[0:14]योग शब्द का अर्थ है जुड़ना। जुड़ने का मतलब है, आज यह एक वैज्ञानिक तथ्य है, कि यह सारी सृष्टि सिर्फ एक ऊर्जा है, जो कई सारे तरीकों से प्रकट हो रही है। जब आइंस्टाइन कहते हैं e = mc², वो एक ही ऊर्जा के लाखों अलग-अलग रूपों में प्रकट होने की बात कर रहे हैं। अगर आप इसे अपने अनुभव की दृष्टि से देखें, तो आप जो सांस बाहर छोड़ रहे हैं, वही सांस पेड़ अंदर ले रहे हैं। जो वो बाहर छोड़ रहे हैं, हम अंदर ले रहे हैं। इसका मतलब यह है कि हमारे फेफड़ों का आधा भाग वहां लटक रहा है। साँसों की पूरी प्रक्रिया यहां नहीं हो रही। पूरा श्वसन तंत्र यहां नहीं है। सिर्फ एक भाग यहां है, दूसरा भाग वहां है। अगर यह बात हम अनुभव के स्तर पर जानते, तो किसी को भी हमें यह कहने की जरूरत नहीं होती कि पेड़ मत काटो, पर्यावरण की रक्षा करो। अगर हमें इसका अनुभव हो जाए तो यह सभी हमारे लिए बेकार की बातें हो जाएंगी। तो यह एक आम बात है। कम से कम आपकी स्कूल पुस्तक में यह आमतौर पर पाया जाता है कि आपका अस्तित्व हर चीज से अलग नहीं। आप सिर्फ इस ब्रह्मांड का एक हिस्सा हैं, आप बस एक और अस्तित्व हैं और यह बाकी की हर चीज का एक हिस्सा है। तो जुड़ने का मतलब है, अगर आप यहां बैठें तो आपके अनुभव में सिर्फ आप ही हैं, सारा ब्रह्मांड बस आप ही हैं। तो किसी ऐसी चीज को जो आप नहीं हैं, आप खुद के रूप में सिर्फ तभी अनुभव कर पाएंगे जब आप अपने भीतर एक खास स्तर तक चीजों को समाहित करने लगे। फिलहाल आप सिर्फ अपने शरीर को समाहित कर पा रहे हैं। अगर इस समाहित करने की क्षमता को शरीर से परे ले जाया जाए, तो अचानक आप यहां बैठकर पूरे ब्रह्मांड को अपने रूप में अनुभव कर पाएंगे। अगर आपके साथ यह घटित होता है, तो हम कहते हैं कि आप योग में हैं। तो शारीरिक आसनों को इसलिए लाया गया, क्योंकि शायद आप में से कई लोगों की उम्र इस बात के लिए काफी कम है। लेकिन अगर आपने 70 के दशक में टीवी देखा हो, तो जब यह पहली बार आया, तो आपके घरों के ऊपर एल्यूमीनियम की एक छोटी सी मशीन होती थी, क्या आपको याद है? एंटीना। आप टीवी देख रहे हैं और अचानक से आपका टीवी फिर कोई ऊपर छत पर जाता था और एंटीना की दिशा ठीक करता था। ऐसे नहीं ऐसे नहीं, धीरे से इस तरह से उसे फिर से सही जगह पर ले आता था और एक बार फिर से पूरा विश्व आपके कमरे में आ जाता था, है ना? बस अगर आप उसे सही जगह पर ले आए तो ऐसा हो जाता है। यह भी ठीक वैसा ही है। अगर आप सिर्फ इस शरीर को ठीक से थामना सीख जाएं, तो आप पूरे ब्रह्मांड को इसमें डाउनलोड कर सकते हैं। यह हठ योग है।
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[0:14]बस अगर आप उसे सही जगह पर ले आए तो ऐसा हो जाता है। यह भी ठीक वैसा ही है। अगर आप सिर्फ इस शरीर को ठीक से थामना सीख जाएं, तो आप पूरे ब्रह्मांड को इसमें डाउनलोड कर सकते हैं। यह हठ योग है।
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