[0:00]पिछले कुछ दिनों से ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है। सी से परेशानी गले में हल्की सी खुजली है बस चिकन में आराम है। गले में खुजली है मुंह खोलो। लगाओ माइक पूछो कहां है खुजली खत्म बाइक पे बोलो नहीं है नहीं है भाग गई हमारे देश में हर सीजन में एक नए बाबाजी प्रकट हो जाते हैं और यह भी उन्हीं में से एक है। इन सबके पास एक से बढ़कर एक शक्तियां मौजूद होती हैं। कोई मुंह से सोना निकाल देता है। कोई हथौड़ा मार के लोगों का इलाज कर देता है। और कोई खुद का अपना एक देश बना के बैठा है। Hindu Sovereign Nation Kailasa, founded by the absconding godman Nityananda. और कोई गूंगे लोगों को बोलने पर मजबूर कर दे रहा है। ये तेरी बहन बोल नहीं सकती थी? नहीं बोल सकती थी। अभी क्या हुआ? अभी क्या हुआ? बोलने लगी। अब कहने को तो यह बाबा लोग हैं, लेकिन काम यह हर तरह के कर देते हैं। कोई खुलेआम कैंसर, ट्यूमर, एड्स और पैरालाइसिस जैसी बीमारियां ठीक कर दे रहा है। क्योंकि ये कैंसर से लेकर एड्स, पैरालिसिस से लेकर डायबिटीज, माइग्रेन से लेकर स्लिप डिस्क हर तरह की बीमारी को ठीक करने का दावा करते हैं। तो कोई मैथ्स सिखा रहा है। 70 में क्या जोड़े की 17 हो जाए? फास्ट। हिंदी से लिखो 70 और फिर हिंदी से लिखो 17 ताकि मात्रा जोड़ दो हो जाएगा। और यह देखो किस तरह के एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। अब खड़ा कर दे परमेश्वर का आत्मा इसको छुए यहोवा की शक्ति उतरे छोड़ दे दौड़ के आ मेरे पास दौड़ के लेकिन मुझे लगता है यहां पर जाने की टिकट शायद इनको नहीं मिल पाई होगी। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि वहां मौजूद हजारों लोगों में से एक भी आदमी ने इसको अपोज नहीं करा। कि भगवान के नाम पर आप यह क्या सिखा रहे हो? बल्कि उल्टा लोग उनके लिए तालियां बजा रहे हैं। मतलब जो कुछ भी अजीब आप सोच सकते हो, वह काम भारत में बाबा लोग बिना किसी रोकटोक के कर रहे हैं। और यह सब करके ये लोग लाखों करोड़ों रुपए की वेल्थ जमा कर रहे हैं। और इसमें किसी एक रिलीजन की बात नहीं है। सारे रिलीजन वाले बाबा आते हैं। लेकिन मेरा सवाल यहां इनकी वेल्थ को लेकर नहीं बल्कि इनकी पॉपुलरिटी के ऊपर है। ऐसा क्यों है कि लोग इनके ऊपर इतना भरोसा करना शुरू कर देते हैं। भरोसा इतना ज्यादा है कि हाथरस में अभी जिस बाबा जी के यहां सत्संग में स्टैंपड हुई है, उसका दोष भक्त अपने आप को ही दे रहे हैं। जिन्होंने दुनिया की रचना रची है तीनों लोगों के स्वामी है ये। जो भी कुछ करते हैं यही करते हैं। अभी कल क्या हुआ यह तो वहां के वही जाने इनका कोई दोष नहीं। उनके फॉलोअर्स ने बताया कि स्टंपीड का रीजन था कि भक्त उनके चरणों की धूल लेना चाहते थे, जिसकी वजह से वहां पर भागदड़ बाबा के भक्तों में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो स्टंपीड वाले दिन वहां पर नहीं थे और इस बात को लेकर उन्हें दुख है कि काश वो वहां पर होते और उस दिन मर के उनको स्वर्ग मिल जाता। और इसी में मेरी भी मौत हो जाती, मुझे बड़ी सुखद मैं अगर मैं मर जाती डेड बॉडी भी मेरी लातों से कुचल जाती मैं बहुत भाग्यशाली