[0:00]आज इस वीडियो में हम डिस्कस करने जा रहे हैं पेंटिंग थ्योरी का यूनिट वन। अगर आप भी हैं पेंटिंग सीबीएसई के स्टूडेंट तो यह वीडियो आप ही के लिए होने वाला है। तो मैं हूं जियाउल हसन और आप देख रहे हैं हसन आर्ट स्टूडियो। तो ज्यादा बकवास ना करते हुए चलिए आपका सिलेबस शुरू करते हैं। इससे पहले वीडियो में हमने आपका पूरा सिलेबस डिस्कस किया था कि 2026 के एग्जाम में क्या आने वाला है सीबीएसई ने क्या पढ़ने को आपको बोला है। तो मैं जो यहां पर पढ़ाने जा रहा हूं वो अपने ही नोट से यहां पढ़ाने जा रहा हूं जो कि लास्ट ईयर के नोट्स हैं। इस बार कोई भी सिलेबस में चेंजेस नहीं है इसलिए मैं यही नोट्स आपके इस वीडियो में यूज करने वाला हूं। तो हम यहां पर सिलेबस डिस्कस ना करते हुए सीधा चैप्टर वन पे जंप करते हैं। ओके लेट्स सी ये मैं 2025 के ही यहां पर नोट्स यूज कर रहा हूं। क्योंकि इस बार भी सिलेबस में कोई चेंजेस नहीं है। तो यहां पर हम जो कंटेंट हम पढ़ने जा रहे हैं उसके बारे में हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं दूसरे वीडियो में जिसमें हमने पूरा सिलेबस डिस्कस किया था कि क्या-क्या इस बार हम लोगों को पढ़ना है। तो अभी हम फर्स्ट चैप्टर में आ जाते हैं इंट्रोडक्शन ऑफ मिनिएचर पेंटिंग। तो यहां पर ये फर्स्ट चैप्टर में नहीं आता है वैसे ये सिर्फ स्टार्टिंग के लिए है कि कैसे-कैसे पेंटिंग की शुरुआत हुई है। तो यहां हम ज्यादा इधर-उधर की बात ना करके सीधा पॉइंट पे आते हैं मिनिएचर पेंटिंग क्या होता है पहले ये देख लेते हैं क्योंकि जो आपके यूनिट वन में जितने भी चैप्टर हैं वो मिनिएचर पेंटिंग से रिलेटेड है तो मिनिएचर पेंटिंग जो है हिंदी में उसे लघु पेंटिंग कहते हैं। और ये एक बहुत स्मॉल साइज की पेंटिंग्स होती हैं तो उनको ही आप मिनिएचर पेंटिंग कहते हैं। मिनी मतलब स्मॉल होता है ना। तो जैसे द पेंटिंग्स व्हिच आर स्मॉल इन साइज बट हैविंग इनफ डिटेल्स इन द डेलिनेशन ऑफ डिफरेंट ऑब्जेक्ट्स आर कॉल्ड मिनिएचर पेंटिंग्स। तो जो पेंटिंग बहुत छोटे साइज की होती हैं बट उसके अंदर बहुत ज्यादा डिटेल होती है और उसमें छोटे-छोटे ऑब्जेक्ट्स होते हैं जो भी चीजें बनाई जाती हैं। तो उसको हम मिनिएचर पेंटिंग कहते हैं। और ये जो इसकी शुरुआत हुई है वो सेकंड हाफ ऑफ द 10th सेंचुरी में हुई है द मिनिएचर पेंटिंग यूज फॉर मैन्यूस्क्रिप्ट्स मैन्यूस्क्रिप्ट्स होता है जो बहुत ही पुराने विक्टोरियल हमारे पास एविडेंसेस होते हैं तो वो होते हैं मैन्यूस्क्रिप्ट्स। और अ इलस्ट्रेशन मैन्युस्क्रिप्ट इलस्ट्रेशन मतलब होता है कि कोई भी कहानी को जब हम ड्रॉ करते हैं तो उसे