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सफल होना है तो 'बहरे' बन जाओ 🙉 | Life Changing Story in Hindi | Kahani Junction

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[0:00]दोस्तों, एक सवाल पूछूं आपसे? सच-सच बताना... कितनी बार ऐसा हुआ है कि आपने कुछ बड़ा करने का का सोचा हो? कोई नया सपना देखे, कोई नई शुरुआत करनी चाही हो... लेकिन फिर किसी ने आपसे आकर कह दिया- अरे ये तेरे बस की बात नहीं है, छोड़ दे। इसमें बहुत रिस्क है या फिर तेरे जैसे बहुत आए और चले गए। और मजे की बात आपको पता है क्या है? उन लोगों की बातें सुनकर आपने उस काम को शुरू करने से पहले ही छोड़ दिया। अक्सर ये हमारे साथ होता है। है ना? हमारा टैलेंट, हमारी काबिलियत हार नहीं मानती, लेकिन दूसरों का शोर हमें हरा देता है। नमस्कार दोस्तों, कहानी जंक्शन में आपका स्वागत है। आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं, अगर आपने उस कहानी को आखिर तक सुन लिया तो मैं वादा करता हूं की आज के बाद किसी की भी नेगेटिव बात आपका रास्ता नहीं रोक पाएगी। तो चलिए कहानी शुरू करते हैं। बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था और उस जंगल में पांच मेंढकों का एक ग्रुप रहता था। पांचों जिगरी यार थे। उनकी दोस्ती ऐसी थी कि खाते-पीते-घूमते सभी के साथ करते थे। एक दिन मौसम बड़ा सुहाना था, बारिश हो चुकी थी और मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू आ रही थी। ये पांचों दोस्त जंगल की सैर पर निकले। उछलते-कूदते, मस्ती करते ये अपनी ही धुन में आगे बढ़ते जा रहे थे। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। की अगले ही पल उनकी जिंदगी बदलने वाली। और अचानक एक हादसा हुआ। जंगल के बीचो बीच एक गहरा गड्ढा था। बारिश की वजह से वहां बहुत फिसलन थी और ध्यान ना देने के कारण उन पांच में से तीन मेंढक धड़ाम से उस गहरे गड्ढे में गिर गए। ये गड्ढा कोई छोटा-मोटा नहीं था दोस्तों ये काफी गहरी खाई जैसी थी। ऊपर खड़े दो मेंढक सुरक्षित थे लेकिन नीचे गिरे हुए तीन मेंढक उस अंधेरे गहरे गड्ढे में फंसे हुए थे। ऊपर खड़े दोस्तों ने जब नीचे झांका तो उनके होश उड़ गए। गहराई इतनी ज्यादा थी कि नीचे वाले मेंढक एकदम छोटे दिख रहे थे। ऊपर वाले दोनों मेंढकों ने एक दूसरे की तरफ देखा। डर उनकी आंखों में एकदम साफ दिख रहा था। उन्होंने मान लिया कि अब तो ये गए। इतनी गहराई से कोई बाहर नहीं आ सकता। लेकिन कहानी यही खत्म नहीं हुई दोस्तों। असली खेल तो अब शुरू हुआ। नीचे गिरे हुए तीनों मेंढकों ने हार नहीं मानी थी। वो घबराए हुए जरूर थे, लेकिन उन्होंने कोशिश करना शुरू कर दी। वो अपनी पूरी ताकत लगाकर जम्प करते। मिट्टी को पकड़ने की कोशिश करते लेकिन दीवारें इतनी फिसलन भरी थी कि वो बार-बार फिसलकर नीचे गिर जाती। वो गिरते-उठते, फिर जम्प करते लेकिन दोस्तों अब यहां ध्यान दीजिएगा। ऊपर जो मेंढक खड़े थे वो क्या