[0:00]ये लो बेटा पानी, आपके एक प्लेट गोलगप्पे के ₹20 हो गए। अंकल मैं तो पैसे लाना ही भूल गई। क्या? जल्दबाजी के चक्कर में पैसे पर्स में रखना ही भूल गई। आप अपना QR कोड दे दीजिए, मैं ऑनलाइन पेमेंट कर देती हूं। अकाउंट तो मेरे भाई का है और वो अभी गांव में है। आप मुझे कैश ही दे दो। अंकल मेरे पास कैश नहीं है। कोई बात नहीं आप रहने दो। ₹20 की तो बात है। आप कभी इधर से निकलो तो दे देना। पर मैं अगर देने ही नहीं आई तो? अगर मेरी किस्मत में होंगे तो मुझे मिल जाएंगे। अच्छा अंकल जी अब मैं चलती हूं।
[0:36]हेलो, हां बेटी। पापा जी मैं खाना बना रही थी। देखा कि दाल और चावल खत्म हो गए हैं। आप दुकान से दाल-चावल दे आओगे क्या? हां बेटी, मैं देने आता हूं।
[0:48]बेटा, मेरी दुकान देख लेना एक बार मैं अभी आया।
[0:54]बेटा, आधा किलो दाल और आधा किलो चावल दे दीजिए। अजी, अभी देता हूं। भाई, सामान पैक हो गया मेरा? जी, हो गया। ये लो भैया आपके हो गए ₹450। और ये लीजिए अंकल जी, आपके हो गए ₹100।
[1:09]मेरे पास तो ₹50 हैं। क्या आप ₹50 कल ले लेंगे? अंकल जी यहां पर उधारी नहीं चलती। जब पूरे पैसे आ जाए तो सामान ले जाना। और बिना सामान के ना आज रात को खाना नहीं बन पाएगा। मैं कल की कमाई से आपको ₹50 दे दूंगा। अरे नहीं अंकल, एक बार बोला ना आपको। आप जाओ और कल आना।
[1:27]ये लीजिए भैया। जी भैया। भैया, मेरे जो ₹50 बच रहे हैं ना, वो अंकल के सामान में लगा दो। ठीक है भैया। लीजिए भैया, आपका सामान।
[1:39]लीजिए अंकल जी आपके दाल और चावल। थैंक यू भैया।
[1:45]बेटा रुको जरा। जी अंकल। बेटा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मेरी मदद करने के लिए, पर मैं पैसे आपको वापस कैसे दूंगा? मैं तो आपको जानता तक नहीं हूं। कोई बात नहीं अंकल जी, आपको वापस देने की जरूरत नहीं है। मेरे ₹50 बच रहे थे, तो मैंने वो आपको दे दिए। छोटी सी बात है। भगवान आपको हमेशा खुश रखे बेटा। थैंक यू अंकल जी। अच्छा बेटा। अरे आ गए आप? हम्म। ये लो राशन का सारा सामान। जी आपको पता है, आज ना मैं फ्री में गोलगप्पे खा कर आई हूं। अच्छा, पर वो कैसे? मैंने गोलगप्पे खाने के बाद चेक किया तो पर्स में पैसे ही नहीं थे। मैंने उन अंकल को बोला कि आप ऑनलाइन पेमेंट ले लो, तो उन्होंने ऑनलाइन पेमेंट लेने से मना कर दिया। और बोले कि बेटा, अब फिर कभी दे जाना पैसे। और तुम्हें पता है, आज मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मुझे ग्रोसरी स्टोर पर एक अंकल मिले। उनके सामान में ₹50 कम पड़ रहे थे। और ₹50 मेरे सामान में बच रहे थे। तो इन ₹50 से मैंने उनकी हेल्प कर दी। कितना अच्छा होता ना, अगर वो अंकल वही गोलगप्पे वाले हों। उनको उनके पैसे भी मिल जाते। काश ऐसा हो, पर वो अंकल उस दुकान पर क्यों ही आएंगे? वो तो अपनी दुकान पर होंगे ना। पर कोई नहीं, मैं नेक्स्ट टाइम जब भी उस मार्केट में जाऊंगी ना, मैं उन अंकल के ₹20 जरूर वापस कर दूंगी। जरूर।



