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मिट्टी का AC | Mitti Ka AC | Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Story in Hindi | Story

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[0:10]क्या पता कोई जानवर घर में घुस आया हो और वो एसी को तोड़ गया हो। मैं तो खिड़की का दरवाजा बंद करके गई थी। खिड़की कौन खोल सकता है?
[5:39]बहुत समय पहले की बात है। हस्तिनापुर गांव में सूरज के अस्त होने का समय हो गया था और चांद के निकलने का। तभी सूरज चांद से कहता है। अरे भाई एक बात बताओ जब भी तुम आते हो तो कोई तुम्हें आदर सम्मान देकर प्रणाम क्यों नहीं करता?
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[0:10]चंदन ओ चंदन बेटा कहां है? बेटा यह मटके उठवाने में मैं जरा मेरी मदद कर देता। अरे किसे आवाज लगा रहे हो? चंदन मुखिया जी के घर गया हुआ है। बोल रहा था उनके बेटे किशोर ने गांव के सब बच्चों को अपने घर बुलाए है। जरूर कोई नई चीज शहर से मंगवाई होगी किशोर की आदत है। जब भी कुछ नया मंगवाता है, गांव के बच्चों को चिढ़ाने के लिए बुला लेता है। अब चंदन देखना आते ही कोई फरमाइश रख देगा। वो आ गया। मां बापू, आपको पता है किशोर ने हवेली में इतने बड़े-बड़े चार एसी लगवाए हैं। उसके कमरे का एसी तो मानो ऐसा चल रहा था जैसे बर्फ की सिल्ली पर बैठे हो। बापू काश हम भी एसी में रह पाते। इतनी गर्मी पड़ रही है। एसी के अलग ही मजे हैं। बेटा हमारी इतनी गुंजाइश नहीं कि हम मुखिया जी की तरह घर में एसी लगवा सके। किशोर भी ना तुम लोगों को ना जाने घर पर क्यों बुला लेता है। उसे पता है कि हम गरीबों की इतनी हैसियत नहीं है कि हम उसके जैसी जिंदगी जी सके। तुम मत जाया कर किशोर के घर। अच्छा मैं घड़े बेचने जा रहा हूं। थोड़े घड़े बनाने बाकी है, वो तू बना लेना। चंदन का पिता किशन घड़े बेचने चला जाता है। चंदन घड़े बनाने बैठ जाता है। घड़े बनाते बनाते उसका दिमाग अभी भी किशोर के घर लगे एसी में था। तभी उसके दिमाग में एक आईडिया आता है। अगर मैं मिट्टी का ऐसी बनाऊं तो वह भी तो हमें बहुत ठंडक दे सकता है। अगर मैं कोशिश करूं तो मिट्टी का ऐसी बना सकता हूं। चंदन बेटा किस सोच में पड़ गया। तेरे बापू आएंगे तो गुस्सा करेंगे कि तूने अभी तक घड़े नहीं बनाए। मां, मैं मिट्टी का एसी बनाने के बारे में सोच रहा हूं। अगर हम किशोर के जैसा एसी नहीं ले सकते तो हम मिट्टी का एसी तो बना ही सकते हैं ना। मिट्टी का ऐसी? बेटा वो तू कैसे बनाएगा? मां चिंता मत करो। मैं कोई ना कोई जुगाड़ कर लूंगा। चंदन अब रोजाना अपने मिट्टी का एसी बनाने की तैयारी में जुट गया और फिर एक दिन चंदन ने बहुत ही बढ़िया मिट्टी का एसी बनाकर तैयार कर दिया। चंदन के माता-पिता तो हैरान थे कि चंदन ने मिट्टी का एसी तैयार कर लिया है। चंदन अपने सभी दोस्तों को अपने घर मिट्टी का एसी दिखाने के लिए बुलाता है जिसमें किशोर भी शामिल था। अरे वाह चंदन, हैं? तेरा मिट्टी का एसी तो बहुत बढ़िया है यार। मेरे लिए भी एक मिट्टी का एसी बना दे भाई। हमारे घर भी बहुत गर्मी होती है। हां, हां बना दूंगा। चिंता मत करो। मैं तुम सबके लिए मिट्टी का एसी बना दूंगा। अरे मेरा ऐसी बहुत बढ़िया है। तुम्हारा यह मिट्टी का सस्ता एसी मेरे एसी के सामने कुछ भी नहीं है। हे हे किशोर एक तो चंदन ने इतनी मेहनत से यह एसी तैयार किया है और तू उसे गलत बोले जा रहा है। जा हमें तेरे से बात नहीं करनी है यार जा। मैं देख लूंगा