Thumbnail for दो रोटी की खातिर बंदे | Nirgun Bhajan | Kabir Vani Inspired Spiritual Song  by Siwale Sangeet

दो रोटी की खातिर बंदे | Nirgun Bhajan | Kabir Vani Inspired Spiritual Song

Siwale Sangeet

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[0:03]अरे पापी पेट का खेल निराला सबको नाच नचावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे अरे तू अपना राम भूलावे

[0:26]झूठ कपट की गठरी सिर पर तूने खूब उठाई साज को छोड़ा पकड़ा कूड़ा खोटी करी कमाई जिस काया को नित चमकावे वह तो साथ ना जावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे

[0:59]अरे अजगर करें ना चाकरी पंछी करें ना काऊ दास कबीरा यूं कहे सबके दाता राम लाख टके का मोल था तेरा कौड़ी में बिक गया कांच के टुकड़े देख के पगले पारस को फेंक दिया आंख होते भी अंधा बनकर क्यों ठोकर तू खावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे

[1:52]कुनबा कबीला सब मतलब का जब तक पास है दाम पाप की जब गठरी खुलेगी कोई ना आवे काम जिनके खातिर पाप बटोर वो ना भार बटावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे

[2:26]धोखे की रेखा बड़ी भीतर कबाड़ का ढेर यम का डंडा जब पड़े तब हो जावेगी देर जिस पेट खातिर पाप बटोर वो भी खाक हो जाना चिड़िया चुग गई खेत जब फिर क्या पछताना आज भरेगा कल फिर खाली यह तो रीत पुरानी इसी अगन में जल गया देखो राजा और अभिमानी समझ समझ के मूर्ख बंदे क्यों तू गोता खावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे

[3:45]पशु भी अपना पेट है भरता तुझ में क्या है खास ज्ञान की पूंजी पास में तेरे फिर भी है तू उदास मनुष्य तन यह दुर्लभ पाया क्यों माटी में मिलावे दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे

[4:19]कहत कबीर सुनो भाई साधु मन में रखो धीर रूखी सूखी खाए के ठंडा राखो नीर ईमान बचाओ हरि गुण गाओ यही मुक्ति की राह पेट की खातिर मत करो जीवन में यह गुनाह माटी किए देह माटी में मिल जाएं पेट की आग बुझाने को क्यों ही राब बेच खाए दो रोटी की खातिर बंदे तू अपना राम भूलावे अरे तू अपना राम भूलावे

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