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The Dodo Didn’t Go Extinct Naturally — We Did This

Vigyan Mitra

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[0:00]अगर अंग्रेजों ने डोडो के अंडों को नहीं खाया होता, तो आज उनकी हड्डियां ₹3 करोड़ में ना बिकती। दरअसल डोडो को अक्सर दुनिया का सबसे गधा परिंदा कहा जाता है। वजह यह नहीं कि वो बेवकूफ था, बल्कि इसलिए कि उसे कभी होशियार बनने की जरूरत ही नहीं पड़ी। करीब 40 लाख साल पहले डोडो के पूर्वज इंडिया के इलाके से माइग्रेट करके मॉरिशस आइलैंड पहुंच गए। यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं थी। हर तरफ फल, हरी घास, भरपूर पानी और सबसे बड़ी बात वहां कोई शिकारी जानवर था ही नहीं। डोडो यहीं बस गए। खाने की कोई कमी नहीं, खतरे का कोई डर नहीं। नतीजा, वो धीरे-धीरे मोटे होते गए, उड़ने की क्षमता खत्म हो गई और बेसिक सर्वाइवल स्किल्स भी वक्त के साथ गायब हो गईं। फिर 1638 में इंसान वहां पहुंचा। इंसान अकेला नहीं आया, अपने साथ कुत्ते, बिल्ली और चूहे भी ले आया। सब मिलकर डोडो का शिकार करने लगे। चूहे डोडो के अंडे खा जाते थे और डोडो के पास इतना वक्त ही नहीं था कि वो नई सर्वाइवल स्ट्रेटेजी डेवलप कर पाता। नतीजा यह हुआ कि सिर्फ 100 सालों के अंदर डोडो इस धरती से हमेशा के लिए खत्म हो गया।

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