Thumbnail for मां के कर्मों का फल बेटी ने भोगा। A mysterious story of a beautiful princess, Ajgar story, jealously by Storian safar

मां के कर्मों का फल बेटी ने भोगा। A mysterious story of a beautiful princess, Ajgar story, jealously

Storian safar

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[0:00]बहुत वर्ष पहले एक राजा की दो रानियां थी। बड़ी रानी का नाम अवंती था। जो बहुत ही अच्छे स्वभाव की दयावान स्त्री थी। जबकि छोटी रानी रूपमती बड़ी कठोर और दुष्ट थी। बड़ी रानी अवंती के एक पुत्री थी जिसका नाम देविका था। रानी रूपमती के भी एक बेटी थी नाम था माया। रानी रूपमती बड़ी चालाक और महत्वाकांक्षी स्त्री थी। वह चाहती थी कि राज्य की सत्ता उसके हाथ में रहे। राजा भी उससे दबा हुआ था। रानी रूपमती बड़ी रानी और उसकी बेटी से नफरत करती थी। एक दिन उसने राजा से कह दिया कि रानी अवंती और उनकी बेटी को राजमहल से बाहर निकाल दिया जाए। राजा रानी रूपमती की नाराजगी से डरता था। उसे लगा कि उसे वही करना पड़ेगा जो रूपमती चाहती है। उसने बड़ी रानी और उसकी बेटी को राजमहल के बाहर एक छोटे से घर में रहने के लिए भेज दिया। लेकिन रानी रूपमती की घृणा इससे भी नहीं हटी। उसने देविका को आज्ञा दी कि वह प्रतिदिन राजा की गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाया करें। रानी अवंती यह अच्छी तरह जानती थी कि यदि देविका गायों को चराने के लिए नहीं गई तो रानी रूपमती उन्हें किसी और परेशानी में डाल देगी। इसीलिए उसने अपनी बेटी देविका से कहा कि वह रोज सुबह गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाया करें और शाम के समय उन्हें वापस ले आया करें। देविका को अपनी मां का कहना तो मानना ही था इसलिए वह रोज सुबह गायों को जंगल में चराने ले जाती। एक शाम जब वह जंगल से घर लौट रही थी तो उसे अपने पीछे एक धीमी सी आवाज सुनाई दी। देविका देविका क्या तुम मुझसे विवाह करोगी? देविका डर गई। जितनी जल्दी हो सका उसने गायों को घर की ओर हांका। दूसरे दिन भी जब वह घर लौट रही थी तो उसने वही आवाज पुनः सुनी। वही प्रश्न उससे फिर पूछा गया। रात को देविका ने अपनी मां को उस आवाज के बारे में बताया। मां सारी रात इस पर विचार करती रही। सुबह तक उसने निश्चय कर लिया कि क्या किया जाना चाहिए। रानी अवंती ने देविका से कहा सुनो बेटी यदि आज शाम के समय भी तुम्हें वही आवाज सुनाई दे तो तुम उस आवाज को उत्तर देना। कल सुबह मेरे घर आ जाओ फिर मैं तुमसे विवाह कर लूंगी। देविका बोली लेकिन मां हम उसे जानते तक नहीं। मां ने दुखी होकर कहा मेरी प्यारी बेटी जिस स्थिति में हम जी रहे हैं उससे ज्यादा बुरा और क्या हो सकता