तुम सबको मैं। जानते नहीं हो मैं गांव के मुखिया का बेटा हूं। किशोर गुस्से में वहां से चला जाता है। अरे तुम्हें उससे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी। चलो जाने दो। जब उसका गुस्सा ठंडा होगा, अपने आप आ जाएगा। मां बापू, आओ ना हम सब इस एसी की ठंडी हवा का मजा लेते हैं। चंदन, तूने तो वाकई में बहुत बढ़िया एसी बनाया है रे। यह तो बहुत ठंडक दे रहा है। पूरा कमरा ठंडा हो गया है भाई। ठीक कह रहे हो। हमारा चंदन सचमुच बहुत दिमाग वाला है। पड़ोस के सारे लोग अब इससे ही ऐसा एसी बनाने के लिए कह रहे हैं। हां मां, मैं सबके लिए बना दूंगा। कम से कम गर्मी में सबको परेशानी तो नहीं होगी। मिट्टी का एसी लग जाने से सचमुच गर्मी बहुत कम हो गई थी। आराम से चंदन और उसके माता-पिता रात में सो जाते थे। पर एक दिन चंदन अपने मां-बापू के साथ बाजार गया हुआ था। जब वो वापस लौटा तो उसने देखा उसके घर की खिड़की खुली हुई है और उसका मिट्टी का एसी टूट कर बिखरा पड़ा है। मां बापू ये क्या हो गया? हमारा एसी किसने तोड़ दिया? हमारे घर में कौन आ सकता है? क्या पता कोई जानवर घर में घुस आया हो और वो एसी को तोड़ गया हो। मैं तो खिड़की का दरवाजा बंद करके गई थी। खिड़की कौन खोल सकता है? पर अगर जानवर भी घर में घुसता तो और सामान भी तो छेड़खानी करता। और सामान तो बिखरा हुआ ही नहीं है। सिर्फ ऐसी टूटा है। हो ना हो जरूर किसी की साजिश है। तभी एक लड़का चंदन के घर आता है। चंदन तेरा मिट्टी का एसी किशोर ने तोड़ा है। वो हंसते हुए अपने घर के नौकरों को यह बात बता रहा था। तब मेरे बापू ने सुन ली। तुम तो जानते ही हो बापू किशोर के घर पर काम करते हैं। बापू किशोर ने ऐसा क्यों किया? मैंने उसका क्या बिगाड़ा था जो उसने मेरा ऐसी तोड़ दिया। मैंने कितनी मेहनत से बनाया था बापू। तभी मुखिया जी किशोर के साथ आते हैं। अरे मुखिया जी आप आइए आइए। किशन मैं तो किशोर को यहां माफी मांगने के लिए लेकर आया हूं भाई। किशोर बेटा, सब से माफी मांगो। मुझे पता चल गया है कि किशोर ने चंदन का एसी तोड़ दिया है। ये बात मुझे इसकी मां ने बता दी है। भले ही मैं गांव का मुखिया हूं, पर मेरा खुद का बेटा गलत करें। ये मैं कैसे बर्दाश्त कर सकता हूं। अभी यह छोटा है। मैं इसे अभी तो समझा लूंगा ताकि बड़े होने तक इसे सही गलत काम की पहचान हो जाए। किशोर बेटा तुमने चंदन का एसी तोड़कर ठीक नहीं किया। चंदन से माफी मांगो। मुझे माफ कर दो चंदन। मुझसे गलती हो गई। मैं घबरा गया था कि अगर तुम्हारा मिट्टी का एसी आ गया है तो अब मेरे दोस्त मुझसे दूर हो जाएंगे। मेरे पास कोई भी खेलने के लिए नहीं आएगा क्योंकि तुम सबके घर के लिए मिट्टी का एसी बनाने वाले हो। पहले मेरे एसी के बहाने सब बच्चे मेरे पास खेलने के लिए आ जाते थे, पर पिछले कुछ दिनों से कोई भी मेरे पास नहीं आया। इसलिए मुझे तुमसे ईर्ष्या होने लगी और मैंने तुम्हारा एसी तोड़ दिया। कोई बात नहीं किशोर मैं नया एसी बना लूंगा। पर तुमने यह कैसे सोच लिया कि मैं और बाकी दोस्त तुम्हें छोड़कर चले जाएंगे। हम तुम्हारे दोस्त हैं यार और दोस्त कभी एक दूसरे से अलग नहीं होते। तभी सारे बच्चे वहां आ जाते हैं। किशोर और चंदन एक दूसरे के गले लग जाते हैं। यह तो मुखिया का बड़प्पन था कि उसने अपने बेटे को अच्छी सीख दी। चंदन फिर से एक नया मिट्टी का एसी बनाता है। चंदन खुश था कि उसने एक बार फिर मेहनत करके मिट्टी का एसी बनाकर तैयार कर ही लिया। चंदन और उसके माता-पिता बहुत अच्छे स्वभाव के थे। उन्होंने अपने पड़ोसियों की भी मदद की और भरी गर्मियों में थोड़ी राहत मिल जाए। इसके लिए मिट्टी का एसी बनाकर उन गरीब गांव वालों को भी दिया। सब गांव वालों ने चंदन की बहुत तारीफ की।

