[0:00]श्रद्धा विनोद अग्रवाल जी के सुमधुर भजनों को देखने के लिए कृपया गोविंद की गली चैनल को सब्सक्राइब, लाइक व शेयर करें। राधे-राधे।
[0:13]जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। वर्षा की रिमझिम बूंदों में काली घनघोर घटाओं में।
[2:00]वर्षा की रिमझिम बूंदों में काली घनघोर घटाओ में सावन की इस हरियाली में लहराती ललित लताओं में। सावन की इस हरियाली में लहराती ललित लताओं में झर-झर करते इन झरनों में नदियों की इन धाराओं में। झर-झर करते इन झरनों में नदियों की इन धाराओं में आनंद ना बिल्कुल आता है अब इन प्राकृतिक छटाओ में आनंद ना बिल्कुल आता है अब इन प्राकृतिक छटाओं में।
[3:13]इस सुंदरता से मतलब क्या जब पास मेरे घनश्याम नहीं? इस सुंदरता से मतलब क्या जब पास मेरे घनश्याम नहीं।
[3:33]जब पास मेरे घनश्याम जब पास मेरे घनश्याम नहीं। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। दुनिया की इस फुलवारी में जब वह बसंत ऋतु आती है। दुनिया की इस फुलवारी में जब वह बसंत ऋतु आती है। फूले-फूलो को देख-देख दिन रात धड़कती छाती है। फूले-फूलो को देख-देख दिन रात धड़कती छाती है। भंवरे जब गुंजन करते हैं कोयल जब कूक सुनाती है। भंवरे जब गुंजन करते हैं कोयल जब कूक सुनाती है। मीठी-सी तुम्हारी वो बोलन घुंघरावली तेरी वो अलकन। मीठी-सी तुम्हारी वो बोलन घुंघरावली तेरी वो अलकन।
[5:47]जब याद मुझे आ जाती है आहा करके रो उठता हूं मैं। जब याद मुझे आ जाती है आहा करके रो उठता हूं।
[6:07]फिर चैन है आठों याम नहीं जीवन के दिन सब बीत चले पर फिर चैन है आठों याम नहीं। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। दुनिया की इस फुलवारी में जब वह बसंत ऋतु आती है। दुनिया की इस फुलवारी में जब वह बसंत ऋतु आती है। फूले-फूलो को देख-देख दिन रात धड़कती छाती है। फूले-फूलो को देख-देख दिन रात धड़कती छाती है।
[7:39]जब शरत्चंद्र नभमंडल को अपनी किरणों से धोता है। जब शरत्चंद्र नभमंडल को अपनी किरणों से धोता है। प्रेमी चकोर निज प्रीतम के दर्शन कर हर्षित होता है। प्रेमी चकोर निज प्रीतम के दर्शन कर हर्षित होता है। जब खुली चांदनी में सारा संसार सुखी हो सोता है। जब खुली चांदनी में सारा संसार सुखी हो सोता है। उस वक्त मुझे है नींद कहां दिल तड़प-तड़प कर रोता है। उस वक्त मुझे है नींद कहां दिल तड़प-तड़प कर रोता है।
[8:56]श्री कृष्णचंद्र मुखचंद्र बिना इस शरद् चंद्र से काम नहीं। श्री कृष्णचंद्र मुखचंद्र बिना इस शरद् चंद्र से काम नहीं।
[9:15]जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। मित्रों को मन दे-दे करके देखा पर झूठा प्यार मिला। मित्रों को मन दे-दे करके देखा पर झूठा प्यार मिला। स्वार्थ हटते ही प्रेम घटा दिखलावे का व्यवहार मिला। स्वार्थ हटते ही प्रेम घटा दिखलावे का व्यवहार मिला। अमृत-सी प्रीति कही पाई फिर जहर वियोग अपार मिला। अमृत-सी प्रीति कही पाई फिर जहर वियोग अपार मिला। सब कुछ मंथन कर देख लिया संसार में कुछ ना सार मिला। सब कुछ मंथन कर देख लिया संसार में कुछ ना सार मिला। ये जन्म अटक-अटक कर भटक चुका निकला अच्छा परिणाम नहीं। ये जन्म अटक-अटक कर भटक चुका निकला अच्छा परिणाम नहीं।
[11:39]मोहे जनम जनम विश्राम नहीं। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। इस पापी के इन पापों पर मत दृष्टि डालना वनमाली। इस पापी के इन पापों पर मत दृष्टि डालना वनमाली। मत तोड़ डालना आशा की कलियों से भरी हुई डाली। मत तोड़ डालना आशा की कलियों से भरी हुई डाली।
[13:02]ये व्याकुलता और ये आंसू कहीं जाए ना यूं ही खाली। ये व्याकुलता और ये आंसू कहीं जाए ना यूं ही खाली। जय राम देव बिन श्याम मिले मोहे जनम जनम विश्राम नहीं। जय राम देव बिन श्याम मिले मोहे जनम जनम विश्राम नहीं।
[13:39]मोहे जनम जनम विश्राम नहीं जीवन के दिन सब बीत चले पर मोहे जनम जनम विश्राम नहीं।
[13:58]आए मिले घनश्याम। जीवन के दिन सब बीत चले पर आए मिले घनश्याम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं। तन उन पे न्योछावर कर डालूं अब और किसी से काम नहीं।
[14:55]गोविंद गोविंद गोविंद गोविंद गोविंद गोविंद
[15:28]भवसागर में चलता फिरता हूं गिरता-पड़ता थकहारा हूं मैं। भवसागर में चलता फिरता हूं।
[16:14]भली-भांति सभी फल चख चुका हूं चाहता इनसे छुटकारा हूं मैं।
[17:03]सब ओर से हो के निराश प्रभु अब तो सब भांति तुम्हारा हूं मैं।
[19:13]वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

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