[0:00]हेलो दोस्तों स्वागत है आपका फिर से एक रोमांटिक कहानी में उम्मीद करती हूं पसंद आएगी। मेरी शादी ललिता से मेरे माता-पिता की मर्जी से हुई थी। माता-पिता को ललिता पसंद आ गई थी। हम सब जब ललिता के घर गए थे लड़की देखने तो ललि मुझे कुछ खास पसंद नहीं आई थी। लेकिन मेरे माता-पिता को लता इस साधारण से घरेलू बहू बनने के योग्य लगी। उन्होंने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी और शगुन के तौर पर रुपए भी लता के हाथों में पकड़ दिए। ललिता के साथ एक लड़की थी जो मेरी होने वाली साली थी। वह उस समय छोटी नजर आ रही थी। लेकिन अब हमारी शादी को करीब 6 साल हो गए हैं। अब मेरी छोटी साली भारी जवान हो चुकी है। और उसके लंबे काले घने बाल पतली कमर तीखे नैन नक्ष कोई भी एक बार में सुहाना को देखकर पसंद कर ले। मुझे शादी के समय से ही लता में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी। और अब तो हमारे 5 साल के बाद भी कोई बच्चा नहीं हुआ है। जिस पर माता-पिता भी मुझ पर दूसरी शादी का दबाव डालते हैं। और सच मायने में मैं भी अपनी दूसरी शादी करना चाहता हूं। मेरी नजर अपनी साली पर पड़ी। साली साहिबा जब भी हमारे यहां आती और हंसी मजाक करती। मजाक में ही जब वह मेरे कंधे पर अपने हाथ रख देती। मैं उसे देखता रह जाता। उसकी मुस्कान जादू है। वह अपनी बड़ी बहन लता से बिल्कुल अलग है। लता थोड़ी गंभीर टाइप की लड़की है। लेकिन सुहाना हंसी मजाक करने वाली और एक समा बांधने वाली लड़की है। सुहानी से मुझे धीरे-धीरे प्यार होने लगा है। मैं सुहानी की ओर आकर्षित होने लगा हूं। मुझे असल में समझ नहीं आता है कि सुहाना से मुझे प्यार हो रहा है या उससे जिस्मानी संबंध बनाने के लिए मैं उतावला हो रहा हूं। क्योंकि सुहाना जब भी अपनी दीदी के ससुराल जाने यानी मेरे घर आती तो मैं उसे बाथरूम के झिररे से देखता। उसके बदन को देखकर अपने आप को शांत नहीं कर पाता हूं। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगती है। लेकिन मैं करूं तो करूं क्या? मैं अपने साली के हुस्न को पा लेना चाहता हूं। सुहानी को देखते ही मैं अपने आप को रोक नहीं पाता। उसकी पतली कमर और उभरे हुए सीने पर मेरी नजर जाती थी। एक रात की बात है जब मैं ऑफिस से काम करके घर आया। तब मैंने देखा कि सुहानी अपनी बड़ी बहन ललिता के कमरे में यानी हमारे कमरे में ही सो रही है। मैं धीरे से गया और बिस्तर पर बैठ गया। वह सोते हुए और भी गजब लग रही थी। उसके लंबे बाल पलंग से लटक रहे थे। मेरी नजर सुहानी पर ही टिकी रही। आज ऑफिस में कुछ ज्यादा काम होने की वजह से मैं घर लेट से आया हुआ था। लता ने मुझे ऑफिस में फोन किया था। तो मैं कह दिया था कि मैं ऑफिस में ही मीटिंग में हूं। खाना खाकर आऊंगा इसलिए लगता है दोनों बहने खाना खाने के बाद कमरे में सो गई है। सुहानी के चुस्त समीज और ढीले सलवार समीज के ऊपर उभरा हुआ सीना बाहर आ रहा था। जो लग रहा था अपने हाथों से पकड़ के मसल दूं लेकिन मैं अपने आप को रोका हुआ था। सुहानी के होठ को मैं चूम लेना चाहता था। मैंने सुहानी के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा। धीरे-धीरे गर्दन से उसके सीने की ओर ले गया और उसके सीने के अंदर अपने हाथों को करने लग गया। वह कसकसाने लग गई और करवट ली। मैंने जल्दी से हाथ निकाल लिया। मैं अपने आप को अब रोक नहीं पा रहा था। लेकिन ललिता भी बगल में सो रही थी। कहीं वह जाग ना जाए। मुझे इस बात का भी ख्याल रखना था। लेकिन आज मेरी उत्तेजना शांत नहीं हो रही थी। 