[0:00]जब राम जी और लक्ष्मण जी पाताल लोक में कैद हो गए तो हनुमान जी ने अचानक पांच मुख क्यों धारण किए?
[0:07]और वह पांच मुख आज भी संकट मोचन क्यों कहलाते हैं? आइए इस रहस्य को समझते हैं।
[0:11]रामायण युद्ध के दौरान जब रावण हार की कगार पर था, उसने अपने मायावी भाई अहिरावण पाताल लोक का राजा को बुलाया।
[0:21]अहिरावण ने छल से विभीषण का रूप धारण किया, हनुमान जी को भटकाया और राम लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया।
[0:28]अहिरावण की जान पांच अलग-अलग दीपकों में छिपी थी।
[0:31]पांच दिशाओं में रखे गए एक साथ बुझाना असंभव।
[0:37]जो पांच को एक साथ बुझाएगा, वही उसका वध कर सकेगा। हनुमान जी पाताल लोक पहुंचे, समझ गए कि एक मुख से यह काम नहीं होगा।
[0:45]तब उन्होंने दिव्य रूप धारण किया, पंचमुखी हनुमान।
[0:50]पांच मुख एक साथ प्रकट हुए। पूर्व दिशा में हनुमान जी का वानर मुख।
[0:54]बल, बुद्धि और विजय का प्रतीक दुश्मनों पर जीत दिलाता है।
[0:58]दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, भगवान विष्णु का उग्र रूप राक्षसों और बुरी शक्तियों का नाश करता है।
[1:05]पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख, विष, सर्प और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।
[1:11]उत्तर दिशा में वराह मुख, पृथ्वी का संतुलन, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक।
[1:17]ऊपर आकाश दिशा में हयग्रीव मुख, ज्ञान, विद्या और बुद्धि का स्त्रोत अज्ञानता का नाश करता है।
[1:25]हनुमान जी ने एक ही फूंक में पांचों दीपक बुझा दिए। अहिरावण का वध हुआ।
[1:29]राम लक्ष्मण मुक्त हुए। श्री राम ने गले लगाकर कहा, बजरंगबली तुम्हारा यह रूप कलयुग में भी भक्तों की रक्षा करेगा।
[1:38]हर संकट में पांच मुखों वाली शक्ति तुम्हारे साथ रहेगी। रहस्य यह है कि पंचमुखी हनुमान कोई सिर्फ चमत्कार नहीं।
[1:45]बल्कि पूर्ण सुरक्षा का कवच है।
[1:48]पांच दिशाओं से पांच प्रकार की बाधाओं से बचाते हैं।
[1:52]घर में पंचमुखी हनुमान की मूर्ति रखने से तंत्र मंत्र, बुरी नजर, भय, अज्ञान सब दूर होते हैं।
[1:59]तभी से भक्त पुकारते हैं, जय पंचमुखी हनुमान, क्योंकि बजरंगबली सुनते हैं।
[2:05]हर दिशा से हर संकट में कमेंट में जय पंचमुखी हनुमान लिखो और शेयर करो।



