[0:02]अगर आप फिल्म मेकर बनना चाहते हैं अपने शहर में ही अपने घर पर रहते हुए जॉब और स्टडी के साथ तो यह वीडियो आप लोगों के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि इसमें मैं बताने वाला हूं
[0:16]कि 12 वह कौन से एंगल होते हैं जिससे कि आप फिल्म मेकिंग को मास्टर कर सकते हैं।
[0:27]जो यह कैमरा एंगल्स होते हैं यह हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक हर जो डायरेक्टर है वह इसको मास्टर करता है ताकि वह अपनी स्टोरी टेलिंग को प्रभावी रूप से ऑडियंस तक पहुंचा पाए। यह सिर्फ एक टेक्निकल बात नहीं है। आप जो ऑडियंस के दिल के इमोशन को छूते हैं वह भी कैमरा एंगल से ही कई बार डिफाइन होता है। तो यह जानना बहुत जरूरी है कि एक एक्टर तो परफॉर्म कर रहा है लेकिन एज अ फिल्म मेकर आप अपनी टेक्निकल चीजों से कैसे परफॉर्म करेंगे। अगर वह भी सीख जाएंगे तो आपकी जो फिल्म मेकिंग है वह बहुत ही अच्छी हो सकती है। आज इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर बहुत बढ़ रहे हैं और यह बहुत अच्छी बात है क्योंकि नया-नया कंटेंट देखने को मिल रहा है। तो अब मोबाइल से भी फिल्म बन रही है आप कैमरे से भी बना रहे हैं किसी से भी बनाएं लेकिन अगर कैमरा एंगल की नॉलेज सही से है तो फिर अच्छा होगा क्योंकि अगर डायरेक्शन क्लियर है आपका और कैमरा एंगल प्रॉपर हैं तो आप समझ लीजिए आप किसी सींस के इमोशन एकदम है लेकिन अगर आपके कैमरा एंगल प्रॉपर नहीं है आप कहना कुछ चाह रहे हैं और टेक्निकली कैमरा एंगल कुछ और कह रहा है तो समझ लीजिए वह ब्लॉकबस्टर नहीं बल्कि फ्लॉप हो जाएगा मामला वह मैसेज कम्युनिकेट नहीं हो पाएगा। तो आज के वीडियो में इसको डिटेल में बताऊंगा क्या होता है क्यों होता है कैसे होता है क्यों करना चाहिए यह सब मैं डिटेल बताने वाला हूं। हेलो फ्रेंड्स मैं हूं वीरेंद्र राठौर वेलकम टू फिल्मी फंडेड जॉइन फिल्म्स एकेडमी द प्रैक्टिकल फिल्म स्कूल आप देख रहे हैं बॉलीवुड का google.cinemahd तो सेक्शन वन है कि व्हाई कैमरा एंगल मास्टर मतलब क्यों मास्टर करना चाहिए देखिए आप जो ऑडियंस को दिखाना चाहते हो वह आप कैमरा एंगल्स के थ्रू ही दिखा सकते हो ना कि वह जो कि ऑडियंस बस देख के अपने आप पर्सपेक्टिव लगाया अपने आप समझे जो आपका एज अ फिल्म मेकर पर्सपेक्टिव है वह कैमरा एंगल के थ्रू ही डिफाइन होता है। सेकंड सेक्शन है इमोशन अगर सेम ड्रामा है मान लीजिए कोई भी ड्रामा चल रहा है उस सीन में एक्टर कुछ भी परफॉर्म कर रहा है अगर कैमरा एंगल चेंज हो गया ना ड्रामा चेंज हो जाएगा मूड चेंज हो जाएगा और जो ऑडियंस का इमोशन फील करने का तरीका है पर्सपेक्टिव वह भी चेंज हो जाएगा। एक ही सीन है दो कैरेक्टर बात कर रहे हैं अगर एक एंगल लगा दिया हमने तो वह ऐसा लगेगा कि नॉर्मल बातचीत चल