसानी से हो जाए राघव ने तब तीनों बेटों की तरफ देखते हुए कहा यस और यही सीक्रेट है मेरी एंपायर का यही चीज मैंने करी और इसी चीज को मैंने भी रोहन में नोटिस किया एक बड़ा एंपायर सिर्फ हार्ड वर्क से या स्मार्ट वर्क से नहीं बनता है वह लेवरेज और सही टाइम पर सही चीज करने से बनता है अरुण ने बोला मतलब आई वाज अ फूल जिसने इतनी मेहनत करी राघव ने कहा नहीं तुम ऑनेस्ट थे बस अब थोड़े और वाइजर हो जाओगे और होते ही रहोगे विकास ने तब हैरत से रोहन की तरफ देखा और उसने बोला कि तुमको कैसे पता चल गया इतना सब कैसे सीख लिया तब रोहन ने सोचते हुए बोला कि मैंने तुम दोनों को ही बहुत टाइम से देखा है अरुण को मेहनत करते हुए विकास को अपना दिमाग लगाते हुए और मुझे लगा कि हां ये दोनों ही सही है और मैंने डैड की स्टोरी भी कई बार डैड से सुनी है और टू बी ऑनेस्ट मैंने 8020 प्रिंसिपल भी पढ़ा था जिस वजह से ही मेरे लिए रेस जीतना थोड़ा आसान हो गया ना रोहन की यह स्मार्टनेस और हार्ड वर्क का कॉमिनेशन देख के राघव अरुण और विकास तीनों ही प्राउड थे और तीनों ने हैपिली ही न्यू चेयरमैनशिप की पोजीशन रोहन को संभालने के लिए दे दी यह बोलते हुए कि यस तुम सच में इसे डिजर्व करते हो ना देखो दोस्तों अगर आप भी 8020 प्रिंसिपल का यूज करना चाहते हो अपनी जिंदगी में अगर आप भी चाहते हो कि आप कम मेहनत करके ज्यादा आउटपुट क्रिएट कर सको अगर आप मेहनत से डरते नहीं हो लेकिन मेहनत के लिए पागल भी नहीं हो अरुण की तरह अगर आप स्मार्ट वर्क करना चाहते हो लेकिन स्मार्ट वर्क के आड में आप लेजनेर को दोस्त नहीं बनाना चाहते हो और आप सच में रोहन की तरह दोनों चीजों के कॉम्बिनेशन का यूज करना चाहते हो अपनी जिंदगी में तो मैं आपको इनवाइट करना चाहूंगा मैं लाइव करने वाला हूं इस संडे और आने वाले कई संडे मैं ऐसी लाइव करूंगा जहां मैं किताबों की बातों को आपको ऐसे समझाऊंगा जिससे आप कम एफर्ट डाल के ज्यादा रिजल्ट्स अपनी लाइफ में क्रिएट कर सकते हो ज्यादा टाइम वेस्ट करके एनर्जी वेस्ट किए बिना अपनी लाइफ में कैसे रिजल्ट्स क्रिएट कर सकते हो कैसे मैं उसे क्रिएट करता हूं वह सब मैं आपको लाइव में आपके साथ शेयर करता रहूंगा लेकिन हां यह लाइव अटेंड करने के लिए सिर्फ एक कंडीशन है हमारा 99 रप का जो समरी बोर्ड का सब्सक्रिप्शन है आपको सिर्फ वह परचेस करना है जब आप सब्सक्राइब करते हो तो आपको 8020 प्रिंसिपल पूरी किताब वीडियो फॉर्मेट में मिल जाएगी जिससे आप इस बुक की पूरी बातें डिटेल में अच्छे से सीख सकते हो कैसे आप कम एफर्ट से 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