समझती अपने आपको जिसको परमात्मा का दर्जा दिया उसकी शरण में अगर के सांस निकल जाए तो मुझे उसकी खुशी होगी जो शायद है कि बता नहीं सकते हैं। यह सब देखकर आप सोचोगे कि इसमें क्या नई बात है? यह तो अंधविश्वास की वजह से हो रहा है कि लोग बाबाओं पर इतना भरोसा कर रहे हैं। आपका यह जवाब एक लेवल तक ठीक है, लेकिन आपने क्या कभी यह सोचा है कि बाबाओं के भक्तों में ज्यादातर मिडिल एजेड वुमेन ही क्यों देखने को मिलती हैं? ऑलमोस्ट हर वायरल वीडियो में आप इस चीज को नोटिस कर सकते हो। और यहां पर प्रॉब्लम अंधविश्वास से एक लेवल डीप चली जाती है और आज के इस वीडियो में हम इसी प्रॉब्लम पर डिटेल में बात करने वाले हैं।
[3:14]आजकल मैं देखता हूं कि इन बाबा लोगों के ट्रैप में सिर्फ बड़ी ऐज के लोग नहीं बल्कि देश का यूथ भी फस रहा है और अपना टाइम सोशल मीडिया पर वेस्ट कर रहा है। लेकिन मेरा सजेशन यही है कि इन चक्करों में फंसने का कोई फायदा नहीं है। यह टाइम सोशल मीडिया पर बाबाओं के लिए बर्बाद करने से अच्छा है कि आप अपने ऊपर लगाओ। जहां पूरी दुनिया जनरेटिव एआई जैसी चीजों के साथ आगे बढ़ रही है, यह बाबा लोग आज भी आपको स्टोन एज में ले जाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आपको अपने ऊपर काम करना है तो मैं रेकमेंड करता हूं कि आप किसी रेपुटेड ऑर्गेनाइजेशन से जनरेटिव एआई का कोर्स कर लो। जैसे कि ओडिन स्कूल और ई एंड आईसीटी एकेडमी आईआईटी गुवाहाटी का एक कोलैबोरेशन वाला जनरेटिव एआई का कोर्स है जो आपको जेन एआई मॉडल्स को बिल्ड करना और डिप्लॉयड करना सिखाता है। इसमें ऐसे इंस्ट्रक्टर्स हैं जिनके पास इस फील्ड की डीप नॉलेज है। आपको 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट करने को मिलेंगे, जिससे आपका पोर्टफोलियो और स्ट्रांग हो जाएगा। लाइव क्लासेस में आप अपने इंस्ट्रक्टर से रियल टाइम में फीडबैक ले सकते हो। एक कोर्स का क्या ही फायदा अगर उसके बाद इनसे जॉब लेने में हेल्प ना हो। सबसे इंपोर्टेंट बात यह है कि इस कोर्स में आपको ई एंड आईसीटी एकेडमी आईआईटी गुवाहाटी का एडवांस सर्टिफिकेट मिलता है। और इतनी प्रेस्टीजियस ऑर्गेनाइजेशन का एलुमनाई स्टेटस मिलता है जिससे आपका सीवी और स्ट्रांग हो जाता है। दो दिन के लिए आपको आईआईटी गुवाहाटी की कैंपस विजिट भी होती है। इसके अलावा कोर्स के दौरान ओडिन स्कूल की तरफ से आपको डेडिकेटेड जॉब असिस्टेंट मिलती है, जिसमें रिज्यूमे बिल्डिंग, इंटरव्यू प्रिपरेशन, जॉब रेफरल और डेडिकेटेड जॉब एप्लीकेशन पोर्टल शामिल है। ओडिन स्कूल के पास 500 से भी ज्यादा हायरिंग पार्टनर्स हैं जिससे आपकी जॉब एक लीडिंग कंपनी में लगने के चांसेस बढ़ जाते हैं। इतना अच्छा कोर्स है और इसकी फीस है ₹1,20,000 प्लस जीएसटी, लेकिन आपके पास ईएमआई ऑप्शन है। तो जरूरी नहीं कि आपको एक साथ सब कुछ पे करना है। इनका अगला बैच 31st अगस्त से स्टार्ट हो रहा है। लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रहा हूं और मैं हाइली रेकमेंड करता हूं कि एक बार इस लिंक में जाकर इन्हें चेक आउट जरूर करना। देखो जब इन बाबाओं के टारगेट ऑडियंस की बात आती है तो उसमें दो टाइप के लोग दिखते हैं। पहले