[0:00]जब आपकी नौकरी लगती है, आप कॉलेज के माहौल से ऑफिस के माहौल में जाते हो। आपको फर्क महसूस नहीं होता लेकिन फर्क होता है। लोगों की सोच में, समझ में जीने के तरीके में, मानसिकता में बहुत फर्क आ जाता है। लेकिन हम उसको रियलाइज नहीं कर पाते और गलतियां कर देते हैं। जिनका हमें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। दोस्तों दो तरीके के लोग कॉरपोरेट में कामयाब हो जाते हैं। एक तो जो बॉस की चापलूसी करते हैं, चमचागिरी करते हैं, पीछे पड़े रहते हैं, बटर लगाते रहते हैं। उनमें भी जो बॉस को सबसे ज्यादा पसंद होगा ना, जो बिल्कुल बॉस का नौकर या बॉस का गधा होगा, बॉस का पालतू होगा उसको आगे बढ़ाया जाएगा, बाकी सबको लात मार दी जाएगी। इसके अलावा बॉस उनका नाजायज इस्तेमाल करेगा, अनड्यू फेवर्स मांगेगा। कई बार तो सेक्सुअल फेवर्स भी मांगे जाते हैं। उनसे अपने घर के काम भी कराएगा। तो ऐसे लोगों की लाइफ बहुत अच्छी नहीं होती, वह कई बार आगे तो बढ़ जाते हैं। लेकिन चूंकि शायद उनमें आगे बढ़ने का टैलेंट नहीं होता, तो वह परफॉर्म नहीं कर पाएंगे। परफॉर्म भी करेंगे, तो बॉस उनका नाजायज इस्तेमाल करेगा। और दोस्तों दूसरे लोग होते हैं, जो अपने बॉस का काम आसान करके आगे बढ़ जाते हैं। जितना आसान अपने बॉस का आप काम करोगे, अपने सीनियर्स का काम आसान करोगे, जो रिस्पांसिबिलिटीज उन्होंने आपको डेलिगेट की है, उनको अच्छे से निभा पाओगे। उतनी ही ज्यादा आपके बॉस को आपकी जरूरत होगी। आपकी उनको सुननी पड़ेगी, आपकी इज्जत करनी पड़ेगी, आपको प्रमोट करना पड़ेगा। क्योंकि किसी भी मैनेजर का सबसे बड़ा एसेट होता है, एक काम करने वाला, उसका काम आसान करने वाला एम्प्लॉई। ऐसे एंप्लॉई जब छोड़ के जाते हैं ना ऑफिस को डिप्रेशन तक हो जाता है मैनेजर्स को। तो ऐसे एंप्लॉई बनो, जो अपने मैनेजर का काम आसान कर रहा है, जो अपनी रिस्पांसिबिलिटीज को अच्छे से निभा रहा है। मैनेजर की मजबूरी बन जाएगी कि वह आपको आगे बढ़ाए, चमचों को पीछे रखे। चमचों को तो वह समझा भी देगा, डांट भी देगा, गाली भी दे देगा। दोस्तों कई बार क्या होता है, कुछ लोग हमें ऑफिस में बुली करते हैं। हमारा मजाक उड़ाते हैं, हमें टीज करते हैं मजे लेने के लिए या हमें डीमोटिवेट करने के लिए, चाहे वह आपके सीनियर्स ही क्यों ना हो। अब इसमें क्या होता है, आप जितना दबोगे, जितना परेशान होगे, उतना ही वह लोग आपको और परेशान करेंगे और किसी दिन का नहीं छोड़ेंगे। स्ट्रॉन्ग पर्सनालिटी वाले लोग हमेशा आगे बढ़ जाते हैं, हमेशा खुश रहते हैं। और जो लोग डर जाते हैं ना, कि यह नौकरी गई तो मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया, मेरा घर कैसे चलेगा, ईएमआई कैसे जाएगी। इतना डरना नहीं चाहिए। डर सिर्फ एक लिमिट तक सही रहता है। उसके बाद अपनी सेल्फ एस्टीम की रक्षा करना बहुत जरूरी हो जाता है। वह सीनियर हो, अकेले में जाकर मिलके फॉर्मली उनको बोल देना कि आप यह चीज जो कर रहे हो, मुझे सही नहीं लग रही है। प्लीज इसको ना करें। क्लियर। कोई इधर-उधर की बात नहीं क्लियर बोलो ताकि उसके दिमाग में फिट बैठ जाए। यह इंसान मेरी फालतू की बातें बर्दाश्त नहीं करेगा। या कोई कॉलीग्स ही कर रहे हो, तो उनको स्पष्ट यह बात बोल दो कि आगे से अगर आपने ऐसी कोई हरकत करी, तो मुझे मजबूरी में कोई ना कोई एक्शन लेना पड़ेगा, या कंप्लेन करनी पड़ेगी। जितना