[5:39]बहुत समय पहले की बात है। हस्तिनापुर गांव में सूरज के अस्त होने का समय हो गया था और चांद के निकलने का। तभी सूरज चांद से कहता है। अरे भाई एक बात बताओ जब भी तुम आते हो तो कोई तुम्हें आदर सम्मान देकर प्रणाम क्यों नहीं करता? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है भाई। कई लोग मुझे भी प्रणाम करते हैं। पर मैं तो जब भी आता हूं सारी दुनिया जल चढ़ाकर और सूर्य नमस्कार करके मेरा स्वागत करती है। किंतु मैंने आज तक किसी को भी तुम्हारा स्वागत करते हुए नहीं देखा। चांद और सूरज की यह वार्तालाप हस्तिनापुर गांव के निवासी सुन रहे थे। तभी बिरजू कहता है। हम तो सिर्फ सूरज को ही अपना भगवान मानते हैं। चांद हमारे लिए कुछ नहीं है। नहीं ऐसी बात नहीं है। चांद भी हमारे लिए भगवान समान ही है। चांद भी हमें रोशनी देते हैं। सूरज भगवान तो हमें रोशनी और धूप देते हैं लेकिन चांद वो हमें क्या देते हैं? लेकिन सारी रात तो हम सोए रहते हैं। तो फिर उस रोशनी का हम क्या करेंगे? हमें चांद की जरूरत नहीं है। हां अगर चांद नहीं भी आएगा तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हां उसका होना ना होना एक ही बात है। तुम यह क्यों भूल रहे हो करवा चौथ वाले दिन इन्हीं की पूजा करने के बाद तुम्हारे लिए रखा गया व्रत पूरा होता है। लेकिन शुरुआत तो सूरज भगवान की पूजा से ही होती है। गांव वालों की बातें चांद और सूरज बड़े ध्यान से सुन रहे थे। उनकी बातें सुनकर सूरज तो खुश हो गया लेकिन चांद थोड़ा उदास हो गया। फिर सूरज चांद से कहने लगा। देखा, हस्तिनापुर के लोग भी मुझे ही अपना भगवान मानते हैं और उनकी नजर में तुम्हारी कोई अहमियत नहीं है। परंतु मैं भी तो इन्हें रोशनी देता हूं और अगर मैं ना रहूं तो मेरे बिना इनकी जिंदगी भी अस्त व्यस्त हो जाएगी। यह तुम्हारी गलतफहमी है। इन लोगों को तुम्हारी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। अगर मेरी जरूरत किसी को भी नहीं है तो ठीक है। आज के बाद मैं आऊंगा ही नहीं। इसके बाद चांद वहां से चला जाता है और उसके जाते ही सारे गांव में अंधेरा छा जाता है। वैसे तो आसमान में कुछ सितारे होते हैं, लेकिन उनकी रोशनी ना के बराबर होती है। लेकिन अंधेरा इतना ज्यादा होता है कि किसी को भी कुछ दिखाई नहीं देता। हस्तिनापुर गांव में बुवाई का समय शुरू हो गया था। इसीलिए किसानों को सुबह जल्दी उठकर खेतों में जाना होता है। लेकिन चांद के ना होने से बाहर घनघोर अंधेरा होता है। अरे उमा जल्दी से उठ जाओ। आज खेत की बुवाई करने जाना है। जल्दी से उठ जाओ वरना देर हो गई तो बाहर धूप बहुत तेज हो जाएगी। फिर खेतों में काम करना मुश्किल हो जाएगा। हां बुवाई के लिए तो जाना है पर अभी बाहर बहुत अंधेरा है। आप भी सो जाओ जी और मुझे भी सोने दो। मुझे लगता है बाहर सुबह होने वाली है। अब हमें चलना चाहिए। वो तो आप सही कह रहे हो जी पर बाहर इतना अंधेरा है कि हम जाएंगे कैसे? ठीक है फिर बाद में ही चलते हैं। इसके बाद दोनों सुबह का इंतजार करने लगे। फिर जब सुबह हुई तो दोनों खेतों के लिए निकल पड़े। लेकिन थोड़ी ही देर में सूरज सर पर आ गया और खेत में काम करना मुश्किल हो गया। आह बहुत गर्मी हो रही है जी। चलो घर चलते हैं। कल