[0:00]दीपक एक ब्रोकर के ऑफिस में बैठा था। जैसे ही ब्रोकर मनोज वहां आता है। सर मैं 3 घंटे से आपका इंतजार कर रहा हूं। हां हां बताओ भाई क्या हुआ? सर मुझे मेरे ऑफिस के पास ही कोई अपार्टमेंट चाहिए। यह बहुत जरूरी है। वैसे ही मेरी नाइट शिफ्ट्स की वजह से मुझे घर लौटने में बहुत देर हो जाती है। उफ वो दीपक, एक तो तुम्हारा बजट भी इतना कम है। खैर रुको अभी नए अपार्टमेंट्स की लिस्ट आई है। उसमें से देखकर बताता हूं। अगर तुम्हारे मतलब का मिले तो। हां हां सर। अरे हां यह देखो दीपक, यह प्रकाश हाइट्स अपार्टमेंट तुम्हारे ऑफिस के बहुत पास है और यहां 13वीं मंजिल पर कई फ्लैट्स खाली है। तुम्हारे बजट में भी है। क्या अरे हां सर देखने में भी सही लग रहा है। चलो फिर अभी फ्लैट देखकर आते हैं। ठीक है सर चलिए। दीपक और मनोज दोनों साथ में प्रकाश हाइट्स फ्लैट देखने चले जाते हैं। अपार्टमेंट के बाहर ही एक गार्ड बैठा हुआ था जो सो रहा था। ओ भाई अरे ओ यह ड्यूटी के टाइम कौन सोता है? माफ़ करना सर 12th फ्लोर की वजह से रात भर सो ही नहीं पाता तो अभी आंख लग गई। गार्ड बोलते-बोलते अनजाने में ऊपर की तरफ देख लेता है। जैसे कई रातों से वो ठीक से सोया ही ना हो। क्या इसका क्या मतलब क्या सारी रात वहीं पर पहरेदारी करते हो? अरे कुछ नहीं साहब आपको कौन से फ्लोर पर फ्लैट लेना है। वैसे अभी तो सारे फ्लैट्स भरे हुए हैं ना तो आप यहां आए क्यों हैं? वह हम 13वीं मंजिल वाले फ्लैट लेने आए हैं। क्या 12वीं के ऊपर वाली 13वीं मंजिल? हां भाई 13वीं मंजिल है तो 12वीं के बाद ही आएगी ना। चलो दीपक हम फ्लैट देखकर आते हैं। हां हां सर चलिए। दीपक को गार्ड का बर्ताव थोड़ा अजीब तो लगता है। मगर वह उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता। दीपक और मनोज दोनों लिफ्ट में चढ़ जाते हैं। तभी मनोज कुछ सोचकर कहता है। एक बात ध्यान रखना दीपक। क्या वह क्या सर? तुम्हें 13वीं मंजिल पर जाना हो तो सीधा वहीं जाना। बीच में कहीं भी नहीं रुकना और यह लिफ्ट कभी भी 12वीं मंजिल पर नहीं रुकती है। क्योंकि वहां उस फ्लोर पर कोई नहीं रहता और ना ही रहना चाहता है। क्या मगर ऐसा क्यों सर? पिछले साल वहां एक भयंकर आग लग गई थी। आग को कंट्रोल कर लिया गया था और पूरी बिल्डिंग में फैलने से रोक भी लिया गया था। लेकिन तब से वह फ्लोर बंद ही कर दिया गया। ओह अच्छा ठीक है ना सर मुझे क्या लेना देना उस फ्लोर से मैं वैसे भी बहुत जल्दी में रहता हूं। किसी और फ्लोर पर टहलने का तो मेरे पास समय भी नहीं है। हां बढ़िया है और तुम तो जानते ही हो ना लोगों को कहीं भी ऐसा कुछ होता है तो लोग अजीबोगरीब बातें बनाने लगते हैं कि वहां भूत है प्रेत है। वैसे तुम तो इन सब पर यकीन नहीं करते ना दीपक। जैसे ही मनोज दीपक से यह सवाल करता है दीपक एकदम शांत हो जाता है। उसके मन में कई ख्याल आने लगते हैं। उसका अतीत और अतीत से जुड़ा सब कुछ कुछ पल के लिए उसके कानों में आग के चटकने की आवाज और