इलस्ट्रेशन कहते हैं। सो दे आर पिक्टोरियल ट्रांसलेशंस ऑफ पोएटिक वर्सेस तो जो पोएट्री पुराने जमाने में लिखी गई थी उनके जो यहां पर हमें उनके ट्रांसलेशन का पिक्टोरियल ट्रांसफॉर्मेशन दिखता है। एंड कलेक्शन ऑफ रूलर इट्स एल्बम एंड हिस्टोरिकल फोलियो तो ये जितनी भी हिस्ट्री की चीजें हैं वो हमें यहां पर हमें देखने को मिलती हैं। सबसे पहले हम बात करते हैं पाल डायनेस्टी की तो पाल डायनेस्टी क्या है बेसिकली बिलोंग्स टू द पाल डायनेस्टी पाल डायनेस्टी रीन इन बिहार एंड बंगाल फ्रॉम द 8th टू 12th सेंचुरी एरी। तो ये जो पाल एंपायर आप यहां देख रहे हैं स्क्रीन पे तो ये यहां पर राज करते थे पाल राजा जो बुद्ध जी को फॉलो करते थे और इन्होंने ही यहां पर मॉनेस्ट्रीज बनवाई थी जिसमें नालंदा और विक्रमशिला मुख्य हैं। तो ये बहुत ही ग्रेट सेंटर्स हैं मतलब इन्हें सबसे पहली यूनिवर्सिटी भी कहा जाता है दुनिया की तो यहां पर बुद्धिस्ट लर्निंग होती थी मतलब जो बुद्ध से रिलेटेड चीजें थी वो यहां पर पढ़ाई जाती थी। तो यहां पर ही हमें सचित्र पोथियां देखने को मिली मतलब जो मैन्यूस्क्रिप्ट्स हैं वो देखने को मिली जैसे कि आप यहां पर देख रहे हैं प्रजान प्रमिता जो सबसे पहली हमें मैन्यूस्क्रिप्ट्स देखने को मिलती है जो फेमस है तो वो है प्रजान प्रमिता या प्रज्ञा प्रमिता उसे कहते हैं। तो ये है और इसमें क्या होता था ये बहुत ही स्मॉल साइज की पेंटिंग्स होती थी स्मॉल साइज का पीस होता था ये और ये है ताड़ पत्र मींस पाम लीफ पर ये बनी हुई है।
[4:06]ये इतनी पतली होती थी और इसमें दो छेद या एक छेद भी रहा करता था ताकि ये जो पेजेस हैं इधर-उधर ना हो जाएं एक साथ बंधे हुए रहे तो इसलिए इसमें छेद कर-कर के धागे से बांधा जाता था इनको। तो इसमें बीच में या साइड में जो है पिक्चर रहती थी और रिलेटेड टू द टेक्स्ट और फिर वहां साइड में टेक्स्ट लिखा जाता था। बट ये बहुत ही ब्यूटीफुली इतनी छोटी-छोटी चीजों पे यहां पर लिखा हुआ है और ये आज भी हमें देखने को मिलता है। यहां आप जब जाएंगे नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली तो आप वहां जाकर के इसे देख सकते हैं। अगर जैन स्कूल की बात करें इसके बाद आगे चल के जैसे ये आपका हो गया पाल एंपायर और जैन एंपायर आता है आपका गुजरात के एरिया में। ठीक है तो यहां पर देखते हैं बेसिकली बिलोंग टू जैनिज्म जैनिज्म जैसे ये बौद्ध धर्म है तो ये जैन धर्म है जैन धर्म से रिलेटेड है। तो धर्म ने बहुत ज्यादा पेंटिंग्स को आगे बढ़ाया है। एंड इसमें हम कल्पसूत्रा स्टाइल की मैन्यूस्क्रिप्ट्स देखते हैं जैन स्कूल में एंड कल्पसूत्रा जो होता है वो