वह लोग हैं जो सब जगह से हार के बैठे हैं और अपनी सारी उम्मीदें खो चुके हैं। यह कोई भी हो सकता है जैसे कोई आदमी जो लाइलाज बीमारी से जूझ रहा हो या ऐसा इंसान जिसके बच्चे ना हो रहे हो या फिर जिसको कोई सीरियस मेंटल इलनेस हो और यह सारी मेडिकल हेल्प लेने के बाद भी उसका इलाज ना हो पा रहा हो। ऐसे लोगों के पास यूजुअली अच्छे इलाज को अफोर्ड करने के लिए पैसे भी नहीं होते हैं और ऐसी सिचुएशन में यह बाबा लोग इनके लिए एक होप की तरह काम करते हैं। और वह यह सोचते हैं कि जब इतना सब कुछ करके देख लिया है तो एक बार इनके पास चलकर देख लेते हैं। शायद कुछ ठीक हो जाए। जो ऐसे पीड़ित व्यक्ति हैं, जिनका कि हमारे किसी के पास डॉक्टरों के पास इलाज नहीं है और वो अलौकिक रूप से और इन वैदिक पद्धतियों से अगर ठीक हो रहे हैं, तो किसी को क्यों आपत्ति है तो खुश होना चाहिए ना यह सिचुएशन किसी के साथ भी आ सकती है। कोई कितना भी पढ़ा लिखा इंसान हो वह भी एक बार इस काम को करने के लिए तैयार हो जाता है क्योंकि जब मुसीबत आती है तो इंसान हर वह काम करने को तैयार होता है जो उसकी बुद्धि भी उसे करने से मना करती है। लेकिन इन बाबा लोगों के फॉलोअर्स में ऐसे लोगों का नंबर बहुत कम मिलता है और ज्यादातर लोग वो होते हैं जो एक स्पेसिफिक सोशल बैकग्राउंड से आते हैं। और इनकी प्रॉब्लम नॉर्मल होती है। ठीक भी हो सकती है नॉर्मली लेकिन फिर भी यह बाबा के पास जाना प्रेफर करते हैं। छोटे शहरों में सांप बिच्छू काटने पर आप देखोगे मेडिकल स्टोर से पहले लोग बाबा के पास जाकर मंत्र पढ़वाते हैं। स्टार्टिंग की वीडियो में आपने देखा एक औरत गले की खराश के लिए बाबा जी के पास चली गई थी। अब गले की खराश तो नॉर्मल बीमारी है एक दो रपए की टॉफी से भी ठीक हो सकती है, लेकिन इन लोगों को बचपन से ही ऐसे ब्रेन वॉश किया जाता है कि ये लोग बाबा के पास जाना सबसे पहला ऑप्शन रखते हैं। यह सोसाइटी में लो साइंटिफिक टेंपरामेंट का एक डायरेक्ट रिजल्ट है और इसी तरह कोई घुटने में दर्द को लेकर कोई अपनी कमजोर नजर को लेकर अलग-अलग रीजन लेकर बाबा जी के सामने लाइन में जाकर खड़े हो जाते हैं। और यही लोग इन गॉडमैन के लिए एक टारगेट ऑडियंस होते हैं जिनको कोई सवाल नहीं पूछना बस जो बाबा कह रहे हैं उस पर विश्वास कर लेना है। मैं इस वीडियो में अब तक कई बार टारगेट ऑडियंस की बात कर चुका हूं। यह टारगेट ऑडियंस है कौन? ये मेनली होती है 35 से 55 की एज वाली वूमेन जो टियर टू टियर थ्री सिटीज या छोटे-छोटे टाउन में रहती है। और अगर आप भी ध्यान से देखोगे तो आपको पता चलेगा इन बाबाओं के दरबार में आपको इसी तरह की महिलाएं ज्यादा दिखाई देंगी। ये लोग ऐसे सोशल बैकग्राउंड से आती हैं जहां पर उन्हें ज्यादा अथॉरिटी नहीं दी जाती चाहे वो एजुकेशन की बात हो एक्सप्लोरेशन की बात हो या सोशल लाइफ हो। इन्हें इन सब से दूर रखा जाता है जिससे इनका जो ओवरऑल थिंकिंग पैटर्न है वो हमेशा के लिए बदल जाता है। बिना घूंघट के फोटो नहीं खिंचवाएंगे। बदनामी होगी। भारत के छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में आज भी पेटियार्कल सोसाइटी काफी ज्यादा स्ट्रांग होल्ड रखती है और काफी