[0:00]अब यहां पर मैं आपको एक बहुत ही तगड़ी चीज समझाता हूं जो जानते तो बहुत सारे लोग हैं, लेकिन उन्हें उसके पीछे का लॉजिक नहीं पता होता और जब आपको यह लॉजिक समझ आएगा तब आपको लगेगा कि हां, भाई इस चीज के काम करने के जो चांसेस हैं वह बहुत ज्यादा है।
[0:15]दोस्तों आज की वीडियो में मैं आपको प्राइस एक्शन ऐसे सिखाऊंगा ना कि आपको इसे याद रखने की जरूरत ही नहीं होगी, ये आपके दिमाग में पूरी तरीके से बैठ जाएगा। और इसके बाद आप किसी भी चार्ट को देखते ही बता दोगे कि यहां से प्राइस ऊपर जा सकती है या फिर नीचे जा सकती है। इस वीडियो में मैंने ठान रखा है कि मैं आपको पूरा प्राइस एक्शन घोट के पिलाने वाला हूं, लेकिन देखिए एक कंडीशन है और वो यह है कि आपने इस वीडियो को ध्यान से देखना है और पूरा देखना है। क्योंकि कुछ इंपॉर्टेंट चीजें हैं जो मैं वीडियो के बाद में बताऊंगा और अगर आप अधूरा ज्ञान लेकर चले जाएंगे तो फिर इसका नुकसान ज्यादा होगा। तो चलिए इस वीडियो को शुरू करते हैं। लेकिन उससे पहले एक बार कमेंट करके पहले यह बता दो कि आपके अकॉर्डिंग अभी प्राइस एक्शन क्या होता है। तो चलिए सबसे पहले समझ लेते हैं कि प्राइस एक्शन होता क्या है। देखिए, प्राइस एक्शन का सीधा सा मतलब है कि प्राइस को देखकर आप क्या एक्शन लेंगे। यानी ये जो प्राइस एक्शन है यह सीधा-सीधा आपसे जुड़ा हुआ है, अब इसे मैं एक सिंपल से एग्जांपल से समझाता हूं। मान लीजिए कोई स्टॉक है जिसकी प्राइस आपने बहुत बार नोटिस किया है कि बढ़ते-बढ़ते हाई जो जाती है वह ₹20 के आसपास जाती है कभी ₹18 जाएगी, कभी ₹19 जाएगी, कभी ₹20 जाएगी, कभी हो सकता है ₹21 भी चले जाए। लेकिन उसके बाद ऑलमोस्ट ₹20 के पास जाने के बाद वापस से प्राइस गिरती है और गिरते-गिरते-गिरते-गिरते कम से कम अगर आएगी तो ₹10 के पास आएगी। ये आपने किसी स्टॉक के लिए या किसी क्रिप्टो के लिए नोटिस किया है। तो अब जब प्राइस ₹10 के पास होगी तो आपको पता है कि इससे नीचे तो कभी जाती ही नहीं है। तो आप क्या करेंगे? आप यहां पर बाय करेंगे क्योंकि जब आपको पता है कि प्राइस इससे नीचे जाती नहीं है तो आप यहां पर खरीदोगे ना, तो आपने यहां पर खरीद लिया। आपके खरीदने के बाद प्राइस बढ़ते-बढ़ते ₹20 के पास पहुंच गई। तो यहां पर मान लीजिए आपने अपने ₹100000 लगाए थे, तो अब आपका पैसा डबल हो चुका है, ₹200000 हो चुका है, आपको ₹100000 का प्रॉफिट चल रहा है और आपने बार-बार नोटिस किया है कि यह प्राइस ₹20 के पास जाने के बाद गिर जाती है। तो आपको जब पता है कि प्राइस ₹20 के पास जाने के बाद गिर जाती है तो आप यहां पर बेच दोगे, प्रॉफिट कमाओगे। तो आप क्या कर रहे हो बार-बार? आप यहां पर बाय कर रहे हो जब प्राइस ₹10 के पास आ रही है और जब प्राइस ₹20 के पास जा रही है तब आप क्या कर रहे हो? तब आप बार-बार सेल कर दे रहे हो। अब ऐसा अगर बार-बार होगा तो अगली बार और भी बहुत सारे ऐसे लोग होंगे जिन्होंने नोटिस किया होगा कि इस क्रिप्टो या स्टॉक की प्राइस फिर से ₹10 आ गई। यार, पिछली बार भी ₹10 आने के बाद बढ़ी थी, यार, उससे पहले भी ₹10 से बढ़ी थी, तो इस बार और भी ऐसे लोग होंगे जो इस मुहिम में जुड़ जाएंगे। वह भी जैसे ही प्राइस ₹10 पर आएगी फिर बाय कर लेंगे और जैसे ही प्राइस फिर बढ़ते-बढ़ते-बढ़ते-बढ़ते ₹20 पर जाएगी वह यहां पर सेल कर देंगे। तो यहां पर मैंने आपको समझा दिया है कि यह सारा क्या है। यह सारा साइकोलॉजी का गेम है जब प्राइस ₹10 पर आ रही है तो वहां पर लोग खरीद रहे हैं और जब ज्यादा लोग खरीदते हैं चाहे वो कोई भी चीज हो उसकी डिमांड बढ़ती है। और जब ज्यादा लोग बेचते हैं तो वह कोई भी चीज हो उसकी प्राइस गिरती है। तो आपको बेसिक समझ आ गया है तो चलिए अब प्राइस एक्शन में सबसे पहले हम बात करते हैं ट्रेंड की। तो अब आपने कई बार नोटिस किया होगा कि शेयर की जो प्राइस होती है वह डायरेक्ट इस तरीके से नहीं बढ़ती है। शेयर की प्राइस किस तरीके से बढ़ती है? शेयर की प्राइस थोड़ा सा बढ़ेगी चाहे वो क्रिप्टो हो उसके बाद थोड़ा नीचे आएगी, फिर थोड़ा बढ़ेगी फिर थोड़ा नीचे आएगी, फिर थोड़ा बढ़ेगी फिर थोड़ा नीचे आएगी, फिर थोड़ा बढ़ेगी फिर थोड़ा नीचे आएगी। तो अगर कभी आपको दिखाई देता है कि प्राइस इस तरीके से बढ़ रही है तो इसको कहा जाता है अपट्रेंड। अब देखिए, यह अपट्रेंड कैसे है, यह हमें पता कैसे चलेगा, इसको ध्यान से देखिएगा। यह जो पॉइंट है यह हमारा कौन सा पॉइंट है? यह हमारा लो पॉइंट है। इसकी बाद प्राइस यहां से बढ़ के गई तो ये हमारा कौन सा पॉइंट है? ये हमारा हाई पॉइंट है। अब इसके बाद जब प्राइस वापस नीचे आती है तो इसने हमारा जो लो था