रिलीजियस टेक्स्ट होता है जो पाम लीफ पर बनाया हुआ है जैसे ये आप देख रहे हैं। एंड अदर नेम इसका अभ्रंश स्टाइल, गुजरात स्टाइल, वेस्टर्न इंडियन स्टाइल तो इसके इतने नाम हैं और ये मेन-मेन चीजें हैं आएगा तो एमसीक्यूस वगैरह में आ जाएगा अदर वाइज ये इससे ज्यादा पूछा नहीं जाता है। तो अब हम यहां पर सिलेबस डिस्कस ना करते हुए सीधा चैप्टर वन पे जंप करते हैं। ठीक है तो यहां पर देखते हैं बेसिकली बिलोंग टू जैनिज्म जैनिज्म जैसे ये बौद्ध धर्म है तो ये जैन धर्म है जैन धर्म से रिलेटेड है। तो धर्म ने बहुत ज्यादा पेंटिंग्स को आगे बढ़ाया है।
[5:20]तो अब हम यहां पर देख लेते हैं जो आपका रियल फर्स्ट चैप्टर शुरू होता है द राजस्थानी स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग। तो राजस्थानी स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग क्या है? ये राजस्थान से रिलेटेड है। एंड स्कूल की अगर हम बात करें तो ये स्कूल स्कूल नहीं होता ये स्टाइल को स्कूल कहते हैं। ठीक है कोई स्कूल नहीं है कि वहां पर पढ़ाई होती होगी राजस्थानी पेंटिंग्स की ऐसा नहीं है। तो ये राजस्थान राज्य है और उसमें जो पेंटिंग स्टाइल हो रहा है उसके बारे में यहां पर बात होगी। तो राजस्थान में कैसे शुरुआत हुई पेंटिंग्स की ये देखेंगे। तो ओरिजिन डेवलपमेंट सबसे पहले जब हम लॉन्ग आंसर लिख रहे होंगे तो हम ओरिजिन डेवलपमेंट जरूर मेंशन करेंगे। इस पे आपको लॉन्ग आंसर लिखने को आता है। सो यहां पर कैसे स्टार्टिंग हुई है राजस्थानी स्कूल की ये देखते हैं। इन द बिगिनिंग ऑफ द 16th सेंचुरी। तो यहां पर 16th सेंचुरी में हमें राजस्थानी पेंटिंग्स की बिगिनिंग देखने को मिलती है। डेलीनेशन मतलब ये ड्राइंग हो गया पेंटिंग हो गया। और जो भी स्केचिंग वगैरह होता है उसे डेलिनेशन कहते हैं। कुछ बनाने को ऑफ मिनिएचर पेंटिंग्स इन द जैन कल्पसूत्र स्टाइल तो स्टार्टिंग में जो पेंटिंग यहां पर हुई हैं वो जैन कल्पसूत्रा स्टाइल में हुई हैं। और ये मेवाड़ स्कूल में सबसे पहले हमें देखने को मिलता है जो उदयपुर का एरिया है। और ये राजस्थान में आता है। एंड इन दिस पेंटिंग वी फाइंड द कोलाबोरेशन ऑफ स्पेसिफिक एलिमेंट्स ऑफ लोकल फोक आर्ट्स एंड द ग्रेट आर्ट ट्रेडिशन ऑफ अजंता एंड गुजरात। तो यहां पर हमें मिक्सचर देखने को मिलता है अजंता, गुजरात और फोक राजस्थानी फोक आर्ट का। तो ये इन चीजों से मिलकर के राजस्थानी पेंटिंग बनी है। क्योंकि गुजरात का ट्रेडिशन या गुजरात का स्टाइल क्यों देखने को मिलता है यहां पर क्योंकि ये जो राजस्थान एरिया है वो गुजरात के बहुत ज्यादा पास में आता है। और गुजरात का ही स्टाइल