[0:00]जब कभी एक देश दूसरे देश से कुछ इंपोर्ट या एक्सपोर्ट करता है तो यह जो ट्रेड पेमेंट होती है यह यूएस डॉलर्स में करी जाती है क्योंकि यूएस डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी है।
[0:09]एग्जांपल से समझें इंडिया को मान लो सऊदी अरेबिया से तेल खरीदना है उस तेल की पेमेंट करते वक्त इंडिया को पहले रुपीस को डॉलर में कन्वर्ट कराना होगा।
[0:17]उन डॉलर्स की पेमेंट कराई जाएगी और सऊदी अरेबिया भी इस पेमेंट को रिसीव करेगा तो वह डॉलर्स को अपनी करेंसी रियाल में कन्वर्ट कराएगा।
[0:24]जब ऐसा होता है तो दोनों कंट्रीज को कन्वर्जन चार्जेस देने पड़ते हैं और यूएसए ग्लोबल इकोनॉमी और फाइनेंशियल सिस्टम में अपनी एक मोनोपोली बनाकर रखता है इस तरीके से।
[0:32]अब रिसेंटली आरबीआई ने इंडियन रुपी को ओपन अप किया इंटरनेशनल ट्रेड के लिए कई नेबरिंग कंट्रीज ने इंटरेस्ट दिखाया कि इंडियन रुपी का यहां पर इस्तेमाल किया जाए यूएस डॉलर की जगह जैसे कि श्रीलंका ने यह रिसेंटली किया।
[0:42]कुल मिलाकर 35 कंट्रीज हैं जिन्होंने अपना इंटरेस्ट शो किया है इसमें एक तरफ कुछ एस्पेक्ट्स में यह अच्छी खबर है लेकिन दूसरी तरफ यह रिस्की भी हो सकता है।
[0:49]आरबीआई के लिए रुपी की वैल्यू को कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाएगा क्योंकि इंटरनेशनल इवेंट्स भी अब इंडियन रुपी को एक्सटर्नल शॉक्स दे सकते हैं लेकिन डॉलर की डोमिनेंस कम करने के लिए डेफिनेटली एक अच्छा कदम है।



