[0:01]प्रेम तो बहुतों ने किया। पर शिव और सती का प्रेम वो प्रेम नहीं था जिसे दुनिया समझती है। वो दो शरीरों का मिलन नहीं, दो आत्माओं का पूर्ण विलय था। और जब सती ने खुद को अग्नि में आहूत किया तो यह सिर्फ एक बलिदान नहीं था। यह मैं का अंत था। शिव के प्रेम के अपमान का जवाब था। पूरी सृष्टि थर्रा उठी थी। और जिस शिव ने कभी मृत्यु को भी खेल समझा उसने पहली बार विरह का दर्द जाना। जिसके लिए पूरा ब्रह्मांड एक खिलौना था। उसने अपनी सती को उठाने के लिए पूरा जीवन दाँव पर लगा दिया। यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी। यह दर्शाता है कि सबसे बड़े वैरागी का प्रेम भी कितना गहरा हो सकता है। और उस प्रेम के जाने का दर्द कितना अनंत हो सकता है। सती गई नहीं, शिव के भीतर समा गई। और उस दिन से शिव सिर्फ शिव नहीं, वो सती के शिव बन गए। प्रपञ्च सृष्ट्युन्मुखलास्यकायै नमः शिवायै च नमः शिवाय। अर्थात मैं उन्हें नमन करता हूं, जो एक ही शरीर में शिव अर्थात सती भी है और शिव भी। सती शिव की शक्ति है और शिव सती के आधार। सती के बिना शिव शव समान हैं, और शिव के बिना सती का कोई अस्तित्व नहीं।

Shiva aur Sati, ShivaShakti #shiva #shiv #sati #shakti #love #shorts #short #status #viral #feed
Omit Awasthi ख़ाकसार
1m 56s211 words~2 min read
Auto-Generated
Watch on YouTube
Share
MORE TRANSCRIPTS