जैन स्टाइल था। तो वही यहां पर आगे बढ़कर के राजस्थान पहुंचा। और ये जो अजंता है ये अजंता में बुद्ध से रिलेटेड बहुत ज्यादा पेंटिंग है और स्कल्पचर्स हैं वहां पर तो उन से भी यहां पर थोड़ा सा हमें इन्फ्लुएंस देखने को मिलता है। अगर हम इनके और नामों की बात करें तो इसमें हिंदू स्टाइल और राजपूता पेंटिंग है। राजपूत स्टाइल पेंटिंग भी इसे कहते हैं जो राजस्थानी स्कूल ऑफ पेंटिंग है। तो इन नामों से भी ये जाना जाता है। तो ये पॉइंट्स आप याद रखेंगे। एंड पीरियड इसका 16th टू 19th सेंचुरी है एंड पीक टाइम की अगर हम बात करें तो ये 18th सेंचुरी है। एंड अर्ली एरिया मतलब जो शुरुआत हुई थी वो मेवाड़ से हुई थी उदयपुर से तो इसलिए यहां पर दिया गया है। मिक्सचर वही गुजराती ट्रेडिशन एंड राजस्थानी फोक आर्ट अजंता पेंटिंग्स एंड स्कॉलर हैं यहां पर आनंद कुमार स्वामी। अकॉर्डिंग टू ए के स्वामी 200 इयर्स, डिफरेंस बिटवीन पहाड़ी एंड राजस्थानी पेंटिंग। तो पहले क्या था पहले हम समझते थे कि राजस्थानी और पहाड़ी पेंटिंग एक ही हैं उनको अलग-अलग उसमें नहीं रखा जाता था। लेकिन आनंद कुमार स्वामी ने यहां पर बताया कि इनमें डिफरेंट है डिफरेंस है इनके अंदर। वो पहाड़ी पेंटिंग है पहाड़ से रिलेटेड है और उनके फीचर्स अलग हैं और इनके फीचर्स अलग हैं राजस्थानी के तो इन्होंने बताया है कि और इन्होंने ही साइंटिफिक डिवीजन किया है इसका। ठीक है ये क्वेश्चन आ भी चुका है तो इसे आप याद रखेंगे। बुक जो जिसमें हमें ये देखने को मिलता है वो है राजपूत पेंटिंग जिस बुक का नाम है। एंड डेट्स वगैरह ज्यादा याद रखने की आप लोगों को जरूरत नहीं है डेट्स हमें काफी कंफ्यूजन होती है जब हम लिख रहे होते हैं उसमें कई बार हम गलत डेट्स लिख देते हैं तो इसलिए डेट्स पर आप ज्यादा ध्यान नहीं देंगे। सब स्कूल की बात करें यहां पर तो राजस्थान के जो सब स्कूल हैं वो मेवाड़, जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, जयपुर एंड बूंदी ये हमें पढ़ने हैं। एंड थीम्स की अगर हम बात करें तो ये इनका डिस्क्रिप्शन पढ़ने की ज्यादा जरूरत नहीं है बट एक बार फिर भी आप लोग देखेंगे क्योंकि एमसीक्यूस में पूछा जा सकता है कई बार जैसे कि बारामासा के बारे में पूछ लिया गया था कि 12 मंथ बारामासा क्या होता है। तो उसमें था 12 मंथ ऑफ द ईयर या फिर ऐसे ही ऑप्शंस दे रखे थे तो आपको उसका आंसर देना था। तो यहां वैष्णवनिज्म हमें देखने को मिलता है जिसमें राम एंड कृष्णा डिपिक्शंस ऑफ द डिवाइन इनकार्नेशंस राम एंड कृष्णा देयर लाइफ इवेंट्स, टीचिंग्स एंड डिवाइन एट्रिब्यूट्स। कृष्णा गॉड एंड आइडियल ऑफ लवर रा ह्यूमन सोल