उसको ब्रेक नहीं किया। यानी ये हमारा क्या बन गया? यह हमारा हायर लो बन गया। अब इसके बाद जब प्राइस वापस गई तो पिछला वाला जो हाई था ना उसने उसको भी ब्रेक कर दिया। आप देख सकते हैं पिछला हाई हमारा यहां पे था और इसने इसको भी ब्रेक कर दिया तो ये क्या बना हमारा? ये बना हमारा हायर हाई। ऐसे ही वापस प्राइस नीचे आई तो इसने हमारा हायर लो बनाया, हायर हाई बनाया, हायर लो बनाया और हायर हाई बनाया। तो जब आपको दिखाई देता है कि किसी भी चार्ट में प्राइस हायर हाई एंड हायर लोस बना रही है तो इसको कहा जाता है अपट्रेंड। और अपट्रेंड का मतलब होता है कि जो कंट्रोल है वो अभी बायर्स के हाथ में है। तो जब आपको पता है कि कंट्रोल बायर्स के हाथ में है, बायर्स ज्यादा स्ट्रांग हैं तो इस जगह पर आप क्या करेंगे? इस जगह पर आप जाहिर सी बात है कि बाय करेंगे। तो ये होता है अपट्रेंड। अब देखिए, यह अपट्रेंड हमेशा तो बना नहीं रहेगा। हमेशा तो शेयर की प्राइस ऊपर नहीं जाएगी, एक ना एक दिन प्राइस नीचे आएगी और यह जो इससे पहले हमारा हायर लो था उससे नीचे आ जाएगी। तो अब जब प्राइस अपने हायर लो से नीचे आ गई है तो अब इसने क्या बना दिया? अब इसने बना दिया है लो। लेकिन आपको पता है कि प्राइस एकदम से नीचे भी नहीं आती, उसके बाद थोड़ा सा बढ़ने की कोशिश करेगी और अपना लोअर हाई बनाएगी। फिर प्राइस लोअर हाई बनाने के बाद नीचे आएगी, अपना लोअर लो बनाएगी, फिर थोड़ा ऊपर बढ़ेगी, यहां पर लोअर हाई बनाएगी, फिर लोअर लो बनाएगी। तो जब आपको दिखाई देता है कि प्राइस इस तरीके से लोअर हाईस एंड लोअर लोस की फॉरमेशन कर रही है तो इसको कहा जाता है डाउनट्रेंड। और जब प्राइस डाउनट्रेंड में है तो इसका सीधा सा मतलब है कि जो प्राइस की कमान है वो सेलर्स के कंट्रोल में है, सेलर्स ज्यादा स्ट्रांग हैं और जब सेलर्स ज्यादा स्ट्रांग हैं तो वहां पर हमें सिर्फ सेल करने की ही पोजीशन लेनी चाहिए। तो अब आपको अपट्रेंड और डाउनट्रेंड समझ आ गया है तो अब एक तीसरे तरीके का भी ट्रेंड होता है जिसको कहा जाता है साइडवेज ट्रेंड। आपको कई बार दिखाई देगा कि जो प्राइस है वह एक ही रेंज में बार-बार घूम रही है। मतलब थोड़ा ऊपर-थोड़ा नीचे, थोड़ा ऊपर-थोड़ा नीचे, थोड़ा ऊपर-थोड़ा नीचे। तो ऐसा कब होता है? ऐसा जब ना तो प्राइस बायर्स के कंट्रोल में है ना तो बायर्स ज्यादा स्ट्रांग है ना तो सेलर्स ज्यादा स्ट्रांग है। तो इस टाइम पर जो प्राइस होती है वह एक ही रेंज में घूमती रहती है, बायर्स ऊपर ले जाने की कोशिश करते हैं, सेलर्स नीचे लाने की कोशिश करते हैं और इसको कहा जाता है साइडवेज ट्रेंड जिसमें आपको इक्वल हाई और इक्वल लो दिखाई देंगे। तो इस तरीके का जो ट्रेंड होता है इसको कहा जाता है साइडवेज। तो अगर आपको कभी चार्ट में एक साइडवेज ट्रेंड दिखाई देता है तो इसका मतलब है कि जो बायर्स एंड सेलर्स हैं दोनों बराबर हैं, अगर सेलर्स ज्यादा होंगे तो इसके बाद प्राइस गिर सकती है और अगर बायर्स ज्यादा आ जाएंगे तो इसके बाद प्राइस बढ़ सकती है। तो अब आपको तीन तरह के ट्रेंड समझ आ गए हैं तो अब हम सेकंड चीज जो यहां पर समझेंगे वो है रिवर्सल। देखिए, शुरुआत हम बेसिक से कर रहे हैं धीरे-धीरे हम एडवांस में जाएंगे और आपको बहुत सारी ऐसी भी चीजें सीखने को मिलेंगी जो आपने कभी सुनी भी नहीं होंगी। तो अब आपको जब पता है कि ट्रेंड इस तरीके से बनता है यानी हायर राइज़ एंड हायर लोस की जब फॉरमेशन होती है तो अपट्रेंड बनता है। तो अब यह ट्रेंड रिवर्स हो गया है यह हमें पता कैसे चलेगा? तो इसके लिए आपको पता है कि यह है हमारा हायर लो, यह है हमारा हायर हाई। तो अगर कभी अपट्रेंड में आपको दिखाई देता है कि जो प्राइस है वह हमारे हायर लो से नीचे आ जाती है। यानी यह हमारा हायर लो था प्राइस अब इससे नीचे आ गई है तो यहां पर आप कह सकते हैं कि जो ट्रेंड है वह चेंज हो गया है। पहले मार्केट अपट्रेंड में था अब वह डाउनट्रेंड में आ चुका है क्योंकि प्राइस हायर लो से नीचे आ गई है। और अगर प्राइस हायर लो से नीचे आ गई है और ट्रेंड चेंज हो गया है तो इसका मतलब यह है कि पहले यहां पर बायर्स ज्यादा एक्टिव थे यानी ज्यादा लोग खरीद रहे थे जिसकी वजह से प्राइस बढ़ रही थी। अब ज्यादा लोग बेच रहे हैं सप्लाई ज्यादा आ रही है जिसकी वजह से प्राइस गिर गई है यानी यहां से आप समझ सकते हैं कि मार्केट में सेलर्स ज्यादा एक्टिव हो चुके हैं। इसका उल्टा अगर आपको कभी दिखाई देता है कि जो प्राइस है वह डाउनट्रेंड में है। अब डाउनट्रेंड में है तो जाहिर सी बात है कि यहां पर लोअर लोस और लोअर हाईस की फॉर्मेशन होगी। बट अगर आपको दिखाई देता है कि प्राइस इसके बाद