Thumbnail for Jiya Kab Tak Uljhega with Lyrics | Rekha Trivedi | Ashit Desai | Jain Bhajan | Paryushan Parv 2024 by Red Ribbon Jain Bhajan

Jiya Kab Tak Uljhega with Lyrics | Rekha Trivedi | Ashit Desai | Jain Bhajan | Paryushan Parv 2024

Red Ribbon Jain Bhajan

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[0:31]Section 1

जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। कितने भव बीत चुके, संकल्प विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा,...

[1:50]Section 2

रागों में लिप्त सदा, भव भव दुख पाता है। क्षण भर को भी न कभी, निज आतम ध्याता है। निज तो न सुहाता है, पर ही मन भाता है। यह जीवन बीत रहा, झू...

[4:37]Section 3

शुद्धातम का चिंतन, आनंद अतुल अभिनव। कर्मों की पगध्वनि का, मिट जावेगा कलरव।

[5:55]Section 4

अनंतरमुख हो जा तू निज में निज रस भरे। पर अवलंबन तज रे, निज का आश्रय करे। पर परिणति विमुख हुआ, तो सुख पल अल्पों में।

[7:03]Section 5

आया है किस घर से, जाना किस गाँव अरे। सोचा न कभी तूने, दो क्षण की छाँव अरे। यह तन तो पुद्गल है, दो दिन की ठाँव अरे।

[8:21]Section 6

फिर काल अनंत अरे, दुःख का घन छायेगा। यह नरभव कठिन महा, किस गति में जायेगा। नरभव भी पाया तो, जिनश्रुत नहीं पायेगा। अनगिनत जन्मों में, अनगि...

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[0:31]जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। कितने भव बीत चुके, संकल्प विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में।
[1:50]रागों में लिप्त सदा, भव भव दुख पाता है। क्षण भर को भी न कभी, निज आतम ध्याता है। निज तो न सुहाता है, पर ही मन भाता है। यह जीवन बीत रहा, झूठे संकल्पों में।
[5:55]अनंतरमुख हो जा तू निज में निज रस भरे। पर अवलंबन तज रे, निज का आश्रय करे। पर परिणति विमुख हुआ, तो सुख पल अल्पों में।
[7:03]आया है किस घर से, जाना किस गाँव अरे। सोचा न कभी तूने, दो क्षण की छाँव अरे। यह तन तो पुद्गल है, दो दिन की ठाँव अरे।
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[0:31]जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में। कितने भव बीत चुके, संकल्प विकल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में।

[1:34]उड़-उड़ कर यह चेतन, गति-गति में जाता है।

[1:50]रागों में लिप्त सदा, भव भव दुख पाता है। क्षण भर को भी न कभी, निज आतम ध्याता है। निज तो न सुहाता है, पर ही मन भाता है। यह जीवन बीत रहा, झूठे संकल्पों में।

[2:52]निज आत्मस्वरूप लखो, तत्वों का कर निर्णय।

[4:37]शुद्धातम का चिंतन, आनंद अतुल अभिनव। कर्मों की पगध्वनि का, मिट जावेगा कलरव।

[5:00]तू सिद्ध स्वयं होगा, पुरुषार्थ स्वकल्पों में।

[5:55]अनंतरमुख हो जा तू निज में निज रस भरे। पर अवलंबन तज रे, निज का आश्रय करे। पर परिणति विमुख हुआ, तो सुख पल अल्पों में।

[6:47]तू कौन कहाँ का है, अरु क्या है नाम अरे।

[7:03]आया है किस घर से, जाना किस गाँव अरे। सोचा न कभी तूने, दो क्षण की छाँव अरे। यह तन तो पुद्गल है, दो दिन की ठाँव अरे।

[7:35]तू चेतन द्रव्य सबल, ले सुख अविकल्पों में।

[8:21]फिर काल अनंत अरे, दुःख का घन छायेगा। यह नरभव कठिन महा, किस गति में जायेगा। नरभव भी पाया तो, जिनश्रुत नहीं पायेगा। अनगिनत जन्मों में, अनगिनत कल्पों में। जिया कब तक उलझेगा, संसार विकल्पों में, संसार विकल्पों में, संसार विकल्पों में।

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