किसी औरत की घबराई हुई चीख गूंज जाती है। दीपक दीपक बोलो ना क्या हुआ? कुछ भी तो नहीं सर नहीं मुझे इन सब बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है। और अब तो मुझे सिर्फ एक नई शुरुआत करनी है। इसीलिए तो मैं इस नए शहर में आया हूं। चलो यह तो अच्छी बात है दीपक। लो हम आ भी गए आ जाओ। तभी अचानक से लिफ्ट 13वीं मंजिल पर रुकती है। मनोज और दीपक 13वीं मंजिल के कॉरिडोर में आते हैं। और वह एकदम खाली था। इस फ्लोर पर भी अभी कोई नहीं रह रहा है। सब नीचे वाले फ्लोर की डर की वजह से यह बेरोजगार लोग बस डरावनी अफवाहें फैला देते हैं और लोगों का बिजनेस बिगाड़ देते हैं। खैर लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है जल्द ही और लोग आ जाएंगे। यह देखो तुम्हारा रूम नंबर है 103। ओह अच्छा ठीक है सर 103 बढ़िया है। दीपक अपना फ्लैट देखता है। फ्लैट काफी बड़ा और आलीशान था। इतना अच्छा कि दीपक को यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह फ्लैट उसे इतना सस्ता मिल गया। क्यों है ना अच्छा? हां बहुत अच्छा है सर मेरे बजट में तो बहुत अच्छा है। दीपक नीचे झांकता है और उसे गार्ड दिखाई देता है जो उसी की तरफ देख रहा था। लेकिन कुछ अजीब था। गार्ड के ठीक पीछे एक औरत खड़ी थी। काली साड़ी पहने। वह वह कौन है? तो बताओ डील डन? हां ठीक है। फिर क्या था? अगले दो दिनों में ही दीपक उस फ्लैट में शिफ्ट हो जाता है। पहले तो सब कुछ नॉर्मल था। वह एक हॉस्पिटल में नर्स की नौकरी करता था। इसीलिए उसका आधे से ज्यादा समय हॉस्पिटल में ही निकल जाता था। कभी-कभी तो उसे वहां दो-दो तीन-तीन दिन रुकना पड़ता था। एक दिन रात के 12:00 बजे वह हॉस्पिटल से निकलता है। उफ यह मॉर्निंग शिफ्ट कब इवनिंग में और नाइट में बदल जाती है? पता ही नहीं चलता। आज भी 12:00 बज गए। खैर अच्छा ही है। कम से कम यही सब सोचते हुए दीपक अपनी बिल्डिंग में पहुंच जाता है। गार्ड जागा हुआ था। अरे साहब आप आ गए। हां और तुम पिछली बार की तरह सो मत जाना। ऐसी किस्मत कहां साहब वो 12वीं मंजिल सोने नहीं देगी। आप भी जरा संभल कर जाइएगा और भूल कर भी उस फ्लोर पर मत रुकिए। क्या इसका क्या मतलब है? अरे साहब रात को 01:45 बजे के बाद उस फ्लोर पर अपने आप लाइट्स जलने लगती है। कभी-कभी तो वहां कोई खड़ा भी दिखाई देता है और कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे वहां आग लग गई हो। लेकिन जाकर देखो तो बस अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है। जरूर तुम नशे करके ड्यूटी करने आते होगे और इसीलिए तुम्हें यह सब नजर आता है। खैर अब तुम अपना काम करो मैं भी जा रहा हूं। दीपक बिल्डिंग के अंदर जाता है और लिफ्ट का बटन दबा देता है। लेकिन जब वह ऊपर देखता है तो चौंक जाता है। लिफ्ट सीधा 12वीं मंजिल से ही नीचे आ रही थी। दीपक के दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं। हे ऊपर वाले पता नहीं यह सब क्या हो रहा है। जैसे ही