अपने लोअर हाई को ब्रेक करके ऊपर चली जाती है तो इसका मतलब यहां पर आप समझ सकते हैं कि ट्रेंड वापस से चेंज हो गया है। पहले डाउनट्रेंड था अब अपट्रेंड शुरू हो गया है। डाउनट्रेंड का मतलब ज्यादा लोग बेच रहे थे अब ज्यादा लोग खरीद रहे हैं। वीडियो पसंद आ रही है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर देना अगर स्टॉक मार्केट में ट्रेड या इन्वेस्ट करना चाहते हो तो डीमेट अकाउंट का लिंक डिस्क्रिप्शन पर दिया गया है। और आजकल मैं खुद क्रिप्टो ट्रेडिंग में बहुत ज्यादा इंटरेस्टेड हो गया हूं तो अगर आप भी क्रिप्टो ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो मैंने उसके लिए डेल्टा एक्सचेंज का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। यहां हम क्रिप्टो में फ्यूचर्स ट्रेडिंग की बात कर रहे हैं जिसमें 30% का टैक्स एप्लीकेबल नहीं होता है, 200 टाइम्स तक का लेवरेज भी मिल जाता है तो एक बार क्रिप्टो ट्रेडिंग को ट्राई जरूर कर लेना, उसके लिए आप हमारी यह वाली वीडियो भी देख सकते हैं। इसके अलावा मैंने आपको लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है वहां से अपना अकाउंट जरूर खुलवा लीजिएगा। रिवर्सल आपने समझ लिए हैं तो चलिए अब की लेवल्स क्या होते हैं इनको समझते हैं। तो सबसे पहले एग्जांपल में मैंने आपको एक स्टॉक के बारे में बताया था जिसकी जो प्राइस है वह 10 से 20 के बीच में घूमती रहती है। बार-बार प्राइस इसी रेंज के बीच में घूम रही है तो यहां पर यह जो 10 और 20 का लेवल है यह क्या होंगे? यह की लेवल्स होंगे। जिसमें जो 20 का लेवल है यह है एक रेजिस्टेंस। रेजिस्टेंस मतलब जब भी प्राइस इस लेवल के पास आती है तो नीचे गिर जाती है। और जो 10 का लेवल है वह है सपोर्ट। यानी जब भी प्राइस इस रेंज पर आती है तो यहां से वापस बढ़ जाती है। तो अगर आपको कभी दिखाई देता है कि वापस से प्राइस इस लेवल के पास पहुंच गई है तो यहां पर आप क्या कर सकते हैं? आप शॉर्ट कर सकते हैं। और जब आपको दिखाई देता है कि प्राइस वापस से 10 के लेवल के पास पहुंच गई है तो यहां पर आप क्या कर सकते हैं? यहां पर आप बाय कर सकते हैं। तो ऐसे पॉइंट या ऐसी प्राइस जहां पर जाने के बाद लोगों को वह स्टॉक या क्रिप्टो महंगा लगने लगता है उस पॉइंट को कहा जाता है रेजिस्टेंस क्योंकि उसके बाद लोग सेल करना शुरू कर देते हैं उसमें सप्लाई आ जाती है। और ऐसा पॉइंट या ऐसी प्राइस जहां पर जाने के बाद लोगों को वह स्टॉक या क्रिप्टो सस्ता लगने लग जाता है उसको कहा जाता है सपोर्ट और वहां पर लोग क्या करते हैं? वहां पर लोग बाय करना शुरू कर देते हैं। अब इसके बाद नेक्स्ट है सप्लाई एंड डिमांड ज़ोन। देखिए आपने सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस को तो समझ लिया है बट थोड़ा सा ही डिफरेंस होता है सप्लाई और डिमांड ज़ोन के बीच में। देखिए जब भी प्राइस दो बार एक लेवल पर पहुंच जाती है तो वो हमारा एक इंपॉर्टेंट लेवल बन जाता है और उसको हम क्या कहते हैं? उसको हम कहते हैं अगर वह ऊपर की साइड होगा तो रेजिस्टेंस और नीचे की साइड होगा तो सपोर्ट। लेकिन अगर यह तीन या तीन से ज्यादा बार होता है तो इस केस में यह लेवल बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो चुका है और इस जगह पर आप यह मान के चल सकते हैं कि अगर यह नीचे का लेवल है तो यहां पर भाई डिमांड तो आनी ही आनी है। जैसे ही प्राइस चौथी बार यहां पर आएगी तो लोगों ने वहां पर खरीदना ही खरीदना है और इसके अलावा जैसे ही प्राइस वापस से इस लेवल पर आएगी तो यहां पर लोगों ने बेचना ही बेचना है। तो अब इस लेवल को हम कहते हैं डिमांड और इस लेवल को हम कहते हैं सप्लाई। क्योंकि जब भी प्राइस इस लेवल पर आएगी तो ज्यादा बायर्स आएंगे जिसकी वजह से डिमांड क्रिएट होगी और जब भी प्राइस इस लेवल पर आएगी तो ज्यादा सेलर्स आएंगे जिसकी वजह से सप्लाई क्रिएट होगी। अब इसके बाद नेक्स्ट हम बात करते हैं एक्सट्रीम स्विंग हाई एंड स्विंग लो की। तो कई बार आपने देखा होगा कि प्राइस बढ़ रही होती है, बढ़ते-बढ़ते एक पॉइंट आता है जहां पर जाने के बाद वो रेजिस्टेंस लेती है और फिर वापस से नीचे आती है। नीचे आके थोड़ी देर साइडवेज घूमती है और उसके बाद वापस से प्राइस जाती है जहां पर उसने पहले रेजिस्टेंस लिया था सेम उसी लेवल पर दोबारा से रेजिस्टेंस लेती है और उसके बाद वापस से नीचे आती है। और यहां पर जैसे पहले वह मूवमेंट कर रही थी उसी तरीके से मूवमेंट होने लग जाता है। अब देखिए, इस केस में ये जो लेवल होते हैं ना, ये अब बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट लेवल हो जाते