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“श्री कृष्ण के मोरपंख का रहस्य 😲 मोरपंख में बसा राधा का नाम 🌸"

Saatvik Shiksha

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एक बार राधा रानी ने कान्हा से विनोद में पूछा कान्हा तुम हमेशा इस मोर पंख को अपने मस्तक पर धारण क्यों किए रहते हो क्या यह तुम्हें बहुत प्र...

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राधा रानी को विश्वास नहीं हुआ उन्होंने कहा यह तो निर्जीव है यह भला कैसे तुम्हारा स्मरण हो सकता है

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जैसे ही वह मोर पंख राधा रानी के कान के समीप पहुंचा उसमें से एक अत्यंत सूक्ष्म और मधुर ध्वनि आने लगी

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राधा रानी चकित रह गई उस निर्जीव पंख के रोम रोम से केवल राधा नाम की ही झंकार निकल रही थी

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मैंने उस मोर की भक्ति को अमर करने के लिए उसका पंख अपने शीर्ष पर सजा लिया अब यह पंख 24 घंटे तुम्हारा ही नाम जपता रहता है

[1:15]Section 6

कान्हा अब मैं समझी तुम दुनिया को अपना संगीत सुनाते हो पर खुद तो बस मेरे नाम के ही धुन में रमे रहते हो राधे राधे

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[0:00]एक बार राधा रानी ने कान्हा से विनोद में पूछा कान्हा तुम हमेशा इस मोर पंख को अपने मस्तक पर धारण क्यों किए रहते हो क्या यह तुम्हें बहुत प्रिय है
[0:17]राधा रानी को विश्वास नहीं हुआ उन्होंने कहा यह तो निर्जीव है यह भला कैसे तुम्हारा स्मरण हो सकता है
[0:29]जैसे ही वह मोर पंख राधा रानी के कान के समीप पहुंचा उसमें से एक अत्यंत सूक्ष्म और मधुर ध्वनि आने लगी
[0:41]राधा रानी चकित रह गई उस निर्जीव पंख के रोम रोम से केवल राधा नाम की ही झंकार निकल रही थी
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[0:00]एक बार राधा रानी ने कान्हा से विनोद में पूछा कान्हा तुम हमेशा इस मोर पंख को अपने मस्तक पर धारण क्यों किए रहते हो क्या यह तुम्हें बहुत प्रिय है

[0:10]कान्हा मुस्कुराए और बोले राधे यह मोर पंख मेरा श्रृंगार नहीं मेरा स्मरण है

[0:17]राधा रानी को विश्वास नहीं हुआ उन्होंने कहा यह तो निर्जीव है यह भला कैसे तुम्हारा स्मरण हो सकता है

[0:23]कान्हा ने धीरे से अपने मस्तक से मोर पंख उतारा और राधा जी के कान के पास ले गए

[0:29]जैसे ही वह मोर पंख राधा रानी के कान के समीप पहुंचा उसमें से एक अत्यंत सूक्ष्म और मधुर ध्वनि आने लगी

[0:36]राधे राधे राधे

[0:41]राधा रानी चकित रह गई उस निर्जीव पंख के रोम रोम से केवल राधा नाम की ही झंकार निकल रही थी

[0:49]कान्हा ने बताया राधे जब तुमने वन में नृत्य किया था तब एक मोर ने अपने प्राण तुम्हारे चरणों में न्योछावर कर दिए थे

[0:58]मैंने उस मोर की भक्ति को अमर करने के लिए उसका पंख अपने शीर्ष पर सजा लिया अब यह पंख 24 घंटे तुम्हारा ही नाम जपता रहता है

[1:06]राधा रानी की आंखों से प्रेम अश्रुओं की धारा बह निकली उन्होंने वह मोर पंख वापस कान्हा के मस्तक पर सजा दिया और बोली

[1:15]कान्हा अब मैं समझी तुम दुनिया को अपना संगीत सुनाते हो पर खुद तो बस मेरे नाम के ही धुन में रमे रहते हो राधे राधे

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