[0:00]अपनी मेहनत से कमाई हुई जो आपके पास काफी सारी रकम है, प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, क्या आप अपनी बीवी के नाम पर खरीद सकते हैं? खरीदनी चाहिए? तो देखें आप ने मेहनत की, आप ने बहुत सारा पैसा कमाया, आप बैरून मुल्क थे या पाकिस्तान में भी थे। अब आप का हक है उस पैसे के ऊपर, कोई भी शख्श, आप के वालिद साहब कमाते हैं, उनका हक है। अब प्रॉपर्टी खरीदनी है तो अपने नाम पर खरीदें। बीवी के नाम पर खरीदना या भाई के नाम पर खरीदना या अज़ीज़ों का रब या दोस्त के नाम पर खरीदना, ये इसमें रिस्क मौजूद रहता है। डिपेंड करता है, एक्सेप्शंस आर ऑलवेज देयर। अब हुआ क्या? लेटेस्ट जो हमारे पास एक केस आया, वह यह था कि मैंने सर बड़ी मेहनत की। बैरून मुल्क था, तो ढेरों रुपया कमाया, एक एक शानदार सा घर ले लिया लाहौर के अंदर। लाहौर के अंदर बड़ा प्यारा सा घर लिया है। अब लगवाई वो प्लॉट जो है वो बीवी के नाम लगवाया था। कंस्ट्रक्शंस वगैरह की, सारा कुछ कर लिया, घर बन गया जनाब। अब मेरी बीवी ने मुझे घर से निकाल दिया, कहती है कि घर तो मेरे नाम पे है, निकलो। बिजली का कनेक्शन, गैस का कनेक्शन सारा कुछ मेरे नाम पे है, रजिस्ट्री मेरे नाम पे है, तो ये घर तो मेरा है। लड़ाई हो गई थोड़ी, नाराज़गी हो गई, वो कहती है, निकल जाओ। उसने घर से ही निकाल दिया है। अब वो बंदा आया हमारे पास, कहता है, सर जी ये मकान तो मेरा है, मैंने तो बीवी के नाम लगवाया था, ना। इसको कहते हैं बेनामी ट्रांजैक्शन। कि जो असल में मालिक कोई और होता है तो नाम किसी और के लगाया जाता है। सारी बीवियां गलत नहीं होतीं, सारे भाई गलत नहीं होते, लेकिन ऐसा होता है। कि बैरून मुल्क था मैंने ढेर सारे पैसे भेजे, भाई के नाम पर लगवाया और भाई खा गया। भाई ने आंखें दिखा दी, कहता है, जाओ, ले लो जहां से मिलता है। ऐसा भी होता है। बीवियां भी ऐसी ना आबद अंदेश बीवियां भी होती हैं कि उनके नाम पे कोई चीज लगाएं तो वो तो बंदा ही छोड़ देती हैं चीज के चक्कर में। ऐसा होता है। बेटर ये है कि आप कोई भी प्रॉपर्टी खरीदें, कोई चीज खरीदें, अपने नाम पे लगवाएं। और अगर किसी के नाम पे लगवाएं, किसी से मतलब, बीवी किसी थोड़ी होती है। आप का भाई किसी थोड़ी होता है, आप का बाप किसी थोड़ी होता है, लेकिन इसमें रिस्क फैक्टर रहता है। अच्छा उसमें एक एहतियात आप ये कर लें, चलें। शौक आया है कि मैं अपने भाई के नाम पे लगवा देता हूं, बड़ा ट्रस्ट है मुझे अपने भाई पे। होना भी चाहिए अच्छी बात है, लेकिन थोड़ी सी एहतियात कर लें, बीवी के नाम लगवा रहे हैं, थोड़ी सी एहतियात। क्या एहतियात करें? अब वो शख्श जो हमारे पास आया है, ना कहता है, मैं प्रॉपर्टी सर मेरी थी, तो बीवी से वापस ले दें। उसके हाथ कटे हुए, पैर कटे हुए, इस तरह का केस ले के आए हैं। कुछ चीजें जो मैंने उससे अर्ज़ किया, ना, कि आप फलां-फलां चीज आप के पास है, लाओ, हम केस करते हैं बेनामी का, तो प्रॉपर्टी आप के नाम लग जाएगी, बीवी से वापस हो जाएगी। अब मैंने उससे क्या-क्या चीजें मांगी? वो ये थीं कि आप ने जो प्लॉट खरीदा था, उसकी पेमेंट आप ने की थी? वो बंदा कहता है, नहीं, मैंने अपने साले को भेजे थे पैसे। साले ने आगे बीवी को, बीवी ने आगे किसी डीलर के ज़रिये जैसे भी बाय किया, वो बीवी ने पेमेंट की थी, जिस बंदे का प्लॉट था उसको। ये बहुत बड़ी गलती है। जब भी कोई प्लॉट