[0:00]एक दिन दादी अपनी पुरानी अलमारी देख रही थी तभी उसे एक चमत्कारी किताब मिली. दादी सोच में पड़ गई वह आराम से बैठकर किताब पढ़ने लगी. किताब में साफ लिखा था तुम्हारे घर के बाहर जमीन में एक घड़ा दबा है उसे निकाल लो तुम मालामाल हो जाओगी. दादी बिना देर किए बाहर गई और जमीन खोदने लगी. थोड़ी देर बाद उसे सच में एक सोने का घड़ा मिला. दादी घड़ा घर लाई और जैसे ही उसे खोला अंदर से एक चमत्कारी पेंसिल निकली. दादी पेंसिल को ध्यान से देखने लगी तभी रहस्यमई आवाज आई दादी अब तुम मालामाल हो जो भी चाहिए कागज पर लिख दो सब पूरा होगा. दादी ने पेंसिल को बेकार समझकर टेबल पर रख दिया और सो गई. अगले दिन दादी ने पेंसिल को आजमाया. उसने किताब में खाने का चित्र बनाया. थोड़ी ही देर में स्वादिष्ट खाना उसके सामने आ गया. दादी खुश हो गई. इस बार उसने किताब में हीरा लिखा. जैसे ही लिखा सामने ढेर सारे हीरे आ गए. अब दादी समझ गई कि पेंसिल सच में चमत्कारी है. दादी सारे हीरे बैलगाड़ी में लादकर गरीबों में बांटने लगी. फिर घर आकर उसने किताब में बंगला लिखा. अचानक उसकी झोपड़ी एक बड़े बंगले में बदल गई. दादी खुशी से नाचने लगी. सुबह दादी मंदिर के पास गई. वहां उसने गरीब और भिखारियों को पुराने कपड़ों में देखा. दादी ने तुरंत किताब में कपड़ा लिखा. बहुत सारे कपड़े आ गए और वह उन्हें बांटने लगी. तभी एक चालाक भिखारी दादी की पेंसिल छीनकर भाग गया. वह समझ चुका था कि पेंसिल चमत्कारी है. एक कोने में जाकर उसने कागज पर लाल कोबरा बना दिया. अचानक आसमान से ढेर सारे सांप गिरने लगे. पूरा गांव डर से कांप उठा. घबराकर दादी एक सपेरे के पास पहुंची और सारी बात बताई. सपेरा तुरंत गांव आया. उसने अपने झोले से सफेद पाउडर निकालकर चारों तरफ फेंका. उसी पल सारे सांप गायब हो गए. गांव फिर से शांत हो गया. लोगों ने उस चोर भिखारी को पकड़कर सजा दी. फिर सबने मिलकर दादी को सम्मानित किया. लेकिन दादी अभी भी रो रही थी क्योंकि किसी ने लाइक और सब्सक्राइब नहीं किया था.
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