[0:02]ए जल्दी आ जाओ पा महंदी लगी पड़ी है के थारे आ तो लाग रहे मा जी आपके पा ही तो है आज घर चल मैं बताऊंगी बेजती करा कर दी
[0:17]जीजी बता मैंने के बेजती करवा दी तेरी तू इस ग ने भुक दे मैं माजी तो बताऊ एक हो गया क्यों घर में पते टाडन लाग रही है तू होना के था आप तो पूजा करके आ गल के सारी लुई का मजाक उड़ा रही थी क्यों ऐसा के पड गई आपने दिखाई ना देता खा खा के मैं सो रही है सब लुगा इसका मजाक उड़ा रही थी और तो और सब लुगा मनने छोटी बता थी ना ब बता थी मने तो बहुत भूी शर्म आई डूब के मर जाओ चुल्लू भर पानी में अग लुगाया ना तेरे तक कही और तू सुन के आ गई उन लुगाए ने मेरे तक क्यों ना कही और मेरी बात सुन अगर मोटी है ना यहां तो किसी के घर खाने ना जाती और मनने तो मोटे सुथरी लागे है यह कहता पानी भी लाग जाए शरीर में और कोई घी में डूब जाए भी ना फूले तू इतना खावे तेरे लाग है के तेरे याद है ना जा पे मैं इतना ही तरह था तेरे गुंद के लडडू के ऊपर के जीी भी ना फूली तू मोरी का का सब और सुथरा कम से कम दुनिया की बातो में ना अपने घर देख भगवान सब का शरीर अलग अलग बनावे संस्कार देखने चाहिए वा कितना काम करन लाग री घर का मीनू बेटा दुनिया का काम बोने का हो कर है तू जैसी है ना उसी मनने बहुत सुथरी लागे है कोई जरूरत ना पतले होने की