रही है लेकिन अगर एंगल बदल दिए तो ऐसा लगेगा शायद कोई बहुत खास बात चल रही है या बहुत ही स्केरी बात चल रही है या बात धमकी की हो रही है इतना कुछ बदल जाता है कैमरा एंगल बदलने से। तीसरा पॉइंट है सेक्शन वन में कि एडिटिंग के लिए बहुत अच्छा हो जाता है क्योंकि उनके लिए तो एक तरह से गोल्ड माइन हो गई है उनको जितने ज्यादा एंगल मिलेंगे जितने ज्यादा सीन मिलेंगे उतना ज्यादा अच्छे से वह अपनी स्टोरी को प्लान करके परफेक्टली ज्यादा एंगल्स के थ्रू ऑडियंस तक पेश कर पाएंगे। तो सेक्शन टू स्टार्ट करते हैं 12 कैमरा एंगल वह कौन से हैं आप यह याद रखिए कि आपको इन एंगल के थ्रू एक वैल्यू देनी है ऑडियंस को जो इमोशन आप कहना चाहते हैं वह कहने का एकमात्र जो उपाय है जो साधन है जो ऑप्शन है वह यही कैमरा एंगल है तो जो सबसे पहले कैमरा एंगल यूज होता है वह होता है वाइड शॉट जिससे कि इमोशन जो होते हैं जैसे आइसोलेशन है या स्केल आपको बहुत बड़ा दिखाना है या एनवायरमेंट इस्टैब्लिश करना है उसके लिए होता है और लोकेशन इस्टैब्लिश करने के लिए काम आता है तो उस टाइम के लिए वाइड शॉट आपको यूज करना चाहिए। लॉन्ग शॉट जिसमें कि इमोशंस जो हैं कैरेक्टर के जो उसके साथ वर्ल्ड की रिलेशनशिप है या उस एरिया की रिलेशनशिप है वह डेवलप होता है इसको यूज तब करना चाहिए जब आपके लिए एक्टर की पूरी बॉडी लैंग्वेज जो है वह दिखाना बहुत जरूरी है तो फिर इस शॉट को यूज करना चाहिए। इसके बाद होता है मीडियम शॉट जिसमें कि आपका अगर इमोशन मान लीजिए कंफर्ट का है कोई नॉर्मल कन्वर्सेशन चल रहा है कोई क्लेरिटी करनी है तो आपको मीडियम शॉट यूज करना चाहिए और तब यूज करना चाहिए जब डायलॉग और परफॉर्मेंस पर आपका फोकस हो तो आपको मिड शॉट का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि मिड शॉट जब ये लगता है तो उसकी परफॉर्मेंस है जो डायलॉग है वह बहुत अच्छे से दिखाई देते हैं ऑडियंस को। फोर्थ शॉट है कबा शॉट यह होता है मिड थाई से लेकर हेड तक इसमें जो इमोशन बहुत अच्छे से इस्टैब्लिश होता है वह होता है हिरोइस्म किसी को आपको बहुत पावरफुल दिखाना है रेडनेस दिखानी है कॉन्फिडेंस दिखाना है तो फिर इस इमोशन को बहुत अच्छे से यह पोर्ट्रेट करता है और इसको कब इस्तेमाल करना चाहिए जब आपको ना कहीं ना कहीं एक एक्शन का फील देना हो और वेस्ट को भी यूज करना हो तो फिर इस तरह के शॉट आपको लगाने पड़ते हैं। फिर आता है पांचवा क्लोजअप शॉट क्लोजअप शॉट में इमोशन जो है वह आपके बहुत अच्छे से पोर्ट्रेट होते हैं ट्रुथ वाले मतलब कोई सच बताने चाहते हैं आप तो आप उसको बोलेंगे कोई सस्पेंस वाली बात है तो उसको आप वहां से बता सकते हैं इंटेंसिटी की कोई चीज है तो वह बता सकते हैं या बहुत ही खास कोई दो-तीन वर्ड हैं जो आपको दिखाने हैं या कोई एक्सप्रेशन है या कोई इमोशन है वह एक्सप्रेस करना है तो फिर क्लोजअप शॉट लगाना चाहिए और कब होना चाहिए कब यूज कर सकते हैं जब एक्टर का इमोशन आपके लिए ऑडियंस के लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट हो तो फिर क्लोज शॉट लगाना चाहिए।