2:00 बजे का समय था आधी रात का और ऐसे में भरी जवान साली का मेरे कमरे में सोना मुझे मदहोश कर रहा था। मैंने सुहानी की ओर की चादर धीरे से हटाई और उसके पजामे की डोरी को धीरे-धीरे खींच कर खोल दी। सुहानी नींद में कसमसा रही थी। मैंने अपने हाथों को सुहानी की कमर को सहलाने लगा। सुहानी नींद में हल्के मुस्कुरा रही थी। देखकर ऐसा लग रहा था कि उसे अच्छा लग रहा है। मैंने अपने हाथ को उसके पेट से होकर के धीरे-धीरे मैं उसके पूरे जिस्म को सहलाने लगा। सुहानी सिसकारी ले रही थी और मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मेरी सांस तेज हो रही थी। मेरी सांसों से गर्म सांस निकल रही थी। मैं सुहानी के सीने के पास मुंह करके उसे चूमने लगा। सुहानी एक और जैसे करवट लेती है। मैं और खड़ा हो जाता हूं। उसकी नींद खुल जाती है और कहती है जीजू आप मैं घबरा जाता हूं। फिर कहता हूं कि हां मैं अभी-अभी ऑफिस से आया हूं। सुहानी कहती है सॉरी जीजू मैं दीदी से बातें करते-करते आपके ही बेडरूम में सो गई। चलिए मैं आपके लिए खाना लगा देती हूं दीदी तो गहरी नींद में सो रही है नहीं मैं खाना खाकर आया। कोई बात नहीं तुम यहीं सो जाओ। मैं हॉल में सोफे पर सो जाता हूं। सुहानी कहती है जीजू इतना बड़ा तो बिस्तर है। आप यहां पर भी सो सकते हो तो मैं कहता हूं इससे साले साहिबा को कोई परेशानी तो नहीं होगी तो सुहानी कहती है इसमें मुझे क्या परेशानी होगी। एक तरफ दीदी सो रही है। एक तरफ में आप सो जाओ और बीच में मैं सो जाती हूं। सुहानी देखने में भरी जवान है लेकिन उसकी बातों में बचपन अब भी झलकता है। सुहानी लेटते ही वापस से फिर से सो जाती है और मैं उसके पास ही सो जाता हूं। इस बार तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाता और सुहानी वह पूरी रात उसके जिस्म को मैं चूमने लगता हूं। सुहानी नींद में उसे कुछ नहीं पता चलता है। पूरी रात मैं सो नहीं पाया। नींद मेरी कोसो दूर थी क्योंकि अभी भी जी भर के मैं सुहानी को प्यार नहीं किया है क्योंकि लता बगल में ही सो रही थी। कहीं उसकी नींद ना खुल जाए। मैं सुबह होने से पहले उठकर जाकर हॉल में सो गया। तब ललिता की नींद खुलती है तो वह आती है और कहती है कि आपने मुझे जगाया क्यों नहीं? तो मैं कहता हूं जब मैं ऑफिस आया तो देखा तुम और सुहानी कमरे में सो रहे हो तो मैं हॉल में ही सो गया। लता कहती है कि मुझे जगह देना चाहिए था। आपको परेशानी नहीं होती। मैं कहता हूं कोई बात नहीं। अगले दिन ऑफिस में मेरा काम में मन नहीं लगता है। क्योंकि-क्योंकि सुहानी के जिस्म को जब से मैं छुआ था इसके बाद से ही मैं प्यार के चरम सीमा तक पहुंचना चाहता था। लेकिन वह सब हो नहीं पाया जो होना चाहिए था। अब मैं किसी भी हालत में सुहानी को अपना बनाना चाहता था। एक दिन लता किसी काम को लेकर मार्केट गई हुई थी। उस दिन मेरी छुट्टी थी और मम्मी पापा भी अपने कमरे में सो रहे थे। सुहानी अपने कमरे में बैठी मुझे सोच रही थी। मैं जैसे ही कमरे में गया सुहानी मुस्कुराती और कहती है जीजू अब लगता है मुझे घर जाना चाहिए। मैं बहुत दिनों से यहां हूं। यह सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगता और मैं कहता हूं क्या हुआ? तुम्हें