[0:03]मैं अजवत भाई ने मौला के हवाले से बहुत अच्छे-अच्छे शेर पढ़े हैं मैं मैं भी पढ़ता हूँ समात करना चाहता हूँ भाई वहां तक आवाज़ आ जाए जहां तक से मेरी आवाज़ आ जाए पढ़ता हूँ समात की आवाज़ की इतना चाहता हूँ समात कर के चले जाए रब के महबूब की आंखों का वो तारा निकला रब के महबूब की आंखों का वो तारा निकला रब के महबूब की आंखों का वो तारा निकला मैं मैं बोल के बताता हूँ आप सुन के बताएँ रब के महबूब की आंखों का वो तारा निकला रब के महबूब की आंखों का वो तारा निकला मेरे शब्बीर का जो चाहने वाला निकला मेरे शब्बीर का जो चाहने वाला निकला और एक शेर और पढ़ता हूँ समाज के साथ-साथ आसमान हूर व मलख और जमीं रोने लगे आसमान हूर व मलख और जमीं रोने लगे आसमान हूर व मलख और जमीं रोने लगे
[2:55]जब मदीने से मोहम्मद का घराना निकला जब मदीने से मोहम्मद का घराना निकला नारे रिसालत खानदान-ए-मुस्तफा अजमत-ए-हुसैन जब मदीने से मोहम्मद का घराना निकला जब मदीने से मोहम्मद का घराना निकला एक-एक करके यतीमों का जनाज़ा निकला एक-एक करके यतीमों का जनाज़ा निकला एक-एक करके यतीमों का जनाज़ा निकला
[4:16]एक-एक करके यतीमों का जनाज़ा निकला या अली जंग में जब आपका बेटा निकला या अली जंग में जब आपका बेटा निकला या अली जंग में जब आपका बेटा निकला या अली जंग में जब आपका बेटा निकला ये शेर पढ़ता हूँ समात कीजिए गौस
[5:08]साथ छूटा न कभी आख़िरी दम तक वो रहा साथ छूटा न कभी आख़िरी दम तक वो रहा
[5:33]साथ छूटा न कभी आख़िरी दम तक वो रहा या हुसैन
[6:05]रूत जाए तो मनाने को फ़रिश्ता निकला रूत जाए तो मनाने को फ़रिश्ता निकला कितना काफ़ूर हुसैन का घोड़ा निकला सबर का वक्त है वरना तू हुसैन ऐसे हैं सबर का वक्त है वरना तू हुसैन ऐसे हैं
[6:51]सबर का वक्त है वरना तू हुसैन ऐसे हैं रूत जाए तो मनाने को फ़रिश्ता निकला रूत जाए तो मनाने को फ़रिश्ता निकला
[7:28]रूत जाए तो मनाने को फ़रिश्ता निकला