हैं क्योंकि बहुत सारे लोग देखिए यहां पर बाय कर रहे होंगे, यहां पे सेल कर रहे होंगे, यहां पे बाय कर रहे होंगे, यहां पे सेल कर रहे होंगे। तो इस केस में अगर मान लीजिए प्राइस वापस से इस लेवल के पास आ जाती है तो यहां पर जिन सभी ने भी बाय कर रखा होगा उन सब को लगेगा कि भाई अब तो बहुत महंगा हो चुका है क्योंकि हम तो नीचे-नीचे खेल रहे थे। प्राइस तो देखिए इतने ऊपर लेवल पर आ चुकी है। तो जब प्राइस वापस से इस लेवल के पास आती है तो अब इन सब को लगेगा कि भाई यह जो स्टॉक है या यह जो क्रिप्टो है यह ओवर एक्सपेंसिव हो चुका है और इसका मतलब यह है कि यहां पर बहुत ज्यादा सप्लाई आएगी और लोगों के सेल करने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगे। तो आप इस जगह पर क्या कर सकते हैं? आप इस जगह पर शॉर्ट कर सकते हैं। अब सिर्फ इतना समझ के चले गए तो अधूरे ज्ञान की वजह से आपको नुकसान हो जाएगा। आगे जब समझोगे कि आपको 100% कैसे श्योर होंगे कि एक्चुअल में प्राइस गिरेगी या फिर प्राइस बढ़ेगी वह भी मैं आगे आपको बताऊंगा, धीरे-धीरे हम एडवांस की तरफ जा रहे हैं, शुरुआत में बेसिक समझना पड़ता ही है तभी चीजें एडवांस समझ आती हैं। इसका उल्टा अब देखिए कई बार ऐसा होता है आपने देखा कि प्राइस नीचे की तरफ आई है फिर थोड़ा घूमी है फिर यह लेवल पर आई है। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि यह जो लेवल होगा एक बहुत स्ट्रांग सपोर्ट लेवल होगा। ज्यादा स्ट्रांग सपोर्ट लेवल होने का मतलब यह है कि इनके ब्रेक होने के चांसेस कम है। तो अगर इनके ब्रेक होने के चांसेस कम हैं तो इसका मतलब है कि आप ज्यादा कॉन्फिडेंट हो सकते हो कि यहां पर मुझे बाय करना है। अब चलिए इसके बाद हम समझते हैं कि हायर टाइम फ्रेम की क्या इंपॉर्टेंस होती है। तो देखिए ट्रेडिंग में एक चीज जो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होती है और जो आपको पता होनी चाहिए वो है हायर टाइम फ्रेम की इंपॉर्टेंस। अगर मान लीजिए आप 5 मिनट के टाइम फ्रेम में अपना कोई चार्ट देख रहे हैं तो इसका मतलब है कि एक जो आपको कैंडल दिखाई दे रही होगी चाहे वो ग्रीन कलर की हो चाहे वो रेड कलर की हो वह 5 मिनट में बन रखी है। मतलब उसका जो हाई होगा वह उस 5 मिनट का हाई होगा, उसका जो लो होगा वह उस 5 मिनट का लो होगा, उसका जो ओपन होगा वह उस 5 मिनट का होगा, क्लोज होगा वह उस 5 मिनट का होगा। तो इस जगह पर अगर आप उसी चार्ट को 1 घंटे के टाइम फ्रेम पर देखते हैं तो अब जो 5 मिनट में मूवमेंट हो रहे थे ना वह आपको दिखाई ही नहीं देंगे और इवन आपको लगेगा कि यह तो बिल्कुल दूसरा ही चार्ट है। यानी जो बड़े टाइम फ्रेम का चार्ट होता है जैसे कि वीकली या मंथली टाइम फ्रेम का चार्ट उसमें जो छोटे-मोटे मूवमेंट होते हैं वह कहीं पर नजर ही नहीं आते हैं लेकिन वहां पर भी कुछ इंपॉर्टेंट लेवल्स होते हैं। जैसे हो सकता है कि किसी स्टॉक की प्राइस एक टाइम पर 100 से ₹110 के बीच में घूम रही हो। लेकिन 6 महीने पहले उसकी प्राइस एक बार 130 भी गई थी और 6 महीने पहले ही उसकी प्राइस एक बार ₹90 भी गई थी। तो अगर प्राइस मान लीजिए इस लेवल को ब्रेक करके 130 पर आ जाती है ना तो यह जो लेवल हो गए यह बहुत ही ज्यादा स्ट्रांग होगा और इसके ब्रेक होने के जो चांसेस होंगे वह बहुत कम होंगे। तो अगर ब्रेक होने के चांसेस कम हैं तो सीधी सी बात है कि वहां पर आप अपना शॉर्ट करने का ट्रेड सोच सकते हैं। और अगर प्राइस नीचे आ रखी है और उस लेवल के ब्रेक होने के चांसेस कम हैं तो सीधी सी बात है कि वहां पर आप बाय करने का ट्रेड प्लान कर सकते हैं। इसलिए बहुत ज्यादा जरूरी है कि जब भी आप ट्रेड कर रहे हो तो उस टाइम पर आपने चार्ट को सिर्फ एक टाइम फ्रेम में नहीं देखना है। आपने उसको मल्टीपल टाइम फ्रेम में देखना है, वीकली चार्ट भी लगा के देखो मंथली चार्ट भी लगा के देखो उनके लेवल भी ड्रॉ करके रखो ताकि अगर प्राइस कभी उस लेवल के पास आएगी तो आपको पता होगा कि भाई यह तो मंथली लेवल है और आप उस हिसाब से अपना डिसीजन ले सकेंगे। अब देखिए अभी तक प्राइस एक्शन में मैंने आपको सिर्फ इतना बताया कि प्राइस एक लेवल पर जाती है वहां से नीचे आती है, एक लेवल पर जाती है वहां से नीचे आती है, एक लेवल पर जाती है वहां से नीचे आती है। तो जब प्राइस इस लेवल पे जा रही है तो यहां पर आप शॉर्ट कर सकते हैं, जब प्राइस नीचे इस लेवल पे आ रही है तो यहां पर आप बाय कर सकते हैं। लेकिन देखिए हमेशा ही प्राइस एक रेंज में तो घूमेगी नहीं, एक ना एक दिन या एक ना एक वक्त तो ऐसा जरूर आएगा जब प्राइस वापस इस लेवल पर जाएगी। आपको लगेगा कि भैया यहां पर