स्पष्ट बन के चलोगे, क्लियर बन के चलोगे, उतना फेस पर तो बुरे बन जाओगे लेकिन उतनी आपकी लाइफ आसान हो जाएगी, आपका कोई शोषण नहीं कर पाएगा, आपको जलील नहीं कर पाएगा। हर इंसान अपने बॉस से थोड़ा बहुत निराश होता है, क्योंकि यह पोजीशन ही ऐसी है कि कहीं ना कहीं डिसएग्रीमेंट होंगे। आपको डांटा भी जाएगा। तो हम क्या करते हैं, हम अपने बॉस की बुराई करते हैं। किससे करते हैं, अपने कलीग्स से करते हैं। और जितनी आपने बुराई की है ना, उससे चार गुना नमक मिर्च लगा के वह बात आपके बॉस तक पहुंच जाएगी, बहुत जल्दी पहुंच जाएगी। ऐसा इसलिए होता है दोस्तों, क्योंकि ऑफिस में जो कलीग्स होते हैं ना, वह आपके कॉलेज वाले फ्रेंड्स नहीं होते। ज्यादातर लोग आपको अपना कंपटीशन समझते हैं, आपसे पहले प्रमोशन पाना चाहते हैं, आपसे पहले आगे बढ़ना चाहते हैं। उसके लिए वह खुद मेहनत करें ना करें आपको नीचा दिखाना चाहते हैं। तो हल्के शब्दों का इस्तेमाल ऑफिस में कम से कम करें। सीनियर हो, बॉस हो, किसी की भी बुराई किसी से मत करना। घर जाकर मां-बाप से डिस्कस कर लेना, हसबैंड-वाइफ से डिस्कस कर लेना। ऑफिस में कभी भी किसी की भी बुराई मत करो। ऑफिसेस में ना लोगों को राई का पहाड़ बनाने की आदत होती है, जान के, क्योंकि हर इंसान दूसरे को कंपटीशन समझता है। कोई ना कोई कारण चाहिए उनको जज करने के लिए। तो थोड़ा बहुत आपको अपनी दिनचर्या का ध्यान रखना है। कैसे ध्यान रखना है? आपने एक-दो दिन की ज्यादा छुट्टी ले ली। आपने पहले छुट्टी ली हुई थी, और कोई कारण ऐसा पड़ गया कि आपको दोबारा छुट्टी लेनी पड़ गई। उसके बाद लोग आपके बारे में बातें करना शुरू कर देंगे कि यह इंसान तो बहुत छुट्टियां लेता है। सीनियर्स भी बातें करेंगे। तो दोस्तों इन चीजों में बहुत केयरफुल रहना है। अब जैसे आपको छुट्टी की जरूरत पड़ गई, तो जो बहुत क्रूशियल डेज होते हैं ना, या ऐसे दिन होते हैं जहां पर ज्यादातर लोग छुट्टी पर होते हैं, जैसे फेस्टिवल सीजन है। ज्यादातर लोग छुट्टी लेकर घर जाएंगे, उस समय आप प्रेजेंट रहो। उस समय काम करो, जो बॉस को आपकी वैल्यू हो। वह सोचे कि यह इंसान छुट्टी नहीं मार रहा, बाकी सब छुट्टी पर हैं। बात को समझ रहे हो ना? अपनी इमेज का थोड़ा सा ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि लोग बिना कारण से इमेज बना देते हैं। जरा सी गलती हुई नहीं, जज करना शुरू कर देंगे और बातों को बढ़ा बना देंगे। तो अगर कोई गलती हुई है, या कोई चीज ऐसी हुई है, तो उसको कवर अप करो, समझदारी से कवर अप जरूर करो। दोस्तों जब भी आप अपने जूनियर्स की हेल्प करते हो ना, जो नए ट्रेनीज आए हैं, जूनियर्स हैं, एक बात का ध्यान रखना। अगर वह कोई गलती कर देंगे, तो सबसे पहले नाम जाएगा आपका। वह सीधे आपका नाम देंगे कि आपसे मदद लेकर उन्होंने यह चीज यह काम किया था। और बॉस किसको बुलाएगा? आपको। तो किसी की भी मदद करो, तब करो जब आप 100% श्योर हो। और भला बनने के लिए हर किसी की मदद भी मत करो। थोड़ा संभल के चलो। दोस्तों शो ऑफ कल्चर आजकल बहुत बढ़ गया है। लोग आपको नीचा दिखाना चाहेंगे। कौन सी गाड़ी है? फ्लैट लिया नहीं लिया? हॉलिडे पर कहां गए थे? आपका फोकस सिर्फ इन्वेस्टमेंट्स पे, सेविंग्स पे, कैरियर को ग्रो करने में, एक अच्छा कॉर्पस बिल्ड करने में, और लाइफ को सेट करने में होना चाहिए। इन टाइप की छिछोरी हरकतों में मत