लंबे टाइम से चला आ रहा है। जैसे कि कोई मर्द ही घर के लिए मुखिया होगा और उसके डिसीजन ही सब लोगों के ऊपर लागू हो जाएंगे। वो जो कहेगा वही होने लगेगा और कोई लड़की जो थोड़ी बहुत भी पढ़ाई कर लेती है उसको सब मिलकर कहते हैं अरे ये लड़की तो हाथ से निकलती जा रही है जल्दी इसके हाथ पीले करवा दो। लड़कियों से कहा जाता है कि पढ़ लिख के क्या करोगी तुम्हें ससुराल में चूल्हा बर्तन ही तो करना है। घर की बेटी बहू को अक्सर ये सिखाया जाता है कि आपका भाई, पिताजी, हस्बैंड यही लोग तुम्हारे बॉडीगार्ड हैं और तुम्हारी जो भी प्रॉब्लम होगी वो बस यही लोग दूर कर सकते हैं। इसमें दिक्कत तब शुरू होती है जब घर के मर्दों की सारी बातें एक ऑर्डर की तरह चलने लगती हैं और वह सही कहे या गलत घर की औरतों को उन्हें मानने के लिए बोला जाता है। एक अनस्पोकन सा क्लास डिफरेंस घर के अंदर ही इस्टैब्लिश हो जाता है और यही औरतें बाबाओं की टारगेट ऑडियंस बनती हैं। आप एक चीज नोटिस करना कोई भी चमत्कारी लोग जब सामने आते हैं यह सारे के सारे मेल होते हैं। क्या आपने कभी किसी औरत को देखा है जो चमत्कार दिखा रही हो स्टेज पर बैठकर औरतों को जो घर में सिखाया जाता है कि मर्दों से मिले ऑर्डर आपको फॉलो करने हैं इसी मेंटालिटी और सोशल स्ट्रक्चर का फायदा बाबा लोग उठाते हैं। अच्छा तो आपके पति खुद कहते कि हमारी पूजा करो। हां ये कहते हैं हमारी पूजा तो पति तो भगवान होते ही है कर भी लेना से क्या बुराई है। तो फिर अभी मारते हैं तो फिर क्या करें तो पूजा नहीं करोगी तो मारेंगे। क्योंकि औरतों की सोशल कंडीशनिंग की वजह से यह बाबा जैसे मर्दों को भी एक अथॉरिटी फिगर की तरह देखना शुरू कर देती हैं और बिना सवाल किए उनकी सारी बातों को एक पत्थर की लकीर मान लेती हैं। उन्हें लगता है कि उनके पापा भाई या हस्बैंड की तरह जो बाबाजी बैठे हैं, यह भी उनके लिए एक प्रोटेक्टर हैं और इनकी सारी प्रॉब्लम्स को बस यही खत्म कर सकते हैं। लेकिन सही में लोगों का कितना फायदा हो रहा है ये कोई नहीं जानता है। और जानेगा भी कैसे यह थोड़ी पता कर सकता है कि कौन कहां से आया था उसको जो बाबाजी ने बताया उसका उन्हें फायदा हुआ या नुकसान हुआ। और यहां पर एक सवाल रेज होता है कि अगर लोगों को फायदा नहीं हो रहा तो लोग बाबाजी की जय क्यों बोल रहे हैं। लोगों को क्यों लग रहा है कि बाबाजी उनका सब कुछ ठीक कर देंगे। इसका भी रीजन हमारी सोसाइटी की सोशल कंडीशनिंग से निकलता है। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि बड़े लोगों की बात मानो वो सही बोलते हैं और ऐसे में लोगों के अंदर अथॉरिटी को क्वेश्चन करने से ज्यादा उनको फॉलो करने की टेंडेंसी डेवलप होती है। यही चीज चाइना जैसी कंट्रीज में भी होती है, लेकिन वहां रिलीजन इतना पॉपुलर नहीं है तो लोग सरकार का ऑर्डर बिना क्वेश्चन किए फॉलो कर लेते हैं। जबकि आप वेस्ट में देखो ऐसा नहीं दिखेगा। वहां पर लोग ग्रुप में नहीं सोचते हैं सबकी इंडिविजुअल थॉट होते हैं और वह अथॉरिटी को खुलकर क्वेश्चन करना प्रेफर करते हैं। बाकी जो बाबा लोग रहते हैं ये दो चार अपने ही असिस्टेंट भीड़ में बिठा देते हैं और उनको बीमार होने का