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6 Dangerous Wars That Changed India’s Energy Strategy Forever | By Ankit Agrawal #short

StudyIQ IAS

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[0:00]छह ऐसे वॉर हैं जिन्होंने भारत को बार-बार मजबूत किया है कि वह अपनी एनर्जी स्ट्रेटेजी बदले। आज भी रियलिटी देखिए इंडिया अपनी जरूरत का लगभग 40% क्रूड ऑयल, 50% LNG और 90% LPG स्ट्रेट ऑफ होमोज के थ्रू इंपोर्ट करता है। मतलब इस रीजन में हल्का सा भी कॉन्फ्लिक्ट होता है तो सीधा इंपैक्ट इंडिया की इकोनॉमी और हाउस होल्ड पर पड़ता है। इस मामले में सबसे पहला झटका 1973 में योम किपुर वॉर से आया। इजिप्ट और सीरिया ने मिलकर इजराइल पर अचानक अटैक कर दिया था। इसमें अमेरिका ने इजराइल को सपोर्ट दिया और रिस्पांस में सऊदी अरब ने ओपेक के थ्रू 1973-74 तक ऑयल एंबार्गो लगा दिया। रिजल्ट ग्लोबल ऑयल प्राइसेस तीन गुना तक बढ़ गए और इंडिया का इंपोर्ट बिल कंट्रोल से बाहर चला गया। इसके बाद दूसरा बड़ा शौक मिला 1979 में ईरानियन रेवोल्यूशन से। और तुरंत बाद 1980-1988 के ईरान इराक वॉर ने सिचुएशन और खराब कर दी। हॉर्मुज वॉर जोन बन गया, टैंकर अटैक्स हुए और इंडिया में फ्यूल शॉर्टेजेस, इन्फ्लेशन और पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी तक देखने को मिली। तीसरा टर्निंग पॉइंट था 1990 का गल्फ वॉर, जिसके बाद ऑयल प्राइसेस स्पाइक हुए, फॉरेक्स रिजर्व गिर गए और 1991 में इंडिया को मजबूरन इकोनॉमिक रिफॉर्म्स लाने पड़े। चौथा फेज आया 2003 में इराक वॉर के बाद, जब ऑयल प्राइसेस लंबे समय तक हाई रहे। इस बार इंडिया ने रिफाइनरी कैपेसिटी बढ़ाकर ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अपनी स्ट्रॉन्ग पोजीशन बना ली। पांचवा झटका था 2022 में रशिया यूक्रेन वॉर। हालांकि वेस्टर्न सैंक्शन्स के बीच इंडिया ने रशियन ऑयल लेकर स्मार्ट बैलेंसिंग की, लेकिन जिओपॉलिटिकल प्रेशर भी फेस किया। और अब लेटेस्ट 2026 का यूएस, इजराइल एंड ईरान वॉर, ईरान ने होर्मुज को वेपन बना दिया, जिससे इंडिया के एनर्जी इंपोर्ट्स डायरेक्टली इंपैक्ट हो रहे हैं। तो दोस्तों, हर वॉर ने इंडिया को एक नया लेसन दिया। पहले डायवर्सिफिकेशन, फिर डोमेस्टिक प्रोडक्शन, फिर ग्लोबल डिप्लोमेसी।

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