Thumbnail for Schrodinger's Cat, Quantum Superposition & Consciousness Explained [हिन्दी] | Technical Prabhuji by Hare Krishna Sanga

Schrodinger's Cat, Quantum Superposition & Consciousness Explained [हिन्दी] | Technical Prabhuji

Hare Krishna Sanga

5m 39s821 words~5 min read
Auto-Generated

[0:00]इमेजिन करिए कि आपके पास ऐसा कॉइन है जो एक ही समय पे हेड और टेल दोनों ही है, लेकिन तब तक जब तक आप उसे देखते नहीं। क्वांटम वर्ल्ड में इलेक्ट्रॉन जैसे पार्टिकल उस सिक्के की तरह एक ही समय पे मल्टीपल स्टेट या मल्टीपल पोजीशन में प्रेजेंट रहते हैं। इसको हम श्रोडिंगर कैट एक्सपेरिमेंट से समझते हैं।इर्विन श्रोडिंगर ने 1935 में अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ काफी सारे करसपॉन्डेंस के बाद एक थॉट एक्सपेरिमेंट प्रपोज किया। श्रोडिंगर ने इमेजिन किया कि एक कैट को एक बॉक्स में रख दिया जाए और उसी बॉक्स में एक डिवाइस को रखकर बॉक्स बंद कर दिया जाए। बॉक्स में रखा वह डिवाइस ऐसे सेट किया गया है कि अगले एक घंटे के बाद 50% चांस है कि वह डिवाइस के रेडिएशन से कैट की डेथ हो जाए। अब श्रोडिंगर ने पूछा कि एक घंटे बाद जब वह बॉक्स को खोलेंगे तो कैट किस अवस्था में होगी? कॉमन सेंस जवाब है कि कैट या तो जिंदा या मरी हुई पाई जाएगी। लेकिन श्रोडिंगर ने फाइंड आउट किया कि क्वांटम फिजिक्स के अनुसार बॉक्स खोलने के जस्ट पहले कैट लीविंग और डेड दोनों ही अवस्था में होगी। जब उस बॉक्स को खोला जाएगा, तभी वह एक डेफिनेट स्टेट में आएगी लीविंग या डेड। उससे पहले कैट लीविंग और डेड दोनों स्टेट की प्रोबेबिलिटी में ही होगी। हालांकि यह सब सुनने में बहुत पज़लिंग एंड अब्सर्ड लगता है, लेकिन श्रोडिंगर कैट इज अ रियलिटी ऑन क्वांटम लेवल। एक एटम के अंदर इलेक्ट्रॉन वेव जैसी ऑर्बिट में स्प्रेड आउट होता है। और जब दूसरा एटम इस एटम के नजदीक लाया जाए, तब यह इलेक्ट्रॉन इन दो में से सिर्फ एक एटम पे नहीं, लेकिन दोनों में स्प्रेड आउट हो जाता है। और यदि और ज्यादा एटम इनके नजदीक लाए जाए तो वह इलेक्ट्रॉन इन सब के बीच स्प्रेड आउट हो जाता है। यानी साइमलटेनियसली वह इलेक्ट्रॉन बहुत सारे एटम में प्रेजेंट रहता है। अगर इलेक्ट्रॉन जैसे क्वांटम पार्टिकल एक ही समय में मल्टीपल स्टेट में नहीं रहते तो जिस डिवाइस में आप यह वीडियो देख रहे हैं, वह डिवाइस चल नहीं रहा होता। क्वांटम पार्टिकल्स का एक ही समय पे मल्टीपल स्टेट में या पोजीशन में होना यह क्वांटम सुपरपोजिशन कहलाता है। क्वांटम पार्टिकल्स ऐसा मिस्टीरियस बिहेवियर अपने वेव पार्टिकल ड्युअल नेचर की वजह से दिखाते हैं। और क्वांटम सुपरपोजिशन क्वांटम मैकेनिक्स का मोस्ट फंडामेंटल कांसेप्ट है। और इसकी एप्लीकेशन से ही कंप्यूटर मोबाइल्स एमआरआई मशीन सोलर सेल्स जैसे कई सारे मॉडर्न टेक्नोलॉजीस