है। हमें इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेना चाहिए। ईश्वर हमारी सहायता करेगा। उस संध्या को जब देविका गायों को लेकर लौट रही थी उसे वही आवाज फिर सुनाई दी। देविका देविका क्या तुम मुझसे विवाह करोगी? आवाज कोमल और दुख भरी थी। देविका रुक गई उसने पीछे मुड़कर देखा लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया। वह हिचकिचाई। वह वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन फिर उसे मां की बात याद आ गई। और वह जल्दी से बोली हां यदि तुम कल सुबह मेरे घर आ जाओ तो मैं तुमसे विवाह कर लूंगी। वह बड़ी तेजी से गायों को हांकती हुई घर चली गई। अगले दिन सुबह रानी अवंती जरा जल्दी उठ गई। उन्होंने जाकर बाहर का दरवाजा खोला। देखने के लिए कि कोई प्रतीक्षा तो नहीं कर रहा। वहां कोई भी नहीं था। अचानक उसे एक धक्का सा लगा और वह स्तब्ध रह गई। एक बड़ा अजगर कुंडली मारे सीढ़ियों पर बैठा था। रानी अवंती सहायता के लिए चिल्लाई। देविका और नौकर भागे-भागे आए कि क्या बात है। तभी एक आश्चर्यजनक बात हुई। अजगर विनम्र शब्दों में बोला, नमस्कार मुझे आमंत्रित किया गया था इसलिए मैं आया हूं। आपकी लड़की ने मुझसे वादा किया था कि यदि मैं सुबह घर आ सकूं तो वह मुझसे विवाह कर लेगी। मैं इसीलिए यहां आया हूं। रानी अवंती की समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे। उसे तो यही आशा थी कि किसी दिन कोई सुंदर नौजवान लड़का उसकी बेटी से विवाह करने आएगा। उसने यह कभी नहीं सोचा था कि वह अजगर होगा। एक नौकर भागकर रानी रूपमती के पास गया और उसे उसने सारी घटना बताई। रानी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुई। वह उसी समय अपने नौकरों के साथ रानी अवंती के घर गई और कहा। यदि राजकुमारी देवी ने किसी के साथ विवाह का वादा किया है तो उसे अपना वादा अवश्य निभाना चाहिए। रानी होने के कारण यह देखना मेरा कर्तव्य है कि वह अपना वादा पूरा करे। उसी दिन विवाह हो गया। रानी अवंती और देविका के लिए यह कोई प्रसन्नता का समय नहीं था। लेकिन इतने दुर्भाग्य सहने के बाद वह किसी भी प्रकार की विपत्ति का सामना करने को तैयार थी। विवाह के पश्चात अजगर अपनी पत्नी के साथ कमरे में गया। सारी रात रानी अवंती ने प्रार्थना करते हुए बिताई कि उसकी बेटी ठीक-ठाक रहे। दूसरे दिन बड़े सवेरे उसने देविका के कमरे का दरवाजा खटखटाया। एक सुंदर नवयुवक ने दरवाजा खोला। देविका उसके पीछे खड़ी थी। मैं आपको कह नहीं सकता कि मेरी जान बचाने के लिए मैं आपका और देविका का कितना आभारी हूं। उस नवयुवक ने कहा मैं एक श्राप के कारण अजगर बन गया था। एक वन देवता मुझसे क्रुद्ध थे और उन्होंने मुझे अजगर बना दिया।

