[0:00]इस संसार में मुझसे बड़ा वीर कोई नहीं है। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपको अपनी क्षमता पर इतना भरोसा हो जाए कि आप इतिहास को ही चुनौती दे बैठें? यह कथा है अर्जुन और हनुमान के अद्भुत मिलन की, जहां अहंकार का सामना हुआ सच्ची शक्ति से। महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन पहुंचे पवित्र रामेश्वरम तट पर, जहां उन्होंने देखा वह महान रामसेतु, जिसे श्री राम ने वानर सेना के साथ मिलकर बनाया था। उसे देखकर अर्जुन के मन में गर्व जागा कि यदि मैं होता तो बाणों का ऐसा सेतु बनाता कि पूरी सेना उस पर आराम से चली जाती। पास ही बैठे एक साधारण वानर रूपी हनुमान जी मुस्कुराए और बोले, बाणों का पुल, वह हमारे भार के एक कदम में टूट जाता। अर्जुन ने घमंड में हनुमान जी को चुनौती दे दी कि यदि उसके भार से अर्जुन का बनाया सेतु टूट गया तो वह अग्नि में समाहित हो जाएंगे। अर्जुन ने अपने दिव्य गांडिव से बाणों का विशाल सेतु बना दिया, उन्हें पूरा विश्वास था, अब उनकी श्रेष्ठता सिद्ध हो जाएगी। लेकिन जैसे ही हनुमान जी ने उस सेतु पर कदम रखा, वह कांप उठा और अगले ही पल तिनकों की तरह बिखर गया। अर्जुन ने फिर प्रयास किया और फिर असफल हुए, अब अहंकार टूट चुका था। और वचन निभाने के लिए अर्जुन अग्नि में कूदने को तैयार हो गए, तभी प्रकट हुए श्री कृष्ण और उन्होंने अर्जुन को सत्य दिखाया कि जिसे वह साधारण वानर समझ रहे थे। वह स्वयं राम भक्त हनुमान थे, अर्जुन की आंखें खुल गई। उन्होंने विनम्र होकर क्षमा मांगी, यह कथा हमें सिखाती है ज्ञान और शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों ना हो, अगर उसमें अहंकार आ जाए तो वह एक क्षण में टूट जाती है। अगर आप हनुमान जी के भक्त हैं तो इस वीडियो को शेयर जरूर करना।

जब हनुमान जी ने किया घमंड का अंत 🙏। #hanuman #krishna #mahabharat #sanatandharma #shorts
Shivu_Katha_Sangam
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