यहां किसी चीज की दिक्कत है? सुहानी कहती है, नहीं जीजू यहां तो मुझे अपने घर जैसा ही लगता है। लेकिन मेरे माता-पिता मुझे याद करते होंगे। रजत सुहानी के करीब आता है और कहता है कुछ दिन और रुक जाओ। उसके बाद मैं तुम्हें पहुंचा दूंगा। सुहानी आज थोड़ा उदास हो जाती है। रजत कहता है सुहानी तुम बहुत खूबसूरत हो। यदि ललिता से पहले तुम ललिता की बड़ी बहन होती तो मैं तुमसे ही शादी करता। ललिता से शादी तो मेरे मम्मी पापा ने जबरदस्ती कर दी है। मुझे पता है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो। सुहानी कहती है कि जीजू यह आप क्या कह रहे हैं? ललिता मेरी बड़ी बहन है आपकी पत्नी है। और रजत कहता है, लेकिन मुझे तुमसे धीरे-धीरे प्यार होने लगा है। यह कहते-कहते रजत सुहानी को अपनी बाहों में भर लेता है और उसके होठों को कसकर चूमने लगता है। सुहानी भी उसे रोकने की कुछ खास कोशिश नहीं करती है और उसकी बाहों में अपने आप को छोड़ देती है। रजत कहता है सुहानी क्या तुम्हें मन नहीं करता? वह सब करने का सुहानी कहती है वह सब यह आप क्या कहना चाहते हैं? रजत कहता है सुहानी देखो तुम अब जवान हो चुकी हो तुम्हें अपने पर ध्यान देना चाहिए तुम्हारे जिस्म को देखकर तो कोई भी पागल हो जाए। फिर मैं तो तुम्हारा जीजू ही हूं सुहानी बिस्तर पर लेट जाती है और रजत सुहानी के कमीज को ऊपर उठा देता है और उसके साथ वह सब हरकतें करने लगता है। सुहानी सिसकारी निकालने लगती है और वह कहती है जीजू मुझे आप यह क्या कर रहे हैं? कोई देख लेगा दीदी आ जाएगी। रजत कहता है तुम्हारी दीदी अभी नहीं आएगी और मम्मी पापा भी ऊपर वाले कमरे में सो रहे हैं। जिसका बाहर का गेट का कुंडी बंद है। कोई नहीं आएगा। तुम बेफिक्र रहो। सुहानी को भी तसल्ली हो जाती है और वह भी रजत को अपनी बाहों में भरकर उसके सीने को प्यार करने लगती है। रजत सुहानी के जिस्म को आज भरपूर प्यार करना चाहता है। रजत जैसे ही सुहानी के समीज को खोलता है तो वह देखता है कि उसके छाती पर एक नीले कलर का निशान है। वह कहता है सुहानी तुम्हारे सीने पर यह नीले कलर का निशान कैसा है? यह निशान तो तुम्हारी बहन ललिता के पर भी है। वह कहती है हां हम दोनों बहनों के सीने पर यह निशान है। लेकिन ललिता मुझे पसंद नहीं। लेकिन तुम मुझे दिलो जान से पसंद हो। यह निशान मैं ले जाकर के तुम्हें एक डॉक्टर से हटवा दूंगा। तो सुहानी कहती है कि इसकी क्या जरूरत है? यह निशानी तो है जो सीने पर पड़ा है। रजत कहता है कि मैं तुम्हारे जिस्म के हर कोने को प्यार करना चाहता हूं। इसलिए यह निशान मैं ले जाकर के हटवा दूंगा। तो इस पर सुहानी मुस्कुराने लगती है और रजत के सर को लेकर अपने सीने के अंदर कर लेती है। रजत उसे भरपूर प्यार करता है और थक कर वह दोनों कुछ समय के लिए आराम करने लग जाते हैं। जैसे ही रजत सुहानी के कमरे से बाहर निकलता है कि लता थोड़ी ही देर में घर आ जाती है और वह जाकर के ऊपर का दरवाजा भी खोल देता है। रजत की आज इच्छा पूरी हुई थी। रजत इस दिन के बाद से हर दिन सुहानी के साथ जिस्मानी संबंध बनाने लग जाता है और सुहानी के भी ऐसी हालत हो जाती है कि वह भी अपने जीजू राजू के बिना एक पल भी नहीं रह पाती है। जब भी दोनों को मौका मिलता एक दूसरे के जिस्म को एक साथ खेलते। एक दूसरे को भरपूर प्यार करते हैं। एक दिन लता के अंदरूनी कुछ हिस्से से उसके पीरियड्स रुक