तो शॉर्ट करना है लेकिन प्राइस ऊपर बढ़ जाएगी। तो जब इस तरीके का एक्शन होता है तो इसको कहा जाता है ब्रेकआउट और अब हम इस ब्रेकआउट को समझेंगे। तो चलिए, अब ये जो ब्रेकआउट है इसे एक एग्जांपल से समझते हैं। तो मान लेते हैं यह आलू है जिसकी प्राइस वापस से 10 से 20 के बीच में घूमती रहती है, वापस से 10 के बीच में आती है फिर 20 के पास जाती है, फिर ₹10 के पास आती है, अब वापस से ₹20 के पास जाती है। अब हर बार आपको पता है कि जब प्राइस ₹20 के पास जाती है तो वहां से वह नीचे आने लगती है तो यहां पर आप क्या करते हो? यहां पर आप उसे शॉर्ट कर देते हो यानी बेच देते हो। लेकिन अचानक से वॉर की खबर आ जाती है। अब अगर वॉर होगी तो लोगों को पता है कि भैया सामान खरीदने में बहुत दिक्कत होगी। तो ऐसे में एक अलग डिमांड मार्केट में आ जाएगी जो लोग यह कहेंगे कि भैया बाकी सब छोड़ो 20 के अगर 25 या 30 में भी कोई दे रहा होगा तब भी खरीद लेंगे। यानी यहां पर बार-बार सप्लाई आती थी, लेकिन अब अचानक से डिमांड आ गई है जिसकी वजह से बायर्स ज्यादा हो गए हैं, सेलर्स कम हो गए हैं और जैसे ही सेलर्स कम हुए अब इसकी प्राइस जो होगी वो बढ़ने लग जाएगी। तो अगर प्राइस ऐसे अपने लेवल को ब्रेक कर देती है तो इसको कहा जाता है ब्रेकआउट। अब ये जो ब्रेकआउट होता है ना, यह बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट होते हैं क्योंकि अगर मान लीजिए ब्रेकआउट हुआ तो यहां पर प्राइस के बहुत ज्यादा बढ़ने के चांसेस होते हैं। तो जैसे ही ब्रेकआउट होता है उसके बाद अगर आप बाय करेंगे तो आपको एक बहुत बड़ा मूवमेंट जो होगा वो बहुत जल्दी मिल सकता है। अब जैसे ही ये ब्रेकआउट आया है वैसे ही ब्रेकडाउन भी आ सकता है। एग्जांपल के लिए वापस आलू वाला एग्जांपल लेंगे। इसके बाद मैं आपको एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज बताऊंगा जो बहुत कम ही लोग जानते हैं और यह पूरी साइकोलॉजी आपकी जो होगी ना वह यहां से बनेगी। देखिए, मान लेते हैं कि जो प्राइस है आलू की वह 20 से ₹10 के बीच में चलती रहती है, वापस से 20 जाती है, वापस से 10 आती है, वापस से 20 जाती है। अब 20 गई होगी तो यहां पर लोगों ने बेच दिया और वापस से जो प्राइस है वो ₹10 के पास आ गई है। अब जब प्राइस ₹10 के पास आती है तो यहां पर लोग क्या करते हैं? उन्हें पता है कि भाई बार-बार ₹10 पर आने के बाद प्राइस बढ़ती है तो वह खरीद लेते हैं। लेकिन उसी टाइम अचानक से खबर आ जाती है कि इस बार आलू की खेती बहुत अच्छी हो रखी है। तो ऐसे में लोगों को लगेगा कि भैया बहुत अच्छी खेती हुई है ना तो यहां पर शॉर्ट कर देते हैं। तो इसका मतलब है प्राइस अब नीचे गिर सकती है तो यहां पर जिन लोगों ने खरीदने का सोच रखा था वह अब बोलेंगे कि थोड़ा रुक जाते हैं। वह नहीं खरीदेंगे और बहुत सारे ऐसे भी लोग होंगे जिन्हें लगेगा कि भैया इस बार ज्यादा खेती हुई है ना तो यहां पर शॉर्ट कर देते हैं। तो यानी वह बेच देंगे जिस वजह से यहां पर सप्लाई आएगी और जैसे ही सप्लाई आएगी उसके बाद प्राइस गिर सकती है तो इसको कहा जाता है ब्रेकडाउन, वैसे आजकल लोग इसको भी ब्रेकआउट ही बोल लेते हैं। लेकिन एक्चुअल में इसको ब्रेकडाउन कहा जाता है। यानी अगर आपका कोई भी इंपॉर्टेंट लेवल चाहे वह ऊपर की साइड हो, चाहे वह नीचे की साइड हो वह ब्रेक होता है तो उसको ऊपर की साइड ब्रेकआउट कहा जाता है, नीचे की साइड ब्रेकडाउन कहा जाता है। अगर ऊपर की साइड ब्रेकआउट आएगा तो वहां पर प्राइस के बहुत ज्यादा बढ़ने के चांसेस हैं और अगर ब्रेकडाउन आएगा तो वहां पर प्राइस के बहुत ज्यादा गिरने के चांसेस होते हैं। तो अगर ब्रेकआउट आता है तो आप बाय कर सकते हैं, ब्रेकडाउन आता है तो आप शॉर्ट या सेलिंग कर सकते हैं। अब यहां पर मैं आपको एक बहुत ही तगड़ी चीज समझाता हूं जो जानते तो बहुत सारे लोग हैं, लेकिन उन्हें उसके पीछे का लॉजिक नहीं पता होता। और जब आपको यह लॉजिक समझ आएगा तब आपको लगेगा कि हां, भाई इस चीज के काम करने के जो चांसेस हैं वह बहुत ज्यादा है। तो मान लीजिए एक स्टॉक है या क्रिप्टो है जिसकी प्राइस 10 से 20 के बीच में घूमती रहती है। अब जाहिर सी बात है जब प्राइस ₹10 आ रही होगी तो लोग क्या कर रहे होंगे? बाय कर ले रहे होंगे। जब प्राइस ₹20 जा रही होगी लोग क्या कर रहे होंगे? सेल कर रहे होंगे। लेकिन यहां पर एक चीज जरूर ध्यान रखिए जब भी कोई ट्रेडिंग करता है चाहे कोई इंडिविजुअल या कोई बड़ा सा इंस्टिट्यूशन वो वहां पर स्टॉप लॉस का भी जरूर यूज करता है। तो अगर आपने किसी स्टॉक को ₹10 पर बाय किया है तो हो सकता है कि ₹8 पर आपने अपना स्टॉप लॉस सेट कर रखा