खरीदना है, कोई चीज खरीदनी है, कोशिश करें कि पेमेंट आप के अकाउंट से हो। साबित हो कल को कि ये पेमेंट मैंने की है। एक चीज। दूसरी चीज ये, मैंने उससे पूछा कि आप बताओ कि ये जो प्रॉपर्टी है, इसकी रजिस्ट्री कोई होगी? कोई डॉक्यूमेंट ऑफ टाइटल होगा? तो वो असल कागज़ जो है, वो आप के पास हैं? वो आगे से कहता है, नहीं, वो तो मेरी बीवी के पास है। अब ये एक और, देखें आप भाई के नाम पर खरीद रहे हैं या बीवी के नाम पर खरीद रहे हैं, जब असल डॉक्यूमेंट्स बन जाते हैं, ना, तो वो डॉक्यूमेंट आप ने ले के तो अपनी कस्टडी में रखने हैं कि मालिक आप हैं। बेनामी है, उनके नाम पे लगी हुई है, फिर भी पेमेंट आप ने की, असल डॉक्यूमेंट्स आप के पास होने चाहिए। तीसरी चीज आप का कब्ज़ा होना चाहिए। भाई के जनाब अगर आप ने नाम ले भी ली है, ना, तो कोशिश कर के तो फुल बटा फुल उसको हर चीज हैंडओवर ना कर दें। कि वह अगर पेमेंट उसने की हुई है, डॉक्यूमेंट ओरिजिनल उसके पास है, पज़ेशन उसके पास है, तो फिर कोई चांस नहीं है कि आप कोशिश कर के भी तो वो उससे प्रॉपर्टी वापस नहीं ले सकते। कल को अनबन हो गई, कल को लड़ाई हो गई, तो आप ये चीजें वापस नहीं ले सकते। लगवानी है, लगवाएं। दो चीजें, दो ऑप्शंस आप के पास हैं। मैं बीवी के नाम लगवा रहा हूं तो दो चीजें या भाई के नाम लगवा रहा हूं या किसी के नाम, दोस्त के नाम लगवा रहा हूं, दो चीजें माइंड में रखनी हैं। दो ऑप्शंस हैं आप के पास। नंबर वन, आप वह प्रॉपर्टी उसको दे रहे हो कि जाओ रख लो, ये तुम्हारी है, फिर उसके नाम लगवाएं। कल को लड़ाई झगड़ा, ऑप्शन मौजूद रहता है, ना। तो ये ज़ेहन में रखें कि ये सारा कुछ मैं उसको गिफ्ट कर रहा हूं, ये उसकी है। दूसरी ऑप्शन क्या है? आप कहते हैं, नहीं-नहीं, ये तो किसी सूरत भी नहीं, मेरी है तो नाम लगवा लूं, लेकिन रखनी मैं, ये मालिक मैं ही रहना है। कल को मैं इसे ये खा नहीं सकता। अगर ऐसी चीज है, तो ये कुछ ना कुछ एहतियातें आप ने कर लेनी हैं। आप ने उसके नाम लगवा दी है, उसे फौरन कहें डॉक्यूमेंट्स जो हैं, वो ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स मुझे दे दें। वो आप को हैंडओवर कर देगा। आप पेमेंट खुद करें, अपने अकाउंट से करवाएं। फिर आप के पास ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स भी होंगे और पज़ेशन कोशिश कर के पज़ेशन आप का होना चाहिए। आप के पास, उसको ताला-शाले लगा हुआ है, उसकी चाबियां, ये चीजें सारी आप के पास, आप उसकी, बैरून मुल्क भी रहते हो फिर भी आप के पास हो वो चीज। रेंट आउट करनी है, आप पाकिस्तान आए हो आप रेंट आउट करो। आप किसी को मुख्तारनामा दे दो। कुछ ऐसे तरीकेकार अडॉप्ट करो कि वो कब्ज़ा आप का ही शो हो। तो इन तरीकों से अगर आप किसी के नाम पे, बीवी के नाम पे, भाई के नाम पे, किसी भी दोस्त के नाम पे प्रॉपर्टी कोई ऐसी इमरजेंसी मज़बूरी बन गई है, ले भी रहे हैं। कोई इश्यू नहीं है, लेकिन उसमें कुछ-कुछ एहतियातें कर लें कि कल को आप वापस लेना चाहें वकील साहब के पास आए तो वकील यही क्वेश्चन करेगा दो-चार जो मैंने किए हैं। एटलीस्ट आप के पास उसका कोई आंसर मौजूद हो ताकि आप की प्रॉपर्टी कल को आप को वापस नहीं ले सकते।

کیا پراپرٹی خرید کر بیوی کے نام لگوانی چاہئے؟ اگر بھائی/ بیوی کے نام لگوانی پڑے تو چند کام ضرور کرنا
Legal Issues
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