[5:22]बाद में उन्हें अपनी करनी पर दुख हुआ तब उन्होंने कहा कि यदि कोई राजकुमारी मुझसे विवाह कर लेगी। तो मैं फिर से मनुष्य बन जाऊंगा और अब देविका ने मुझसे विवाह कर लिया है। मेरा श्राप उतर गया है। अब मैं फिर कभी अजगर नहीं बनूंगा। रानी अवंती बहुत प्रसन्न हुई। वह अपनी बेटी और दामाद को राजा से मिलाने के लिए ले गई। यह बड़ी विचित्र घटना थी चारों ओर से लोग इस विचित्र नवयुवक को देखने राजमहल में आने लगे। सभी उत्सुक थे सिवाय रानी रूपमती के। रानी रूपमती बहुत गुस्से में थी। उसने झल्लाते हुए अपने आप को कमरे में बंद कर लिया। देविका का भाग्य उससे देखा नहीं जा रहा था। वह चाहती थी कि उसकी बेटी माया भी ऐसी भाग्यशाली बने। आखिरकार उसे एक युक्ति सूझी उसने उसी समय अपनी बेटी को बुलाया और कहा। देविका का विवाह तो अब हो गया है इसलिए गायों को जंगल में चराने के लिए तुम ले जाया करो। नहीं तारा चीख कर बोली। इतने नौकर हैं तो फिर मैं क्यों गाय चराने जाऊं? यह मेरी आज्ञा है रानी क्रुद्ध होकर बोली। एक बात और भी सुनो। यदि जंगल में कोई तुमसे विवाह का प्रस्ताव करें तो तत्काल कह देना कि तुम विवाह के लिए राजी हो। यदि वह अगले दिन सुबह हमारे घर आ जाए। माया अपनी मां की इस योजना से भयभीत हो गई। वह गायों को जंगल में नहीं ले जाना चाहती थी। वह खूब रोई लेकिन रानी रूपमती फिर भी नहीं पिघली। माया को उनकी आज्ञा माननी पड़ी। माया रोज सुबह गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाती और फिर शाम के समय वापस ले आती। लेकिन उसने एक बार भी जंगल में किसी तरह की आवाज नहीं सुनी और उसने यह बात अपनी मां रूपमती से कही। यह सुनकर रानी रूपमती निराश नहीं हुई क्योंकि जंगल में कोई अजगर तो था नहीं जो माया से विवाह का प्रस्ताव करता। इसलिए उसने खुद अजगर ढूंढने का निश्चय किया। उसने अपने नौकरों को एक अजगर लाने की आज्ञा दी। बहुत खोज करने पर काफी दिनों पश्चात उन्हें एक बहुत बड़ा अजगर मिला। उसे पकड़कर वे राजमहल ले आई। आखिरकार रानी का भी प्राय पूरा हो गया। और उसने माया का विवाह इस अजगर से कर दिया। अब रानी को संतोष हुआ। विवाह की रात माया तथा अजगर को एक कमरे में बंद कर दिया गया। रानी रूपमती अधीरता से सुबह की प्रतीक्षा कर रही थी। उसने सवेरे-सवेरे ही माया के कमरे का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई उत्तर ना मिला। उसने जरा और जोर से दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा तब भी ना खुला। रानी से और प्रतीक्षा ना की गई और उसने धक्का देकर दरवाजा खोल दिया। मोटा अजगर जमीन पर पड़ा हुआ था लेकिन माया का कहीं पता नहीं था। रानी रूपमती चीख पड़ी महल में सभी ने उनका चीखना सुना। राजा और नौकर भागे आए कि क्या बात है। राजकुमारी कहां है सब चिल्लाए। वह तो अजगर के पेट में होंगी रसोईया बोला। देखो वह कितना मोटा हो गया है। रानी रूपमती अब बड़ी जोर-जोर से रोने लगी। राजा भी रोने लगा। रसोइया अपना सबसे बड़ा चाकू ले आया। वह बोला यदि वह अब तक जीवित हुई तो मैं राजकुमारी को बचाने की कोशिश करूंगा। उसने अजगर का पेट चीर डाला। माया अच्छी भली जीवित थी। रसोइए ने उसे बाहर खींचा। माया चीख मारकर अपनी मां की तरफ भागी। अजगर की मृत्यु हो गई और साथ में रानी रूपमती की इस इच्छा की भी कि वह तारा का विवाह देवी की तरह ही किसी योग्य और संपन्न युवक से करें। प्यारे दोस्तों इस कहानी से हमें एक बहुत महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि हमें कभी भी दूसरों का बुरा नहीं सोचना चाहिए। कभी भी अपने अनायास स्वार्थ के लिए दूसरों के प्रति अपने मन में ईर्ष्या का भाव नहीं रखना चाहिए। क्योंकि ईर्ष्या और द्वेष की भावना रखने वाला इंसान अंत में खुद को ही नुकसान पहुंचाता है। प्यारे दोस्तों अगर कहानी रोमांचक और प्रेरणादायक लगी तो वीडियो को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब कर लेना धन्यवाद।

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