[5:11]इसके बाद होता है एक्सट्रीम क्लोजअप एक्सट्रीम क्लोजअप में जो इमोशन पोर्ट्रे हो पाते हैं वह होते हैं सस्पेंस वाले क्युरियोसिटी वाले सिंबॉलिज्म वाले क्योंकि एक्सट्रीम क्लोज है तो एक लुक भी ऐसा किया आइब्रो भी ऊपर की तो वह दिख जाता है एक्सट्रीम क्लोजअप में और इसको कब कब यूज करना चाहिए जब आपको किसी डिटेल को डीप मीनिंग देना हो जैसे कि आइज हो गया या हैंड्स हो गया या फिर ऑब्जेक्ट्स हो गया मान लो अगर मुझे दिखाना है कि यह मोबाइल उठा के वह बात कर रहा है और मोबाइल में कुछ है तो इतना एक्सट्रीम क्लोज शॉट बनेगा जिससे कि मोबाइल की स्क्रीन भी वहां पर दिख पाए या सिर्फ एक लुक भी देना है एक तो आइज़ का आ जाएगा एक्सट्रीम क्लोज और फिर बस लुक दिया और फिर देखें इस तरह के जो शॉट होते हैं उसमें एक्सट्रीम क्लोजअप बहुत काम आता है। इसके बाद होता है लो एंगल इसमें जो इमोशन बहुत अच्छे से दिखता है आपको ज्यादातर जो विलेन्स की एंट्री दिखेगी वह इसी में दिखेगी जहां पर पावर दिखाना होता है डोमिनेंस दिखाना होता है बहुत ही पावरफुल व्यक्तित्व दिखाना होता है या कोई पावरफुल पावर बिल्डिंग से या अ जो लोकेशन है उससे भी होती है तो भी लो एंगल शॉट यूज किया जाता है और कब यूज किया जाता है जब अगर हीरो की भी एक स्ट्रांग एंट्री हो रही है तब यूज होगा या फिर विलन की कोई डायलॉग्स हैं या फिर विलन दिखा रहा है कि मैं बहुत पावरफुल हूं तब ये यूज होगा तो जब भी पावर या डोमिनेंस वाली बात आएगी तो फिर लो एंगल शॉट लगना चाहिए। इसके बाद आता है टॉप एंगल शॉट यानी कि हाई एंगल शॉट भी बोलते हैं कई बार उसको और जब भी हमें कोई कैरेक्टर ऑब्जेक्ट या सब्जेक्ट को वीक दिखाना होता है उसको इनसिक्योर दिखाना होता है या फिर यह बताना है कि भई वह बहुत कमजोर है हेल्पलेस है वह फील कर रहा है हेल्पलेसनेस को तो फिर यह शॉट लगता है उससे क्या होता है कि वह जो ऑब्जेक्ट है वह जो कैरेक्टर है वह छोटा नजर आता है ऑडियंस को उसके पॉइंट ऑफ व्यू से इसलिए इस एंगल को यूज किया जाता है और उसको बोलते हैं टॉप एंगल शॉट। इसके बाद होता है डच एंगल डच एंगल में इमोशन जो पोर्ट्रेट कर सकते हैं वह है डिस्टरबेंस कुछ हो रहा है कंफ्यूजन हो रहा है डेंजर कुछ आपको दिखाना है तो हो सकता है और कब यूज कर सकते हैं कुछ ऑफ लग रहा हो अगर आपको सीन में कुछ ऑफ या मिसिंग वाला फील देना हो तो आप इस तरह के शॉट को यूज कर सकते हैं। फिर है ओवर द शोल्डर ओटीएच शॉट यह सबसे ज्यादा यूज होता है खास तौर से अगर आप टीवी शो देखेंगे