लिफ्ट नीचे आकर खुलती है तो दीपक चैन की सांस लेता है। क्योंकि अंदर कोई भी नहीं था। लिफ्ट खाली थी। दीपक लिफ्ट के अंदर चला जाता है और 13वीं मंजिल का बटन दबाता है। लिफ्ट के दरवाजे बंद हो जाते हैं। लेकिन लिफ्ट चलती नहीं अचानक से लिफ्ट के दरवाजे फिर से खुल जाते हैं और सामने एक औरत खड़ी थी। यह वही औरत थी जिसे दीपक ने पहले भी देखा था। काली साड़ी लिफ्ट के अंदर अचानक ठंड बढ़ जाती है। मैडम आपको कौन सी मंजिल पर जाना है? लेकिन औरत दीपक की तरफ देखती भी नहीं। जैसे उसे तो उसकी आवाज ही सुनाई नहीं दे रही थी। लेकिन वह चुपचाप 12वीं मंजिल का बटन दबा देती है। यह देखकर दीपक समझ जाता है। कि इस वक्त वो जिसके साथ लिफ्ट में खड़ा था वो कोई और नहीं बल्कि एक चुड़ैल थी। वह मन ही मन सोचता है। मुझे कुछ नहीं करना चाहिए। वह वह 12वीं मंजिल पर उतर जाएगी और मैं उसकी तरफ देखूंगा भी नहीं। हां धीमे-धीमे लिफ्ट एक-एक मंजिल पार करती है। उस औरत के वहां होने की वजह से दीपक ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था। देखते ही देखते 12वीं मंजिल आती है और लिफ्ट रुक जाती है। दीपक देखता है कॉरिडोर की लाइट जल रही थी। लिफ्ट का दरवाजा बंद नहीं होता और दीपक उस औरत को कॉरिडोर के आखिर तक जाते हुए देखता है। वो औरत जो कॉरिडोर में सबसे आखिर में खड़ी थी। वो धीमे से दीपक की तरफ पलट कर देखती है। वह औरत दीपक की तरफ देखकर मुस्कुराती है और फिर आखिर में जो फ्लैट था उसके अंदर चली जाती है। दीपक अभी भी लिफ्ट बंद करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन तभी दीपक एक गहरी सांस लेता है। लगता है अब मुझे यह करना ही होगा। ठीक है मैं तुम्हें देख सकता हूं। तुम सबको बताओ तुम मुझसे क्या चाहते हो? जैसे ही दीपक यह कहता है कॉरिडोर में वो आत्माएं आ जाती हैं। यह सब वही लोग थे जिनकी एक साल पहले हादसे में मौत हुई थी। इस फ्लैट में बिल्डिंग का मालिक रहता था। मैं उसकी पत्नी थी। लेकिन उसका बाहर अफेयर चल रहा था। जब मुझे इस बारे में पता चला तो उसने गुस्से में मुझे मार दिया और यहां से चला गया। इस बात को छिपाने के लिए उसने इस पूरे फ्लोर में आग लगवा दी और कई लोगों की जान चली गई। हम सब की आत्माएं यहां कैद हैं। हमें मुक्ति चाहिए। ठीक है मैं अभी पुलिस को बुलाकर सब बता दूंगा। बस मुझे जाने दो। दीपक जल्दी से पुलिस को बुलाता है और उन्हें उस लाश के बारे में बताता है। तलाशी लेने पर सचमुच वहां उस औरत की लाश मिलती है। जिसके बाद उसके पति यानी बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया जाता है। लेकिन उसके बाद भी कई बार जब दीपक लिफ्ट लेकर 13वीं मंजिल पर जाता था। लिफ्ट अपने आप ही 12वें फ्लोर पर रुक जाती थी। उसे अपने पीछे किसी औरत की बहुत धीमी हंसी सुनाई देती थी। हंसी

भूतिया 12वीं मंज़िल | Haunted 12th Floor | Hindi Stories | Kahaniya | Horror Stories 2026
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