गीता गोविंदा गी गो रिटन बाय जयदेवा 12 सेंचुरी बुक राधा एंड कृष्णा राकपिया केशवदास श्रृंगार रसा बारामासा पोएटिक बुक 12 मंथ ऑफ द ईयर थीम्स रिवॉल्व अराउंड द 12 मंथ्स ऑफन शोकेसिंग नेचर सीजन एंड इमोशन एसोसिएटेड विथ ईच मंथ। तो जो ये पुरानी बुक्स ये सारी पुरानी बुक्स हैं कोई कविताओं की बुक है तो ये सारी बुक्स पर यहां पर टॉपिक लेकर के पेंटिंग्स बनाई गई हैं रागमाला बनी है बिहारी सतसई रस मंजरी सिक्स मेन राग रोमांटिक स्टोरीज जिसमें ढोला मारू बहुत फेमस स्टोरी है और इसकी पेंटिंग भी आपके सिलेबस में है। सोनी महिवाल पंजाबी लव स्टोरी मारीगावत एंड लव पोयम चौरापंचासीका कश्मीरी पंडित की एंड लोरियल चंदा और ये है मौलाना दाऊद की एंड पुराण यहां पर रामायण, महाभारत, भगवत पुराण ये सारी चीजें यहां पर पेंट की गई हैं बहुत ही ज्यादा संख्या में। अदर थीम्स की बात करें तो दरबार सीन एंड हिस्टोरिक मूवमेंट, हंटिंग, पिकनिक्स, पार्टीज, डांस, म्यूजिक, फेस्टिवल्स, पोर्ट्रेट ऑफ किंग्स, कोर्टियर्स, सिटी व्यूज, बर्ड्स एंड एनिमल्स तो ये सारी चीजें इसलिए पेन की गई हैं क्योंकि जब ये जो आर्टिस्ट थे वो दरबारी आर्टिस्ट कहे जाते हैं और ये दरबारी आर्ट इसलिए कही जाती है क्योंकि यहां पर जितने भी राजा हैं उनके बड़े-बड़े दरबार हुआ करते थे क्योंकि वो राजा हैं। ठीक है तो उनके दरबार में पेंटर्स रहते थे तो वो इन से ही रिलेटेड पेंटिंग्स बनाते थे जो भी आपसे राजा पेंटिंग बनवाता था तो इसमें दरबार सीन हो गए हिस्टोरिक मूवमेंट हो गए हंटिंग सीन हो गए जब हंटिंग पे जाते होंगे पिकनिक पे जा रहे हैं तो पेंटर लेकर जा रहे हैं वो पार्टीज कर रहे हैं तो पेंटर लेकर जा रहे हैं डांस हो रहा है म्यूजिक हो रहा है फेस्टिवल हो रहे हैं कोई तो उनके साथ हमेशा पेंटर्स रहते थे और पेंटर्स वहां पर पेंटिंग्स बनाया करते थे। स्पेशलिटीज और फीचर्स की बात करें तो यहां पर हम कलर स्कीम एंड मटेरियल की बात करेंगे तो इसमें जो पेपर यूज होता था वो वासलिस हैंडमेड शीट यूज होती थी। आउटलाइन ब्लैक एंड ब्राउन की है ब्रश कैमल एंड स्क्वायरल हेयर के हैं पेंटिंग एक्टिविटी वाज अ काइंड ऑफ टीम वर्क। तो पेंटिंग जो यहां पर बनती थी वो कोई एक पेंटर नहीं बनाता था। वो मिल-जुल के यहां पर पेंटिंग्स बनाई जाती थी। मास्टर आर्टिस्ट लास्ट में फिनिशिंग टच देता था। ऑल वूमन पेंटेड इन सेम फिगर एज सिंबल ऑफ ऑल फेमिनिटी। तो ये एक जैसी दिखाने के लिए सबको एक जैसा फिगर यहां पर दिया गया है फीमेल्स को लार्ज लोटस आइज फ्लोइंग ट्रेसस हेयर फर्म ब्रेस्ट स्लेंडर वेस्ट एंड रोजी हैंड। इंडियन लाइफ इट्स डेली एक्टिविटी विद इमोशंस। 