तो उसमें तो बहुत ही मैक्सिमम लेवल पर यूज होता है और यह सबका फेवरेट शॉट भी है और सबसे ज्यादा कॉमन शॉट भी है जो हर किसी को लेना चाहिए इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर के लिए भी बहुत यूजफुल है इसमें जब रिलेशनशिप की डायनामिक्स दिखानी होती है कोई टेंशन दिखाना है तो भी यूज होगा और कन्वर्सेशन चल रहा है जब कोई भले कॉन्फ्लेट है कंफरेंट है करते हैं कैरेक्टर एक दूसरे से या किसी चीज पर एग्री भी करते हैं तब भी ओएस शोल्डर लगाया जाता है क्योंकि यह दो लोगों का कन्वर्सेशन हो रहा है उसको बेहतर तरीके से प्रेजेंट करने के लिए बहुत जरूरी होता है कि एक बार ऑडियंस अ बिहाइंड द शोल्डर से एक कैरेक्टर के दूसरे कैरेक्टर को देखें और फिर सेम एंगल से दूसरे कैरेक्टर को देखे तो वह उस सीन के साथ इवॉल्व हो पाते हैं इवॉल्व हो पाते हैं इसलिए ओवर द शोल्डर शॉट भी बहुत जरूरी होता है।
[8:10]इसके बाद 11वां होता है पीओवी शॉट यानी कि पॉइंट ऑफ व्यू शॉट पॉइंट ऑफ व्यू शॉट में इमोशन जो पोर्ट्रे होता है वह है इमर्जन का पर्सनल एक्सपीरियंस का कुछ भी आप एक्सपीरियंस कर रहे हैं मतलब आपका जो एक्टर है जो कैरेक्टर है वह एक्सपीरियंस कर रहा है तो पीओवी मतलब उसके पॉइंट ऑफ व्यू से अ शॉट होता है या फिर अ सेकंड कैरेक्टर के पॉइंट ऑफ व्यू से शॉट होता है जिससे कि उसके इमोशन बहुत क्लियरली अ दिख जाएं इसको कब यूज करना चाहिए जब आपका एक्शन हो इमोशनल मूवमेंट हो फियर हो या फिर थ्रिलिंग एलिमेंट हो। इसके बाद बारवा आता है कटवे शॉट कटवे शॉट जो इमोशन पोर्ट्रे को करते हैं वह है लेयरिंग कनेक्शन है सब टेक्स्ट है जब आप इसको इस्तेमाल कर सकते हैं और कब यूज करना चाहिए जब आपको एक ट्रांजिशन चाहिए एक बदलाव चाहिए पैरेलल एक्शन शो करना हो कोई कि भई इस चीज के साथ कहीं और पे यह भी हो रहा होगा तो वहां पर एक कटवे शॉट लगा दिया जाता है या इमोशन को रीइन्फोर्स करना हो तो भी लगा दिया जाता है कटवे शॉट कि भई घबराने की वजह से यह ऐसे हाथ यूं हो रहे हैं या कुछ हो रहा है नर्वसनेस तो वह कटवेज लिया हाथ का और उस इमोशन के साथ उसको अटैच कर दिया तो वह बहुत अच्छे से इस्तेमाल हो जाता है। सेक्शन थ्री है कि हाउ मल्टीपल एंगल्स लिफ्ट योर सीन आपके जो डिफरेंट कैमरा एंगल्स हैं वह लिफ्ट कर देते हैं मतलब उठा देते हैं उस इमोशन को उस ड्रामा को उस स्टोरी को अगर आपने उनको सही तरीके से इस्तेमाल किया है। तो आपके जो इमोशन है बहुत अच्छे से आते हैं इमोशंस हैं जो बहुत अच्छे से आता है जो आपकी स्टोरी टेलिंग है वह स्ट्रांग हो जाती है जो कैरेक्टर एस्टैब्लिशमेंट है वह बहुत स्ट्रांग हो जाता है और सबसे बड़ी बात ऑडियंस के साथ आपकी स्टोरी का आपके कैरेक्टर का एक कनेक्शन बिल्ड अप हो जाता है। देखिए इसको इस तरह से समझिए कि