सुबह जल्दी आकर काम कर लेंगे। हां तुम सही कह रही हो। इस भयानक गर्मी में तो हालत खराब हो गई। अगले दिन जब दोबारा काम के लिए उठते हैं तो बाहर बहुत अंधेरा होता है और बाद में जब काम पर जाते हैं तब तक तेज धूप हो जाती है। इस समस्या से परेशान होकर पवन सूरज भगवान से कहता है। हे सूर्यदेव अगर आप रात को भी उपस्थित रहे तो हमें कभी भी चांद की जरूरत नहीं पड़ेगी और हम केवल आपकी ही पूजा करेंगे। अरे जल्दी से खाना बना दो। मुझे बहुत तेज भूख लगी है। नींद आ रही है सोना भी है। लेकिन अभी तो दिन हो रहा है जी। क्या अभी से खाना बना दूं। हां मुझे लगता है आज शाम नहीं होगी। तुम जल्दी से खाना बना दो। मुझे बहुत भूख लगी है। अच्छा ठीक है बना देती हूं। फिर दोनों खाना खा लेते हैं लेकिन तब भी रात नहीं होती और दोनों सोने के लिए चले जाते हैं। बहुत गर्मी हो रही है बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही। ऐसा करता हूं जाकर नहा लेता हूं। इसके बाद पवन नहाने चला जाता है। नहाने के बाद भी बहुत गर्मी हो रही है। तभी बाहर शोर होता है। पवन और उमा बाहर निकल कर देखते हैं तो बिरजू का बेटा बिट्टू बेहोश पड़ा हुआ था। क्या हो गया मेरे बच्चे? कोई जल्दी से पानी लाओ। फिर उमा जल्दी से पानी लाकर बिट्टू के मुंह पर छिड़काव करती है। कुछ ही देर में बिट्टू होश में आ जाता है। लगता है दिन रात धूप लगने की वजह से यह बेहोश हो गया था। इसके बाद सभी सोने के लिए चले जाते हैं। लेकिन गर्मी की वजह से किसी को भी नींद नहीं आ रही थी। सारी रात लोगों की ऐसे ही कट जाया करती। इतनी गर्मी में तो हम लोग मर ही जाएंगे। काश सूरज ढल जाता तो इतनी गर्मी नहीं होती और हम लोग चैन से सो पाते। चुप रहो तुम थोड़ी सी गर्मी सह नहीं कर सकती। ऐसे ही एक हफ्ता बीत जाता है लेकिन हस्तिनापुर के लोग बिल्कुल भी चैन से नहीं सो पाते और देखते ही देखते कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगती है। यह सब तुम्हारे कारण ही हो रहा है। ना तो तुम चांद का अपमान करते और ना तो वह यहां से जाते। इसके बाद पवन बाहर जाकर सूर्यदेव से प्रार्थना करता है। हे सूर्य देवता, अब से आप केवल दिन में ही रहिए। हम आपकी गर्मी सह नहीं कर पा रहे हैं। रात को हमें चांद की ही जरूरत है। इसके बाद पवन और सभी गांव वाले चंद्रदेव को पुकारने लगते हैं। हे चंद्रदेव, हमें माफ कर दीजिए। हमें आपकी भी उतनी ही जरूरत है जितनी सूरज की। हां चंद्रदेव, जहां दिन सूरज के बिना अधूरा है वहीं रात आपके बिना अधूरी है। अब से हम आपकी भी उसी तरह पूजा करेंगे। जिस तरह सूर्यदेव की करते हैं। ठीक है मैं रात में तुम लोगों को रोशनी देने के लिए फिर से उपस्थित रहूंगा। मुझे माफ कर दो मेरे भाई। अब मुझे समझ आ गया है कि जितनी जरूरत इस दुनिया को मेरी है उतनी ही तुम्हारी। सूरज ढल गया और अंधेरा होने लगा। तब चांद ने अपनी रोशनी चारों ओर बिखेर दी। इसके बाद सभी गांव वालों ने सर झुकाकर चांद का स्वागत किया और सभी गांव वाले पूरे एक हफ्ते बाद चैन की नींद सोए। बेस्ट बडीज़

[11:16]हेलो फ्रेंड्स थैंक्स फॉर वाचिंग दिस वीडियो। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया है तो प्लीज लाइक सब्सक्राइब कमेंट करें इस वीडियो पर। और हां शेयर करना भी ना भूले। और भी मजेदार वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए बेल आइकॉन को दबाएं। देखते रहिए। बेस्ट बडीज।

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