[0:00]जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, आप अकेले होते जाएंगे। अकेले होने के साथ थोड़ा सा दुखी भी होंगे, बेचैन भी होंगे, परेशान भी होंगे और जो झुंड में आपके दोस्त हैं वो ज्यादा खुश रहेंगे और कभी-कभी आपको जलन होगी कि ज्यादा खुश तो ये हैं बिना पढ़े-लिखे। हम पढ़-लिख के भी दुखी हो रहे हैं बिना बात के। तो ये कैसी जिंदगी है? तो जब-जब ये दुख हो तो एक बहुत अच्छे चिंतक हुए जे एस मिल। उनका एक वाक्य याद कर लीजिएगा बस। जॉन स्टुअर्ट मिल थे 19th सेंचुरी इंग्लैंड के विचारक थे। उन्होंने कहा, it is always better to be an unsatisfied person than a satisfied pig. एक संतुष्ट सूअर होने से बहुत बेहतर है असंतुष्ट मनुष्य होना। सूअर जितना संतुष्ट है उतना मनुष्य हो ही नहीं सकता कभी। वो नाली में पड़ा है मस्त एकदम। वही उसका स्विमिंग पूल है, वही उसकी तलैया है वही गंदगी उसको मिल रही है खाने के लिए। मस्त है, पेट भरा हुआ है, ठंडक में है। और इंसान दुखी है उसकी तुलना में। और इंसान होने वाला दुख सूअर होने वाले सुख की तुलना में ऊंचे स्तर का है।

आज कल लोग पढ़ लिखकर भी दुखी है 😱 || vikas divyakriti sir new video || #shorts #motivation
Divya Drishti UPSC
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