जो एंगल्स हैं वह आपके ब्रश है और जो आप शूट कर रहे हैं वह आपका कैनवास है एक भी स्ट्रोक एक भी पॉइंट अगर आपने गलत यूज किया तो आपकी पूरी की पूरी पेंटिंग स्टोरी टेलिंग की खराब हो जाएगी। लेकिन आपने बिल्कुल सही वे में यूज किया है तो फिर वह बहुत ही खूबसूरत पेंटिंग यानी कि बहुत ही खूबसूरत फिल्म बन के निकलेगी। सेक्शन फोर है व्हेन नॉट यूज अ मल्टीपल एंगल्स देखिए मैंने कई बार नए एमेच्योर फिल्म मेकर्स को देखा है कि वह हर सीन में डिफरेंट-डिफरेंट एंगल लेना चाहते हैं और बहुत सारे शॉट्स कई बार आपकी स्टोरी टेलिंग को किल भी कर देते हैं। यह बता दूं कि यह जो मैं आपको सारी जानकारी दे रहा हूं यह एक छोटा सा पार्ट चैप्टर भर है। अगर आप जॉब के साथ बिजनेस के साथ स्टडी के साथ फिल्म मेकिंग सीखना चाहते हैं अपने घर पर रहते हुए लेकिन प्रैक्टिकल फॉर्म में मतलब आप सीखेंगे ऑनलाइन और उसके साथ-साथ प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस से अपनी भी एक फिल्म बनाना चाहते हैं और प्रोजेक्ट बनाना चाहते हैं तो उसके लिए जॉइन फिल्म्स अकेडमी को कांटेक्ट कर सकते हैं स्क्रीन पर नंबर दिया हुआ है। तो मैं यह कह रहा था कि अगर आपने जरूरत से ज्यादा एंगल शूट किए और उसको आपने एडिटिंग में लगा दिया तो वह आपकी फिल्म की कहानी को मार देगा। मान लीजिए एक सिंगल कैरेक्टर है उसकी आपको लोनलीनेस दिखानी है तो उसमें मल्टीपल शॉट लगा के ना उसको किल हो जाएगा। लेकिन आपने स्टैटिक शॉट लगाया बिल्कुल सिंपल सा तो वह एंपटीनेस वह लोनलीनेस वह लॉस है बहुत अच्छे से पोर्ट्रेट होगी। तो यह ध्यान रखिए कि आपका इमोशन क्या है आप क्या दिखाना चाहते हैं ऑडियंस को क्या फील कराना चाहते हैं उसके हिसाब से डिजाइन कीजिए और डिसाइड कीजिए कि नंबर ऑफ शॉट्स कितने होंगे अदर वाइज फिल्म मेकिंग आपकी बनेगी तो बहुत अच्छी टेक्निकली आप सोचेंगे मैंने बहुत कमाल का काम किया है लेकिन जो एक्चुअल मकसद था एम था कि मैं एक अच्छी फिल्म बनाऊ और ऑडियंस को समझ में आए वह कभी भी आपका पूरा नहीं हो पाएगा। सेक्शन फाइव है जो थोड़ा सा और डीप है और मैं इस तरह की डीप जानकारी आपको देता रहता हूं जॉइन फिल्म्स चैनल पर तो पहली बार जुड़े हैं तो सब्सक्राइब कीजिएगा बेल आइकन को प्रेस कीजिएगा 180° रूल में क्या होता है कि जो भी आपका सीन है उसमें आप ना अपने हिसाब से इनविजिबल लाइन खींच लीजिए बीच में और कैमरे को एक तरफ रख ताकि क्लियर हो पाए कि कौन सा कैरेक्टर कहां देख रहा है किससे बात कर रहा है अगर आपने इधर से उधर कर दिया शिफ्ट तो फिर कंफ्यूज हो जाएगी ऑडियंस की वह किससे बात कर रहा है क्या देख रहा है तो यह टेक्निकली जानना बहुत जरूरी है 180° का रूल। सेक्शन सिक्स है 30° रूल देखिए जो भी आपका कैमरा एंगल आप डिसाइड कर रहे हैं और लगा रहे हैं तो