जाते हैं। उसके बाद लता देखती है कि चादर पर पीरियड लगे हुए हैं। लेकिन वह देखती है कि उसके पीरियड्स तो एक महीने से आ ही नहीं है। और यह पीरियड तो कल का ही दाग लग रहा है। आजकल का ही लग रहा है और यह पीरियड के ही दाग है। उसे उसे समझ में नहीं आता है। राजीव उस समय ऑफिस जाने के लिए तैयार होता है। वह कहती है राजीव जी यह चादर में इतने पीरियड की जगह के निशान जगह-जगह निशान कैसे लगे हैं? मेरी तो पीरियड ही नहीं आ रही है। राजू घबरा जाता है और कहता है और कहता है किसी और चीज का दाग होगा। कितनी छोटी-छोटी बातों में तुम इतनी गंभीरता से सोचने लगती हो। चलो मेरे ऑफिस जाने का लेट हो रहा है। मैं निकलता हूं। यह कहकर राजू चला जाता है। लेकिन लता के मन में कुछ शक के कीड़े होने लगते हैं। वह एक दिन देखती है कि आधी रात को पति रजत उसके कमरे में नहीं है। वह जो बाहर निकलती है तो सुहानी के कमरे से आवाज आती है। सुहानी के सिसकने की आवाज आ रही है। वह जैसे ही सुहानी के कमरे की ओर जाती है तो देखती है पति रजत सुहानी के साथ संबंध बना रहे होते हैं और सुहानी दर्द से कर रही होती है। लेकिन गौर से देखने पर वह पाती है कि सुहानी भी अपने जेजू का साथ दे रही है। यह देख ललिता स रह जाती है और वह लड़खड़ाते कदमों से अपने कमरे में आती है और उस रात पीरियड वाली चादर का राज उसके समझ में आ जाता है। सुबह होने से पहले ही रजत अपने कमरे में आता है और ललिता के पास सो जाता है। लता सुबह होने के बाद पूछती है कि आप आधी रात को कमरे में नहीं थे तो रजत कहता है हां मैं वह पानी पीने गया था। इसके बाद तो मैं सो गया और उस पर चिल्लाने लगता है कि तुम्हें आजकल हो क्या गया है। हर छोटी-छोटी बात पर तुम नजर रखती हो। लता कहती है चिल्लाना तो मुझे चाहिए लेकिन उल्टा तुम चिल्ला रहे हो। तुम और सुहानी जो कर रहे हो वह मैंने सब कुछ देख लिया है। रजत गुस्से से कहता है देख लिया है तो ठीक किया है। मैं सुहानी से प्यार करने लगा हूं। और मैं उसके साथ ही अपने गृहस्थी बसाना चाहता हूं। तुम्हारे साथ शादी करके आखिर मुझे मिला ही क्या? एक बच्चा भी तो ना दे सके तुम। ललिता की आंखों में आंसू भर जाते हैं। पति तो पति बहन ने भी उसे धोखा दिया। उसे बर्दाश्त नहीं होता है। सुहानी दरवाजे के बाहर यह बातें सुन रही होती थी। रजत कहता है देखो ललिता मैं तुम्हारे साथ-साथ सुहानी को भी रखना चाहता हूं। यदि तुम्हारी बहन सही मेरा बच्चा हो तो उसमें हरज ही क्या है? दो पलियां बहुत लोगों की होती है और तुम दोनों तो सगी बहने हो। एक घर में मिलजुलकर आराम से रह सकती हो। यह सुनकर रजत के मुंह से यह बातें लता स रह जाती है और कहती है नहीं ऐसा कभी नहीं हो सकता है। मैं सुहानी की जिंदगी से तुम्हें खेलने नहीं दूंगी। वह बहक गई है। तुमने उसे चिकनीचुपी बातें की होगी। वह अभी उतनी समझदार नहीं है। तुमने उसे अपनी बातों में फंसा लिया है। मैं अभी उसे घर भेजती हूं। मैं अपने पिताजी के पास फोन लगाती हूं। वह उन्हें आकर के ले जाएंगे। राजू यह सुनकर तिलमिला जाता है और ललिता को आंखें तेरी के कहता है। खबरदार यदि सुहानी को एक दिन के लिए भी यहां से भेजा मैं एक रात भी सुहानी से दूर नहीं रह सकता हूं। राजू सुहानी को हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले आता है और कहता है सुहानी मेरे बच्चे की मां बनने वाली है। और अब यह घर जैसे