2D पेंटिंग और 2D पेंटिंग्स क्या होता है? 2D पेंटिंग्स होता है जैसे आप कोई भी फिगर बना रहे हैं और उसमें आप इफेक्ट नहीं डालेंगे शैडो एंड लाइट का सीधा-सीधा कलर भर देंगे। मतलब फ्लैट कलर यहां पर यूज हुए हैं। वार्म एंड फ्लैशी कलर्स यहां यूज हुए हैं और जयपुर में जो है सबसे ज्यादा बड़ी पेंटिंग्स देखने को मिली हैं हमें जो पोर्ट्रेट थे वो लाइफ साइज पोर्ट्रेट्स। ये है लाइफ साइज पोर्ट्रेट्स। इसका मतलब है कि जो असली में जितने बड़े लोग होते हैं उतने ही बड़े यहां पर पोर्ट्रेट्स बनाए गए हैं। सब स्कूल की बात करें अब हम सब स्कूल की बात कर लेते हैं। सब स्कूल में ज्यादा नहीं पूछते हैं। लेकिन यहां से एमसीक्यूस आने के चांसेस रहते हैं तो इसलिए हम यहां पर देखते हैं मेवाड़ अर्ली सेंटर ऑफ राजस्थानी पेंटिंग। जैसा हमने देखा था कि यहीं से शुरुआत हुई थी एंड दिस स्टाइल ट्रेस अदर सेंटर ऑफ राजस्थानी स्कूल फ्रॉम 16th सेंचुरी ऑनवर्ड्स। तो यहां पर जब ये शुरुआत हो गई तो यहां की ही पेंटिंग्स की जो स्टाइल है वो सारे जितने भी राजस्थान के सेंटर्स थे उन्होंने यहां से कॉपी करना शुरू किया। एंड इट्स प्योर बिफोर इट केम इन टू कांटेक्ट विद मुगल्स। तो मुगल्स से कांटेक्ट में आने से पहले ये बिल्कुल प्योर इंडियन पेंटिंग्स थी मतलब राजस्थानी पेंटिंग्स थी और मुगल के बाद कांटेक्ट में आने में थोड़े से वहां का इन्फ्लुएंस हमें इसमें देखने को मिलता है। मेन आर्टिस्ट इसके साहिबदीन एंड मनोहर हैं। इसमें अगर और वर्क की बात करें तो इसमें रागमाला पेंटिंग हुई हैं राक प्रिया है भगवत पुराण है युद्धकांड है मनोहर की यहां पर बाल कांड ऑफ रामायण है बिहारी सतसई है एंड नाथद्वार ये आपके एग्जाम में पूछा जा चुका है कि नाथद्वार किस सब स्कूल का सब स्कूल है।
[13:17]तो ये नाथद्वार जो है मेवाड़ का है एंड इसमें क्या है ये नाथद्वार की पेंटिंग के लिए जो है श्रीनाथ जी की पेंटिंग के लिए फेमस है और इसमें जो पेंटिंग फेमस है वो है पिछवाई और पिछवाई का मतलब होता है जो श्रीनाथ जी की जो मूर्ति है उसके पीछे एक कपड़ा लगाया जाता है बड़ा सा कर्टेन लगाया जाता है जिसमें श्रीनाथ जी से रिलेटेड ही पेंटिंग्स पेंटेड हुई होती हैं वो काफी फेस्टिवल्स वगैरह पर लगाया जाता है तो वो चीज पिछवाई कहलाती है। तो आप यहां से याद रखेंगे इसे। अब अगर फीचर्स की बात करें यहां पर तो भक्ति मूवमेंट पेंटिंग्स। ब्राइट एंड ब्रिलियंट कलर्स यूज्ड। मेल एंड फीमेल हैव लॉन्ग नोसेस ओवल शेप्ड फेसेस, फिश लाइक आइज। मेल यूज लूज फिटिंग गारमेंट्स, पटका, टर्बन्स। फीमेल यूज लूज लॉन्ग स्कर्ट्स, चोली, ट्रांसपेरेंट ओडनेस। फीमेल