[0:00]दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसमें एक गहरा सच छिपा है संगत का असर यह कहानी है एक राजा और दो तोते की लेकिन सुनने में भले ही यह कहानी छोटी सी बात लगे पर यकीन मानिए यह कहानी हमारी जिंदगी का आईना है तो चलिए शुरू करते हैं बहुत समय पहले की बात है एक राजा था बुद्धिमान और न्यायप्रिय वह अपने राजकाज के कामों से कुछ समय निकालकर जंगल की ओर घूमने निकला राजा का काफिला जंगल के रास्ते से गुजर रहा था सूरज की किरणें पत्तों में से छन-छन कर नीचे गिर रही थी हवा में मिट्टी और पत्तों की खुशबू घुली थी सब कुछ बड़ा शांत और सुंदर लग रहा था पर अचानक जंगल में से एक अजीब आवाज आई मारो मारो, लूटो-लूटो राजा चौंक गया उसके सिपाही भी सतर्क हो गए चारों तरफ निगाहें दौड़ाई तो देखा एक पेड़ की डाल पर बैठा एक तोता चिल्ला रहा था राजा को अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ उसने सोचा अरे यह कैसा तोता है पक्षी तो मीठी बोली के लिए जाने जाते हैं यह गालियां क्यों दे रहा है और लूटपाट की बातें क्यों कर रहा है राजा को बहुत गुस्सा आया उसने अपने सिपाहियों से कहा इसे पकड़ो मगर सिपाही जैसे ही पास पहुंचे तोता फुर से उड़ गया राजा ने सिर हिलाया और आगे बढ़ गया कुछ ही दूर चलने के बाद राजा अपने काफिले के साथ एक सुंदर आश्रम के पास पहुंचा चारों तरफ हरियाली, फूलों की खुशबू और एक शांत माहौल राजा जैसे ही आश्रम के फाटक पर पहुंचा वहां एक और तोता बैठा मिला मगर वह तोता तो कुछ और ही कह रहा था उसने बेहद मधुर आवाज में कहा स्वागतम सुस्वागतम राजा महाराज आपका स्वागत है राजा के कदम वहीं रुक गए उसके चेहरे पर आश्चर्य झलक उठा उसने सोचा अरे यह तोता तो कितना मीठा बोल रहा है वही रंग वही आकार और परों पर भी वही हरी आभा पर आवाज में जमीन आसमान का फर्क इतनी देर में आश्रम के ऋषि बाहर आ गए उन्होंने राजा को देखा हाथ जोड़कर बोले आइए राजन आपका स्वागत है आपने हमारे आश्रम में पधार कर इसे पवित्र कर दिया राजा मुस्कुराया ऋषियों ने उन्हें भीतर बुलाया आश्रम में उगे हुए फल मीठे बेर जामुन सब राजा को परोसे राजा बहुत खुश हुआ उसने ऋषियों से कहा ऋषिवर एक बात पूछूं अभी थोड़ी ही देर पहले एक तोता मिला था वह गालियां दे रहा था मारो-मारो, लूटो-लूटो कह रहा था और यहां यह तोता इतना मीठा बोल रहा है दोनों का रंग एक, आकार एक और शायद जात भी एक फिर ऐसा कैसे हो सकता है ऋषिवर मुस्कुरा दिए उन्होंने राजा को पास बैठाया और कहा राजन बात बस इतनी सी है वह दोनों तोते एक ही मां के बच्चे हैं दोनों का जन्म एक ही घोसले में हुआ दोनों के पंखों का रंग आवाज सब एक जैसे हैं मगर उनकी परवरिश अलग-अलग जगह हुई एक तोता डाकुओं के हाथ लग गया रोज उनकी गालियां सुनता उनकी बातें सुनता और वही सीख गया मारो-मारो, लूटो-लूटो दूसरा तोता मेरे आश्रम में आ गया और यहां उसने ऋषियों के मुंह से मधुर वचन सुने और वही बोलने लगा राजा दोष तो इन तोतों का भी नहीं है दोष तो संगत का है जैसा वातावरण वैसी भाषा और वैसा ही व्यवहार इंसानों के साथ भी ऐसा ही होता है इंसान जैसी संगत में रहता है वैसे ही विचार और आदतें उसके अंदर घर बना लेती हैं राजा ऋषि की बात सुनकर गहरी सोच में पड़ गया उसे एहसास हुआ कि ये तोते की कहानी नहीं बल्कि पूरे समाज की सच्चाई है राजा ने कहा ऋषिवर आप सच कह रहे हैं संगत ही आदमी को सजाती है या बिगाड़ती है इंसान खुद तो निर्दोष जन्मता है मगर उसके आस-पास जो लोग होते हैं जिनके बीच वह पलता-बढ़ता है वही उन्हें अच्छा या बुरा बना देते हैं राजा ने गहरी सांस ली और उसने प्रण किया कि अब से वो अपने महल में अपने राज्य में वह सब ध्यान रखेगा कि बच्चे अच्छी संगत में रहे ताकि उनका मन भी स्वच्छ रहे और विचार भी नेक रहे ऋषियों ने आशीर्वाद दिया राजा ने उन्हें प्रणाम किया और वापस अपने महल की ओर चल पड़ा लेकिन उसके दिल में ऋषि की बात हमेशा के लिए बस गई दोस्तों कहानी तो खत्म हो गई मगर सोचने वाली बात यही है हम सब अपने बच्चों अपने दोस्तों यहां तक कि खुद पर भी ध्यान दें कि किसके साथ उठते बैठते हैं कौन सी बातें सुनते हैं और क्या आदतें सीख रहे हैं अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो लाइक कीजिए शेयर कीजिए और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलिए फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए जय हिंद

संगत का असर 🌿 | Motivational Story in Hindi | Moral Kahani | Kahani Junction
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