तुम्हारा है सुहानी का भी है। लता रोते-रोते यह बात अपने सासर से कहती है कि उसने मेरी छोटी बहन को रजत ने बहका लिया है। तो सासर भी कहते हैं कि देख बहू तूने तो रजत को पिता होने का सुख दिया ही नहीं और ना ही हमें दादा-दादी बनने का। अब तेरी बहन से हमें यह सुख मिल रहा है। तो फिर इसमें गलत ही क्या है? मैं तुम्हारे माता-पिता से बातें कर लूंगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। तुम्हें चिंता लेने की कोई जरूरत नहीं है। बस तुम दोनों बहने इस घर में रहो और शांति बनाए रखो और हमें कुछ नहीं चाहिए। वह सासर के मुंह से ऐसी बातें सुनकर ललिता और भी उदास हो जाती है। उसकी आंखों में आंसू भर जाते हैं कि वह आज अपने पति से भी ठगी गई और अपनी सगी बहन से भी। उसे अब बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था। उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया कि वह अब करे भी तो करे क्या? ससुराल में अपनी सौतन बहन के साथ रहे या फिर अपने मायके लौट जाए। वह लड़खड़ाते कदमों से फोन उठाती है और अपने माता-पिता को रोते हुए कहती है कि उसकी छोटी बहन ने उसकी गृहस्थी उजाड़ के रख दी। मेरे पति के बच्चे की मां बनने वाली है। माता-पिता को कुछ समझ में नहीं आता है। लेकिन कुछ देर के बाद वह अपनी बेटी ललिता को यह समझाते हैं कि देख बेटी तेरी बहन ने गलती तो की है। लेकिन वह इस वक्त गर्भवती है। अगर तेरा अपना कोई बच्चा हो जाता तो रजत जी को यह सब करने की जरूरत ना पड़ती और यदि यह गलती उनसे भी हो गई है तो तेरी बहन के साथ ही शादी करना चाहते हैं। तुम दोनों बहने मिलजुलकर एक ही घर में गृहस्थी अपनी बसा सकती हो। रजत जी किसी बाहर की लड़की को ले आते हैं तो फिर हम सब कर ही क्या सकते थे? इसलिए समझदारी इसी में है कि तुम इन चीजों को स्वीकार कर लो और दोनों बहने मिलकर के आपस में एक खुशहाल गृहस्थी बसा लो। इसी में दोनों परिवार की भलाई है और तुम्हारी भी गृहस्थी जमी रहेगी। अपने माता-पिता के मुंह से यह बातें सुनकर वह और भी टूट जाती है और फोन बंद कर देती है। कुछ समय बीतने के बाद उसे लगता है कि माता-पिता जो कह रहे थे ठीक ही कह रहे थे। वह अब अनमन तरीके से अपनी पति और बहन के साथ ही रहने लग गई। लेकिन एक यह बदलाव आया कि रजत जी अब उस पर गुस्सा नहीं होते या बच्चे के लिए दबाव नहीं बनाते। और जितना समय वह सुहानी को देते हैं, उतना ही समय मुझे भी देते हैं और प्यार से बातें करते हैं। ना कोई लड़ाई झगड़ा और ना कोई गाली गलौज। इससे पहले वह मेरे साथ मारपीट और गाली गलौज किया करते थे। लेकिन बच्चे मिलने की खुशी में शायद वह यह सब भूल गए। लेकिन इनमें यह बदलाव ना जाने मुझे सुकून भी दे रहा है और ऐसा लग रहा है कि जो भी हो सुहानी मेरी बहन है और वह गर्भवती है। मुझे उसका ध्यान रखना चाहिए। आखिर मैं भी तो उस बच्चे की मां बनने वाली हूं। वह मेरा भी तो बच्चा होगा। उसके दिल में थोड़ी खुशी होने लग जाती है और वह सुहानी के कमरे की ओर चल देती है। और सुहानी को कुछ नहीं कहती तो दोस्तों यह थी आज की कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं। वीडियो को लाइक चैनल सब्सक्राइब करें। धन्यवाद।

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Rochak kahaniyan...123
22m 57s3,067 words~16 min read
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