स्मॉलर देन द मेल। तो ये ज्यादातर सारे जितने भी हमारे सब स्कूल है उसमें सेम है। आइस का थोड़ा डिफरेंशिएशन आपको देखने को मिलेगा नहीं तो ये सब सेम है। पेंटिंग की बात करें तो पेंटिंग ही सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है आपकी अगर आपको जैसे 28 और 29 मार्क्स आपके सिर्फ पेंटिंग से आ जाएंगे। क्योंकि पेंटिंग्स बहुत ज्यादा पूछी जाती हैं पेंटिंग ही पूछी जाती है आपके सिलेबस में और ज्यादा कुछ नहीं पूछा जाता है। तो पेंटिंग की बात करें मारु रागिनी दिस इज द फेमस पेंटिंग। और फेमस लव स्टोरी है ये ढोला एंड मारू की। पेंटिंग साहिबदीन ने बनाई है ये पेंटर्स हैं इसके कलर इसका वाटर कलर है एंड टेक्निक टेंपरा है सब स्कूल मेवाड़ हो गया कलेक्शन नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। तो जब आप आंसर लिख रहे होंगे पेंटिंग का किसी का भी तो आप ये जो लिस्ट है ये जरूर आप ऊपर लिखेंगे फिर उसके बाद सब्जेक्ट मैटर लिखेंगे उसके बाद कंपोजीशन लिखेंगे। ठीक है तो जैसे सब्जेक्ट मैटर यहां पर सब्जेक्ट मैटर का मतलब है जो टॉपिक है इसका उसी को आपको दो लाइन में लिख देना है। जिस टॉपिक पर भी ये पेंटिंग बनी हुई है तो पहले आप यहां पेंटिंग देखिए पेंटिंग में क्या देखने को मिलता है। दिस इज द रागमाला सीरीज पेंटिंग बाय साहिबदीन दिस पेंटिंग बेस्ड ऑन फेमस राजस्थानी लव स्टोरी ढोला एंड मारू।
[15:21]कंपोजीशन की बात करें तो कंपोजीशन में एक तो ये गीत गोविंदा से ही ली गई है जो ये पेंटिंग है जो इसका थीम है। एंड कृष्ण जी इसमें कृष्ण जी जा रहे हैं और ये गोकुल से वृंदावन की तरफ जा रहे हैं तो उस टाइम का ट्रेवलिंग का ये एक सीन है और ये बहुत ही अच्छा ट्रेवल डायरी आप इसे कह सकते हैं उस टाइम का।
[16:40]ठीक है तो पहले इसको कांगड़ा स्टाइल या कांगड़ा कलम कहते थे। पीरियड 16th टू 19th सेंचुरी अभी तक जो हमने देखा राजस्थान का था 16th टू 19th सेंचुरी और ये 17th टू 19th सेंचुरी है। तो ये इकलौता स्कूल है जिसका जो डेट 17th टू 19th सेंचुरी है नहीं तो आपको 16th टू 19th सेंचुरी ही देखने को मिलेगा आगे भी। अगर एरिया और सब स्कूल की बात करें तो बसोली गुलेर, कांगड़ा कुल्लू, मंडी चंबा, मानकोट, नूरपुर, बिलासपुर, जम्मू एंड अदर हिल वेस्टर्न हिमालयस।
[17:17]तो ये सारी चीजें इसमें आती हैं। पहाड़ी स्कूल हिली और माउंटेनियस आर्ट अदर नेम इसका कांगड़ा स्टाइल कांगड़ा कलम। पहले इसको कांगड़ा स्टाइल या कांगड़ा कलम कहते थे। पीरियड 17th टू 19th सेंचुरी अभी तक जो हमने देखा राजस्थान का था 16th टू 19th सेंचुरी और ये 17th टू 19th सेंचुरी है। तो ये इकलौता स्कूल है जिसका जो डेट 17th टू 19th सेंचुरी है नहीं तो आपको 16th टू 19th सेंचुरी ही देखने को मिलेगा आगे भी। अगर एरिया और सब स्कूल की बात करें तो बसोली गुलेर, कांगड़ा कुल्लू, मंडी चंबा, मानकोट, नूरपुर, बिलासपुर, जम्मू एंड अदर हिल वेस्टर्न हिमालयस।