पड़ना, लोगों के इन्फ्लुएंस में मत आना। वह खुद तो बिगड़े हुए हैं, बर्बाद है, आपको भी बर्बाद करना चाहते हैं। कोई चीज पसंद है, बहुत ज्यादा पसंद है, किसी की बहुत ज्यादा जरूरत है, तो वह जरूर लो। फ्लैट चाहिए बहुत जरूरत है, तो ले लो। किसी की भैंस में, फ्लैट लेना, गाड़ी लेना, हॉलीडेज़ पर जाना सही नहीं है। फोकस सिर्फ अपने ऊपर रखना, लोगों से कंपटीशन नहीं करना। और कोई आपको एक रेस में लेकर आ रहा है, तो पार्टिसिपेट मत करना। कई कंपनीज का रिवाज होता है कि वह एम्प्लॉईस पे इतना लोड डाल देते हैं, कि अगर आप 24 घंटे भी काम कर लो ना, वह लोड पूरा नहीं हो पाएगा, काम पूरा नहीं कर पाओगे। और कई लोग इतने सीरियस होते हैं कि वह परेशान आ जाते हैं। वह मेहनत कर-कर के परेशान आ जाते हैं और टारगेट पूरा नहीं होता, तो स्ट्रेस में डिप्रेशन में आ जाते हैं। लेकिन दोस्तों, आपको समझदारी से काम लेना पड़ेगा, आपको सोचना है, कि क्या मैंने सफिशिएंट मेहनत कर ली? आप अपना बेस्ट दे रहे हो? और अगर आप अपना बेस्ट दे रहे हो, तो बस, कुछ भी मत सोचो। टारगेट पूरे हो ना हो। आपको निकाल देंगे ना ज्यादा से ज्यादा, कोई बात नहीं, आपकी लाइफ तो खत्म नहीं हो रही ना, कुछ ना कुछ कर ही लोगे। यह सिर्फ प्रेशर बनाने के तरीके होते हैं ताकि एम्प्लॉई गधे की तरह मेहनत करता रहे, टाइम वेस्ट ना करे। आप सिर्फ यह देखो, आप कितनी मेहनत सबसे ज्यादा कर सकते हो, अपना बेस्ट कैसे दे सकते हो, वह दो और भूल जाओ। गलती हर इंसान से होती है, कोई भी परफेक्ट नहीं होता। अगर आपसे कोई गलती हुई है, आप सिर्फ इंप्रूव कर सकते हो, एक वादा कर सकते हो कि आगे से और ध्यान से और मेहनत से काम करोगे। इससे ऊपर आप कुछ भी नहीं कर सकते। आपको वार्निंग मिल रही है, जलील किया जा रहा है, जज किया जा रहा है करने दो। आपने ध्यान नहीं देना, क्योंकि आप क्या कर सकते हो, सिर्फ इंप्रूव, वह आपने करना है। उसके बाद जो होना है हो जाए, जज करना है, जज करो। आपने बार-बार गिल्टी फील नहीं करना, बार-बार माफी नहीं मांगनी, क्योंकि जितनी बार आप माफी मांगोगे, उतनी बार आपको दबाया जाएगा, उतनी बार जलील किया जाएगा, उतनी बार जज किया जाएगा। जितना स्ट्रॉन्ग रहोगे, गलती को एक्सेप्ट करके बस ठान लिया है, आगे बढ़ना है, उतनी ही जल्दी लोग उस गलती को भूल जाएंगे। बार-बार माफी मांगना, रिग्रेट करना, गिल्टी फील करना, सेल्फ एस्टीम को लो करना, ठीक नहीं है। कैरियर बहुत इंपोर्टेंट होता है। आपका फोकस अपना बेस्ट देने पे, इंप्रूव करने पे, चीजें सीखने में, समझने में, प्रैक्टिस करने में, करियर में ग्रो करने में, पार्ट टाइम कोर्सेज करने में, इन सब चीजों पर फोकस होना चाहिए, खासकर शुरुआती सालों में। जितना कम ऑफिस पॉलिटिक्स में पड़ोगे, उतना आपके लिए बेहतर है। ऑफिस को कॉलेज की तरह मत लेना, यह एक अलग लाइफ है। कुछ लोग गलती कर देते हैं, इनको मिक्स करने की और धोखा खा जाते हैं। आप एक प्रोफेशनल हो, थोड़ा सा प्रोफेशनल एटीट्यूड लेके आओ। सेल्फ रिस्पेक्ट की रक्षा करते हुए अपनी तरफ से मेहनत करो और टेंशन मत लो। एक जॉब चली भी गई तो दूसरी मिल जाएगी, अपने टैलेंट पर अपनी काबिलियत पर भरोसा रखो और मेहनत करते रहो। ऑल द बेस्ट।

HOW TO DEAL WITH OFFICE POLITICS? कड़वा सच #CAREER #JOB BY ANUBHAV JAIN
Anubhav Jain
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