कर रहे थे? क्या वो हौसला बढ़ा रहे थे? नहीं। वो ऊपर से चिल्ला रहे थे- अरे भाई! रहने दो! कोई फायदा नहीं है! यह गड्ढा बहुत गहरा है, तुम लोग बाहर नहीं आ पाओगे। सोचिए नीचे वो जान बचाने के लिए जंग लड़ रहे थे। और ऊपर वाले मेंढक एक्सपर्ट बनकर अपना ओपिनियन दे रहे थे कि कोशिश करना बेकार है। उन तीनों मेंढकों में से जो पहला मेंढक था उसने थोड़ी देर कोशिश की। फिर उसकी नजर ऊपर वाले मेंढक पर पड़ी। उसने सुना कि वो कह रहे हैं ये नामुमकिन है। उसे लगा हां यार ये सही तो कह रहे हैं। वाकई ये गड्ढा बहुत गहरा है। उसने एक-दो बार और देखा फिर अपना माथा पकड़ लिया। उसका मनोबल टूट गया। उसने सोचा जब सब कह रहे हैं, नहीं होगा तो शायद नहीं ही होगा। और जानते हैं क्या हुआ? वो थक कर हार मानकर गड्ढे के एक कोने में जाकर बैठ गया। उसने अपनी मौत को स्वीकार कर लिया। दोस्तों, हमारी जिंदगी में वो पहला मेंढक बहुत बार जाग जाता है। जब हम दुनिया के सुनकर सब कुछ छोड़कर कोने में बैठ जाते हैं और अब बचे दो मेंढक वो भी उछल रहे थे, पसीने से लथपथ थे, मिट्टी में सने हुए थे। और अब ऊपर वाले मेंढकों का शोर और बढ़ गया। उन्होंने कहा- अरे ओ पागल हो क्या? देखते नहीं तुम्हारा दोस्त हार मान गया? तुम क्यों अपनी हड्डियों का चूरा कर रहे हो? रुक जाओ! ये सब व्यर्थ है। अब जो दूसरा मेंढक था, उसने देखा कि उसका पहला दोस्त हार मान चुका है और ऊपर से इतनी भीड़ भी चिल्ला रही है कि नहीं होगा, नहीं होगा। तो उस दूसरे वाले मेंढक के मन में भी सेल्फ डाउट आ गया। उसे लगा शायद मैं ही बेवकूफ हूं जो लगा हुआ हूं। जब इतने लोग कह रहे हैं तो शायद सही ही कह रहे होंगे। और उसने अपनी कोशिश धीमी कर दी। उसका जोश ठंडा पड़ गया। उसने भी ऊपर वाले मेंढकों की बात मान ली और वो भी जाकर पहले वाले मेंढक के पास सिर झुकाकर बैठ गया। उसने भी मान लिया कि अब यही अंत है। दोस्तों, ये दूसरा मेंढक वो इंसान है जो कोशिश करना तो चाहता है, लेकिन भीड़ को देखकर अपना रास्ता बदल लेता है। हम अक्सर सोचते हैं कि अगर वो नहीं कर पाया तो मैं कैसे करूंगा? लेकिन अभी भी एक बचा था तीसरा मेंढक। वो रुक नहीं रहा था, वो गिर रहा था, उसका शरीर छिल गया था, उसे चोटें लगी थी लेकिन वो हर बार गिरते ही दुगुनी ताकत से जम्प करता। ऊपर खड़े दो मेंढक अब और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। हाथ हिला-हिलाकर इशारा करने लगे। अबे ओ पागल तुझे समझ नहीं आता? मर जाएगा तू! रुक जा! तेरे दोनों दोस्तों ने हार मान ली, तू क्या सुपरमैन है? माहौल ऐसा था कि ऊपर वाले चिल्ला-चिल्लाकर थक गए, लेकिन नीचे वाला कोशिश कर-करके नहीं थक रहा था। उसने अपनी नस-नस का जोर लगा दिया। उसने सोच लिया था कि या तो बाहर निकलूंगा या कोशिश करते हुए मरूंगा, लेकिन रुकूंगा नहीं। और आखिरकार उसने एक ऐसी छलांग लगाई जिसमें उसने अपनी पूरी जान झोंक दी। उसके पंजों ने गड्ढे के किनारों को छुआ और एक जोरदार जम्प