होगा तो यहां पर आपका क्या होगा? स्टॉप लॉस होगा। और अगर कोई शॉर्ट करता है तो वह भी अपना स्टॉप लॉस सेट करता है और वो अगर ₹20 पर शॉर्ट कर रहा है तो उसे तो प्राइस बढ़ने पर नुकसान होता है। तो वह क्या करेगा? उसने हो सकता है ₹22 पे अपना स्टॉप लॉस यहां पे उसने सेट कर रखा है। अब यहां पर समझने वाली बात यह है कि देखिए जिसने ₹10 में बाय कर रखा है उसके स्टॉप लॉस का मतलब क्या है? उसके स्टॉप लॉस का मतलब है सेल करना। यानी उसने यहां पर बाय किया अगर प्राइस नीचे आती है तो वो सेल करेगा। यानी बहुत ज्यादा लोगों ने यहां पर अपना क्या कर रखा होगा? यहां पर अपना स्टॉप लॉस सेट कर रखा होगा और उस स्टॉप लॉस का मतलब है उन्होंने सेलिंग करने के लिए यहां पे अपना ऑर्डर लगा रखा होगा। ऐसे ही जो लोग ₹20 पे शॉर्ट कर रहे हैं उन्होंने बार-बार क्या कर रखा होगा? उन्होंने यहां पर ₹22 पे अपना स्टॉप लॉस लगा रखा होगा और ये जो स्टॉप लॉस होगा वो क्या होगा? वो एक बाय करने वाला स्टॉप लॉस होगा। बाय करने वाला स्टॉप लॉस क्यों होगा क्योंकि यहां पर वह शॉर्ट कर रहे हैं, वह पहले सेल कर रहे हैं तो अगर उनका स्टॉप लॉस हिट होता है तो वह बाय करेंगे। अगर आपने ट्रेडिंग की है तो आपने भी बेसिकली ऐसा ही किया होगा, आप सपोर्ट के पास क्या करते हैं आप सपोर्ट के पास बाय कर लेते हैं, उससे थोड़ा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगाते हैं, आप रेजिस्टेंस के पास शॉर्ट करते हैं, उससे थोड़ा सा ऊपर अपना स्टॉप लॉस लगाते हैं। अब जैसा कि मैंने आपको बताया है कि प्राइस बहुत बार इस रेंज में घूमती है लेकिन एक ना एक टाइम देखिए ऐसा जरूर आएगा जब प्राइस वापस से उस रेंज में जाएगी, लेकिन इस बार प्राइस ने मान लीजिए इसको ब्रेक कर दिया। यानी किसी भी वजह से यहां पर बायर्स ज्यादा हो जाते हैं, डिमांड बढ़ जाती है और लोग क्या करते हैं? लोग यहां पर बाय करते हैं जिसकी वजह से प्राइस बढ़ जाती है। अब प्राइस बढ़ के क्या पहुंच जाती है? प्राइस बढ़कर पहुंच जाती है ₹22 पे। अब देखिए, यहां पर सबसे बड़ी समझने वाली बात यह है कि जहां पर पहले ही बायर्स थोड़े से एक्टिव हो गए थे जिस वजह से प्राइस ₹22 के पास पहुंच गई और इस जगह पर जिन लोगों ने ₹20 पे शॉर्ट किया होगा उन सब लोगों का स्टॉप लॉस क्या होगा? उन सब लोगों का स्टॉप लॉस होगा ₹22 पे या ₹22 के आसपास जिसकी वजह से वो जो स्टॉप लॉस है वह बाय स्टॉप लॉस है। यानी जिन सबने शॉर्ट किया था वो भी एक तरह से बायर बन गए हैं और पहले ही ऑलरेडी यहां पर अच्छी खासी बाइंग थी यानी डिमांड थी और एक जो एक्स्ट्रा डिमांड थी वो यहां से आ गई तो इसके बाद जो प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं वो बढ़ जाते हैं। इसी तरीके से अगर मान लीजिए कि जो प्राइस है वह नीचे गिरती है और गिरते-गिरते जो लेवल है ₹10 से गिर के ₹8 पे आ जाती है। अब जैसे ही ₹8 पर आएगी तो बहुत सारे लोगों ने क्या कर रखा होगा? उन सबका स्टॉप लॉस जो होगा वह ₹8 के आसपास होगा। तो उन सब का स्टॉप लॉस हिट होगा, स्टॉप लॉस हिट होने का मतलब है सेलिंग आएगी और जब लोगों की सेलिंग आएगी तो पहले ही सेलर्स यहां पर ज्यादा हुए थे इसी वजह से तो प्राइस नीचे आई और एक एडिशनल जो सेलिंग थी वो यहां से मिल गई जिसकी वजह से जो सप्लाई होती है यानी जो सेलर्स होते हैं वह बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं और प्राइस के तेजी से गिरने के चांसेस होते हैं। तो ये सारी चीजें ना लॉजिक से चल रही हैं अब लोगों को लॉजिक नहीं पता होता वह बस आंख बंद करके फॉलो करते हैं तो अब आपको लॉजिक पता है तो आपका विजन थोड़ा क्लियर हो जाएगा और आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। अब इसके बाद नेक्स्ट एक बहुत बड़ा सवाल आपके माइंड में आना चाहिए अगर नहीं आया तो शायद आप ध्यान से वीडियो को नहीं देख रहे हैं। वीडियो को ध्यान से देखिए, वीडियो को साथ में लाइक भी जरूर कर दीजिएगा और चैनल को सब्सक्राइब भी जरूर कर दीजिएगा। और अगर आप चाहते हैं कि हम क्रिप्टो ट्रेडिंग की स्ट्रेटजी के ऊपर एक वीडियो बनाएं तो कमेंट जरूर कीजिए। अगर आप लोगों के अच्छे खासे कमेंट आएंगे तो हम एक बहुत ही बेहतरीन स्ट्रेटजी है उसके ऊपर वीडियो बनाएंगे। तो अब वापस आते हैं और सबसे बड़ा सवाल समझते हैं कि आपको पता कैसे चलेगा कि मान लीजिए यह वह रेंज है जिस पर प्राइस बार-बार घूम रही थी। जैसे प्राइस यहां से बढ़ते-बढ़ते इस लेवल पर जा रही थी फिर यहां पर आ रही थी फिर यहां पर आ रही थी फिर यहां पर आ रही थी अब प्राइस इस रेंज पर है। और यहां पर आप सोच रहे हो कि मैं शॉर्ट करूं या ना