ड्रामा करने के लिए कहते हैं। फिर एकदम जादू से उनको ठीक कर देते हैं और यह देखकर जो बाकी लोग हैं उनके मन में भी डर बैठ जाता है कि भले अगर मेरी कंडीशन ठीक ना भी हुई हो क्या पता शायद मैं ही गलत हूं बाबाजी तो गलत नहीं हो सकते हैं। यहां पर प्लेसीबो इफेक्ट भी काम करता है। यह एक साइकोलॉजिकल कंडीशन है जिसमें अगर कोई आपको चीनी की गोली भी ये बोल के दे देता है कि ये तो दवाई है इससे सब ठीक हो जाता है तो खाने के बाद आपको ऐसा लगने लगेगा कि हां थोड़ा सा फायदा मुझे फील हो रहा है। यह प्लेसीबो इफेक्ट दवाइयों में भी चलता है और बाबा जी के जादू में भी। इन सब के अलावा लैक ऑफ एजुकेशन और सोसाइटी में जो ओवरऑल लो साइंटिफिक टेंपरामेंट है इसकी वजह से ही बाबाओं की दुकानें चल रही हैं। मैंने फेक डॉक्टर्स वाली वीडियो में भी यह बात कही थी कि कैसे लोग बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाने से पहले झाड़ फूंक करवाने पर ज्यादा भरोसा करते हैं और झाड़ फूंक के पीछे भी प्लेसीबो इफेक्ट ही काम करता है। क्योंकि वहां पर एक्चुअल में कोई इलाज नहीं हो रहा है बस लोगों के मन में एक वहम बैठ जाता है कि इन्होंने झाड़ दिया है अब शायद मैं ठीक हो रहा हूं। और यह जो बाबा लोगों की दो चार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होती है ये तो बस टिप ऑफ द आइसबर्ग है। एक बार सोच के देखना डेढ़ अरब की आबादी में बाबालोग हजारों की तादाद में पूरे देश भर में घूम-घूम के छोटे-छोटे कस्बों और शहरों के लोगों की जिंदगी के साथ कैसे खेल रहे हैं। और इसमें आपको हर एक रिलीजन के बाबा मिल जाएंगे जो अपनी-अपनी स्टाइल में लोगों को चूना लगा रहे हैं। देखो इस वीडियो का मकसद यह नहीं है कि मैं किसी भी रिलीजियस इंसान को टारगेट कर रहा हूं, लेकिन रिलीजन के नाम पर जो लोगों को पागल बना रहे हैं और पैसे छापने का जो यहां पर खेल चल रहा है उस पर बात होनी बहुत जरूरी है। ये लोग फर्जी जादू के दम पर लोगों की जिंदगियों के साथ खेल रहे हैं। फूक मार के इलाज करने का ढोंग कर रहे हैं और लोगों को इस तरह से ब्रेन वॉश करके रख दिया है कि वो लोग इस बात से दुखी हैं कि हाथरस स्टैंपेड के दिन वो वहां पर जाकर मर क्यों नहीं गए। ये कितनी डेंजरस ब्रेन वॉशिंग है जिसके चंगुल में हमारे घर की मां, बहन, बेटियां सब लोग फस रहे हैं। एक मां बच्चों के लिए सबसे क्लोज होती है और उसके दिमाग में अगर ऐसी ब्रेन वॉशिंग हो रही है तो यह हमारे फ्यूचर जनरेशन के लिए कितना डेंजरस होने वाला है। नेता लोग किसी बाबा के अगेंस्ट आपको बोलते हुए नहीं दिखेंगे क्योंकि बाबाओं के जो भक्त होते हैं उसको वह वोट बैंक की तरह देखते हैं। इसीलिए बाबाओं के क्राइम कितने भी प्रूव हो जाए, उसके बाद भी सरकार स्ट्रिक्ट एक्शन नहीं लेती। अगर अदालत ने जबरदस्ती जेल भी भेज दिया है तो ये लोग परोल पर हमेशा बाहर घूमते रहते हैं और इसीलिए इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए अब हमें आगे आना पड़ेगा और अगर अभी आवाज नहीं उठाई तो शायद बहुत देर हो जाएगी। बाकी ओडिन स्कूल का लिंक डिस्क्रिप्शन में है। एक बार उन्हें चेक आउट जरूर करना। जय हिंद वंदे मातरम।