के साथ वो गड्ढे के बाहर आ गया। अब वो गड्ढे से बाहर निकल गया था। उसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया था। जैसे ही वो बाहर आया ऊपर खड़े मेंढक और वो जो नीचे हार मान गए थे, सब हैरान रह गए। ऊपर वाले मेंढकों ने उसे घेर लिया। उन्होंने कहा, भाई, तू कमाल है! हम इतना चिल्ला रहे थे कि मत कर, मत कर, रहने दे... फिर भी तू नहीं रुका? तूने हमारी बात क्यों नहीं सुनी? मेंढक ने उनकी तरफ देखा वो कुछ समझ नहीं सका। वो बस मुस्कुरा रहा था। तब उन दोस्तों को एहसास हुआ और यही इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है। दोस्तों वो तीसरा मेंढक बहरा था, उसे कुछ नहीं सुनाई देता था। जब ऊपर वाले मेंढक हाथ हिला-हिलाकर चिल्ला रहे थे, उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे, उसे डिमोटिवेट कर रहे थे तो उस बहरे मेंढक को लगा कि उसके दोस्त ऊपर से चीयर कर रहे हैं। उसे लगा वो कह रहे हैं तुम कर सकते हो! शाबाश, एक बार और। उनका नकारात्मक शोर उस मेंढक के लिए प्रेरणा बन गया क्योंकि उसने वो नहीं सुना जो दुनिया कह रही थी, उसने वो महसूस किया जो वो करना चाहता था। तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि हमारा जीवन भी उस गहरे गड्ढे जैसा है और हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जो ऊपर खड़े उन मेंढकों की तरह हैं। जब आप कुछ बड़ा करने जाओगे या जब आप यूट्यूबर बनना चाहोगे? जब आप कोई रिस्क लोगे तो वो लोग चिल्लाएंगे अरे ये नहीं चलता इसमें करियर नहीं है या फिर तुमसे नहीं होगा। अगर आप पहले दो मेंढक की तरह उनकी बात सुनोगे, तो आप हार मान लोगे। और अपनी क्षमताओं पर शक करने लगोगे। लेकिन अगर आपको जीवन में वो हासिल करना है जो 99% लोग नहीं कर पाते तो आपको इस तीसरे मेंढक की तरह बहरा बनना पड़ेगा। आपको अपने लक्ष्य के बीच आने वाली हर नकारात्मक आवाज के लिए कान बंद करने होंगे। याद रखिए लोग तब भी बोलेंगे जब आप कुछ नहीं करोगे। और लोग तब भी बोलेंगे जब आप कुछ करोगे। लोगों का काम है कहना और आपका काम है करते रहना। हो सकता है जो लोग आज आपको रोकने के लिए हाथ हिला रहे हैं, कल आपकी कामयाबी देखकर वही लोग आपके लिए तालियां बजाने का काम करें। लेकिन वो तब होगा जब आप रुकोगे नहीं। अगर इस कहानी ने आपके दिल में थोड़ी सी भी आग लगाई है। अगर आपको लगा है कि ये कहानी आपकी ही थी तो इस वीडियो को लाइक जरूर करना। और हां इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करना जो जिंदगी में थोड़ा निराश हो गए हैं। शायद ये कहानी उनकी जिंदगी बदल दे। ऐसी ही बेहतरीन कहानियों के साथ मैं आपसे मिलता रहूंगा। अगर आप हमारे परिवार का हिस्सा बनना चाहते हैं और कहानी जंक्शन से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना। अगली कहानी में फिर मिलेंगे, तब तक के लिए अपने सपने ज़िंदा रखिये। जय हिंद।

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