करूं? अगर मैंने शॉर्ट किया और उसके बाद प्राइस बढ़ गई तो फिर तो मेरा नुकसान हो जाएगा और अगर मैंने शॉर्ट ना किया प्राइस गिर गई तो मेरे हाथ से अपॉर्चुनिटी निकल जाएगी। तो मुझे पता कैसे चलेगा कि यहां पर मुझे शॉर्ट सेलिंग करनी चाहिए या फिर बाइंग करनी चाहिए? तो इसके लिए एक इंपॉर्टेंट चीज होती है वो होती है कैंडल। देखिए, बहुत सारे तरीके के कैंडलस्टिक पैटर्न है हमने कैंडल स्टिक पैटर्न के ऊपर एक पूरी प्लेलिस्ट बना रखी है, बहुत ही इंपॉर्टेंट आपको जरूर देखनी चाहिए उसका लिंक हम आपको डिस्क्रिप्शन में दे देंगे या फिर नीरज जोशी कैंडल स्टिक पैटर्न्स लिखकर आप उस वीडियो को देख सकते हैं। लेकिन यहां पर मैं आपको एक इंपॉर्टेंट कैंडल स्टिक पैटर्न के बारे में बताता हूं और वो है लॉन्ग विक कैंडल्स। तो मान लीजिए कि जो प्राइस है वह वापस से अपने रेजिस्टेंस के पास पहुंच गई है और यहां पर जाने के बाद आपको एक ऐसी कैंडल दिखाई देती है जिसकी जो विक है वो तो बहुत लंबी है। यानी इस तरीके की कैंडल आपको दिखाई देती है लेकिन बॉडी बहुत ही छोटी है। तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि बायर्स ने पूरी कोशिश की थी प्राइस को ऊपर ले जाने की, लेकिन वो ऊपर प्राइस को सस्टेन नहीं कर पाए, सेलर्स का प्रेशर ज्यादा था यानी ज्यादा बेचने वाले लोग अवेलेबल थे जिसकी वजह से वापस से प्राइस नीचे आ गई है। और प्राइस नीचे आई है इसका मतलब है यहां से प्राइस के वापस से गिरने के चांसेस ज्यादा है। यानी अगर आपको लॉन्ग विक की कैंडल दिखाई देती है तो इसका मतलब है कि जो सेलर्स हैं वो अभी भी डोमिनेटिंग है और इसके बाद प्राइस गिरने के चांसेस हैं। इसका उल्टा अगर मान लीजिए जो प्राइस है वह वापस से रेजिस्टेंस के पास आती है और यहां पर आपको एक स्ट्रांग कैंडल दिखाई देती है ग्रीन कलर की तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि अब यहां पर बायर्स बहुत ज्यादा एक्टिव हो गए हैं और इसके बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होंगे। इसके साथ आपको और भी चीजें कंफर्म करनी होंगी लेकिन यह एक बहुत बड़ा सिग्नल होगा कि इसके बाद प्राइस बढ़ सकती है। इसका उल्टा अगर मान लीजिए आपको दिखाई देता है कि प्राइस नीचे अपने सपोर्ट के पास पहुंच गई है और सपोर्ट के पास पहुंचने के बाद आपको पता कैसे चलेगा कि यहां से प्राइस वापस बढ़ने वाली है या फिर नीचे आ सकती है। तो इसके लिए अगर मान लीजिए यहां पर आपको एक इस तरीके की लॉन्ग विक वाली कैंडल दिखाई देती है तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि जो सेलर्स हैं वह प्राइस को नीचे ले के गए थे लेकिन बायर्स बहुत ज्यादा डोमिनेटिंग है तो इसका मतलब है प्राइस यहां से बढ़ सकती है। और इसका उल्टा अगर मान लीजिए सपोर्ट के पास आपको एक स्ट्रांग रेड कलर की कैंडल दिखाई देती है तो इसका मतलब है कि सेलर्स बहुत ज्यादा डोमिनेटिंग हो गए हैं जहां पर वह बाय करते थे और इसके बाद प्राइस गिरने के चांसेस है तो यहां पर आप शॉर्ट करने की पोजीशन ले सकते हैं। अब दोस्तों अभी तक मैंने आपको बताया कि प्राइस बार-बार एक रेंज में घूम रही है और उस जगह पर आप किस तरीके से डिसीजन ले सकते हैं प्राइस एक्शन को देखकर। लेकिन आपको पता है कि प्राइस एक रेंज में बहुत कमी घूमती है। ज्यादातर बार या तो प्राइस आपको अपट्रेंड में दिखाई देगी यानी बढ़ रही होगी या फिर प्राइस आपको डाउनट्रेंड में दिखाई देगी यानी प्राइस गिर रही होगी। तो इस जगह पर आप कैसे डिसीजन लेंगे कि आपको बाय करना है या सेल करना है क्योंकि यहां पर भी आपको बहुत सारी अपॉर्चुनिटीज मिलती हैं। तो इसके लिए काम आती है ट्रेंड लाइन। तो अगर अपट्रेंड की बात करें तो इस केस में आप क्या कर सकते हैं? आप यहां पर जो हायर लोज हैं इनसे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर सकते हैं। अब इसके बाद अगर प्राइस वापस से इस लेवल पर आती है तो यहां पर यह एक सपोर्ट की तरह काम करेगा और आप बाय कर सकते हैं, लेकिन अगर इस लेवल को ब्रेक कर दिया जाता है तो यहां पर इसका मतलब है कि ब्रेकडाउन हो चुका है और आप इस जगह पर शॉर्ट कर सकते हैं। लेकिन उसके लिए भी आपको कैंडल्स को एज अ कंफर्मेशन यूज करना पड़ेगा। इसी तरीके से अगर डाउनट्रेंड की बात करें तो डाउनट्रेंड में जो भी लोअर हाईस होते हैं आप उनसे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर सकते हैं। और इसके बाद अगर प्राइस इस रेंज को ब्रेक करके ऊपर चली जाती है तो इसका मतलब है ब्रेकआउट आ सकता है और यहां पर आप बाय कर सकते हैं, लेकिन अगर प्राइस इस लेवल पर जाने के बाद वापस से रिजेक्ट होकर नीचे