[18:06]बट इनको यहां पर पढ़ने की जरूरत नहीं है अभी जो हम देखेंगे बसौली गुलेर और कांगड़ा ही देखेंगे यही फेमस हैं और यही आपके इंपॉर्टेंट भी हैं। अर्ली स्टाइल की बात करें तो बसोली से ये इसकी शुरुआत हुई है।
[18:19]मोस्ट डेवलप सब स्कूल था कांगड़ा सब स्कूल। इन्फ्लुएंस और मिक्सचर का यहां देखें तो गुजरात स्टाइल, मुगल स्टाइल, राजस्थानी स्कूल और डेक्कन स्कूल। स्कॉलर हैं बी एन गोस्वामी एंड भूपेंद्र नाथ गोस्वामी ए के स्वामी आनंद कुमार स्वामी।
[18:37]अकॉर्डिंग टू ए के स्वामी 200 इयर्स, डिफरेंट बिटवीन पहाड़ी एंड राजस्थानी पेंटिंग जो हम राजपूत पेंटिंग में के बारे में बात करते हैं उस बुक के तो उसी में हमें ये देखने को मिलता है। आर्टिस्ट वर फ्री टू चूज देयर थीम एंड टॉपिक फॉर पेंटिंग। जो हमारा पहाड़ी स्कूल है तो वो क्यों बस है मतलब क्यों शुरू हुआ है क्योंकि जब मुगल कोर्ट में पेंटिंग को बैन कर दिया गया था औरंगजेब के टाइम पे। तो उस टाइम पे वहां के आर्टिस्ट सारे अलग-अलग राज्यों में जाना शुरू हो गए थे जहां छोटे-छोटे राजा महाराजा जो है अपने-अपने राज्यों में राज कर रहे थे तो उन जो छोटे-छोटे साम्राज्यों में जाकर के इन्होंने पेंटिंग्स बनाना शुरू किया और कुछ इंडिपेंडेंटली भी वर्क करने लग गए थे। कैरेक्टरिस्टिक और फीचर्स की बात करें तो वही डेलीकेसी ऑफ लाइंस एंड आई ऑफ विमेन मेड इन द फॉर्म ऑफ बो लॉन्ग एंड नैरो एंड ब्रिलियंस ऑफ कलर्स मिन्यूटनेस ऑफ डेकोरेटिव डिटेल्स स्पेशल फीचर्स इज द डेलिनेशन ऑफ द फीमेल फेसेस विद द स्ट्रेट नोज इन लाइन विद द फोर हेड। तो ये सेम फीचर्स ही रखे हुए हैं जो ऊपर हमने पढ़े थे। सो थीम्स की बात करें तो भगवत पुराण, गीता गोविंदा, नालादमयंती, बिहारी सतसई, रागमला एंड बारामासा। सो थीम्स भगवत पुराण, गीता गोविंदा, नालादमयंती, बिहारी सतसई, रागमला एंड बारामासा।
[19:47]अदर थीम्स की बात करें तो पिक्टोरियल रिकॉर्ड ऑफ संसार चंद एंड हिज कोर्ट। संसार चंद शोन सिटिंग बाय द रिवर साइड, लिसनिंग म्यूजिक, वाचिंग डांस, प्रैक्टिसिंग आर्चरी।
[20:06]तो ये सब चीजें देख कर के वहां पर उनका एक बहुत ही आराम करते हुए एक दृश्य इस पेंटिंग में दिखाया गया है। और अगर और ज्यादा पेंटिंग्स की बात करें तो ये पेंटिंग्स हैं आप इनको पढ़ सकते हैं लेकिन ये ज्यादातर पेंटिंग्स नहीं पूछी जाती हैं।