अगर आप कटिंग कर देंगे एंगल्स को सेम सब्जेक्ट के टाइम पर तो फिर बहुत गड़बड़ हो जाएगी क्योंकि उसमें अगर आपने 30° का एक डिफरेंस नहीं रखा है तो वह जंप कट जैसा लगेगा और एमेच्योर फिल्म मेकर यह सबसे बड़ी गलती करते हैं तो 30° के रूल को भी याद रखिएगा। सेक्शन सेवन है वर्कफ्लो टिप मैं आपको यह बता दूं कि 12 एंगल तो मैंने बताए हैं लेकिन नॉर्मली अगर आप चार-पांच छह एंगल भी यूज करेंगे ना तो आप एक अपनी अच्छी शॉर्ट फिल्म बना सकते हैं या फिल्म बना सकते हैं अगर आप पहली बार इंडिपेंडेंटली बना रहे हैं तो। तो इसके लिए आपको जो है वाइड शॉट यूज करना चाहिए मीडियम शॉट यूज करना चाहिए क्लोजअप एंगल यूज करना चाहिए और डिटेल के लिए आप कोई सा भी लो एंगल या जो भी चाहते हैं वह कर लीजिए या फुल फ्रेम कर लीजिए और एक कोई भी क्रिएटिव एंगल मतलब वह चाहे लो एंगल हो हाई हो या डच हो कोई भी एक थोड़ा सा एक्सपेरिमेंटल एंगल लेंगे तो ये चार-पांच एंगल से ही आप अपनी पूरी फिल्म बना सकते हैं बाकी के एंगल जब जरूरी हो बहुत जरूरी हो तो ही इस्तेमाल करें। इससे एडिटर को क्या मिलेगा एक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी फ्रीडम मिलेगी फ्रेशनेस मिलेगी कि वह अब अपने हिसाब से एडिट में डिफरेंट एंगल्स को लगा के एक कंप्लीट स्टोरी को स्ट्रक्चर कर सकता है। तो मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा फिल्म मेकिंग पर यह जो नया चैप्टर है यह आपको कैसा लगा अगर आपको अच्छा लगा और रेगुलर आप इस पे वीडियो देखना चाहते हैं तो फिल्म मेकिंग की स्पेशली प्लेलिस्ट है उसमें बहुत सारे वीडियोस अवेलेबल है उससे आप बहुत अच्छे एक इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर बन सकते हैं। और अगर आप एक प्रैक्टिकल कोर्स करना चाहते हैं तो जॉइन फिल्म्स अकेडमी में कांटेक्ट कर सकते हैं कि कैसे एक ट्रांजिशन लेकर आप जॉब स्टडी या बिजनेस के साथ-साथ भी अपने इस शौक को हॉबी को एक प्रोफेशनल बदल सकते हैं या कम से कम अपनी एक इच्छा तो पूरी कर सकते हैं अपनी एक फिल्म बनाने की तो उसके लिए जॉइंट फिल्म्स एकेडमी में आप एक बार कॉल कर लीजिए काउंसलर आपके लिए बेस्ट कस्टमाइज कोर्स डिजाइन करके आपको बता देंगे और आप अपनी कहानी अपनी फिल्म दुनिया को दिखा पाएंगे सिर्फ आपके दिमाग में आपके सपनों में नहीं चल रही होगी तो आप अगर इस तरह के वीडियो और देखना चाहते हैं तो मुझे सब्जेक्ट लिखिए फिल्म मेकिंग पर आप किस किस तरह के वीडियो चाहते हैं मैं आपके साथ जल्दी वह वीडियो बनाकर शेयर करूंगा और इसको सभी फिल्म मेकर्स जो फ्रेंड्स हैं आपके जो ग्रुप्स हैं उनमें शेयर कर दीजिए ताकि सभी को बेनिफिट मिले सभी का फायदा हो पाए अगले वीडियो में फिर से मिलता हूं तब तक के लिए देखते रहिए सीखते रहिए जमे रहिए ऑल द बेस्ट।