फंक्शन करती है। क्वांटम सुपरपोजिशन के आईडिया से श्रोडिंगर फिलोसफिकली इनक्विजटिव होने लगे। वे जर्मन फिलोसोफर आर्थर शोपन हौर के वर्क से काफी इन्फ्लुएंस होने लगे और शोपन हौर के किताबों से उनको उपनिषद और वेदांत में रुचि लगी। बाद में उन्होंने इन शास्त्रों को पढ़ना शुरू किए। ऑस्ट्रेलियन एकेडमी ऑफ साइंस के जनरल साइंटिफिक पेपर्स कलेक्शन के वॉल्यूम फोर में पाए गए एक पेपर में श्रोडिंगर कॉन्शियसनेस के बारे में लिखते हैं। कॉन्शियसनेस कैन नॉट बी अकाउंटेड फॉर इन फिजिकल टर्म्स फॉर कॉन्शियसनेस इज एब्सोलutely फंडामेंटल इट कैन नॉट बी अकाउंटेड फॉर इन टर्म्स ऑफ एनीथिंग एल्स। कॉन्शियसनेस एक फंडामेंटल एंटिटी है और उसको उत्पन्न नहीं किया जा सकता, ना ही उसे किसी फिजिकल टर्म्स में डिफाइन किया जा सकता है। कॉन्शियसनेस इटर्नल एंटिटी है। श्रोडिंगर का यह प्रपोजल वैदिक पॉइंट ऑफ व्यू से बिल्कुल सही है। कॉन्शियसनेस आत्मा का फीचर है, वो आत्मा से आती है और आत्मा की प्रेजेंस का सिम्टम है। जिस तरह एनर्जी या आत्मा को क्रिएट या डिस्ट्रॉय नहीं किया जा सकता, वैसे ही आत्मा की प्रॉपर्टी कॉन्शियसनेस को भी क्रिएट या डिस्ट्रॉय नहीं किया जा सकता। श्रोडिंगर क्वांटम सुपरपोजिशन के आईडिया को कॉन्शियसनेस पे एक्स्ट्रापोलेट करते हुए अपनी बुक माय व्यू ऑफ द वर्ल्ड के फोर्थ चैप्टर में एक्सप्रेस करते हैं कि देर एजिस्ट सेवरल कॉन्शियसनेस एंड देर एजिस्ट अ कॉमन कॉन्शियसनेस। यानी इस अस्तित्व में इंडिविजुअल कॉन्शियसनेस भी है और यूनिवर्सल कॉन्शियसनेस भी है। श्रोडिंगर का यह प्रपोजल भी भगवत गीता के 13th चैप्टर के सेकंड और थर्ड श्लोक में इस तरह से पाया जाता है। शरीर एक क्षेत्र है और इस क्षेत्र को जानने वाला एक इंडिविजुअल क्षेत्रज्ञ इंडिविजुअल कॉन्शियसनेस है। और भगवान यानी श्री कृष्ण हरेक शरीर को जानने वाली कॉमन कॉन्शियसनेस या यूनिवर्सल कॉन्शियसनेस के सोर्स है। हम सबने बचपन से सुना है कि भगवान कण-कण में है। इस बात को श्रोडिंगर क्वांटम सुपरपोजिशन से रिलेट करते हैं। यदि एक छोटा सा इलेक्ट्रॉन एक साथ मल्टीपल जगह में रह सकता है तो भगवान एक साथ सारे कण-कण में क्यों नहीं रह सकते? क्वांटम सुपरपोजिशन भगवान के ओमनप्रेजेंस फीचर को साइंटिफिकली एक्सेप्टेबल प्रूव करता है। श्रोडिंगर की यह अंडरस्टैंडिंग स्कॉटिश फिज़िसिस्ट केल्विन की इस बात को सच साबित करती है कि इफ यू स्टडी साइंस डीप इनफ एंड लॉन्ग इनफ इट विल फोर्स यू टू बिलीव इन गॉड। थैंक यू वेरी मच, हरे कृष्णा। अगर हमारा यह वीडियो आपको पसंद आया है तो इसे अपने साइंटिस्ट दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट में कुछ साइंटिफिक क्वेश्चंस जरूर पूछे। थैंक यू वेरी मच, हरे कृष्णा।

Need another transcript?

Paste any YouTube URL to get a clean transcript in seconds.

Get a Transcript