Thumbnail for All Prophets Gathered | Time Collapsed | Mi‘raj Explained #facts #sidra by ALAM TO AAKHIRAH

All Prophets Gathered | Time Collapsed | Mi‘raj Explained #facts #sidra

ALAM TO AAKHIRAH

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[0:00]अल अक्सा का रेलम जहां सारे नबी मौजूद थे। मस्जिद अल-अक्सा सिर्फ एक जगह नहीं थी। वो एक रेलम था, एक ऐसा डायमेंशन जहां टाइम कोलैप्स हो चुका था। यहीं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिब्रील के साथ अलैहिस्सलामुस रेलम में दाखिल हुए। जहां मौजूद थे, आदम अलैहि सलाम, नूह अलैहि सलाम, इब्राहिम अलैहि सलाम, मूसा अलैहि सलाम, ईसा अलैहि सलाम, तमाम अंबिया। और कहा गया, आगे बढ़िए इमामत आप कराइए। ये सिर्फ नमाज़ नहीं थी। ये डिक्लेरेशन ऑफ फाइनल प्रोफेट हुड थी। और वहां से आसमानों की ओर मेराज की शुरुआत। पहले आसमान पर, आदम अलैहि सलाम। दूसरे पर, ईसा अलैहि सलाम और याहया अलैहि सलाम। तीसरे पर, युसूफ अलैहि सलाम। चौथे पर, इदरीस अलैहि सलाम। पांचवें पर, हारून अलैहि सलाम। छठे पर, मूसा अलैहि सलाम। और सातवें पर, इब्राहिम अलैहि सलाम। और फिर, वहां पहुंचे, जहां ना कोई नबी गया, ना कोई फरिश्ता। जहां आसमान की सारी हदें खत्म हो जाती हैं। जहां से आगे किसी फरिश्ते का भी सफर मुमकिन नहीं। वह मुकाम सिदरतुल मुंतहा, जहां इल्म, नूर और हक़ीक़तें एक साथ जमा होती हैं। सिदरतुल मुंतहा की जड़ (रूट) छठे आसमान पर है और उसकी शाखाएं सातवें आसमान तक फैली हुई हैं। यही वह जगह है, जहां से नील और फ़ुरात, दुनिया की दो सबसे मुबारक नदियां, अपनी हक़ीक़त का सफर शुरू करती हैं। हदीथ सही मुस्लिम में है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, सिदरतुल मुंतहा से दो जाहिरी नहरें निकलती हैं, नील और फ़ुरात। और दो बातनी नहरें जन्नत के अंदर बहती हैं। वो जगह थी सिदरतुल मुंतहा, एक नूर से भरा पेड़। जिसके पत्ते हाथी के कानों जितने बड़े, फल मटके जितने भारी, और उनके ऊपर गिर रहा था अल्लाह का नूर। यह नूर जब सिद्रा पर गिरता था, तो पेड़ के रंग ऐसे बदल जाते थे, जो किसी इंसान ने, किसी दुनिया ने, किसी कैमरे ने कभी देखे ही नहीं। क्योंकि वो रंग इस दुनिया के स्पेक्ट्रम में आते ही नहीं। इंसान की आंख सिर्फ 0.003% रंग देख सकती है। सिदरतुल मुंतहा के रंग उन डाइमेंशंस के स्पेक्ट्रम से आते हैं, जहां मैटर का कोई अस्तित्व नहीं। सिर्फ एनर्जी है। नील और फ़ुरात सिदरतुल मुंतहा से निकलती हैं। लेकिन सीधे लिक्विड पानी बनकर जमीन पर नहीं गिरती। क्यों? क्योंकि सिदरतुल मुंतहा कोई फिजिकल जगह नहीं। यह एक हायर डायमेंशन है।

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