आने लगती है तो इसका मतलब है कि प्राइस यहां से गिर सकती है तो यहां पर आप शॉर्ट कर सकते हैं। बट यहां पर भी आपको कैंडल्स को देखना पड़ेगा, वॉल्यूम को देखना पड़ेगा। इसके अलावा कंफर्मेशन के लिए आप दो-तीन कैंडल्स को भी देख सकते हैं। अब इसके बाद प्राइस एक्शन में जो नेक्स्ट चीज इंपॉर्टेंट होती है वह होते हैं चार्ट पैटर्न्स। देखिए, चार्ट पैटर्न्स बहुत सारे तरीके के होते हैं और चार्ट पैटर्न के ऊपर ऑलरेडी हमने वीडियो बना रखी है। तो अगर आप चार्ट पैटर्न्स सीखना चाहते हैं तो नीरज जोशी चार्ट पैटर्न्स लिखकर आप इन वीडियोस को देख सकते हैं। अभी फिलहाल मैं आपको एग्जांपल के लिए कुछ चार्ट पैटर्न्स दिखाता हूं और उनके पीछे की साइकोलॉजी समझा लेता हूं क्योंकि वो इंपॉर्टेंट है। देखिए, एग्जांपल के लिए यहां पर आपको डबल बॉटम पैटर्न दिखाई दे रहा है जिसको डब्लू पैटर्न भी कहा जाता है क्योंकि ये डब्लू जैसा दिखता है। इसमें आप देख सकते हैं कि पहले प्राइस नीचे आ रही थी और यहां पर उसने अपना बॉटम बनाया यानी सपोर्ट लिया और इसके बाद लोगों को लगा होगा कि बहुत सस्ता हो गया है स्टॉक। तो उन्होंने बाय करना शुरू कर दिया उनके बाय करने के बाद प्राइस बढ़ गई लेकिन इस लेवल पे आने के बाद लोगों को लगा कि नहीं भाई इससे ऊपर तो कही जाएगी बेच देते हैं प्रॉफिट बुकिंग कर देते हैं तो लोगों ने सेल करना शुरू कर दिया और शॉर्ट कर दिया। अब जिसने शॉर्ट किया होगा उसका स्टॉप लॉस क्या होगा? उसने थोड़ा सा ऊपर यहां पर अपना स्टॉप लॉस रखा होगा। अब इसके बाद क्या होगा? इसके बाद प्राइस यहां से गिरने लग जाती है क्योंकि लोगों ने शॉर्ट किया है और प्राइस गिरते-गिरते नीचे आ गई है। अब जब यहां पर आई होगी तो इन सबको प्रॉफिट हो गया होगा और इसके बाद यहां पे क्या करेंगे वो? यहां पर उन्होंने अपनी प्रॉफिट बुकिंग की नए लोगों ने बाइंग की जिसके बाद डिमांड आई और प्राइस बढ़ते-बढ़ते इस लेवल पर पहुंच गई है।
[26:47]अब जब प्राइस इस लेवल पर पहुंचती है तो यहां पर आने के बाद तो वापस से लोगों को शॉर्ट कर देना चाहिए था और बहुत सारे लोगों ने शॉर्ट किया भी होगा। लेकिन किसी भी रीजन से अगर यह लेवल ब्रेक हो जाता है तो इस जगह पर प्राइस के बढ़ने के चांसेस होते हैं। क्योंकि आपको पता है कि इससे थोड़ा सा ऊपर तो इन लोगों ने अपना स्टॉप लॉस भी रखा हुआ है तो अगर यह ब्रेक होगा तो इन सबका जिन्होंने दोबारा से यहां पे शॉर्ट किया होगा उनका स्टॉप लॉस हिट हो जाएगा और इसके बाद जब स्टॉप लॉस हिट होगा तो बाइंग आएगी और उसके बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। तो ये डबल बॉटम पैटर्न है, इसी तरीके से डबल टॉप पैटर्न होता है। अब इसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां पर ट्रिपल टॉप और ट्रिपल बॉटम पैटर्न है, यह है ट्रिपल टॉप पैटर्न। अब देखिए आपको पता है कि इस जगह पर सिर्फ दो टॉप बन रहे थे यहां पर ट्रिपल टॉप बन रहे हैं तो इसका मतलब यह जो लेवल होगा यह ज्यादा स्ट्रांग होगा। और इस तरीके से बहुत सारे चार्ट पैटर्न्स हैं जो सब इसी साइकोलॉजी के ऊपर बेस्ड है। अब जैसे चार्ट पैटर्न्स होते हैं वैसे ही कैंडल स्टिक पैटर्न्स भी होते हैं जैसे यहां पर आप देख सकते हैं यह एक हैमर पैटर्न है। सिर्फ इस कैंडल की हम बात कर रहे हैं तो अगर मार्केट कभी डाउनट्रेंड में होता है और उसके बाद इस तरीके की एक कैंडल बनती है तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यह है कि पहले जो सेलर्स थे उन्होंने प्राइस को नीचे ले जाने की कोशिश की, लेकिन यहां पर बायर्स एक्टिव हो चुके हैं और उन्होंने बहुत ज्यादा बाइंग की जिस वजह से यहां पर एक लंबी सी विक बनी है। तो इससे हमें समझ आ रहा है कि यहां पर बायर्स ज्यादा स्ट्रांग हो रहे हैं और इसके बाद प्राइस बढ़ने के चांसेस होते हैं। खैर साथ में आपको और भी बहुत सारे फैक्टर्स देखने होते हैं अब यह जो कैंडल स्टिक पैटर्न्स हैं यह भी बहुत सारे तरीके के हैं इसके ऊपर भी हमने ऑलरेडी वीडियो बना रखी है। तो यही सब चीजें प्राइस एक्शन में आती है, यह सब तो लोग कोर्स बना कर बेचते हैं मैंने आपको बिल्कुल फ्री में प्रोवाइड किया है इसलिए वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिएगा। साथ ही एक बार क्रिप्टो ट्रेडिंग को भी ट्राई करके देखो मैंने आपको डेल्टा एक्सचेंज का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट और ट्रेड करना है तो डीमेट अकाउंट का लिंक भी डिस्क्रिप्शन पर दिया गया है और अगर आप क्रिप्टो ट्रेडिंग के बारे में डिटेल में सीखना चाहते हैं तो आप यह वाली वीडियो देख सकते हैं। धन्यवाद।



